Wednesday, May 6, 2026
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केंद्रीय बजट के खिलाफ खेत-ग्रामीण मजदूर यूनियन का प्रदर्शन, मनरेगा बहाली की उठी मांग

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)।
जिला कलेक्ट्रेट देवरिया परिसर में उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन की जिला कमेटी के आह्वान पर केंद्रीय बजट के विरोध तथा पुराने मनरेगा को बहाल करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत किया गया, जिसमें राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया।
धरने को संबोधित करते हुए खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड सतीश कुमार ने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा प्रस्तुत नवीनतम केंद्रीय बजट मेहनतकश जनता की अनदेखी करता है। बजट में एक बार फिर कॉरपोरेट और बड़े पूंजीपतियों को टैक्स रियायत, छूट और दीर्घकालिक टैक्स हॉलिडे जैसी सुविधाएं दी गई हैं, जबकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि सामाजिक क्षेत्र के आवंटन में भारी कटौती कर सरकार ने जनता की वास्तविक चिंताओं से मुंह मोड़ लिया है।
किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के बजट में गंभीर कमी दिखाई देती है। बढ़ती महंगाई के मुकाबले बजट में की गई मामूली बढ़ोतरी नाकाफी है। छोटे और सीमांत किसानों व खेत मजदूरों से जुड़ी योजनाओं—प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री सिंचाई योजना और प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना—के आवंटन में कटौती की गई है।
खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन के जिला मंत्री कामरेड रामनिवास यादव ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि विकसित भारत ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका मिशन के लिए किया गया आवंटन सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है। मनरेगा के स्थान पर लाई गई नई योजना में रोजगार के दिनों को बढ़ाने के दावों के विपरीत बजट प्रावधान कमजोर हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकार ग्रामीण रोजगार की गारंटी को लेकर गंभीर नहीं है।
धरने में कामरेड बालेंद्र मौर्य ने कहा कि ग्रामीण विकास से जुड़ी पेंशन योजनाओं में या तो कटौती की गई है या कोई ठोस सुधार नहीं किया गया है। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का आवंटन घटाया गया है, जबकि विधवा और दिव्यांग पेंशन योजनाएं पिछले वर्ष के स्तर पर ही सीमित हैं। उन्होंने पेयजल, शिक्षा, उच्च शिक्षा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में बजट कटौती पर भी सवाल उठाए।
इस धरने की अध्यक्षता हरिवंश प्रसाद ने की तथा संचालन कामरेड परमहंस भारती ने किया। प्रदर्शन में सैकड़ों लोग शामिल रहे, जिनमें सतीश कुमार, जयप्रकाश यादव, प्रेम चंद्र यादव, हरिबद प्रसाद, संजय कुमार गोंड, बलविंदर मौर्य, दुर्गेश पासवान, गंगा देवी, पूनम देवी और लीलावती देवी प्रमुख रूप से मौजूद रहीं।

हमारा आंगन–हमारे बच्चे कार्यक्रम में शिक्षा के प्रति किया गया जागरूक

बलिया(राष्ट्र की परम्परा)

रेवती जूनियर हाई स्कूल प्रांगण में सोमवार को “हमारा आंगन–हमारे बच्चे” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करना और अभिभावकों में शैक्षिक जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग तथा प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी से गुलजार रहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नायब तहसीलदार बांसडीह रजनीश सिंह ने अपने संबोधन में शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बताया। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित समाज ही मजबूत राष्ट्र की नींव रखता है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके कंधों पर आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने की बड़ी जिम्मेदारी है, जिसे उन्हें पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें।एडीओ पंचायत शशिभूषण दूबे ने सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि शासन की मंशा है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को भी बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्तियों की भूमिका की सराहना की, जो प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत बनाने में अहम योगदान दे रही हैं।खण्ड शिक्षा अधिकारी डीपी सिंह ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों, शिक्षकों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से विद्यालय और समुदाय के बीच समन्वय मजबूत होता है, जिससे बच्चों की उपस्थिति और सीखने की गुणवत्ता में सुधार होता है। कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा लघु सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन्होंने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। शिक्षकों ने बच्चों को नियमित विद्यालय आने, स्वच्छता बनाए रखने और मन लगाकर पढ़ाई करने की शपथ भी दिलाई।कार्यक्रम में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे: नायब तहसीलदार बांसडीह रजनीश सिंह ,एडीओ पंचायत शशिभूषण दूबे,खण्ड शिक्षा अधिकारी डीपी सिंह,मंडलाध्यापक – कामिनी पाण्डेय, हरिशंकर सिंह, प्रदीप शुक्ला,बुद्धि अस्थाना,आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियाँ एवं विद्यालय स्टाफ कार्यक्रम का समापन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना और शिक्षा के प्रति जागरूकता के संदेश के साथ किया गया।

