Thursday, May 14, 2026
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बेसहारा ज़िंदगी का वालिद कौन? समाज, परिवार और व्यवस्था पर उठते गंभीर सवाल

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। आज समाज के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा है, जो जितना संवेदनशील है उतना ही शर्मनाक भी—बेसहारा ज़िंदगी का वालिद कौन? सड़कों पर भटकते बच्चे, वृद्धाश्रमों में आंसुओं के साथ जीवन काटते बुजुर्ग, अनाथालयों में पलती मासूम आंखें और न्याय के लिए संघर्ष करती महिलाएं—ये सभी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक विफलता की तस्वीर पेश करते हैं।

आज यह सच्चाई किसी से छिपी नहीं है कि बेसहारा होने के पीछे केवल किस्मत नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से भागता इंसान और संवेदनहीन व्यवस्था है। सवाल यह नहीं कि बेसहारा कौन है, बल्कि यह है कि उसे बेसहारा बनाने वाला कौन है?

हर बच्चा माता-पिता की छांव में सुरक्षित भविष्य के सपने के साथ जन्म लेता है। लेकिन गरीबी, नशा, घरेलू हिंसा और सामाजिक दबावों के कारण जब माता-पिता अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं, तब एक मासूम ज़िंदगी बेसहारा हो जाती है। कई मामलों में पिता का नाम केवल कागज़ों तक सीमित रह जाता है, वास्तविक जीवन में उसकी भूमिका शून्य हो जाती है।

वहीं दूसरी ओर, जिन वृद्ध माता-पिता ने पूरी उम्र अपनी संतान के लिए त्याग किया, वही संतान उन्हें बोझ समझने लगती है। ऐसे में यह सवाल उठता है—क्या केवल जन्म देना ही वालिद होने की पहचान है, या जीवन भर साथ निभाना भी उसकी जिम्मेदारी है?

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व्यवस्था की उदासीनता भी जिम्मेदार

परिवार के बाद समाज और शासन की जिम्मेदारी बनती है, लेकिन हकीकत यह है कि सरकारी योजनाएं और कानून अक्सर कागज़ों में ही सिमट कर रह जाते हैं। बेसहारा बच्चों के संरक्षण और बुजुर्गों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान अमल के अभाव में दम तोड़ देते हैं। जब सिस्टम सोया रहता है, तब शोषण फलता-फूलता है।

सड़कों पर भीख मांगते बच्चे, मजदूरी करते नाबालिग और अकेलेपन में दम तोड़ते बुजुर्ग—ये किसी एक घर की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की हार का प्रमाण हैं।

समाज का नैतिक पतन

आज रिश्ते संवेदना पर नहीं, सुविधा पर टिके हैं। जब तक कोई उपयोगी है, तब तक उसका महत्व है; उपयोग खत्म, तो रिश्ता भी खत्म। यही सोच बेसहारा ज़िंदगी की सबसे बड़ी वजह बन रही है। हम दूसरों के दुख से आंखें फेर लेते हैं, यह सोचकर कि यह हमारी जिम्मेदारी नहीं।
लेकिन सच्चाई यह है कि जब समाज सवाल पूछना छोड़ देता है, तभी अन्याय जन्म लेता है।

बेसहारा ज़िंदगी किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं, बल्कि लापरवाह परिवार, असंवेदनशील समाज और उदासीन व्यवस्था—तीनों की संयुक्त जिम्मेदारी है।
यह लेख केवल सवाल उठाने के लिए नहीं, बल्कि आत्ममंथन के लिए है। क्योंकि अगर आज हमने जवाब नहीं ढूंढा, तो कल कोई हमसे पूछेगा—जब ज़रूरत थी, तब आप कहां थे?

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ई-रिक्शा चालक पर हथौड़े से हमला दबंगों ने लूटी दिनभर की कमाई

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​बरियारपुर /देवरिया। (राष्ट्र की परंपरा)
जनपद के बरियारपुर थाना क्षेत्र में एक ई-रिक्शा चालक के साथ मारपीट और लूटपाट का मामला सामने आया है। घटना के संबंध में पीड़ित की पत्नी ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
​​प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित मन्नू गोंड, जो पेशे से ई-रिक्शा चालक हैं और वर्तमान में देवरिया के तारा भवन के पास किराए पर रहते हैं, बीते दिन अपना काम कर रहे थे। आरोप है कि जब वह रिक्शा लेकर जा रहे थे, तभी ब्रिम गुप्ता नामक व्यक्ति ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।
​शिकायतकर्ता पिंकी गोंड (मन्नू की पत्नी) ने बताया कि आरोपी ने उनके पति पर जानलेवा हमला किया और लोहे की हथौड़ी से उनके हाथ पर वार कर उन्हें घायल कर दिया। इतना ही नहीं, आरोपी ने ई-रिक्शा को अपने कब्जे में ले लिया।
​जब पिंकी गोंड अपने साथ दो अन्य लोगों को लेकर ई-रिक्शा वापस लेने पहुंचीं, तो आरोपी ने उनके साथ भी बदसलूकी की। आरोप है कि ब्रिम गुप्ता ने उन्हें धमकी देते हुए कहा, अभी तो इसे मारा है, तुम लोग यहाँ से चले जाओ वरना तुम सबको भी बहुत मारूँगा।
​पैसे छीनने का भी आरोप
​पीड़िता का आरोप है कि मारपीट के दौरान ई-रिक्शा के गल्ले में रखे 1600 रुपये भी आरोपी ने छीन लिए। यह राशि चालक की पूरे दिन की मेहनत की कमाई थी। घटना दोपहर करीब शाम की बताई जा रही है।
​​पीड़िता ने बरियारपुर थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और अपना ई-रिक्शा वापस दिलाने की मांग की है। पुलिस फिलहाल मामले की जांच में जुट गई है।

15 स्थानों पर सघन जांच से बढ़ा सुरक्षा का भरोसा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)देवरिया में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और आमजन में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से देवरिया पुलिस मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान चलाया गया। यह अभियान पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित किया गया।
अभियान के तहत जनपद के समस्त थाना प्रभारी एवं थानाध्यक्षों द्वारा प्रातः 05 बजे से 08 बजे तक विभिन्न क्षेत्रों में भ्रमण किया गया। इस दौरान मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएं सुनी गईं और उन्हें पुलिस की ओर से सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।

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देवरिया पुलिस मार्निंग वॉकर चेकिंग का मुख्य उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना, मित्र पुलिसिंग की अवधारणा को सशक्त करना और स्थानीय स्तर पर छोटे विवादों का समाधान करना रहा। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों को बताया कि ऐसे अभियानों से अपराध पर नियंत्रण के साथ-साथ पुलिस और जनता के बीच विश्वास भी मजबूत होता है।
अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन जांच की गई। पुलिस टीमों ने चोरी की गाड़ियों की तलाश, तीन सवारी चलने वालों पर कार्रवाई, मोडिफाइड साइलेंसर लगे दोपहिया वाहनों का चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर विधिक कार्रवाई तथा अवैध असलहा एवं मादक पदार्थों की जांच की।
जनपदीय पुलिस के अनुसार देवरिया पुलिस मार्निंग वॉकर चेकिंग के अंतर्गत कुल 15 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 281 व्यक्तियों और 165 वाहनों की जांच की गई। इस दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

