Wednesday, May 6, 2026
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Union Budget 2026: टैक्स, रेल और कृषि में बड़े सुधारों का ऐलान

Budget 2026: बैंकिंग रिफॉर्म पर बड़ा दांव, NBFC के लिए नया विजन; इनकम टैक्स, रेल और किसानों को बड़ी राहत

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में Budget 2026 पेश करते हुए देश की अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर और आम नागरिकों से जुड़ी कई बड़ी घोषणाएं कीं। यह उनका वित्त मंत्री के रूप में लगातार नौवां बजट है। बजट भाषण में सरकार ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग रिफॉर्म आने वाले वर्षों में आर्थिक मजबूती की रीढ़ होगा।
सरकार का फोकस अब केवल विकास पर नहीं, बल्कि स्थिर, पारदर्शी और समावेशी बैंकिंग सिस्टम पर है। इस बजट में बैंक, NBFC, किसान, मध्यम वर्ग, छात्र और उद्योग—सभी के लिए राहत और अवसर दोनों दिखाई देते हैं।

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Budget 2026 में बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़ा ऐलान
वित्त मंत्री ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने के लिए बैंकिंग सेक्टर का रिफॉर्म बेहद जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने NBFC (Non-Banking Financial Companies) के लिए एक नया विजन तैयार किया है।
इस विजन के तहत:
NBFC की निगरानी और नियमन को और मजबूत किया जाएगा
छोटे व्यवसायों और MSME को आसान लोन उपलब्ध कराने पर जोर
डिजिटल बैंकिंग और टेक्नोलॉजी आधारित फाइनेंस को बढ़ावा
जोखिम प्रबंधन और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान
सरकार का मानना है कि मजबूत बैंकिंग सिस्टम से ही आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत होगी।

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इनकम टैक्स को लेकर Budget 2026 का बड़ा फैसला
Budget 2026 में मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी गई है। वित्त मंत्री ने घोषणा की कि:इनकम टैक्स फॉर्म (ITR) को और सरल किया जाएगा
नया इनकम टैक्स कानून 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा
संशोधित ITR अब 31 मार्च तक दाखिल किया जा सकेगा
टैक्स सिस्टम को डिजिटल और पारदर्शी बनाया जाएगा
यह कदम टैक्सपेयर्स की परेशानियों को कम करेगा और स्वैच्छिक टैक्स अनुपालन को बढ़ावा देगा।

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विदेश यात्रा और शिक्षा पर टैक्स में राहत
Budget 2026 में विदेश यात्रा और पढ़ाई करने वालों के लिए भी राहत की घोषणा की गई है। सरकार ने संकेत दिया है कि:
शिक्षा और मेडिकल कारणों से विदेश जाने पर टैक्स बोझ कम होगा
विदेशी शिक्षा को लेकर वित्तीय दबाव घटेगा
मध्यम वर्ग के परिवारों को सीधी राहत मिलेगी
यह फैसला खासतौर पर छात्रों और ग्लोबल एक्सपोजर चाहने वाले युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
किसानों के लिए Budget 2026 में क्या खास?
कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने का ऐलान किया है।

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मुख्य बिंदु:
कृषि उत्पादन में विविधता
किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
आधुनिक तकनीक और मूल्य संवर्धन
पर्यावरण-सहज खेती को प्रोत्साहन
सरकार का लक्ष्य है कि किसान केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त बनें।
हाई-स्पीड रेल और टेक्सटाइल सेक्टर पर जोर
Budget 2026 में बुनियादी ढांचे को नई रफ्तार देने के लिए:
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने का प्रस्ताव
पर्यावरण-अनुकूल और तेज़ यात्री परिवहन पर जोर

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इसके अलावा:
टेक्सटाइल सेक्टर के लिए इंटीग्रेटेड प्रोग्राम
रोजगार सृजन और निर्यात बढ़ाने की रणनीति
आत्मनिर्भर भारत के लिए 2000 करोड़ रुपये
सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य:

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घरेलू उद्योगों को बढ़ावा
स्टार्टअप और MSME को समर्थन
आयात पर निर्भरता कम करना
Budget 2026 का समग्र संदेश
Budget 2026 सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की आर्थिक दिशा तय करने वाला रोडमैप है। बैंकिंग रिफॉर्म, टैक्स सरलीकरण, किसान कल्याण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास—इन सभी का संतुलन इस बजट को खास बनाता है।
सरकार का साफ संदेश है—
मजबूत बैंकिंग सिस्टम + सरल टैक्स + सशक्त किसान = मजबूत भारत

किशोर से जुआरी तक: नशे ने खोली तबाही की राह

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महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। शिकारपुर चौराहे से दरौली को जोड़ने वाला मार्ग इन दिनों नशे और अव्यवस्था का केंद्र बनता जा रहा है। इस मार्ग पर स्थित देशी शराब की दुकान अब केवल बिक्री स्थल नहीं, बल्कि विवाद और सामाजिक पतन का अड्डा बन चुकी है। चिंताजनक बात यह है कि इसी मार्ग पर एक प्राचीन कोट देवी का स्थल, शैक्षणिक संस्थान तथा आमजन के दैनिक आवागमन का रास्ता भी है।
सायंकालीन बेला में शराब पीने वालों की संख्या अचानक बढ़ जाने से स्थानीय परिवारों, महिलाओं, बच्चों और विद्यार्थियों का आना- जाना दूभर हो गया है। आए दिन गाली-गलौज, हुड़दंग और जुए जैसी गतिविधियों से वातावरण असुरक्षित होता जा रहा है।