यू जी सी के विरोध मे ब्राह्मण महा सभा ने पुतला फुका

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)
सोमवार को ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष जय नारायण तिवारी प्रिंस के नेतृत्व में, यूजीसी कानून को वापस लो, आरक्षण मुर्दाबाद, एस सी एस टी मुर्दाबाद का नारा लगाते हुए मेन चौराहे पर नारेबाजी कर विरोध जताया। उसके बाद अटल तिराहे पर एस सी एस टी एवं आरक्षण का पुतला फूंका और जोरदार विरोध प्रकट कराया इस दौरान काफी संख्या में युवा उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का नेतृत्व करते हुए ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि आज जो भी सवर्ण शांत बैठे हैं आना वाला समय उनके और उनके परिवार के लिए भयावह होगा।
वर्तमान की सरकार ब्राह्मण समाज के पीछे हाथ धोकर पड़ी हुई है सबसे ज़्यादा हत्या ब्राह्मणों का योगी की सरकार में हुआ है। आगे त्रिपाठी ने कहा कि अभी भी समय है एक हो जाइए और इन सवर्ण विरोधियों को सबक सिखाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को कोई आरक्षण नहीं चाहिए, लेकिन सभी का आरक्षण समाप्त किया जाय एवं एस सी येस्ट टी को भी समाप्त किया जाय वर्ना अभी ये शुरुआत है आगे सवर्ण समाज एक जुट हो उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा,
इसी क्रम मे बिट्टू मिश्र, बबलू शुक्ल आदि ने सम्बोधित किया।
इस दौरान मनीष तिवारी, पाण्डेय , अरण्व त्रिपाठी, आदि सैकड़ों नौजवान उपस्थित रहे।

बरठा चौराहा पर बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा की जयंती पर गरजे समान शिक्षा के स्वर

सलेमपुर/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)बरठा चौराहा स्थित राष्ट्रीय समानता दल कार्यालय पर सोमवार, 2 फरवरी 2026 को अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा की जयंती राजनीतिक चेतना और संघर्ष के संकल्प के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में वक्ताओं ने देश की मौजूदा शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।
राष्ट्रीय समानता दल उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष संजय दीप कुशवाहा ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा केवल एक नेता नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन का विचार थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “राष्ट्रपति हो या मजदूर की संतान—सबकी शिक्षा एक समान” का नारा आज भी सत्ता और पूंजीपरस्त व्यवस्था को चुभता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जानबूझकर सरकारी शिक्षा को कमजोर किया जा रहा है ताकि गरीब, पिछड़े और शोषित समाज के बच्चे आगे न बढ़ सकें। यह असमान शिक्षा व्यवस्था देश की एकता और प्रगति दोनों के लिए घातक है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकारी शिक्षा व्यवस्था नहीं बचेगी तो देश के निर्धनतम परिवार का बच्चा कभी बराबरी का सपना नहीं देख पाएगा। बाबू जगदेव का संदेश साफ है—समान, मुफ्त और मजबूत सरकारी शिक्षा के लिए निर्णायक लड़ाई लड़नी होगी।
सुजीत कुमार ने कहा कि बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा शोषित समाज की ऐसी आवाज थे, जिसने सत्ता के पाखंड और दोहरे चरित्र को बेनकाब किया। चंद्रिका पासवान ने कहा कि बाबू जगदेव के विचारों में पाखंडवाद सीधे तौर पर शोषण का औजार था, जिसे खत्म किए बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं।
शेषमणि कुशवाहा ने कहा कि बाबू जगदेव देश में समान अवसर और सामाजिक बराबरी के सबसे मजबूत वैचारिक स्तंभ थे। अभय कुमार और उमेश कुशवाहा ने उन्हें सामाजिक क्रांति का योद्धा बताते हुए कहा कि आज जरूरत है उनके विचारों को आंदोलन में बदलने की।
कार्यक्रम का संचालन शत्रुघ्न कुशवाहा ने किया।
इस अवसर पर रामशकल कुशवाहा, मुस्तफा अंसारी, अल्लाउद्दीन, राजेश कुमार, मोहन कुशवाहा, गुड्डू कुशवाहा, राधेश्याम, रामनाथ कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे।

नौतनवां में देर रात डिवाइडर से टकराई कार,चारो पहिया ऊपर

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा)। नौतनवां में रविवार रात एक तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकराकर पलट गई, जिससे चारों चक्के ऊपर हो गए। हादसा ओवरस्पीड और सड़क पर पड़े कंक्रीट के टुकड़े से टकराने के कारण हुआ। कार में सवार तीनों युवक सुरक्षित हैं और उन्हें हल्की चोटें आई हैं।
प्राप्त समाचार के अनुसार नौतनवां कस्बे में रविवार की रात एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। सोनौली से गोरखपुर की ओर जा रही एक तेज रफ्तार कार डिवाइडर से टकरा कर पलट गई, जिससे कुछ देर के लिए इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
इस हादसे में कार के चारों चक्के ऊपर हो गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि वाहन में सवार तीनों युवक सुरक्षित बाहर निकल आए। यह दुर्घटना रविवार रात करीब 8:40 बजे नौतनवां के व्हाइट हाउस के सामने हुई। हुंडई कार सोनौली से गोरखपुर की ओर जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कार की रफ्तार काफी तेज थी। अचानक सड़क पर पड़े कंक्रीट के टुकड़े से टकराने के बाद चालक ने नियंत्रण खो दिया और कार सीधे डिवाइडर से जा टकराई। डिवाइडर से टकराने के बाद कार कई बार पलटी खाते हुए सड़क पर उलट गई। टक्कर की आवाज सुनकर आस-पास के लोग मौके पर पहुंच गए। हादसे के बाद कुछ समय के लिए सड़क पर यातायात बाधित हो गया। कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसका अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।
दुर्घटना के समय कार में तीन युवक सवार थे। आशीष श्रीवास्तव, निवासी विकास नगर विस्तार, गोरखनाथ, गोरखपुर, दूसरा युवक रितेश कुमार निवासी जटेपुर उत्तरी, थाना गोरखनाथ, गोरखपुर और अमित कुमार, निवासी तुर्कमानपुर यादव टोला, थाना राजघाट, गोरखपुर शामिल थे। हादसे में तीनों को हल्की चोटें आईं, लेकिन किसी को गंभीर नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों और राहगीरों की मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
घटना की सूचना मिलते ही नौतनवां पुलिस स्थानीय प्रशासन मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने क्षतिग्रस्त वाहन को सड़क से हटवाया और यातायात को सामान्य कराया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मौके पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था बनी हुई है।
यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और सड़क पर बिखरी निर्माण सामग्री की गंभीर समस्या को उजागर करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर पड़े कंक्रीट और मलबे के कारण पहले भी दुर्घटनाएं हो चुकी है।