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पुलिस द्वारा आमजन को अभियान के उद्देश्य, सुरक्षा उपायों और यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया। मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस की मौजूदगी से उन्हें सुरक्षा और भरोसे का अनुभव हुआ।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि देवरिया पुलिस मार्निंग वॉकर चेकिंग जैसे जनहितकारी अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके और नागरिकों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित हो।

बरहज में लगेगा मत्स्य पालकों का वृहद पंजीकरण शिविर

प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना के तहत एनएफडीपी पोर्टल पर निःशुल्क ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

बरहज /देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना (पीएमएमकेएसएसवाई) के अंतर्गत जनपद के मछुआरों, नाविकों एवं मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े सभी लाभार्थियों के ऑनलाइन पंजीकरण हेतु विकास खंड बरहज में वृहद पंजीकरण शिविर का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मत्स्य पालक विकास अभिकरण ने बताया कि निदेशक मत्स्य, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के निर्देशानुसार एनएफडीपी पोर्टल पर अधिक से अधिक मत्स्य पालकों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह विशेष शिविर 31 जनवरी 2026 को विकासखंड बरहज सभागार में प्रातः 11:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा।

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उन्होंने बताया कि शिविर में मछुआरे, नाविक, मछली पालन करने वाले, मछली विक्रेता, मत्स्य जीवी सहकारी समितियों के सदस्य तथा मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित सभी लाभार्थियों का निःशुल्क ऑनलाइन पंजीकरण किया जाएगा।

इच्छुक लाभार्थियों से अपील की गई है कि वे अपने साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक तथा आधार से लिंक मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लेकर शिविर स्थल पर उपस्थित हों, जिससे पंजीकरण प्रक्रिया सरल एवं सुगम रूप से पूर्ण की जा सके।अधिक जानकारी के लिए मोबाइल नंबर 9026704674, 9839367476 पर संपर्क किया जा सकता है।

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30 लाख खर्च, फिर भी बंद आरआरसी सेंटर, गांव में फैली गंदगी

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। फरेंदा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मथुरा नगर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब एक वर्ष पूर्व 30 लाख रुपये से अधिक की लागत से बनाए गए कूड़ा डंपिंग यार्ड व रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) पर प्रशासनिक उदासीनता के चलते आज तक ताला लटका हुआ है। लाखों रुपये की लागत से बना यह सेंटर उपयोग के अभाव में बेमतलब साबित हो रहा है।

आरआरसी सेंटर का उद्देश्य गांव के कचरे को एकत्र कर उसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना था, लेकिन सेंटर बंद होने के कारण कचरा यार्ड में डालने के बजाय सड़कों के किनारे फेंका जा रहा है। इससे पूरे गांव में गंदगी फैल गई है और दुर्गंध के कारण लोगों का जीना मुहाल हो गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सेंटर का निर्माण होने के बाद आज तक उसमें एक बार भी कूड़ा नहीं डाला गया। मुख्य गेट पर हमेशा ताला बंद रहता है, जिससे ग्रामीण कचरा जमा नहीं कर पाते। मजबूरी में लोग खुले स्थानों और सड़कों के किनारे कचरा फेंक रहे हैं।ग्रामीण राजेश, मुकेश, सर्वजीत, बुधिराम, चंद्रभान, अरविंद, रामनेवास और हरवंश ने आरोप लगाया कि यार्ड के संचालन के लिए जिम्मेदार अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

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आरआरसी सेंटर के बंद रहने से न केवल स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। जबकि केंद्र व राज्य सरकार की स्वच्छता अभियान को बड़े पैमाने पर चलतीं हैं, और उसी योजनाओं को ठेंगा दिखाकर जिम्मेदार मलाई काट रहे हैं। निर्माण होने के बाद जिम्मेदार कमीशन लेकर डकार गए और (आरआरसी) सेंटर बेमतलब साबित हो रहा हैं।

इस संबंध में फरेंदा खंड विकास अधिकारी अतुल कुमार ने बताया कि आरआरसी सेंटर के बंद होने की जानकारी मिली है। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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आज का राशिफल 30 जनवरी 2026: नौकरी-पैसा-प्रेम में किसे मिलेगा बड़ा लाभ?

🔱 30 जनवरी 2026 का राशिफल: शुक्रवार को किस राशि की चमकेगी किस्मत? जानें मेष से मीन तक का पूरा भविष्यफल

ग्रह-नक्षत्रों की चाल से आज के राशिफल का आकलन किया गया है।

30 जनवरी 2026, शुक्रवार को गुरु और चंद्रमा मिथुन राशि में संयोग बना रहे हैं।
सूर्य, बुध, शुक्र और मंगल मकर राशि में स्थित हैं।
राहु कुंभ, केतु सिंह और शनि मीन राशि में गोचर कर रहे हैं।
इन ग्रह योगों का प्रभाव रुपया-पैसा, नौकरी, व्यापार, शिक्षा, करियर, राजनीति, प्रेम संबंध और स्वास्थ्य पर साफ दिखाई देगा।
आइए जानते हैं 30 जनवरी 2026 का राशिफल, मेष से मीन राशि तक 👇

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मेष राशि (Aries)
आज आपका पराक्रम और आत्मविश्वास रंग लाएगा। जिन योजनाओं को आपने लंबे समय से डिज़ाइन किया है, उन्हें आज अमल में लाने का सही समय है।
नौकरी और करियर में नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है।
व्यवसाय में निवेश से लाभ के संकेत हैं।
प्रेम जीवन में स्थिरता रहेगी और संतान से शुभ समाचार मिल सकता है।
स्वास्थ्य पहले से बेहतर रहेगा।
👉 उपाय: हरी वस्तु का दान करें।

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वृषभ राशि (Taurus)
आज का दिन धन लाभ और पारिवारिक सुख देने वाला है।
वाणी से जुड़े कार्यों—लेखन, पत्रकारिता, शिक्षण, राजनीति—में सफलता मिलेगी।
नौकरी में आय बढ़ने के संकेत हैं।
व्यापार में ग्राहकों की संख्या बढ़ेगी।
प्रेम और वैवाहिक जीवन संतुलित रहेगा।
👉 उपाय: पीली वस्तु का दान शुभ रहेगा।
मिथुन राशि (Gemini)
आज आप सौम्यता और आकर्षण का केंद्र बनेंगे।
समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी सराहना होगी।
जरूरत के संसाधन समय पर उपलब्ध होंगे।
प्रेम संबंधों और संतान को लेकर थोड़ा धैर्य रखें।
व्यापार और करियर स्थिर रहेंगे।
👉 उपाय: मां काली को प्रणाम करें।

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कर्क राशि (Cancer)
आज स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सतर्कता जरूरी है।
सिर दर्द, आंखों में जलन या मानसिक चिंता हो सकती है।
हालांकि प्रेम और संतान का भरपूर सहयोग मिलेगा।
व्यापार सामान्य से अच्छा रहेगा।
शुभ कार्यों में खर्च बढ़ सकता है।
👉 उपाय: पीली वस्तु पास रखें।
सिंह राशि (Leo)
आज आय के नए स्रोत बनेंगे।
पुराने निवेश से भी लाभ मिलेगा।
यात्रा के योग बन रहे हैं और शुभ समाचार मिल सकता है।
प्रेम जीवन और संतान से खुशी मिलेगी।
व्यापार और राजनीति के लिए दिन शुभ है।
👉 उपाय: लाल वस्तु पास रखें।