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स्थानीय सम्मानित नागरिकों का कहना है कि यह शराब की भट्टी ही आज की युवा नशे में डूबी पीढ़ी के विनाश की जड़ बनती जा रही है। किशोरा अवस्था से ही युवाओं का नशे की ओर झुकाव समाज के भविष्य पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।लोगों का आरोप है कि एक ओर सरकार जगह-जगह शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर नशाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों की बात भी करती है। ऐसे में जनता के बीच सरकार की वास्तविक नीति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति एक तरफ शांति पाठ, दूसरी तरफ खुराफात की जड़ बोने जैसी प्रतीत होती है।
गिरजेश, सुरेंद्र, राजीव, रंजीत, विकास सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह शराब की दुकानों की संख्या बढ़ती रही तो समाज में भ्रष्टाचार, अपराध और नैतिक पतन का ही बोलबाला रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और आबादी वाले क्षेत्रों से शराब की दुकानों को हटाया जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इस उभरती सामाजिक समस्या पर समय रहते कोई ठोस कदम उठाती है या फिर नशे की यह आग आने वाली पीढ़ी को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लेगी।

मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान: 22 स्थानों पर चेकिंग, 385 व्यक्ति व 182 वाहन जांचे गए

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देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में जनपद में शांति, सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने तथा आमजन में सुरक्षा की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से “मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान” चलाया गया।अभियान के तहत प्रातः 5 बजे से 8 बजे तक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में सभी थाना प्रभारी/थानाध्यक्षों द्वारा मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया गया और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया। इस दौरान पुलिस ने सामुदायिक सहभागिता के तहत छोटे-मोटे विवादों का मौके पर निस्तारण किया तथा मित्र पुलिसिंग की भावना को सशक्त किया।चेकिंग अभियान के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की गहन जांच की गई।

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पुलिस द्वारा चोरी की गाड़ियों की तलाश, तीन सवारी के विरुद्ध कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर लगे दुपहिया वाहनों का चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर कार्रवाई तथा अवैध असलहा व मादक पदार्थों की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया गया।पुलिस द्वारा चलाए गए इस अभियान की जनसामान्य ने सराहना की और मॉर्निंग वॉक के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष व्यक्त किया।जनपदीय पुलिस द्वारा बताया गया कि अभियान के दौरान जनपद के कुल 22 स्थानों पर चेकिंग करते हुए 385 व्यक्तियों एवं 182 वाहनों की जांच की गई।पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, जिससे जनपद में शांति, सुरक्षा और आमजन का विश्वास बना रहे।

युवक के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज

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बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा) शादी का झांसा देकर एक युवक ने युवती के साथ शारीरिक संबंध बना कर विडीयो इंटरनेट पर वायरल करने और मारपीट की धमकी देने का मामला सामने आया है। मामले को संज्ञान मे लेते हुए पुलिस ने आरोपित युवक पर शारीरिक संबंध बनाने एवं मारपीट संबंधित धाराओं में अभियोग दर्ज कर लिया है।
थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी युवती का प्रेम प्रसंग थाना क्षेत्र के गांव के ही एक युवक से चल रहा था, जबकि युवक एक निजी कम्पनी मे काम करता है। इसी बीच युवक ने युवती को धमकी देने लगा की तुम्हारा इंटरनेट पर विडिओ वायरल कर दूंगा।

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जिसको लेकर पीड़ित युवती के पिता के तहरीर पर पुलिस ने आरोपी मनीष यादव पुत्र राधेश्याम यादव पर शारीरिक संबंध बनाने एवं वीडियो वायरल कर धमकी देने के आरोप में संबंधित धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर लिया है।

ICC T20 World Cup 2026: भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर टिकी निगाहें

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ICC T20 World Cup 2026: आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 की शुरुआत 7 फरवरी से होने जा रही है। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा, जबकि फाइनल मुकाबला 8 मार्च को आयोजित होगा। टूर्नामेंट का सबसे ज्यादा इंतजार किया जाने वाला मैच भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो में खेला जाएगा, जिसे लेकर क्रिकेट प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।

भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले को क्रिकेट की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता माना जाता है। टी20 विश्व कप में दोनों टीमें अब तक कुल 8 बार आमने-सामने आ चुकी हैं। इन मुकाबलों में भारत ने 6 बार जीत दर्ज की है, जबकि पाकिस्तान को केवल एक मैच में सफलता मिली है। एक मुकाबला टाई रहा था, लेकिन उसमें भी भारत ने बॉल-आउट के जरिए जीत हासिल की थी।

भारत और पाकिस्तान के बीच टी20 विश्व कप की यह कहानी साल 2007 से शुरू हुई थी। दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पहले टी20 विश्व कप में डरबन में दोनों टीमों का मुकाबला टाई रहा, जिसके बाद बॉल-आउट में भारत ने जीत दर्ज की। उसी टूर्नामेंट के फाइनल में जोहान्सबर्ग में भारत ने पाकिस्तान को 5 रन से हराकर पहला टी20 विश्व कप अपने नाम किया था।

इसके बाद भी भारत का दबदबा लगातार बना रहा। 2012 के टी20 विश्व कप में कोलंबो में खेले गए मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराया। 2014 में ढाका और 2016 में कोलकाता में भी भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ आसान जीत दर्ज की। इन मुकाबलों में भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों का प्रदर्शन पाकिस्तान पर भारी पड़ा।

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टी20 विश्व कप में पाकिस्तान की इकलौती जीत साल 2021 में देखने को मिली। दुबई में खेले गए इस मुकाबले में पाकिस्तान ने भारत को 10 विकेट से हराकर इतिहास रच दिया। यह पहली बार था जब पाकिस्तान ने टी20 विश्व कप में भारत को हराया। हालांकि यह बढ़त ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी।

भारत ने 2022 के टी20 विश्व कप में मेलबर्न में खेले गए रोमांचक मुकाबले में पाकिस्तान को 4 विकेट से हराकर वापसी की। इसके बाद 2024 में न्यूयॉर्क में खेले गए मैच में भी भारत ने करीबी मुकाबले में पाकिस्तान को 6 रन से मात दी।