T20 World Cup 2026: भारत-पाक मैच से पहले बड़ा ड्रामा, पाक सरकार ने बहिष्कार का किया ऐलान

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T20 World Cup 2026: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 7 फरवरी से होना है और टूर्नामेंट शुरू होने में अब महज 5 दिन बाकी हैं। लेकिन इससे पहले ही पाकिस्तान की ओर से एक बड़ा राजनीतिक और क्रिकेट ड्रामा सामने आ गया है। रविवार को पाकिस्तान की शहबाज सरकार ने ऐलान किया कि उनकी टीम 15 फरवरी को भारत के खिलाफ होने वाले मुकाबले का बहिष्कार करेगी।

हालांकि, अब तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने इस फैसले की आधिकारिक जानकारी इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) को नहीं दी है। ऐसे में अगर पाकिस्तान अपने फैसले पर अड़ा रहता है और भारत के खिलाफ मैच खेलने नहीं उतरता है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

क्या ICC पाकिस्तान पर एक्शन ले सकता है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब तक पीसीबी औपचारिक रूप से आईसीसी को भारत से मैच नहीं खेलने की सूचना नहीं देता, तब तक आईसीसी कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। लेकिन जैसे ही आधिकारिक जानकारी दी जाएगी, आईसीसी के पास कार्रवाई का अधिकार होगा।

रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान को टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बाहर तक किया जा सकता है। इसके अलावा, आईसीसी पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) में विदेशी खिलाड़ियों को मिलने वाले NOC पर भी रोक लगा सकती है, जिससे पाकिस्तान क्रिकेट को बड़ा झटका लग सकता है।

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पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार क्यों किया?

पाकिस्तान के इस फैसले के पीछे बांग्लादेश फैक्टर को अहम वजह माना जा रहा है। इससे पहले बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा नहीं लेने का ऐलान किया था। वजह यह थी कि आईसीसी ने तय कार्यक्रम जारी होने के बाद उनके मैच भारत के बाहर शिफ्ट करने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद पाकिस्तान के खिलाड़ियों और पीसीबी चीफ मोहसिन नकवी ने आईसीसी की आलोचना की थी और टूर्नामेंट के बहिष्कार के संकेत दिए थे। माना जा रहा है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश के साथ अपने राजनीतिक संबंध मजबूत रखने के लिए भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार कर रहा है।

सेमीफाइनल या फाइनल पर क्या होगा?

फिलहाल पाकिस्तान सरकार ने सिर्फ 15 फरवरी को होने वाले भारत-पाकिस्तान मैच के बहिष्कार की बात कही है। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगर सेमीफाइनल या फाइनल में पाकिस्तान का मुकाबला भारत से होता है, तो टीम खेलेगी या नहीं।

इस मुद्दे पर न तो पाकिस्तान सरकार और न ही पीसीबी की ओर से कोई आधिकारिक स्थिति साफ की गई है, जिससे आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ सकता है।

टी20 वर्ल्ड कप से पहले बढ़ी अनिश्चितता

भारत-पाकिस्तान मुकाबला हमेशा से टी20 वर्ल्ड कप का सबसे हाई-वोल्टेज मैच माना जाता है। ऐसे में पाकिस्तान के बहिष्कार के ऐलान ने टूर्नामेंट से पहले ही आईसीसी और क्रिकेट फैंस की चिंता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पीसीबी कब आईसीसी को आधिकारिक जानकारी देता है और इस पूरे मामले में अगला कदम क्या होगा।

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Higher Tax On Cigarettes: बजट 2026 के बाद सिगरेट पीना पड़ेगा भारी, कीमतों में बड़ा उछाल

अगर आप सिगरेट पीते हैं, तो अब पैकेट पर लिखी चेतावनी सिर्फ सेहत तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह आपकी जेब पर भी सीधा असर डालने लगी है। 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026 में जिन उत्पादों पर सबसे बड़ा झटका दिया गया है, उनमें सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद शामिल हैं। सरकार द्वारा टैक्स बढ़ाए जाने के बाद बाजार में सिगरेट की कीमतों में तेज इजाफा देखने को मिल रहा है।

पॉकेट जलाएगी सिगरेट

नई टैक्स दरों के लागू होने के बाद सिगरेट पीना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा महंगा हो गया है। जिन ब्रांड्स की सिगरेट पहले 10 रुपये में आसानी से मिल जाती थी, उनकी कीमत अब बढ़कर कम से कम 20 से 25 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, प्रीमियम सिगरेट ब्रांड्स की कीमतों में इससे भी ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