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कन्या राशि (Virgo)
आज का दिन कानूनी मामलों और प्रशासनिक कार्यों में सफलता दिलाएगा।
राजनीति या सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों को लाभ मिलेगा।
पिता और वरिष्ठ अधिकारियों का आशीर्वाद मिलेगा।
स्वास्थ्य, प्रेम और व्यापार तीनों ही मजबूत स्थिति में हैं।
👉 उपाय: भगवान विष्णु को प्रणाम करें।
तुला राशि (Libra)
आज भाग्य आपका पूरा साथ देगा।
धर्म-कर्म, यात्रा और उच्च शिक्षा से जुड़े मामलों में प्रगति होगी।
नौकरी और करियर में सकारात्मक बदलाव संभव है।
सम्मान का ध्यान रखें, वाणी पर संयम रखें।
प्रेम, व्यापार और स्वास्थ्य अनुकूल रहेंगे।
👉 उपाय: हरी वस्तु पास रखें।

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वृश्चिक राशि (Scorpio)
आज का दिन थोड़ा सतर्क रहने का है।
चोट-चपेट या अचानक परेशानी हो सकती है।
कोई भी बड़ा जोखिम लेने से बचें।
प्रेम और संतान सामान्य रहेंगे।
व्यापार स्थिर रहेगा।
👉 उपाय: हरी वस्तु गणेश जी को अर्पित करें।
धनु राशि (Sagittarius)
आज जीवनसाथी और साझेदारी से पूरा सहयोग मिलेगा।
नौकरी और करियर में स्थिति मजबूत होगी।
प्रेम संबंधों में मुलाकात और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा।
व्यवसाय, स्वास्थ्य और धन—तीनों पक्षों में शुभता है।
👉 उपाय: हरी वस्तु का दान करें।

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मकर राशि (Capricorn)
आज शत्रुओं पर विजय मिलेगी।
विरोधी भी मित्रवत व्यवहार कर सकते हैं।
ज्ञान और अनुभव में वृद्धि होगी।
बुजुर्गों और गुरुओं का आशीर्वाद मिलेगा।
स्वास्थ्य पर थोड़ा ध्यान दें।
प्रेम, संतान और व्यापार उत्कृष्ट रहेंगे।
👉 उपाय: हरी वस्तु पास रखें।
कुंभ राशि (Aquarius)
आज संयम और सौम्यता सबसे जरूरी है।
विद्यार्थियों के लिए दिन अच्छा है।
प्रेम संबंधों में बहस से बचें।
भावुक निर्णय न लें।
स्वास्थ्य, व्यापार और प्रेम मध्यम रहेंगे।
👉 उपाय: हरी वस्तु पास रखें।

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मीन राशि (Pisces)
आज भूमि, भवन और वाहन खरीदने का प्रबल योग है।
घर-परिवार में उत्सव का माहौल बन सकता है।
आय के नए स्रोत खुलेंगे।
नौकरी और व्यवसाय में शानदार प्रगति होगी।
स्वास्थ्य में सुधार और प्रेम जीवन में मधुरता रहेगी।
👉 उपाय: हरी वस्तु का दान करें।

शिव पुराण कथा: नटराज से नीलकंठ तक की दिव्य यात्रा

🔱 शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा
भूमिका
शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा के एपिसोड 11 में भगवान शिव को संतुलन के प्रतीक के रूप में समझा गया था। सृष्टि, संहार और संरक्षण के बीच जो सूक्ष्म सामंजस्य है, वह शिव तत्व का मूल आधार है।
अब एपिसोड 12 में यह कथा आगे बढ़ते हुए परिवर्तन, वैराग्य और चेतना के विस्तार की गहराई को प्रकट करती है।
शिव केवल देवता नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन हैं। वह हमें सिखाते हैं कि परिवर्तन से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि परिवर्तन ही सृष्टि का नियम है।

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🌙 शिव तत्व और परिवर्तन का शास्त्रोक्त अर्थ
शिव पुराण, लिंग पुराण और स्कंद पुराण में वर्णित है कि
“शिवो भूत्वा शिवं यान्ति”
अर्थात जो शिव तत्व को समझ लेता है, वही शिवत्व को प्राप्त करता है। शिव को परिवर्तन का प्रतीक माना गया है। उनका तांडव केवल विनाश नहीं, बल्कि नई सृष्टि का द्वार है। जब पुराना टूटता है, तभी नया जन्म लेता है।

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🔥 नटराज रूप: परिवर्तन की चरम अवस्था
भगवान शिव का नटराज रूप इस कथा का प्रमुख केंद्र है।
नटराज का तांडव पाँच तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है: आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी।
शास्त्र कहते हैं कि जब संसार जड़ हो जाता है, तब शिव तांडव करते हैं।
यह तांडव अहंकार, अज्ञान और असंतुलन का अंत करता है।
शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा में यह बताया गया है कि
जो व्यक्ति जीवन में परिवर्तन को स्वीकार करता है, वही आगे बढ़ता है।

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🐍 वैराग्य और गृहस्थ का संतुलन
भगवान शिव वैराग्य के प्रतीक होते हुए भी गृहस्थ हैं।
माता पार्वती के साथ उनका जीवन यह सिखाता है कि त्याग और प्रेम विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
शिव के गले में सर्प, भस्म और जटाएं यह दर्शाती हैं कि
भौतिक आकर्षण से ऊपर उठकर भी संसार को अपनाया जा सकता है।
शिव जी की कथा का यह अध्याय बताता है कि
जीवन में संतुलन वही साध पाता है जो भीतर से स्थिर होता है।

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🌊 नीलकंठ: विष से अमृत तक की यात्रा
समुद्र मंथन में जब विष निकला, तब कोई भी उसे धारण करने को तैयार नहीं था।
भगवान शिव ने वह विष पी लिया और नीलकंठ कहलाए।
यह प्रसंग शिव कथा का आत्मा है।
शिव हमें सिखाते हैं कि समाज और संसार की पीड़ा को स्वयं पर लेना ही सच्ची करुणा है।
जो व्यक्ति दूसरों के दुःख को सह लेता है, वही सच्चा शिव भक्त है।
🕉️ ध्यान और मौन की शक्ति
कैलाश पर ध्यानस्थ शिव यह संदेश देते हैं कि
मौन में ही सबसे बड़ा परिवर्तन जन्म लेता है।
आज का मानव शोर में उलझा है, जबकि शिव शांति में स्थित हैं।
भगवान शिव की कथा का यह हिस्सा आत्मचिंतन की प्रेरणा देता है।
ध्यान का अर्थ पलायन नहीं, बल्कि स्वयं से मिलन है।
🌺 भक्त और शिव: कथा का मानवीय पक्ष
शिव अपने भक्तों में भेद नहीं करते।
भस्मासुर हो या मार्कंडेय, केदार हो या गजासुर –
शिव सबको कर्म के अनुसार फल देते हैं।यह स्पष्ट करता है कि शिव का न्याय करुणा से भरा होता है।
📜 शास्त्रोक्त संदेश
शिव पुराण के अनुसार: जो परिवर्तन से डरता है, वह स्थिर नहीं रह पाता।
जो वैराग्य को समझ लेता है, वही सच्चा गृहस्थ बनता है।
शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा का यह अध्याय जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन करता है।
🔔 निष्कर्ष
शिव भगवान की शास्त्रोक्त कथा एपिसोड 12 हमें यह सिखाती है कि
परिवर्तन, त्याग और संतुलन ही जीवन का सत्य है।
शिव को समझना स्वयं को समझना है।
जो शिव तत्व को आत्मसात करता है, वह भय से मुक्त हो जाता है।

