Tuesday, May 5, 2026
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कैंसर को चुनौती देता साहस: समाज के लिए प्रेरणा बने कर्नल मिश्रा दंपत्ति

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कैंसर दिवस पर विशेष रिपोर्ट | नवनीत मिश्र

देश में हर साल लाखों लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं, लेकिन चिकित्सकों और कैंसर से जूझ चुके लोगों का एक स्पष्ट संदेश है—समय पर जांच और सही इलाज से कैंसर लाइलाज नहीं है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 10 से 12 लाख नए कैंसर मरीज सामने आते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसे मामलों की होती है जहां बीमारी का पता शुरुआती चरण में नहीं चल पाता।

विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के लगभग 50 प्रकार होते हैं। महिलाओं में स्तन और गर्भाशय कैंसर के मामले अधिक सामने आ रहे हैं, जबकि पुरुषों में प्रोस्टेट, मुंह, दांत और मस्तिष्क से जुड़े कैंसर ज्यादा पाए जा रहे हैं। कई मामलों में कैंसर वंशानुगत भी होता है, इसलिए जिन परिवारों में इसका इतिहास रहा है, वहां नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

चिकित्सकों का कहना है कि यदि किसी महिला की मां या बहन को कैंसर हो चुका हो, तो समय-समय पर जांच कराना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। बीमारी की शुरुआती अवस्था में इलाज अपेक्षाकृत सरल होता है, जबकि दूसरी और तीसरी अवस्था में पहुंचने पर उपचार लंबा और जटिल हो जाता है।

इलाज से संभव है सामान्य जीवन

कैंसर के उपचार में कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी, सर्जरी, हार्मोनल थेरेपी और आधुनिक दवाओं की अहम भूमिका होती है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर और सही इलाज मिलने पर मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। साथ ही तंबाकू, शराब, पान मसाला और गुटखा जैसे नशीले पदार्थों को कैंसर का प्रमुख कारण बताते हुए इनसे दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

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कर्नल मिश्रा दंपत्ति बने प्रेरणा

कैंसर से लड़ाई की एक मजबूत और प्रेरणादायक मिसाल सेना के सेवानिवृत्त कर्नल डॉ. आदि शंकर मिश्र “आदित्य” और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पद्मा मिश्रा हैं। डॉ. मिश्र वर्ष 2007 में कैंसर से पीड़ित हुए थे, जबकि उनकी पत्नी 2014 में इस बीमारी से जूझीं। इलाज के बाद दोनों ने सामान्य जीवन की ओर वापसी की।

वर्तमान में 77 वर्षीय डॉ. मिश्र पिछले 20 महीनों से पुनः प्रोस्टेट कैंसर का इलाज करवा रहे हैं, वहीं 75 वर्षीय उनकी पत्नी दूसरी बार ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं। इसके बावजूद दोनों अपनी सामान्य दिनचर्या निभा रहे हैं और समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि कैंसर से डरने की नहीं, बल्कि समय रहते इलाज कराने की जरूरत है।

कर्नल मिश्रा दंपत्ति फिलहाल प्रदेश की राजधानी लखनऊ में निवास कर रहे हैं और वहीं रहकर इलाज के साथ-साथ कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने का कार्य भी कर रहे हैं।

हौसला सबसे बड़ी दवा

एक बातचीत में डॉ. मिश्र ने बताया कि इलाज के दौरान शारीरिक कष्ट और आर्थिक बोझ जरूर होता है, लेकिन हौसला और सकारात्मक सोच बीमारी से लड़ने की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने समाज और सरकार से कैंसर के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, समय पर जांच को बढ़ावा देने और सुलभ इलाज व्यवस्था को मजबूत करने की अपील की।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जागरूकता बढ़े, लोग समय पर जांच कराएं और सही उपचार मिले, तो कैंसर के कारण होने वाली असमय मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है। कर्नल मिश्रा दंपत्ति की संघर्षगाथा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि साहस, विश्वास और इलाज से कैंसर को भी मात दी जा सकती है।

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स्मार्ट मीटर परियोजना में वेतन संकट: दो माह से भुगतान नहीं, कर्मचारियों में आक्रोश

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।बलिया स्मार्ट मीटर परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य कर रही जीएमआर कंपनी पर कर्मचारियों ने दो महीने से वेतन बकाया रखने का गंभीर आरोप लगाया है। लगातार आश्वासन मिलने के बावजूद भुगतान न होने से कर्मचारी आक्रोशित हैं और परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। यह मामला अब केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठने लगे हैं।
बलिया स्मार्ट मीटर परियोजना के तहत साउथ इंडियन ज़ोन से जुड़ी टीम द्वारा घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर इंस्टॉलेशन का काम किया जा रहा है। परियोजना में तकनीकी और फील्ड कर्मचारियों की बड़ी संख्या तैनात है। कर्मचारियों का कहना है कि दिन-रात मेहनत के बावजूद वेतन समय पर नहीं मिल रहा, जिससे रोज़मर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक प्रभावित हो रहे हैं। कई कर्मचारियों को मजबूरी में उधार लेना पड़ रहा है।
कर्मचारियों के अनुसार वेतन भुगतान को लेकर रितिक राय, संदीप, अवनीश राय और अभिषेक राय सहित जिम्मेदार अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया। हर बार “जल्द भुगतान” का भरोसा मिला, लेकिन ज़मीनी हकीकत नहीं बदली। आदित्य कुमार, अमित कुमार यादव, अमित तिवारी और ईश्वर यादव समेत लगभग 200 कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।