करीब सात साल बाद सिगरेट पर इतनी बड़ी टैक्स बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। धूम्रपान की आदत अब न सिर्फ सेहत के लिए नुकसानदेह है, बल्कि खर्च के लिहाज से भी भारी साबित हो रही है।

सरकार ने क्यों बढ़ाया तंबाकू पर टैक्स

सरकार का कहना है कि तंबाकू उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैक्स को वैश्विक स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप लाना जरूरी था। इसके साथ ही सरकार का उद्देश्य लोगों को स्मोकिंग से हतोत्साहित करना भी है, ताकि तंबाकू के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके।

बजट 2026 में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए एक नया टैक्स सिस्टम पेश किया गया है। यह व्यवस्था जीएसटी कम्पनसेशन सिस्टम की जगह लेगी, जिसे जुलाई 2017 में लागू किया गया था। नए टैक्स ढांचे के तहत तंबाकू उत्पादों पर ज्यादा प्रभावी कर लगाया जाएगा।

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संसद से पहले ही मिल चुकी थी मंजूरी

दरअसल, दिसंबर में संसद ने इस नए टैक्स सिस्टम का रास्ता साफ कर दिया था। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अधिक टैक्स लगाने को मंजूरी मिलने के बाद बजट 2026 के जरिए इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया गया है।

इस फैसले का असर अब बाजार में साफ दिखाई दे रहा है, जहां कंपनियां अपनी कीमतों में संशोधन कर रही हैं। यह कदम सरकार की स्वास्थ्य नीति और राजस्व बढ़ाने की रणनीति—दोनों को दर्शाता है।

कितनी हो सकती है सिगरेट की कीमत

नई व्यवस्था के बाद 76 एमएम सिगरेट की कीमत प्रति पैक 50 से 55 रुपये तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम कीमत संबंधित ब्रांड और कंपनी द्वारा तय की गई रिवाइज्ड दरों पर निर्भर करेगी। अलग-अलग कंपनियों की कीमतों में थोड़ा-बहुत अंतर देखने को मिल सकता है।

स्मोकर्स के लिए बढ़ी चिंता

बजट 2026 के बाद सिगरेट पर बढ़े टैक्स ने स्मोकर्स की चिंता बढ़ा दी है। कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी से न केवल सिगरेट की बिक्री प्रभावित हो सकती है, बल्कि यह सरकार के स्मोकिंग कम करने के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम भी माना जा रहा है।

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मतदाता सूची संशोधन पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव ने फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल का लगाया आरोप

लखनऊ/कन्नौज (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने फॉर्म-7 के कथित गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्र के साथ बड़ा धोखा बताया है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि जिन लोगों पर गैर-कानूनी तरीके से वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन करने का आरोप है, उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

1 फरवरी और 2 फरवरी 2026 को जारी अपने बयानों में अखिलेश यादव ने दावा किया कि PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं को निशाना बनाकर फर्जी दस्तखतों के साथ फॉर्म-7 के आवेदन जमा किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से संदिग्ध है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

न्यायिक संज्ञान और कानूनी कार्रवाई की मांग

अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले में न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वोटरों के नाम गलत तरीके से हटाने की साजिश में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए। सपा प्रमुख ने मतदाताओं से अपील की कि वे अपनी वोटर लिस्ट में नाम जरूर वेरिफाई करें, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी समय रहते पकड़ी जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कहा कि यदि कहीं भी संदिग्ध तरीके से फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की कोशिश हो रही है, तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए।

यूपी एसआईआर के आंकड़े क्या संकेत देते हैं?

इन आरोपों के बीच 6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक के फॉर्म-7 जमा होने के दिन-वार आंकड़े सामने आए हैं, जो आवेदन की संख्या में अचानक हुई तेज बढ़ोतरी की ओर इशारा करते हैं।

आंकड़ों के अनुसार, 6, 7 और 8 जनवरी को एक भी फॉर्म दर्ज नहीं हुआ। 9 जनवरी को 175 आवेदन जमा हुए, जबकि 10 जनवरी को कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। 11 जनवरी को अचानक 2,236 नए आवेदन आए, जिससे इस प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे। इसके बाद 12 जनवरी को 677, 13 जनवरी को 734, 14 जनवरी को 736, 15 जनवरी को 889 और 16 जनवरी को 906 आवेदन दर्ज किए गए।

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महीने के दूसरे हिस्से में तेज हुई रफ्तार

जनवरी के दूसरे पखवाड़े में फॉर्म-7 के आवेदनों की संख्या और तेजी से बढ़ी। 17 जनवरी को 1,970 आवेदन जमा हुए, जबकि 18 जनवरी को यह संख्या बढ़कर 3,865 तक पहुंच गई। इसके बाद लगातार ऊंचे आंकड़े दर्ज किए गए—19 जनवरी को 2,674, 20 जनवरी को 2,670, 21 जनवरी को 2,848, 22 जनवरी को 2,787 और 23 जनवरी को 2,318 आवेदन सामने आए।

24 जनवरी को 2,861, 25 जनवरी को 2,797 और 26 जनवरी को 2,947 फॉर्म-7 जमा हुए। महीने के आखिरी दिनों में आवेदन की संख्या में और उछाल देखने को मिला। 27 जनवरी को 3,317, 28 जनवरी को 3,424, 29 जनवरी को 3,551 और 30 जनवरी को 4,288 आवेदन दर्ज किए गए। 31 जनवरी को एक ही दिन में 8,503 आवेदन जमा हुए, जो पूरे महीने का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा। 31 जनवरी तक कुल 57,173 फॉर्म-7 आवेदन जमा हो चुके थे।

क्या है फॉर्म-7?