अब आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में एक बार फिर भारत और पाकिस्तान आमने-सामने होंगे। आंकड़े भले ही भारत के पक्ष में हों, लेकिन इस मुकाबले में रिकॉर्ड से ज्यादा उस दिन का प्रदर्शन मायने रखता है। ऐसे में 15 फरवरी को कोलंबो में खेला जाने वाला यह हाई-वोल्टेज मैच एक बार फिर क्रिकेट इतिहास का यादगार अध्याय बन सकता है।

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RRB ग्रुप-डी भर्ती 2026: 21,997 पदों पर निकली वैकेंसी, आवेदन शुरू

RRB ग्रुप-डी भर्ती 2026: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने ग्रुप-डी (लेवल-1) पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती अभियान के तहत देशभर के विभिन्न रेलवे जोन में कुल 21,997 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। आवेदन प्रक्रिया 31 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

रेलवे ग्रुप-डी भर्ती उन युवाओं के लिए खास अवसर मानी जा रही है, जो कम शैक्षणिक योग्यता में सरकारी नौकरी पाना चाहते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 2 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। वहीं जिन उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क जमा करना है, उन्हें 4 मार्च 2026 तक का अतिरिक्त समय दिया गया है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

कौन कर सकता है आवेदन

इस भर्ती में योग्यता को सरल रखा गया है। किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास उम्मीदवार इन पदों के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा NCVT द्वारा जारी नेशनल अप्रेंटिसशिप सर्टिफिकेट (NAC) रखने वाले उम्मीदवार भी पात्र हैं। इस कारण बड़ी संख्या में युवा इस भर्ती में शामिल हो सकते हैं।

आयु सीमा

उम्मीदवार की आयु 1 जनवरी 2026 तक न्यूनतम 18 वर्ष और अधिकतम 33 वर्ष होनी चाहिए। सरकारी नियमों के अनुसार OBC, SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।

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आवेदन शुल्क

रेलवे ग्रुप-डी भर्ती के लिए जनरल और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को 500 रुपये आवेदन शुल्क देना होगा। वहीं SC, ST, महिला और ट्रांसजेंडर उम्मीदवारों के लिए शुल्क 250 रुपये निर्धारित किया गया है।
भर्ती की खास बात यह है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में शामिल होने पर शुल्क का बड़ा हिस्सा वापस कर दिया जाएगा। CBT में शामिल होने पर जनरल और OBC उम्मीदवारों को 400 रुपये, जबकि SC, ST और अन्य श्रेणियों को पूरे 250 रुपये वापस किए जाएंगे। इसलिए आवेदन के दौरान बैंक खाते की सही जानकारी भरना जरूरी है।

चयन प्रक्रिया

रेलवे ग्रुप-डी भर्ती की चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। सबसे पहले कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) आयोजित की जाएगी। इसमें सफल उम्मीदवारों को फिजिकल टेस्ट (PET) के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद दस्तावेज़ सत्यापन और अंत में मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। सभी चरणों में सफल उम्मीदवारों का अंतिम चयन होगा।

आवेदन करते समय ध्यान रखें

उम्मीदवार आवेदन से पहले पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर स्कैन करके रखें। फॉर्म में नाम और जन्मतिथि 10वीं की मार्कशीट के अनुसार ही भरें, क्योंकि किसी भी प्रकार की त्रुटि भविष्य में समस्या पैदा कर सकती है।

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नौतनवां सीमा पर तस्करी पर करारा प्रहार, 15 बोरी तुर्की मकई बरामद, एक गिरफ्तार

महराजगंज/नौतनवां (राष्ट्र की परम्परा)। नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जनपद में तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत नौतनवां थाना पुलिस और एसएसबी को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश के क्रम में, अपर पुलिस अधीक्षक के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी नौतनवां के मार्गदर्शन में थानाध्यक्ष नौतनवां पुरुषोत्तम राव के नेतृत्व में यह संयुक्त कार्रवाई की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार शाम करीब 4:50 बजे मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर थाना नौतनवां पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने पिपरहंवा पाट मुड़िला क्षेत्र में सघन चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें उसके कब्जे से 15 बोरी तुर्की मकई बरामद की गई।

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि बरामद तुर्की मकई नेपाल से अवैध रूप से लाई गई थी। मौके से सुनील कुमार पुत्र राजेन्द्र प्रसाद, निवासी वार्ड संख्या-02, हनुमत नगर, पीपीगंज, थाना पीपीगंज, जनपद गोरखपुर, उम्र लगभग 49 वर्ष को हिरासत में लिया गया।
बरामदगी के संबंध में कस्टम अधिनियम की धारा 111 के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए अभियुक्त को अग्रिम विधिक कार्रवाई के लिए कस्टम कार्यालय नौतनवां भेज दिया गया है।

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इस संयुक्त अभियान में थाना नौतनवां से उपनिरीक्षक संजय कुमार और कांस्टेबल जितेन्द्र गिरी शामिल रहे, जबकि एसएसबी टीम से उपनिरीक्षक मनोहर लाल, हेड कांस्टेबल मारुतिनन्दन और कांस्टेबल रितेश कुमार सिंह मौजूद रहे।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में तस्करी के खिलाफ सख्त निगरानी रखी जा रही है और अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।

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सम्मान, सम्मेलन और कविता का खोता जन-सरोकार: आत्ममंथन की ज़रूरत

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कविता को समाज की सामूहिक चेतना की आवाज़ माना जाता है। वह समय का दस्तावेज़ भी होती है और समय से टकराने का साहस भी रखती है। लेकिन वर्तमान समय में कवि सम्मेलनों, साहित्यिक आयोजनों और सांस्कृतिक मंचों को देखकर एक गंभीर सवाल उठता है कि क्या कविता अपने मूल जन-सरोकार से दूर होती जा रही है।