बजट 2026-27 बनाम आर्थिक सर्वेक्षण- भारत की आर्थिक दिशा, टैक्स सुधार,गिग़ वर्कर्स और मिडिल क्लास की उम्मीदों का निर्णायक पड़ाव

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर सबसे बड़े भारतीय लोकतंत्र में संसद के बजट सत्र में गुरुवार 29 जनवरी 2026 को केंद्रीय वित्तमंत्री द्वारा आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया ज़ो एक सरकारी दस्‍तावेज होता है,जिसे बजट से पहले पेश किया जाता है, इकोनॉमिक सर्वे में देश की आर्थिक स्थिति, चुनौतियों और आगे की दिशा के बारे में विस्‍तार से मूल्‍यांकन किया गया होता है,इसमें देश के विकासमहंगाई के अनुमान और बेरोजगारी, व्‍यापार और फाइनेंशियल हेल्‍थ के बारे में भी जानकारी दी गई होती है,इस रिपोर्ट को केंद्रीय वित्त मंत्रालय की टीम तैयार करती है अब 1 फरवरी 2026 को बजट पेश किया जाएगा जो वैश्विक स्तरपर एक वित्तीय दस्तावेज़ नहीं होता,बल्कि यह देश की आर्थिक सोच सामाजिक प्राथमिकताओं और वैश्विक भूमिका को परिभाषित करने वाला नीति-घोषणापत्र होता है। वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट इस दृष्टि से ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह न केवल एक नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत करेगा, बल्कि भारत के आयकर ढांचे में होने वाले सबसे बड़े कानूनी परिवर्तन से पहले का अंतिम पूर्ण बजट भी होगा। यही कारण है कि संसद से लेकर शेयर बाजार तक, टैक्सपेयर्स से लेकर उद्योग जगत तक और भारत से लेकर वैश्विक निवेशकों तक,सभी की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र बता दूं क़ि वर्ष 2026-27 के बजट का औपचारिक आगाज़ संसद के बजट सत्र के साथ होगा,ज़ो 28 जनवरी से 13 फ़रवरी 2026 तक शुरू हो चुका है,यह सत्र दो चरणों में विभाजित होगा,दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।इस विस्तारित सत्र का उद्देश्य केवल बजट पारितकरना नहीं,बल्कि उससे जुड़ी नीतियों, संशोधनों और विधायी पहलुओं पर व्यापक विमर्श सुनिश्चित करना है। लोकतंत्र में बजट सत्र सरकार और संसद दोनों के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता की कसौटी होता है।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी। यह क्षण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनका एक और बजट होगा, जिसमें उनसे न केवल राजकोषीय अनुशासन बल्कि मिडिल क्लास, नौकरीपेशा वर्ग, किसानों, स्टार्टअप्स और उद्योग जगत के बीच संतुलन साधने की अपेक्षा की जा रही है। भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था में बजट के हर प्रावधान का सीधा असर घरेलू मांग, निवेश वातावरण और वैश्विक भरोसे पर पड़ता है। 

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साथियों बात अगर हम टैक्स पेयर्स की उम्मीदें:बजट का सबसे संवेदनशील पक्ष इसको समझने की करें तो,हर बजट में अगर किसी एक वर्ग की निगाहें सबसे अधिक वित्तमंत्री के भाषण पर टिकी होती हैं,तो वह है टैक्सपेयर्स विशेषकर मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोग। महंगाई,शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रिटायरमेंट की बढ़ती लागत के बीच यह वर्ग वर्षों से यह महसूस करता आया है कि आर्थिक विकास का सबसे बड़ा बोझ उसी के कंधों पर है। इसलिए बजट 2026-27 में इनकम टैक्स से जुड़ी घोषणाएं केवल वित्तीय नहीं,बल्कि सामाजिकराजनीतिक संदेश भी होंगी। 

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साथियों बात अगर हमस्टॉक मार्केट की तैयारी:बजट और निवेशकों का संबंध इसको समझने की करें तो बजट 2026-27 का असर केवल आम नागरिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव शेयर बाजार और पूंजी बाजार पर भी पड़ेगा। स्टॉक एक्सचेंजों ने संकेत दे दिए हैं कि यदि 1 फरवरी को बजट रविवार के दिन पेश किया जाता है,तो उस दिन स्पेशल ट्रेडिंग सेशन आयोजित किया जाएगा। यह व्यवस्था दर्शाती है कि बजट घोषणाओं को बाजार कितनी गंभीरता से लेता है। टैक्स सुधार, पूंजीगत लाभ कर, टीडीएस नियम और निवेश प्रोत्साहन जैसे प्रावधान बाजार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 

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साथियों बात अगर हम  नया इन्कम टैक्स एक्ट 2025 एक युग का अंत, दूसरे की शुरुआत को समझने की करें तो, यूनियन बजट 2026-27को ऐतिहासिक बनाने वाला सबसे बड़ा कारण यह है कि यह 60 साल पुराने आयकर कानून के अंत से पहले का अंतिम पूर्ण बजट होगा। सरकार 1 अप्रैल 2026 से नया इन्कम टैक्स एक्ट 2025 लागू करने जा रही है,जो मौजूदा जटिल विवादग्रस्त और बार-बार संशोधित कानून की जगह लेगा। ऐसे में बजट 2026-27 केवल मौजूदा वित्तीय जरूरतों का दस्तावेज़ नहीं, बल्कि आने वाले टैक्स सिस्टम की बुनियाद भी रखेगा। 

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साथियों बात अगर हम टैक्सपेयर्स की 5 बड़ी उम्मीदें: क्या मिडिल क्लास की खुलेगी किस्मत? इसको समझने की करें तो(1) धारा 80सी और 80 डी की सीमा में वृद्धि : बचत और सुरक्षा का सवाल-धारा 80सी के तहत ₹1.5 लाख की कर छूट सीमा वर्षों से अपरिवर्तित है,जबकि इस अवधि में महंगाई, आय स्तर और जीवन-शैली खर्चों में भारी वृद्धि हुई है। इसी प्रकार 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा पर मिलने वाली छूट भी आज की चिकित्सा लागत के मुकाबले अपर्याप्त प्रतीत होती है। टैक्सपेयर्स की प्रमुख मांग है कि इन सीमाओं को यथार्थवादी स्तर तक बढ़ाया जाए, ताकि लंबी अवधि की बचत, बीमा कवरेज और सामाजिक सुरक्षा को प्रोत्साहन मिल सके।(2) लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में राहत : निवेश संस्कृति को बढ़ावा-भारत सरकार निवेश आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना चाहती है, लेकिन लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स की मौजूदा संरचना कई निवेशकों को हतोत्साहित करती है।