फॉर्म-7 भारत के चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया एक आधिकारिक आवेदन पत्र है। इसका इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या वोटर लिस्ट में शामिल किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। यह फॉर्म तब भरा जाता है जब यह माना जाता है कि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं होना चाहिए।

ऐसी स्थिति तब हो सकती है जब मतदाता की मृत्यु हो चुकी हो, वह स्थायी रूप से किसी अन्य स्थान पर चला गया हो, उसका नाम दो बार दर्ज हो, या वह किसी अन्य कारण से मतदाता के रूप में पंजीकरण के योग्य न हो। इसके अलावा कोई मतदाता स्वयं भी अपना नाम वोटर लिस्ट से हटवाने के लिए फॉर्म-7 का उपयोग कर सकता है।

राजनीतिक हलचल तेज

फॉर्म-7 के बढ़ते आवेदनों और अखिलेश यादव के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर उठे सवाल आने वाले समय में सियासी बहस का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।

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लोकसभा हंगामा: राहुल गांधी के बिना छपी किताब के जिक्र पर सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति

नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। लोकसभा के बजट सत्र में सोमवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सदन में एक ऐसी पुस्तक का हवाला दिया, जो अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है। राहुल गांधी द्वारा पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की आत्मकथा से कथित बयान पढ़े जाने पर सत्ता पक्ष ने तीखी आपत्ति जताई। इस दौरान केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू एक साथ अपनी सीटों से खड़े हो गए और राहुल गांधी को रोकने की कोशिश की।

सदन में शोर-शराबे के कारण कुछ समय के लिए कार्यवाही बाधित हो गई। सरकार की ओर से कहा गया कि राहुल गांधी संसद के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और बिना प्रकाशित पुस्तक का संदर्भ देकर सदन को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है।

डोकलाम बयान को लेकर बढ़ा विवाद

अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाए और उसकी देशभक्ति पर सवाल खड़े किए। इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की आत्मकथा का हवाला देना शुरू किया। राहुल गांधी का कहना था कि उस किताब में देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम बातें लिखी गई हैं, जिनसे यह समझा जा सकता है कि असली देशभक्ति क्या है।

राहुल गांधी ने कहा कि किताब में उल्लेख है कि चीनी टैंक भारतीय पोजीशन के बेहद करीब, कैलाश रेंज से कुछ सौ मीटर की दूरी पर मौजूद थे। हालांकि, जैसे ही उन्होंने यह बात पढ़नी शुरू की, सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेता खड़े होकर विरोध जताने लगे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आपत्ति

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में इस तरह के किसी भी विषय का उल्लेख नहीं किया गया था। राजनाथ सिंह ने साफ तौर पर कहा कि राहुल गांधी जिस पुस्तक का हवाला दे रहे हैं, वह अभी तक प्रकाशित ही नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि संसद में किसी ऐसी किताब को पढ़ना या उसका संदर्भ देना नियमों के खिलाफ है, जो छपी ही नहीं है। राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी के रेफरेंस को गलत बताते हुए कहा कि इससे सदन की गरिमा को ठेस पहुंचती है।

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अमित शाह और किरेन रिजिजू ने भी जताई नाराजगी

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, वह प्रकाशित हुई है या नहीं। अमित शाह ने कहा कि बिना छपी किताब का संसद में हवाला देना स्वीकार्य नहीं है।

वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी को टोकते हुए कहा कि वह सदन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। रिजिजू ने कहा कि संसद नियमों से चलती है और यहां किसी भी ऐसी सामग्री को पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जो आधिकारिक रूप से प्रकाशित न हो।

सरकार की आपत्ति का मुख्य कारण

राहुल गांधी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब में लिखी बातों का ही उल्लेख कर रहे हैं, जिसमें प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के बारे में भी जिक्र है। इस पर राजनाथ सिंह ने दोहराया कि वह किताब प्रकाशित नहीं हुई है।

सरकार की ओर से सबसे बड़ी आपत्ति यही जताई गई कि एक बिना छपी पुस्तक को संसद में पढ़ना या उसका हवाला देना संसदीय परंपराओं और नियमों के खिलाफ है। राजनाथ सिंह ने कहा कि जनरल नरवणे की किताब में कुछ तर्क गलत पाए गए थे, इसी वजह से उसे प्रकाशित नहीं होने दिया गया। अब राहुल गांधी उसी अप्रमाणित सामग्री को सदन में पढ़ रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।

सदन में जारी रहा हंगामा

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मंत्रियों के विरोध के बाद सदन का माहौल गर्म हो गया और कुछ समय के लिए कार्यवाही प्रभावित हुई। मामला बिना प्रकाशित पुस्तक के संदर्भ और संसदीय नियमों के उल्लंघन तक सीमित रहा, जिस पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया।

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आत्मविश्वास व परोपकार

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• डॉ. कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’

दर्पण का काम ही है सबको सबकी
सूरत दिखाना चाहे अच्छी हो या नहीं,
कितना निरपेक्ष है दर्पण का सिद्धांत,
कितना लाजवाब है दर्पण का किरदार।