आज अधिकतर कवि सम्मेलनों का दृश्य लगभग एक-सा दिखाई देता है। मंच पर कवि हैं और श्रोताओं की पंक्ति में भी अधिकांशतः कवि ही बैठे होते हैं। कवि एक-दूसरे को मंच देते हैं, किताबें आपस में ख़रीदी जाती हैं और सम्मान भी एक सीमित दायरे में बाँट लिए जाते हैं। आयोजक, अतिथि, निर्णायक और प्रशंसक—सब एक ही वृत्त का हिस्सा बन चुके हैं। यह स्थिति साहित्यिक लोकतंत्र से अधिक एक आत्मसंतुष्ट और बंद समूह का रूप लेती जा रही है, जहाँ आम समाज की भागीदारी लगातार कम होती जा रही है।

यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि कविता आखिर किसके लिए है। यदि कविता का पाठक वही व्यक्ति है जो स्वयं कविता लिख रहा है, तो यह संवाद नहीं बल्कि आत्मसंवाद बन जाता है। साहित्य का इतिहास गवाह है कि जब रचनात्मक अभिव्यक्ति अपने सामाजिक सरोकारों से कटती है, तब वह धीरे-धीरे अप्रासंगिक हो जाती है।

कविता का जन्म सभागारों में नहीं हुआ था। वह खेतों की मिट्टी, मज़दूर के पसीने, स्त्री की चुप्पी, दलित के अपमान, आदिवासी के विस्थापन और आम आदमी की पीड़ा से उपजी थी। कबीर, निराला, नागार्जुन, त्रिलोचन, पाश और मुक्तिबोध जैसे कवि आज भी इसलिए प्रासंगिक हैं क्योंकि उनकी कविता सत्ता से सवाल करती है और हाशिये पर खड़े व्यक्ति की आवाज़ बनती है। इसके विपरीत आज की कविता का बड़ा हिस्सा संस्थागत सुरक्षा, सत्ता-समीकरण और आपसी प्रशस्ति में उलझा दिखाई देता है।

बड़े साहित्यिक संस्थानों, अकादमियों और विश्वविद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आम हैं। मंच पर सम्मान, शॉल और प्रशस्ति-पत्र दिखाई देते हैं। समस्या सम्मान से नहीं, बल्कि उसके आधार से है। यह सवाल लगातार उठता है कि क्या ये सम्मान सामाजिक प्रभाव पैदा करने वाली रचनाओं को दिए जा रहे हैं या फिर आपसी संबंधों और पहुँच के कारण।

समकालीन समय में कविता भी एक तरह की ब्रांडिंग का हिस्सा बनती जा रही है। कवि की पहचान उसकी कविता से अधिक मंचों पर उपस्थिति और आयोजनों की तस्वीरों से होने लगी है। जब कविता आत्मप्रचार का माध्यम बन जाती है, तो उसकी रचनात्मक शक्ति कमजोर होने लगती है।
एक बड़ा प्रश्न पाठक का भी है। आम पाठक कविता से दूर क्यों हो रहा है, इसका उत्तर केवल पाठक की अरुचि में नहीं, बल्कि कविता की बदलती प्रकृति में भी छिपा है। जब कविता आम जीवन की भाषा और संघर्षों से कट जाती है, तो वह केवल एक बौद्धिक अभ्यास बनकर रह जाती है और मंचों तक सीमित हो जाती है।

कवि का दायित्व केवल सौंदर्य रचना नहीं, बल्कि सत्य के पक्ष में खड़ा होना भी है। कविता का कार्य सत्ता को सहज बनाना नहीं, बल्कि उसे असहज करना है। लेकिन आज कई कवि टकराव के बजाय सुविधा का रास्ता चुनते हैं, जो कविता की आत्मा को धीरे-धीरे खोखला कर देता है।
सम्मेलन संस्कृति पर भी आत्ममंथन आवश्यक है। कविता को केवल मंचों तक सीमित रखने के बजाय स्कूलों, कॉलेजों, मज़दूर बस्तियों, गाँवों और आंदोलनों तक ले जाने की ज़रूरत है। यदि कविता समाज से कट गई, तो उसका प्रभाव शून्य हो जाएगा।

कविता का यह संकट केवल कवियों का संकट नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक चेतना का संकट है। जब साहित्य आत्मालोचना छोड़ देता है, तो वह सजावट बन जाता है। कविता का भविष्य इसी पर निर्भर करेगा कि वह आत्ममुग्ध मंचों से बाहर निकलकर फिर से जीवन के संघर्षों से जुड़ने का साहस करती है या नहीं।

— डॉ. सत्यवान सौरभ
कवि, सामाजिक विचारक एवं स्तंभकार

15 दिन की अमीन ट्रेनिंग से बदलेगा बिहार का राजस्व सिस्टम

बिहार में जमीन विवाद निपटारे की तैयारी तेज, 4904 राजस्व कर्मचारियों को अमीन का प्रशिक्षण अनिवार्य


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में जमीन से जुड़े मामलों के तेजी से निपटारे को लेकर राज्य सरकार अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। जमीन मापी, दाखिल-खारिज और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े लंबित मामलों को जल्द सुलझाने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। राज्य के सभी 4904 राजस्व कर्मचारियों को अमीन के कामकाज का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निर्देश पर 15 दिनों की अमीन ट्रेनिंग अनिवार्य की गई है, जिसमें राजस्व कर्मचारी जमीन मापी से जुड़ी हर तकनीकी और व्यावहारिक जानकारी हासिल करेंगे। इस प्रशिक्षण में पारंपरिक मापी पद्धति के साथ-साथ नए डिजिटल और तकनीकी उपकरणों की भी जानकारी दी जाएगी, जिससे जमीन मापी में पारदर्शिता और गति दोनों बढ़ेंगी।