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टैक्सपेयर्स की अपेक्षा है कि या तो इसकी आय सीमा बढ़ाई जाए, या फिर छोटे और मध्यम निवेशकों को अतिरिक्त राहत दी जाए।इससे घरेलू निवेश, रिटेल पार्टिसिपेशन और पूंजी बाजार की गहराई बढ़ सकती है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए भी सकारात्मक संकेत होगा।(3) टीडीएस सीमा में वृद्धि:नकदी प्रवाह और अनुपालन की सरलता-टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) व्यवस्था का उद्देश्य टैक्स संग्रह को आसान बनाना है, लेकिन अत्यधिक कम सीमाएं कई बार अनावश्यक अनुपालन बोझ पैदा करती हैं।वरिष्ठ नागरिकों, फ्रीलांसर्स और छोटे करदाताओं की मांग है कि विभिन्न श्रेणियों में टीडीएस की सीमा बढ़ाई जाए, जिससे नकदी प्रवाह सुधरे और रिफंड-आधारित टैक्स सिस्टम पर निर्भरता कम हो।

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(4) नए इनकम टैक्स कानून में सरल संरचना : जटिलता से मुक्ति- इन्कम टैक्स एक्ट 2025 से सबसेबड़ी उम्मीद यह है कि यह सरल, स्पष्ट और विवाद-मुक्त होगा। बजट 2026-27 में सरकार से अपेक्षा है कि वह इस नए कानून की संरचना को स्पष्ट संकेतों के माध्यम से पेश करे जैसे कम धाराएं,सरल भाषा, डिजिटल-फ्रेंडली अनुपालन और न्यूनतम व्याख्यात्मक विवाद। यह सुधार भारत की ईजी ऑफ़ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग और वैश्विक टैक्स छवि को भी मजबूत करेगा।(5)विवाद समाधान और टैक्स आतंक से मुक्ति-पिछले वर्षों में सरकार ने ‘टैक्स टेररिज़्म’ की धारणा को समाप्त करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी लंबे विवाद, अपीलें और मुकदमेबाज़ी टैक्सपेयर्स के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। बजट 2026-27 से अपेक्षा है कि इसमें तेज़, पारदर्शी और तकनीक-आधारित विवाद समाधान तंत्र को और मजबूत किया जाएगा। 

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साथियों बात अगर हम इस बजट को दो एंगल मिडिल क्लास व शेयर बाजार केंद्रित से समझने की करें तो (1) मिडिल क्लास केंद्रित आय, बचत और जीवन-स्तर की कसौटी-बजट 2026-27 मिडिल क्लास के लिए इसलिए निर्णायक है क्योंकि यह नए इनकम टैक्स कानून से पहले का अंतिम पूर्ण बजट है। नौकरीपेशा और मध्यम आय वर्ग की प्रमुख अपेक्षा यह है कि बढ़ती महंगाई, शिक्षा-स्वास्थ्य खर्च और रिटायरमेंट आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इनकम टैक्स ढांचे में वास्तविक राहत दी जाए। विशेष रूप से धारा 80सी और 80डी की सीमाओं में वृद्धि मिडिल क्लास के लिए केवल टैक्स लाभ नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का साधन मानी जा रही है।यदि बजट में कर-छूट या टैक्स स्लैब में संतुलित सुधार होता है, तो इसका सीधा असर घरेलू खपत पर पड़ेगा। ऑटो, आवास, उपभोक्ता वस्तुएँ और सेवाएँ—ये सभी सेक्टर मिडिल क्लास की डिस्पोज़ेबल इनकम से चलते हैं। इसलिए बजट 2026 -27 मिडिल क्लास के लिए इस प्रश्न का उत्तर देगा कि क्या सरकार उसे केवल “टैक्स बेस” के रूप में देखती है या आर्थिक विकास का इंजन मानती है। (2) शेयर बाजार केंद्रित-भरोसा,स्थिरता और दीर्घकालिकसंकेत-शेयर बाजार के लिए बजट 2026-27 अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से अधिक नीतिगत दिशा और टैक्स स्थिरता का दस्तावेज़ है।निवेशकों की प्राथमिक अपेक्षा यह है कि कैपिटल गेन टैक्स, टीडीएस और कॉरपोरेट टैक्स से जुड़े संकेत स्पष्ट और पूर्वानुमेय हों। टैक्स अनिश्चितता बाजार को कमजोर करती है, जबकि स्थिरता दीर्घकालिक निवेश को आकर्षित करती है।यदि बजट में राजकोषीय अनुशासन के साथ कैपेक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च को प्राथमिकता दी जाती है, तो यह कैपिटल गुड्स, बैंकिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए सकारात्मक ट्रिगर होगा। साथ ही, नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लेकर स्पष्ट रोडमैप शेयर बाजार को यह संकेत देगा कि भारत का पूंजी बाजार नियम-आधारित और निवेश- अनुकूल दिशा में आगे बढ़ रहा है। 

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साथियों बात अगर हम वैश्विक स्तर पर देखें तो भारत आज विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुखअर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में बजट 2026-27 न केवल घरेलूनीति का दस्तावेज़ होगा,बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों रेटिंग एजेंसियों और बहुपक्षीय संस्थाओं के लिए भी एक संकेतक बनेगा। टैक्स सुधार, कानून की स्थिरता और नीतिगत स्पष्टता भारत को चीन के बाद एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत कर सकती है। 

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे कि  एक बजट, कई उम्मीदें,एक ऐतिहासिक मोड़ है बजट 2026-27 एक साधारण वार्षिक बजट नहीं है। यह पुराने टैक्स युग से नए टैक्स युग की दहलीज पर खड़ा बजट है। यह मिडिल क्लास की वर्षों पुरानी अपेक्षाओं,निवेशकों की आकांक्षाओं और सरकार की सुधारवादी छवि,तीनों की परीक्षा लेगा।यदि यह बजट संतुलित,दूरदर्शी और संवेदनशील रहा, तो यह भारत की आर्थिक यात्रा में एक निर्णायक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425

नाखून बताते हैं आपकी सेहत का राज, रंग और बनावट से पहचानें गंभीर बीमारियां

हम में से ज्यादातर लोग अपने नाखूनों को सिर्फ सुंदरता से जोड़कर देखते हैं। कोई उन्हें रंगता है, कोई काटता है, तो कोई उन पर डिजाइन बनवाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाखून केवल सजावट नहीं, बल्कि आपकी सेहत का आईना भी होते हैं।
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नाखूनों का रंग, बनावट और आकार शरीर के अंदर चल रही कई बीमारियों के संकेत दे सकता है। कई बार दिल, फेफड़े, जिगर, थायरॉइड या यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के शुरुआती लक्षण भी नाखूनों में बदलाव के रूप में दिखने लगते हैं।

कैसे नाखूनों से पहचानें सेहत का हाल?