दर्पण स्वागत तो सभी का करता है,
परंतु किसी का संचित नहीं करता है,
टूटकर बिखर भी जाये तो भी जितने
चेहरे सामने हों सबकी सूरत दिखाता है।

जिस तरह से वृक्षों पर फल आने
से वे झुकते हैं यानी विनम्र बनते हैं,
पानी से भरे बादल आकाश से नीचे
ही आते हैं, अच्छे लोग ऐसे ही होते हैं।

वह समृद्धि से घमण्डी नहीं बनते हैं,
आत्मविश्वास व परोपकारी का रूप
धारण करके संसार का भला करते हैं,
सदाचारियों के स्वभाव ऐसे ही होते हैं।

आत्मविश्वास जीवन का सबसे
सुदृढ़ व खूबसूरत गुण होता है,
जो सुबह से लेकर पूरे दिन तक
जीवन खूबसूरत बनाये रखता है।

इसी आत्मविश्वास से चाणक्य ने
स्वयं राजा न बन श्री चंद्रगुप्तमौर्य
को मगध का सम्राट बनाया था,
व राजकाज का संचालन कराया था।

क्योंकि एक राजा सामाजिक व
पारिवारिक जीवन वाला सम्पन्न,
समृद्धिशाली व्यक्ति होना चाहिए,
जिसे सभी के दुःख सुख की समझ हो।

ऐसा ही व्यक्ति प्रजा के साथ उचित व
सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार कर सकता है,
सन्यासी जीवन व्यतीत करने वाला
सांसारिकता तो समझ नहीं सकता है।

जिस राजा की पत्नी व संतान ही न हों,
भाई, बहन व परिवार के सदस्य ही न हों,
आदित्य परिवार व अपने राज्य की प्रजा
का दुःख दर्द कैसे समझ सकता है।

युवती की ट्रेन से कटकर संदिग्ध मौत, 20 अप्रैल को होनी थी शादी

मोतीराम अड्डा रेलवे पुल के पास मिला शव, जांच में जुटी पुलिस

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के खोराबार क्षेत्र में शनिवार को एक युवती की ट्रेन से कटकर संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना से इलाके में सनसनी फैल गई, जबकि मृतका के परिजनों में कोहराम मच गया है। बताया जा रहा है कि युवती की शादी आगामी 20 अप्रैल को तय थी और घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं।

शनिवार अपराह्न करीब तीन बजे मोतीराम अड्डा रेलवे लाइन पर धोबीघाट के सामने स्थित रेलवे पुल के पास एक युवती का शव पड़ा होने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही डायल-112 पुलिस, झंगहा थाना अध्यक्ष अनूप सिंह, मोतीराम अड्डा चौकी प्रभारी गोपी कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। रेलवे पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और आवश्यक जांच-पड़ताल शुरू की।

मृतका की हुई पहचान

पुलिस द्वारा की गई पहचान में मृतका का नाम अंकिता चौधरी (24) पुत्री राजेश चौधरी बताया गया है। वह झंगहा थाना क्षेत्र के शिवपुर कुर्मियान टोला की रहने वाली थी। परिजनों के अनुसार अंकिता छह बहनों में सबसे बड़ी थी और उसकी शादी 20 अप्रैल को तय थी। शादी की तैयारियों के बीच हुई इस घटना से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।

संदिग्ध हालात में मिली लाश

युवती का शव रेलवे पुल के पास ट्रैक के किनारे मिला, जिससे प्रथम दृष्टया मामला ट्रेन से कटने का प्रतीत हो रहा है। हालांकि, युवती की मौत आत्महत्या है, दुर्घटना है या किसी अन्य कारण से हुई है, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है।

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पुलिस जांच में जुटी

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। मोतीराम अड्डा चौकी प्रभारी गोपी कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही युवती की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

परिवार में मातम

घटना के बाद से मृतका के घर में मातम पसरा हुआ है। शादी की खुशियों के बीच अचानक हुई इस घटना से परिजन सदमे में हैं और रो-रोकर उनका बुरा हाल है। स्थानीय लोगों में भी घटना को लेकर चर्चा बनी हुई है।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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डीडीयूजीयू–शिनावात्रा यूनिवर्सिटी के बीच पाँच वर्षीय अंतरराष्ट्रीय करार