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सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि जमीन विवाद, दाखिल-खारिज और जमाबंदी निर्माण जैसे मामलों में देरी खत्म हो और आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर निर्देश जारी कर दिए हैं।
राजस्व कर्मचारियों की अहम जिम्मेदारियां
इस नई व्यवस्था के तहत राजस्व कर्मचारियों की भूमिका और अधिक मजबूत होगी। उन्हें जमीन से जुड़े निम्नलिखित कार्यों में विशेष दक्षता हासिल करनी होगी—जमीन से संबंधित रिकॉर्ड तैयार करना
राजस्व वसूली की प्रक्रिया
भूमि स्वामित्व ट्रांसफर, दाखिल-खारिज और जमाबंदी निर्माण
संपत्ति और जमीन विवादों के समाधान में सहयोग
सरकारी जमीन की पहचान और जानकारी जुटाना
सरकार का मानना है कि जब राजस्व कर्मचारी अमीन के कार्यों को गहराई से समझेंगे, तो जमीन मापी से जुड़े विवादों का समाधान तेजी से संभव होगा।

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जनसंवाद में मंत्री की सख्त चेतावनी
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय सिन्हा इन दिनों जनसंवाद कार्यक्रम के तहत जिलों का दौरा कर रहे हैं। हाल ही में दरभंगा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक महिला ने मंच पर रोते हुए अपनी पीड़ा बताई। महिला ने कहा कि वह दाखिल-खारिज के लिए पिछले एक साल से दफ्तरों के चक्कर लगा रही है और हर बार अवैध मांग की जाती है।
महिला ने बताया कि उसके पिता पैरालाइसिस से पीड़ित हैं और इलाज के साथ-साथ सरकारी दफ्तरों की भागदौड़ उसके लिए भारी पड़ रही है। यह सुनते ही मंत्री विजय सिन्हा सख्त हो गए। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मार्च तक व्यवस्था नहीं सुधरी तो नौकरी जाना तय है। उन्होंने मंच से साफ कहा— “यह अंतिम चेतावनी है, बहुत बेरोजगार खड़े हैं, सुधर जाइए।”

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जमीन सुधार से आम जनता को राहत
सरकार के इस फैसले से उम्मीद की जा रही है कि बिहार में जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और आम नागरिकों को समय पर न्याय मिलेगा। राजस्व कर्मचारियों को अमीन का प्रशिक्षण देने का यह कदम जमीन सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

व्हाट्सऐप ट्रेडिंग ग्रुप बना ठगी का हथियार, 2.7 करोड़ का साइबर फ्रॉड उजागर

लातेहार साइबर ठगी केस: 2.7 करोड़ की धोखाधड़ी में CID की बड़ी कार्रवाई, बंगाल से आरोपी गिरफ्तार

रांची (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा से सामने आए एक बड़े साइबर ठगी मामले में CID की साइबर क्राइम थाना टीम ने अहम सफलता हासिल की है। इनवेस्टमेंट के नाम पर 2.7 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना से अभिषेक बेरा (26 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी थाना घोला अंतर्गत मुरागच्छा (सीटी), जगबेरिया का निवासी है।
CID ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, तीन सिम कार्ड, पांच डेबिट कार्ड और कई अहम दस्तावेज जब्त किए हैं। प्रारंभिक पूछताछ के बाद आरोपी को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार भेज दिया गया है।
व्हाट्सऐप ग्रुप से शुरू हुआ 2.7 करोड़ का साइबर फ्रॉड
पीड़ित व्यवसायी ने 16 दिसंबर 2025 को रांची स्थित CID साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। साथ ही साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी शिकायत दी गई थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पीड़ित को एक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा, जहां आकर्षक ट्रेडिंग ऑफर और नकली मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा किए जा रहे थे।

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झांसे में आकर पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में करीब 2.07 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसमें पीड़ित के अपने पैसे के साथ परिजनों और दोस्तों की रकम भी शामिल थी। जांच के दौरान CID ने आरोपियों से जुड़े खातों में करीब 40 लाख रुपये फ्रीज कराए हैं।
नकली इनवेस्टमेंट ऐप और फर्जी ट्रेडिंग का जाल
CID के अनुसार, ठगी वित्तीय फर्जी संस्थाओं के नाम पर बनाई गई नकली इनवेस्टमेंट और ट्रेडिंग ऐप के जरिए की गई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और गूगल एड के माध्यम से निवेश के झूठे विज्ञापन दिखाए जाते थे, जिनसे लोग आसानी से फंस जाते हैं।

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CID की चेतावनी: इन बातों का रखें खास ध्यान
इनवेस्टमेंट से जुड़े व्हाट्सऐप/टेलीग्राम लिंक पर क्लिक न करें।किसी अनजान लिंक से वेब पोर्टल या ऐप पर रजिस्ट्रेशन न करें।
इनवेस्टमेंट के नाम पर भेजे गए बैंक अकाउंट या UPI ID में पैसे जमा न करें।
निवेश हमेशा सरकार द्वारा अधिकृत एप्लीकेशन पर ही करें।फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर ठगी तेजी से संगठित अपराध का रूप ले रही है। सतर्कता और सही जानकारी ही इससे बचाव का सबसे मजबूत हथियार है।

जब सूर्य अस्त नहीं होता—केवल भीतर स्थानांतरित होता है…

भूमिका
जब हम कहते हैं कि सूर्य अस्त हो गया, तब वास्तव में क्या सूर्य कहीं चला जाता है? या यह केवल हमारी दृष्टि का भ्रम है? सूर्य की शास्त्रोक्त कथा हमें बताती है कि सूर्य कभी अस्त नहीं होता, वह केवल बाह्य दृश्य से हटकर भीतर की चेतना में स्थानांतरित होता है। यही इस श्रृंखला का बारहवाँ अध्याय है—जहाँ सूर्य का रहस्य केवल आकाश में नहीं, आत्मा के भीतर खुलता है।
यह एपिसोड सूर्य देव कथा को वैदिक, पौराणिक और आध्यात्मिक दृष्टि से प्रस्तुत करता है, ताकि पाठक केवल जानकारी नहीं, अनुभव भी प्राप्त करे।