अगर नाखूनों का रंग अचानक बदल जाए, उन पर अजीब धब्बे दिखने लगें या वे मोटे, टूटने वाले या सूजे हुए लगें, तो इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। आइए जानते हैं नाखूनों में दिखने वाले बदलाव किन बीमारियों की ओर इशारा करते हैं।

पीले नाखून क्या संकेत देते हैं?

अगर आपके नाखून पीले पड़ने लगे हैं, तो इसका सबसे आम कारण फंगल इंफेक्शन हो सकता है। इस स्थिति में नाखून धीरे-धीरे मोटे, कमजोर और टूटने वाले हो जाते हैं।
हालांकि, कुछ मामलों में पीले नाखून थायरॉइड की बीमारी, फेफड़ों की समस्या, सोरायसिस या डायबिटीज का संकेत भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

सफेद नाखून या सफेद धब्बे

नाखूनों पर सफेद धब्बे दिखना आम बात है, जिसे मेडिकल भाषा में ल्यूकोनिशिया कहा जाता है। अक्सर यह हल्की चोट, एलर्जी या संक्रमण की वजह से होता है।
इसके अलावा, यह दवाइयों के साइड इफेक्ट या शरीर में पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है। अगर पूरे नाखून सफेद पड़ने लगें या धब्बे बार-बार दिखें, तो जांच जरूरी है।

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नीले या बैंगनी नाखून क्यों होते हैं?

अगर नाखून नीले या बैंगनी रंग के नजर आने लगें, तो यह शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है। यह स्थिति दिल या फेफड़ों से जुड़ी बीमारी की ओर इशारा करती है।
वहीं, विटामिन B12 की कमी, विल्सन रोग या चांदी की विषाक्तता के कारण भी नाखून नीले हो सकते हैं। यह एक गंभीर संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नाखूनों पर गहरे लाल आधे चांद का मतलब

आमतौर पर नाखूनों के नीचे हल्का सफेद आधा चांद दिखता है। लेकिन अगर यह गहरे लाल रंग का हो जाए, तो सतर्क हो जाएं।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के अनुसार, यह ल्यूपस, हृदय रोग और गठिया (आर्थराइटिस) जैसी बीमारियों का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।

नाखूनों के आसपास सूजन क्यों होती है?

अगर नाखूनों के चारों ओर की त्वचा लाल, सूजी हुई और दर्दनाक हो जाए, तो इसे क्रोनिक पैरॉनिचिया कहा जाता है। यह समस्या एलर्जी, ज्यादा नमी में रहने या फंगल इंफेक्शन की वजह से हो सकती है।
समय पर इलाज न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। आमतौर पर इसका इलाज दवाइयों और क्रीम से किया जाता है।

नाखूनों पर गहरी धारियां खतरे का संकेत

अगर नाखून के नीचे कोई नई या बदलती हुई गहरी धारियां दिखाई दें और वह किसी चोट की वजह से न हों, तो यह गंभीर चेतावनी हो सकती है।
AAD के अनुसार, कुछ मामलों में यह त्वचा कैंसर (मेलानोमा) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत जांच करवाना बेहद जरूरी है।

नाखूनों का क्लबिंग क्या बताता है?

जब नाखून चौड़े, गोल और स्पंज जैसे मुलायम हो जाते हैं, तो इसे नाखूनों का क्लबिंग कहा जाता है। यह आमतौर पर लंबे समय से चल रही बीमारियों का संकेत होता है।
क्लबिंग फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग या गंभीर फेफड़ों की समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी समस्या या लक्षण के दिखने पर डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सफाई कर्मियों की तैनाती

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने जनपद के विभिन्न विकासखंडों के 105 उच्च प्राथमिक विद्यालयों (कंपोजिट) में साफ-सफाई कार्य हेतु एक-एक सफाई कर्मियों को संबद्ध किया है।
जिलाधिकारी द्वारा किए गए स्थलीय निरीक्षण में कई विद्यालयों के प्रांगण और शौचालयों में सफाई की कमी पाई गई थी। इसे गंभीरता से लेते हुए 105 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सफाई कर्मियों की तैनाती की गई है।
साथ ही जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य ही सफाई कर्मियों की उपस्थिति प्रमाणित करें, जिसके बाद ही वेतन आहरण किया जाएगा। यह कदम विद्यालयों में स्वच्छता बनाए रखने और छात्रों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

Economic Survey 2026: रामायण की सीख, चीन के हैनान मॉडल का जिक्र

यूनियन बजट से पहले केंद्र सरकार की ओर से संसद में Economic Survey 2026 पेश किया गया। इस आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की विकास रणनीति को समझाने के लिए प्राचीन महाकाव्य रामायण के एक प्रसंग का उदाहरण दिया गया है। सर्वे में यह बताया गया है कि भारत किस तरह अपने विरोधियों से भी सीख लेकर आगे बढ़ सकता है। साथ ही, यह भी साफ किया गया है कि यह प्रक्रिया आत्मनिर्भरता और स्वायत्तता से समझौता किए बिना संभव है।

रामायण के युद्ध कांड से क्या सीख बताई गई?

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में रामायण के युद्ध कांड से जुड़ी सीख का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, कठिन परिस्थितियों में भी रणनीति, धैर्य और सीखने की क्षमता सबसे अहम होती है।

सर्वे का मानना है कि आज की जटिल वैश्विक अर्थव्यवस्था में यह संदेश बेहद प्रासंगिक है। तेज होते वैश्विक तनाव और अस्थिर वित्तीय हालात के बीच भारत इस सोच को अपनी अंतरराष्ट्रीय रणनीति के रूप में अपना सकता है।

चीन ने हैनान को बनाया फ्री ट्रेड हब

इकोनॉमिक सर्वे में चीन के हैनान फ्री ट्रेड पोर्ट का भी जिक्र किया गया है। चीन ने पूरे हैनान द्वीप को एक विशेष आर्थिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया है।

2025 के अंत तक यहां पूरी तरह सीमा शुल्क व्यवस्था लागू कर दी गई है। इसके चलते यह इलाका कम टैरिफ वाला जोन बन चुका है।

हैनान का कस्टम सिस्टम क्यों है खास?

हैनान का कस्टम सिस्टम चीन के बाकी हिस्सों से अलग रखा गया है। यहां आयात पर बेहद कम शुल्क लिया जाता है।
इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर पर्याप्त वैल्यू एडिशन के बाद तैयार किए गए उत्पादों को बिना किसी अतिरिक्त टैक्स के पूरे चीन में बेचा जा सकता है। इससे निवेशकों और व्यापारियों को बड़ा फायदा मिल रहा है।

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भारत के लिए क्या संकेत देता है हैनान मॉडल?

वहीं, इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि भारत को हैनान फ्री ट्रेड पोर्ट को सिर्फ एक चुनौती के रूप में नहीं देखना चाहिए।
यह एक बड़े और धीरे-धीरे होने वाले बदलाव का संकेत है। आने वाले समय में यह एशिया के व्यापार मार्गों, लॉजिस्टिक्स सिस्टम और निवेश फैसलों को प्रभावित कर सकता है।

खासतौर पर उत्तरी हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में इसका असर देखने को मिल सकता है।

वैश्विक हालात को लेकर बढ़ती चिंता

इसके अलावा, सर्वे यह भी बताता है कि ये सभी बदलाव एक मुश्किल वैश्विक माहौल में हो रहे हैं। हालांकि दुनिया की अर्थव्यवस्था ने 2025 के झटकों को उम्मीद से बेहतर संभाल लिया था।

लेकिन अब हालात पहले जैसे सामान्य नहीं रहे हैं। अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्थाओं, बाजारों और राजनीतिक सिस्टम में आगे चलकर मध्यम से गंभीर स्तर की परेशानियों की आशंका बढ़ गई है।

आगे क्या हो सकता है?