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गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) ने अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए थाईलैंड की शिनावात्रा यूनिवर्सिटी के साथ पाँच वर्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारत और थाईलैंड के बीच शैक्षणिक सहयोग, संयुक्त शोध तथा वैश्विक शैक्षिक पहलों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत माना जा रहा है।
यह सहयोग कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय की वैश्विक सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक एकीकरण की सोच को आगे बढ़ाता है। भारतीय बौद्धिक परंपरा को समकालीन वैश्विक चुनौतियों से जोड़ने की परिकल्पना इस समझौते में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है।
समझौता ज्ञापन के अंतर्गत छात्र एवं शिक्षक विनिमय कार्यक्रम, विज्ञान, मानविकी और विधि जैसे विषयों में संयुक्त शोध परियोजनाएँ, विशेषीकृत शैक्षणिक पाठ्यक्रमों का विकास तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, संगोष्ठी और कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। परास्नातक छात्रों और शोधार्थियों के मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही शिनावात्रा यूनिवर्सिटी, थाईलैंड में डीडीयूजीयू के लिए शैक्षणिक एवं शोध सुविधा मंच के रूप में कार्य करेगी। संयुक्त ऑनलाइन और ब्लेंडेड लर्निंग कार्यक्रमों के शुभारंभ का भी प्रावधान किया गया है।
यह समझौता गोवा में आयोजित क्यूएस समिट के दौरान डीडीयूजीयू की ओर से कुलपति प्रो. पूनम टंडन द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकार, संयुक्त प्रकाशन, गोपनीयता तथा शासन तंत्र से जुड़े स्पष्ट प्रावधान शामिल हैं, जिससे पारदर्शिता और पारस्परिक लाभ सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि शिनावात्रा यूनिवर्सिटी के साथ यह साझेदारी विश्वविद्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव, वैश्विक शोध नेटवर्क तक पहुँच तथा नवाचार, कौशल विकास और उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे। यह सहयोग विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक पहचान को सशक्त करने के साथ-साथ सामाजिक रूप से प्रासंगिक और मूल्य-आधारित शिक्षा को भी बढ़ावा देगा।
यह अंतरराष्ट्रीय समझौता उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डीडीयूजीयू की दूरदर्शी सोच, अकादमिक उत्कृष्टता और वैश्विक मंच पर सशक्त उपस्थिति को दर्शाता है। भविष्य में यह साझेदारी वित्तपोषित शोध, नवाचार, ज्ञान-विनिमय और सांस्कृतिक सहयोग को नई गति प्रदान करेगी।

सुबह 5 बजे से सड़क पर उतरी देवरिया पुलिस, अपराधियों में मचा हड़कंप

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देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद देवरिया में कानून व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन द्वारा एक सराहनीय पहल की गई। पुलिस अधीक्षक देवरिया श्री संजीव सुमन के निर्देशन में रविवार दिनांक 02 फरवरी 2026 को प्रातः 05:00 बजे से 08:00 बजे तक देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान पूरे जनपद में प्रभावी रूप से चलाया गया।
इस विशेष अभियान के तहत जनपद के सभी थाना प्रभारी एवं थानाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रूप से सड़क पर उतरे और सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकलने वाले नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया। पुलिस अधिकारियों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, बल्कि आमजन की समस्याओं को भी गंभीरता से सुना और मौके पर ही कई छोटे विवादों का समाधान सामुदायिक स्तर पर कराया। सुरक्षा और विश्वास बढ़ाने की दिशा में अहम पहल
देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान का मुख्य उद्देश्य पुलिस और जनता के बीच विश्वास की दूरी को कम करना रहा। मित्र पुलिसिंग की भावना को मजबूत करने के लिए पुलिसकर्मियों ने सहज, सकारात्मक और सहयोगात्मक व्यवहार अपनाया। नागरिकों को यह भरोसा दिलाया गया कि पुलिस हर समय उनकी सुरक्षा के लिए तत्पर है।
अभियान के दौरान पार्कों, कॉलोनियों, मुख्य मार्गों, चौराहों और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई। सुबह के समय सक्रिय रहने वाले संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन चेकिंग की गई, जिससे अपराध पर अंकुश लगाने में मदद मिल सके संदिग्धों और यातायात नियमों पर सख्त कार्रवाई
चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई और वाहनों की तलाशी ली गई। इस दौरान चोरी की गाड़ियों की पहचान, तीन सवारी चलने वाले दोपहिया वाहनों के खिलाफ कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों का चालान तथा नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर विशेष सख्ती बरती गई।
इसके अतिरिक्त अवैध असलहा, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य विधि विरुद्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी गई। पुलिस की इस सतर्कता से अपराधियों में भय और आमजन में सुरक्षा का एहसास स्पष्ट रूप से देखने को मिला।
आमजन से सीधा संवाद, मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया
देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस ने आम नागरिकों को इस अभियान के उद्देश्य और लाभों की जानकारी दी। लोगों ने पुलिस के इस प्रयास की खुले दिल से सराहना की और कहा कि सुबह के समय पुलिस की मौजूदगी से उन्हें सुरक्षित महसूस होता है।
मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने पुलिस प्रशासन के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह के अभियान नियमित रूप से चलाए जाने चाहिए ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण बना रहे।आंकड़ों में अभियान की सफलता
इस व्यापक चेकिंग अभियान के दौरान जनपद देवरिया के कुल 23 स्थानों पर चेकिंग की गई।
अभियान में 382 व्यक्तियों और 231 वाहनों की गहन जांच की गई, जो इस बात का प्रमाण है कि पुलिस प्रशासन ने इस अभियान को कितनी गंभीरता और प्रभावशीलता के साथ अंजाम दिया पुलिस प्रशासन की स्पष्ट मंशा
जनपदीय पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के अभियानों का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि समाज में शांति, सुरक्षा और विश्वास की भावना को और अधिक मजबूत करना है। पुलिस प्रशासन भविष्य में भी देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान जैसे प्रयासों को निरंतर जारी रखेगा।
पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में चलाया गया यह अभियान निश्चित रूप से जनपद में अपराध नियंत्रण और बेहतर पुलिस-जन संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