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सूर्य अस्त क्यों दिखता है? शास्त्रों का उत्तर
वैदिक ग्रंथों के अनुसार सूर्य सदा गतिमान है। पृथ्वी की गति के कारण हमें सूर्य के उदय और अस्त का भ्रम होता है। ऋग्वेद में सूर्य को “अचल प्रकाश” कहा गया है। अर्थात सूर्य का प्रकाश कभी समाप्त नहीं होता।
सूर्य की शास्त्रोक्त कथा स्पष्ट करती है कि अस्त का अर्थ प्रकाश का लोप नहीं, बल्कि उसकी दिशा का परिवर्तन है। यही कारण है कि रात्रि में भी सूर्य किसी अन्य लोक को प्रकाशित कर रहा होता है।
अस्त नहीं, अंतर्मुखी यात्रा
पुराणों में उल्लेख है कि सूर्य जब अस्त होता है, तब वह देवताओं के भीतर प्रवेश करता है। यह विचार अत्यंत गूढ़ है। इसका संकेत है कि बाह्य प्रकाश के लुप्त होते ही अंतःप्रकाश जाग्रत होता है।
सूर्य देव कथा में यह क्षण साधना का माना गया है। संध्या काल इसलिए पवित्र है क्योंकि उस समय सूर्य बाह्य आकाश से हटकर साधक के भीतर प्रवेश करता है।

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सप्त अश्व और समय का रहस्य
सूर्य के रथ के सात अश्व केवल रंग या दिन नहीं, बल्कि चेतना के सात स्तरों के प्रतीक हैं। जब सूर्य अस्त होता है, तब ये सात अश्व मनुष्य के भीतर सक्रिय होते हैं।
वैदिक सूर्य रहस्य के अनुसार यही कारण है कि संध्या समय जप, ध्यान और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ समय माना गया है।
आदित्य हृदय स्तोत्र और अस्त का दर्शन
रामायण में आदित्य हृदय स्तोत्र का वर्णन केवल युद्ध विजय के लिए नहीं है। यह स्तोत्र सूर्य के आंतरिक स्वरूप को जाग्रत करने का माध्यम है।
जब सूर्य अस्त होता है, तब यह स्तोत्र साधक को सिखाता है कि बाह्य अंधकार से भय नहीं, क्योंकि भीतर सूर्य का वास है। यही सूर्य की शास्त्रोक्त कथा का मूल संदेश है।

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सूर्य और आत्मा का संबंध
उपनिषदों में सूर्य को आत्मा का बाह्य प्रतीक माना गया है। जैसे सूर्य पूरे संसार को प्रकाशित करता है, वैसे ही आत्मा देह को चेतन बनाती है।
सूर्य देव कथा कहती है कि जो व्यक्ति सूर्य को केवल ग्रह नहीं, आत्मतत्व के रूप में समझता है, उसके जीवन में अज्ञान का अंधकार टिक नहीं पाता।
संध्या वंदन का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष
आज के विज्ञान ने भी स्वीकार किया है कि सूर्यास्त के समय वातावरण में विशेष ऊर्जा परिवर्तन होता है। शास्त्रों ने इसे हजारों वर्ष पहले पहचान लिया था।
वैदिक सूर्य रहस्य बताता है कि संध्या वंदन शरीर, मन और चेतना—तीनों को संतुलित करता है।
जब सूर्य भीतर उतरता है
रात्रि केवल अंधकार नहीं है। यह आत्मचिंतन का द्वार है। सूर्य के अस्त के साथ ही बाह्य कर्म शांत होते हैं और भीतर का सूर्य जाग्रत होता है।
सूर्य की शास्त्रोक्त कथा हमें सिखाती है कि जो व्यक्ति रात्रि को भय नहीं, साधना मानता है, उसके जीवन में प्रकाश स्थायी हो जाता है।

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आधुनिक जीवन में सूर्य दर्शन का अर्थ
आज की भागदौड़ में हम सूर्य को केवल मौसम या तापमान से जोड़ते हैं। लेकिन सूर्य देव कथा बताती है कि सूर्य अनुशासन, समयबद्धता और आत्मबल का प्रतीक है।
सूर्य का अस्त हमें सिखाता है कि हर दिन का अंत आत्ममंथन से होना चाहिए।
क्यों नहीं डूबता सूर्य?
शास्त्र कहते हैं—सूर्य न कभी जन्म लेता है, न कभी मरता है। वह केवल दृश्य बदलता है।
सूर्य की शास्त्रोक्त कथा के अनुसार यही सत्य जीवन पर भी लागू होता है। अंत केवल परिवर्तन है, समाप्ति नहीं।

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एपिसोड 12 का सार
यह अध्याय हमें बताता है कि सूर्य का अस्त होना हार नहीं, बल्कि चेतना की यात्रा है। बाह्य प्रकाश से अंतःप्रकाश की ओर।
जो इसे समझ लेता है, उसके लिए जीवन का कोई भी अंधकार स्थायी नहीं रहता।
निष्कर्ष
जब अगली बार सूर्य अस्त हो, तो इसे दिन का अंत न मानें। इसे भीतर सूर्य के जागरण का संकेत समझें। यही वैदिक सूर्य रहस्य है, यही सूर्य देव कथा का अमृत है, और यही सूर्य की शास्त्रोक्त कथा का शाश्वत सत्य।

आदित्य का हृदय स्रोत गदगद है

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— डॉ० कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

गाँधी कहूँ या सुभाष कहूँ,
या कहूँ वीर जवाहर तैने।
इस उम्र में भी प्रशंसा-पत्रों
की लगा दी लंबी कतार तैने।

उठो और सुनाओ, ए.पी.एस.
डायरेक्टर को अपनी यह गाथा।
इस बुढ़ापे में भी कर रहे हो,
ए.पी.एस. कोर का ऊँचा माथा।