आर्थिक सर्वे के अनुसार आने वाले समय में स्थिरता से ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में भारत के लिए जरूरी होगा कि वह अपनी नीतियों को लचीला और दूरदर्शी बनाए।

रामायण की सीख और वैश्विक उदाहरणों को ध्यान में रखते हुए भारत अपनी आर्थिक रणनीति को और मजबूत कर सकता है।

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अमेरिका ने पाकिस्तान को फिर दिया झटका, ट्रंप प्रशासन ने जारी की ट्रैवल एडवाइजरी

वॉशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका ने एक बार फिर पाकिस्तान को बड़ा कूटनीतिक झटका दिया है। ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार 29 जनवरी 2026 को सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए पाकिस्तान जाने की योजना बना रहे अमेरिकी नागरिकों से अपने यात्रा प्लान पर दोबारा विचार करने की अपील की है। पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) ने अपनी ताज़ा ट्रैवल एडवाइजरी में कहा है कि अपराध, आतंकवाद और अपहरण के बढ़ते खतरे के कारण पाकिस्तान की यात्रा जोखिमभरी हो सकती है।

पाकिस्तान को लेवल-3 हाई रिस्क जोन में रखा

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान को लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी में रखा है, जो हाई रिस्क जोन को दर्शाता है। इस श्रेणी में ऐसे देशों को शामिल किया जाता है, जहां बिना किसी चेतावनी के आतंकवादी हमले हो सकते हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, आतंकियों के संभावित टारगेट में—

• ट्रांसपोर्टेशन हब
• होटल, बाजार और शॉपिंग मॉल
• सेना और सुरक्षा ठिकाने
• एयरपोर्ट और ट्रेन
• स्कूल, अस्पताल
• पूजा स्थल और पर्यटन स्थल
• सरकारी इमारतें
शामिल हैं।

लेवल-4 इलाकों में यात्रा न करने की चेतावनी

एडवाइजरी में खैबर पख्तूनख्वा के कुछ हिस्सों और अन्य संवेदनशील इलाकों को लेवल-4 में रखा गया है, जिसका अर्थ है— यहां यात्रा बिल्कुल न करें।
अमेरिकी नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि इन क्षेत्रों में हत्या और अपहरण की घटनाएं आम हैं, खासकर सरकारी अधिकारियों और आम नागरिकों के खिलाफ।

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बलूचिस्तान और पूर्व FATA से दूर रहने की सलाह

अमेरिकी एडवाइजरी के अनुसार,
“आतंकवाद और अपहरण के खतरे के कारण अमेरिकी नागरिक बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की यात्रा न करें, जिसमें पूर्व का फेडरली एडमिनिस्टर्ड ट्राइबल एरिया (FATA) भी शामिल है।”

एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि आतंकवादी हमले केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कराची और इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में भी हो चुके हैं। यह चेतावनी पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिकों पर भी लागू होगी।

विरोध या सोशल मीडिया पोस्ट पर हो सकती है गिरफ्तारी

अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी आगाह किया कि पाकिस्तान में बिना परमिट विरोध या प्रदर्शन करना कानूनन प्रतिबंधित है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि—

• किसी विरोध के पास मौजूद होने पर भी सुरक्षा एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं

• विरोध में शामिल होने पर अमेरिकी नागरिकों को हिरासत में लिया जा चुका है

• सोशल मीडिया पर पाकिस्तान सरकार, सेना या अधिकारियों की आलोचना करने पर भी हिरासत संभव है

ट्रंप ने एक महीने में पाकिस्तान को दूसरा झटका

इससे पहले इसी महीने ट्रंप प्रशासन ने 21 जनवरी से 75 देशों के आवेदकों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रक्रिया सस्पेंड करने का ऐलान किया था। इसका असर दक्षिण एशिया के देशों पर भी पड़ा, जिनमें पाकिस्तान और बांग्लादेश शामिल हैं।

अमेरिकी वीजा पर रोक को लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई है कि यह सस्पेंशन अस्थायी होगा और जल्द ही प्रक्रिया सामान्य हो सकती है, हालांकि तब तक आवेदनों का बैकलॉग बढ़ने की आशंका है।

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30 जनवरी तक बढ़ी राशन वितरण की तिथि, पात्र लाभार्थियों को मिली राहत

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद के अन्त्योदय एवं पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारकों के लिए राहत की खबर है। तकनीकी कारणों से जिन लाभार्थियों को समय से खाद्यान्न नहीं मिल सका था, उनके लिए अब अतिरिक्त अवसर दिया गया है। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से राशन वितरण की अंतिम तिथि 28 जनवरी से बढ़ाकर 30 जनवरी 2026 कर दी गई है।
खाद्य एवं रसद विभाग उत्तर प्रदेश के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया है, ताकि कोई भी पात्र कार्डधारक राशन से वंचित न रहे। जिला पूर्ति अधिकारी के अनुसार तकनीकी समस्या के चलते कई लाभार्थी खाद्यान्न प्राप्त नहीं कर पाए थे, जिसे ध्यान में रखते हुए समय-सीमा बढ़ाई गई है।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत अन्त्योदय राशन कार्डधारकों को प्रति कार्ड 35 किलोग्राम निःशुल्क खाद्यान्न दिया जाएगा। इसमें 14 किलोग्राम गेहूं, 11 किलोग्राम चावल और 10 किलोग्राम बाजरा शामिल है।
वहीं पात्र गृहस्थी राशन कार्डधारकों को प्रति यूनिट 5 किलोग्राम खाद्यान्न मिलेगा, जिसमें 2 किलोग्राम गेहूं, 1 किलोग्राम चावल और 2 किलोग्राम बाजरा शामिल है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पोर्टेबिलिटी सुविधा के तहत लाभार्थी किसी भी उचित दर की दुकान से 30 जनवरी 2026 तक राशन प्राप्त कर सकते हैं। सभी कार्डधारकों से अपील की गई है कि वे निर्धारित तिथि के भीतर खाद्यान्न अवश्य प्राप्त कर लें।

भारत और मेवाड़ को दिशा देने वाले महान व्यक्तित्वों के ऐतिहासिक निधन

30 जनवरी का इतिहास

30 जनवरी का इतिहास भारतीय और विश्व इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि के रूप में दर्ज है। यह दिन न केवल शोक का प्रतीक है, बल्कि उन महान व्यक्तित्वों की स्मृति का भी अवसर है जिन्होंने अपने विचारों, संघर्षों और योगदान से समाज, राष्ट्र और संस्कृति को नई दिशा दी। 30 जनवरी को हुए निधन भारत के राजनीतिक, साहित्यिक, सैन्य और सामाजिक इतिहास में अमिट छाप छोड़ते हैं।