महराजगंज क्यों रह गया विकास की दौड़ में पीछे

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कैलाश सिंह

महराजगंज(राष्ट्र की परम्परा )। प्रदेश और देश विकास के नए प्रतिमान गढ़ने की बातें कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी, एक्सप्रेस-वे, औद्योगिक कॉरिडोर और डिजिटल सुविधाओं की चर्चा हर मंच पर होती है, लेकिन इसी विकास की दौड़ में महराजगंज आज भी हाशिये पर खड़ा दिखाई देता है। सवाल यह नहीं है कि योजनाएं नहीं आईं, सवाल यह है कि योजनाएं जमीन तक क्यों नहीं पहुंचीं।
महराजगंज प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि और मेहनतकश आबादी से समृद्ध जनपद है। सीमावर्ती होने के कारण व्यापार और पर्यटन की अपार संभावनाएं भी यहां मौजूद हैं, लेकिन इन संभावनाओं को दिशा देने वाला दृढ़ नेतृत्व और प्रभावी क्रियान्वयन तंत्र अब तक विकसित नहीं हो पाया।
सबसे बड़ी समस्या योजनाओं का अधूरा क्रियान्वयन है। सड़कें बनती हैं तो कुछ ही महीनों में उखड़ जाती हैं, नालियां कागजों में साफ हो जाती हैं, लेकिन बरसात में सड़कों पर पानी भर जाता है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकारी दावों और जमीनी सच्चाई के बीच गहरी खाई दिखाई देती है। प्राथमिक विद्यालयों में संसाधनों की कमी और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों का अभाव आम समस्या बन चुका है।
दूसरा बड़ा कारण राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है। चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जीत के बाद वही मुद्दे ठंडे बस्ते में चले जाते हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय का अभाव भी विकास को गति नहीं दे पाया। योजनाएं आती हैं, फाइलें चलती हैं, लेकिन जवाबदेही तय नहीं होती।
इसके साथ ही भ्रष्टाचार और लापरवाही ने विकास की रफ्तार को और धीमा किया है। सीमित बजट का सही उपयोग न होना, गुणवत्ता से समझौता और निगरानी तंत्र की कमजोरी जनता के विश्वास को लगातार कमजोर कर रही है।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि युवाओं के लिए रोजगार के अवसर न के बराबर हैं। परिणामस्वरूप जिले का युवा वर्ग पलायन को मजबूर है। जो ऊर्जा, जो प्रतिभा महराजगंज के विकास में लगनी चाहिए थी, वह बाहर के शहरों की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है।
अब समय आ गया है कि महराजगंज को केवल आँकड़ों में नहीं, नीतियों और प्राथमिकताओं में भी स्थान दिया जाए। विकास का मतलब केवल इमारतें और सड़कें नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मान जनक जीवन है। इसके लिए प्रशासनिक पारदर्शिता, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और जनता की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
यदि अब भी विकास को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए गए, तो महराजगंज यूँ ही विकास की दौड़ में पीछे छूटता रहेगा। सवाल यह नहीं है कि महराजगंज में क्या कमी है, सवाल यह है कि उसे उसका हक़ कब मिलेगा?

सिगरा में एक ही छत के नीचे मिलेगी पार्किंग, होटल और बाजार की सुविधा

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। शहर की यातायात और व्यावसायिक सुविधाओं को नया आयाम देने की दिशा में नगर निगम ने बड़ी पहल की है। सिगरा क्षेत्र में 74.52 करोड़ रुपये की लागत से मल्टीलेवल अंडरग्राउंड पार्किंग, होटल और मार्केट कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना के पूर्ण होने से काशी की शहरी तस्वीर बदलने के साथ-साथ नगर निगम की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सोमवार को महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने सिगरा और सेनपुरा प्रोजेक्ट का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य समय सीमा के भीतर और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि आम जनता को शीघ्र सुविधाओं का लाभ मिल सके।
नगर निगम ने इन दोनों परियोजनाओं के लिए म्युनिसिपल बांड के माध्यम से 50 करोड़ रुपये की धनराशि जुटाई है। सिगरा स्टेडियम के समीप 40.52 करोड़ रुपये की लागत से जी प्लस-6 भवन का निर्माण होगा। 2600 वर्ग मीटर में फैली इस इमारत में अंडरग्राउंड पार्किंग की सुविधा होगी, जहां 56 कारों और 22 दोपहिया वाहनों के खड़े होने की व्यवस्था रहेगी। इससे निगम को लगभग 65 लाख रुपये प्रतिमाह आय होने का अनुमान है।
वहीं कबीरचौरा रोड स्थित पशु चिकित्सालय परिसर की ढाई एकड़ भूमि पर 34 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक जी प्लस-2 कामर्शियल हब विकसित किया जाएगा। इस परियोजना से नगर निगम को लगभग 35 लाख रुपये प्रतिमाह आय होने की संभावना है। दोनों परियोजनाओं से प्रतिमाह एक करोड़ रुपये से अधिक की आय होगी, जिससे लगभग 50 महीनों में बांड की पूरी राशि वसूल हो सकेगी।
नगर निगम इन कॉम्प्लेक्सों की दुकानों को 30 वर्षों की लीज पर देने की योजना बना रहा है, जिसमें समय-समय पर किराया वृद्धि का प्रावधान भी रहेगा। अनुमान है कि सात वर्षों में निगम को कुल 84 करोड़ रुपये से अधिक की आय होगी।
इसके साथ ही सिगरा स्थित शहीद उद्यान पार्क का भी कायाकल्प किया जा रहा है। 748.93 लाख रुपये की लागत से इस पार्क का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है, जिसे 30 जून 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।