ऐसी प्रशस्ति भेजी है अभिन्न
मित्र कर्नल धर्मपाल बरक ने,
हरियाणवी बोली कितनी प्यारी,
क्या सुंदर शब्द चुने मित्र ने।

बस सादर धन्यवाद, आभार यही,
आदित्य का हृदय स्रोत गदगद है।
मित्रों का प्रोत्साहन, संग मिला,
कर्मपथ पर बढ़ने का हौसला है।

अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप: सेमीफाइनल के लिए भारत-पाकिस्तान मुकाबला

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खेल (राष्ट्र की परम्परा)। अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप 2 का आखिरी और सबसे अहम मुकाबला आज भारत और पाकिस्तान के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला सिर्फ प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि सेमीफाइनल में जगह बनाने का भी है। दोनों टीमों के बीच होने वाले मुकाबले हमेशा रोमांच से भरपूर रहते हैं, लेकिन आज का मैच टूर्नामेंट के भविष्य का फैसला करने वाला साबित होगा।
ग्रुप 1 से ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान पहले ही सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। वहीं ग्रुप 2 से इंग्लैंड ने भी सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया है। अब ग्रुप 2 से आखिरी सेमीफाइनल स्थान के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी टक्कर है।

अंक तालिका पर नजर डालें तो इंग्लैंड ने अपने चारों मुकाबले खेलकर 8 अंक हासिल किए हैं और उनका नेट रन रेट +1.757 है, जिसके चलते वह ग्रुप 2 में शीर्ष पर है। भारत ने अब तक तीन मैच खेले हैं और उसके 6 अंक हैं। भारत का नेट रन रेट +3.337 है, जो पाकिस्तान और इंग्लैंड दोनों से बेहतर है। पाकिस्तान ने चार मैचों में 4 अंक हासिल किए हैं और उसका नेट रन रेट +1.484 है, जिससे वह तीसरे स्थान पर मौजूद है।

भारतीय अंडर-19 टीम के लिए समीकरण काफी आसान है। अगर भारत आज पाकिस्तान को हरा देता है, तो उसके 8 अंक हो जाएंगे और वह इंग्लैंड के बराबर पहुंच जाएगा। बेहतर नेट रन रेट के चलते भारत ग्रुप में शीर्ष स्थान भी हासिल कर सकता है। इस स्थिति में भारत का सेमीफाइनल मुकाबला अफगानिस्तान से होगा। यानी भारत को सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए सिर्फ जीत दर्ज करनी है। हालांकि कुछ परिस्थितियों में हार के बावजूद भी भारत सेमीफाइनल में पहुंच सकता है, लेकिन टीम किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहेगी।

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वहीं पाकिस्तान के लिए सेमीफाइनल का रास्ता काफी कठिन है। आईसीसी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को सिर्फ जीत नहीं, बल्कि बड़े अंतर से जीत दर्ज करनी होगी। अगर पाकिस्तान पहले बल्लेबाजी करता है, तो उसे भारत को 105 रन या उससे अधिक के अंतर से हराना होगा, तभी वह सेमीफाइनल में पहुंच सकेगा।

अगर पाकिस्तान की टीम पहले गेंदबाजी करती है, तो उसे लक्ष्य का पीछा बेहद तेज गति से करना होगा। उदाहरण के तौर पर, यदि भारत पाकिस्तान को 251 रनों का लक्ष्य देता है, तो पाकिस्तान को यह लक्ष्य 29.4 ओवरों से पहले हासिल करना अनिवार्य होगा। इससे कम समय में लक्ष्य पूरा करने पर ही पाकिस्तान का नेट रन रेट इतना सुधर पाएगा कि वह सेमीफाइनल में जगह बना सके।

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में खेले गए अंडर-19 एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 191 रनों के बड़े अंतर से हराया था। उस जीत के कारण पाकिस्तान का आत्मविश्वास जरूर बढ़ा हुआ होगा, लेकिन मौजूदा टूर्नामेंट में परिस्थितियां अलग हैं और भारत का नेट रन रेट पाकिस्तान से काफी बेहतर है।

आज का भारत बनाम पाकिस्तान अंडर-19 मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है, जहां एक तरफ भारत अपनी जीत से सेमीफाइनल का टिकट पक्का करना चाहेगा, वहीं पाकिस्तान के सामने टूर्नामेंट में बने रहने के लिए बड़ा चमत्कार करने की चुनौती होगी।

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बेंगलुरु गैस हादसा: होस्कोटे में चार मजदूरों की मौत

बेंगलुरु (राष्ट्र की परम्परा)। बेंगलुरु से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। जिले के होस्कोटे तालुक में शुक्रवार शाम असम के चार मजदूर मृत पाए गए। यह मामला सुलिबेले पुलिस थाना क्षेत्र का है। शुरुआती जांच में पुलिस को आशंका है कि चारों की मौत कमरे में जमा हुई कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से दम घुटने के कारण हुई।

मृतकों की पहचान जयंत, धनंजय, निरेंद्रनाथ और तायदे के रूप में हुई है। सभी मजदूर एक वेयरहाउस में लोडर के तौर पर काम करते थे और होस्कोटे इलाके में एक छोटे से कमरे में साथ रहते थे। पुलिस के अनुसार, हादसे के समय चारों कमरे के अंदर गैस चूल्हे पर चावल बना रहे थे।

जांच में सामने आया है कि कमरे में हवा के निकलने की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। कमरे की इकलौती खिड़की भी बंद थी, जिससे जहरीली गैस धीरे-धीरे अंदर जमा होती चली गई और दम घुटने की स्थिति बन गई। इसके चलते चारों मजदूर बेसुध होकर फर्श पर गिर पड़े।