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महात्मा गांधी (30 जनवरी 1948)
महात्मा गांधी का निधन भारतीय इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक है। राष्ट्रपिता गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को स्वतंत्रता दिलाई। उनका जीवन मानवता, शांति और नैतिक साहस का प्रतीक है। 30 जनवरी को उनका बलिदान आज भी पूरे विश्व को अहिंसा का संदेश देता है।
राणा संग्राम सिंह (30 जनवरी 1530)
मेवाड़ के महान योद्धा राणा संग्राम सिंह, जिन्हें इतिहास में राणा सांगा के नाम से जाना जाता है, भारतीय स्वाभिमान और शौर्य के प्रतीक थे। उन्होंने विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध संघर्ष कर राजपूताना की आन-बान-शान को अक्षुण्ण रखा। 30 जनवरी का इतिहास राणा सांगा की वीरगाथा के बिना अधूरा है।

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माखनलाल चतुर्वेदी (30 जनवरी 1968)
हिन्दी साहित्य के स्तंभ माखनलाल चतुर्वेदी एक महान कवि, लेखक और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रभक्ति, मानवता और संवेदना का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। उनका साहित्य आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
के. वी. कृष्ण राव (30 जनवरी 2016)
पूर्व भारतीय थल सेना प्रमुख के. वी. कृष्ण राव ने भारतीय सेना को आधुनिक और संगठित स्वरूप देने में अहम भूमिका निभाई। उनका सैन्य योगदान भारत की रक्षा नीति के इतिहास में सदैव स्मरणीय रहेगा।
नाथूराम प्रेमी (30 जनवरी 1960)
प्रसिद्ध लेखक, कवि, भाषाविद और संपादक नाथूराम प्रेमी हिन्दी भाषा और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तित्व थे। उन्होंने साहित्य को सामाजिक चेतना से जोड़ने का कार्य किया।

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जे. सी. कुमारप्पा (30 जनवरी 1960)
गांधीवादी अर्थशास्त्री जे. सी. कुमारप्पा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत किया। उनके विचार आज भी सतत विकास की दिशा में प्रासंगिक हैं।
🔶 निष्कर्ष
30 जनवरी को हुए ऐतिहासिक निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि महान व्यक्तित्व भले ही शरीर से विदा हो जाएं, लेकिन उनके विचार और योगदान सदैव जीवित रहते हैं। 30 जनवरी का इतिहास त्याग, साहस, विचार और प्रेरणा का संगम है।

30 जनवरी को जन्मे प्रसिद्ध लोग: प्रेरणा, विचार और परिवर्तन की कहानी

महत्वपूर्ण इतिहास | 30 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व
30 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व भारतीय और विश्व इतिहास में विशेष स्थान रखते हैं। यह दिन केवल एक तारीख नहीं, बल्कि साहित्य, कला, कृषि, पर्यावरण संरक्षण, सिनेमा और राजनीति में असाधारण योगदान देने वाली विभूतियों का प्रतीक है।
30 जनवरी जन्म इतिहास हमें यह समझने का अवसर देता है कि किस प्रकार अलग-अलग क्षेत्रों में जन्मे व्यक्तियों ने समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
आज हम 30 जनवरी को जन्मे प्रसिद्ध लोग और उनके योगदान को विस्तार से जानेंगे, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

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✍️ जयशंकर प्रसाद (जन्म: 30 जनवरी 1890)
30 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में जयशंकर प्रसाद का नाम हिंदी साहित्य के स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज है। वे छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक थे।
उनकी कालजयी कृति ‘कामायनी’ न केवल एक महाकाव्य है, बल्कि दर्शन, मनोविज्ञान और मानव चेतना का गहन विश्लेषण भी प्रस्तुत करती है।
‘चन्द्रगुप्त’, ‘स्कंदगुप्त’ और ‘ध्रुवस्वामिनी’ जैसे नाटक भारतीय इतिहास और राष्ट्रबोध को सशक्त करते हैं।
जयशंकर प्रसाद का योगदान 30 जनवरी जन्म इतिहास को साहित्यिक गरिमा प्रदान करता है।
🌾 सी. सुब्रह्मण्यम (जन्म: 30 जनवरी 1910)

भारत में हरित क्रांति के पिता कहे जाने वाले सी. सुब्रह्मण्यम का जन्म भी 30 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व की सूची को गौरवान्वित करता है।
उन्होंने कृषि मंत्री के रूप में आधुनिक बीज तकनीक, सिंचाई व्यवस्था और खाद उपयोग को बढ़ावा दिया।
उनकी नीतियों के कारण भारत खाद्यान्न संकट से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा।
30 जनवरी का इतिहास भारतीय कृषि परिवर्तन का साक्षी है।

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🎨 अमृता शेरगिल (जन्म: 30 जनवरी 1913)
30 जनवरी को जन्मे प्रसिद्ध लोग में अमृता शेरगिल भारतीय आधुनिक चित्रकला की सबसे प्रभावशाली कलाकार मानी जाती हैं।
उन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन, स्त्री संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को चित्रों के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाई।
उनकी पेंटिंग्स आज भी राष्ट्रीय धरोहर मानी जाती हैं।
30 जनवरी जन्म इतिहास कला और सौंदर्यबोध का प्रतीक बन जाता है।
🌿 कैलास सांखला (जन्म: 30 जनवरी 1925)
प्रसिद्ध प्रकृतिवादी और संरक्षणवादी कैलास सांखला भी 30 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में शामिल हैं।
वे भारत के पहले प्रोजेक्ट टाइगर डायरेक्टर रहे।
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनका योगदान 30 जनवरी का इतिहास को विशेष बनाता है।

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🌍 ओलोफ़ पाल्मे (जन्म: 30 जनवरी 1927)
स्वीडन के प्रधानमंत्री रहे ओलोफ़ पाल्मे एक प्रखर लोकतांत्रिक नेता थे।
वे वैश्विक शांति, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के प्रबल समर्थक रहे।
उनका नाम 30 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ लिया जाता है।
🎬 रमेश देव (जन्म: 30 जनवरी 1929)
भारतीय सिनेमा के सशक्त चरित्र अभिनेता रमेश देव ने सैकड़ों फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं।
उनकी सादगी और अभिनय शैली ने उन्हें दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान दिलाया।
30 जनवरी को जन्मे प्रसिद्ध लोग में उनका योगदान सिनेमा जगत को समृद्ध करता है।

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🏛️ प्रकाश जावड़ेकर (जन्म: 30 जनवरी 1951)
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर आधुनिक राजनीति के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
शिक्षा, पर्यावरण और सूचना-प्रसारण मंत्रालय में उनके कार्यकाल को उल्लेखनीय माना जाता है।
वे 30 जनवरी जन्म इतिहास में समकालीन राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं।
📌 निष्कर्ष
30 जनवरी को जन्मे महान व्यक्तित्व विविध क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।
साहित्य से लेकर राजनीति, कला से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक, इन विभूतियों ने मानव सभ्यता को दिशा दी।
30 जनवरी का इतिहास हमें प्रेरणा देता है कि समर्पण, विचार और कर्म से समाज में स्थायी परिवर्तन संभव है।