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घटना का खुलासा तब हुआ जब मृतकों का एक दोस्त उनसे मिलने उनके कमरे पर पहुंचा। बार-बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद खिड़की खोलकर अंदर देखा गया, जहां चारों मजदूर फर्श पर पड़े मिले। इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी गई।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
यह बेंगलुरु गैस हादसा एक बार फिर शहरी इलाकों में रह रहे मजदूरों की असुरक्षित रहने की स्थिति पर सवाल खड़े करता है।

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मीरा नायर एप्सटीन फाइल्स विवाद: 2009 के ईमेल से जुड़ा नाम, सिनेमा विरासत पर सवाल


मुंबई (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मीरा नायर एप्सटीन फाइल्स विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भारतीय मूल की फिल्म निर्देशक मीरा नायर—जिन्हें मॉनसून वेडिंग और द नेमसेक जैसी चर्चित फिल्मों के लिए जाना जाता है—का नाम हाल में सार्वजनिक हुए कुछ दस्तावेज़ों में संदर्भ के रूप में सामने आने के बाद चर्चा का विषय बन गया है। यह खबर उनके सिनेमाई योगदान से अलग, एक संवेदनशील सामाजिक संदर्भ के कारण ध्यान खींच रही है।
यह लेख तथ्यों और रिपोर्टेड जानकारी के आधार पर मामला समझाने का प्रयास करता है, बिना किसी आरोप को तथ्य के रूप में प्रस्तुत किए।
क्या है एप्सटीन फाइल्स और क्यों है चर्चा
एप्सटीन फाइल्स से आशय उन दस्तावेज़ों और ईमेल संवादों से है, जिनमें दिवंगत फाइनेंसर जेफ्री एप्सटीन से जुड़े सामाजिक नेटवर्क का उल्लेख मिलता है। इन फाइल्स में राजनीति, मनोरंजन और व्यापार जगत के कई चर्चित नाम संदर्भ के रूप में आते रहे हैं। यह स्पष्ट करना ज़रूरी है कि किसी दस्तावेज़ में नाम का आना, अपने-आप में किसी प्रकार के अवैध कृत्य का प्रमाण नहीं होता।
हालिया बहस इसलिए तेज़ हुई है क्योंकि इन फाइल्स में वर्ष 2009 के एक ईमेल का जिक्र बताया गया है, जिसमें एक सामाजिक आयोजन का संदर्भ है और उसमें मीरा नायर एप्सटीन फाइल्स से जुड़ा नाम रिपोर्ट्स में उद्धृत किया गया।

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2009 का ईमेल: क्या कहा जा रहा है
रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस 2009 के ईमेल का हवाला दिया जा रहा है, उसमें एक पार्टी या सामाजिक आयोजन का उल्लेख है। उस दौर में प्रभावशाली और चर्चित लोगों के बीच सामाजिक मेल-जोल आम था। ऐसे आयोजनों में जेफ्री एप्सटीन की मौजूदगी का उल्लेख विभिन्न संदर्भों में मिलता रहा है।
यह भी ध्यान देना आवश्यक है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर मीरा नायर के खिलाफ किसी तरह के आरोप या गलत आचरण का दावा सामने नहीं आया है। मीरा नायर एप्सटीन फाइल्स विवाद में नाम का आना रिपोर्टेड संदर्भ तक सीमित बताया जा रहा है।
मीरा नायर का पक्ष और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
अब तक मीरा नायर की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। वहीं, उनके बेटे और न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल के सदस्य जोहरान ममदानी ने व्यापक रूप से जवाबदेही और नैतिकता पर ज़ोर देने की बात कही है।
सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों के नाम जब विवादास्पद संदर्भों में आते हैं, तो पारदर्शिता और तथ्यों की जाँच की माँग स्वाभाविक हो जाती है। इसी कारण मीरा नायर एप्सटीन फाइल्स से जुड़ी खबरों पर भी सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चा बढ़ी है।

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सिनेमा विरासत बनाम सोशल संदर्भ
मीरा नायर का सिनेमा जगत में योगदान व्यापक और निर्विवाद रहा है। उनकी फिल्मों ने प्रवासी पहचान, पारिवारिक रिश्तों और सामाजिक यथार्थ को वैश्विक मंच पर रखा है।
मॉनसून वेडिंग ने भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों से जोड़ा, जबकि द नेमसेक ने प्रवासी जीवन की जटिलताओं को संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया।
मीरा नायर एप्सटीन फाइल्स विवाद इस बात की याद दिलाता है कि किसी सार्वजनिक व्यक्ति की सामाजिक मौजूदगी को अक्सर अलग-अलग संदर्भों में देखा और परखा जाता है—भले ही उनका पेशेवर योगदान कितना ही महत्वपूर्ण क्यों न हो।
क्या असर पड़ेगा छवि पर
यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि इस घटनाक्रम का मीरा नायर की छवि या विरासत पर दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा। इतिहास बताता है कि रिपोर्टेड संदर्भों और सिद्ध तथ्यों के बीच अंतर को समझना बेहद ज़रूरी है।
पाठकों और दर्शकों के लिए भी यह आवश्यक है कि वे खबरों को तथ्यपरक दृष्टि से पढ़ें और अटकलों से बचें।
मीरा नायर एप्सटीन फाइल्स का उल्लेख, फिलहाल, एक रिपोर्टेड संदर्भ है—ना कि किसी आरोप की पुष्टि।
निष्कर्ष
जैसे-जैसे एप्सटीन फाइल्स से जुड़ी जानकारियाँ सार्वजनिक होती जा रही हैं, वैसे-वैसे चर्चित नामों पर बहस भी तेज़ हो रही है। मीरा नायर एप्सटीन फाइल्स विवाद इस व्यापक बहस का हिस्सा है, जहाँ सामाजिक संपर्क, सार्वजनिक जवाबदेही और मीडिया रिपोर्टिंग की भूमिका पर सवाल उठते हैं।
मीरा नायर की सिनेमाई विरासत अपने आप में मजबूत है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले तथ्यों की पुष्टि और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार करना ही जिम्मेदार रवैया होगा।