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काम रोकने की बात पर दबाव और धमकी का आरोप
कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि जब उन्होंने वेतन बकाया को लेकर काम रोकने की बात कही, तो उन पर कार्य जारी रखने का दबाव बनाया गया। विरोध करने पर नौकरी से हटाने की धमकी तक दी गई। इस पूरे मामले पर कंपनी प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे कर्मचारियों की नाराज़गी और बढ़ गई है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सरकारी महत्व की बलिया स्मार्ट मीटर परियोजना में यदि कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक है। श्रम विभाग और जिला प्रशासन से तत्काल जांच और हस्तक्षेप की मांग उठ रही है। लोगों का सवाल है कि जब परियोजना सुचारु रूप से चल रही है, तो कर्मचारियों का मेहनताना क्यों रोका गया?
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सामूहिक आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। फिलहाल, सबकी निगाहें कंपनी प्रबंधन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस विवाद का समाधान कब तक करते हैं और बकाया वेतन का भुगतान कब होता है।

देवरिया SIR-2026 में फर्जीवाड़े का आरोप, एक पते पर 7 नाम जोड़ने से मचा हड़कंप

देवरिया में SIR-2026 पर बड़ा सवाल: एक ही मकान में 7 फर्जी मतदाता जोड़ने का आरोप, SDM सदर से जांच की मांग

गौरव कुशवाहा

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)देवरिया SIR-2026 फर्जी मतदाता मामला सामने आने के बाद जिले की चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) के तहत प्रकाशित मतदाता सूची में कथित अनियमितता ने प्रशासनिक तंत्र और जमीनी सत्यापन व्यवस्था की विश्वसनीयता को कटघरे में ला खड़ा किया है।
अबूबकर नगर उत्तरी, वार्ड संख्या-32 स्थित मकान संख्या 501 के निवासी अंजूम रहमान ने आरोप लगाया है कि उनके पते पर बिना किसी भौतिक सत्यापन के 7 फर्जी मतदाता जोड़ दिए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वर्ष 2003 की निर्वाचक नामावली में इन नामों का कोई उल्लेख नहीं था, लेकिन देवरिया SIR-2026 की सूची में अचानक इनकी एंट्री दिखाई गई।

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शिकायतकर्ता के अनुसार, SIR-2026 की सूची में उनके मकान को 501 और 501/2 के रूप में दर्शाया गया और उसी पते पर विनोद मद्धेशिया, बिंदू देवी, अशोक कुमार, मंशी देवी, आदित्य सिंह, मीरा सिंह और दुर्गेश कुमार गुप्ता जैसे नाम जोड़ दिए गए। अंजूम रहमान का कहना है कि इन व्यक्तियों से उनका या उनके परिवार का कोई संबंध नहीं है और न ही ये लोग कभी उस मकान में रहते पाए गए।
यह मामला इसलिए भी गंभीर हो जाता है क्योंकि देवरिया SIR-2026 फर्जी मतदाता मामला सीधे तौर पर चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़ा है। मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद मानी जाती है और यदि उसी में गड़बड़ी हो, तो पूरे चुनावी तंत्र की साख पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
अंजूम रहमान ने इस संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी दिव्या मित्तल को लिखित शिकायत सौंपते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी ने SDM सदर को पूरे प्रकरण की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी देखा जाएगा कि सत्यापन प्रक्रिया में किन स्तरों पर लापरवाही या मिलीभगत हुई।
चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सिर्फ एक स्थानीय त्रुटि नहीं बल्कि देवरिया SIR-2026 की प्रक्रिया में संरचनात्मक कमजोरी का संकेत हो सकता है। एक ही पते पर कई फर्जी मतदाताओं का जुड़ना यह दर्शाता है कि बीएलओ स्तर से लेकर उच्च अधिकारियों तक की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है।
फिलहाल, पूरे जिले की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला केवल नाम विलोपन या संशोधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि चुनावी व्यवस्था में भरोसा बहाल करने के लिए प्रशासन कितनी सख्ती दिखाता है। देवरिया SIR-2026 फर्जी मतदाता मामला आने वाले समय में राज्य स्तर पर भी एक बड़ी मिसाल बन सकता है।

एसआईआर विवाद: सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार बनाम प्रक्रिया पर सवाल

एसआईआर मामला: सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, ममता बनर्जी ने सीजेआई के सामने लगाई न्याय की गुहार


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर (Special Investigation Report) मामले को लेकर ज़ोरदार बहस जारी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई हो रही है। इस अहम सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं कोर्ट रूम में मौजूद रहीं, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल वर्चुअल माध्यम से बहस में शामिल हुए।
सुनवाई की शुरुआत राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने की। उन्होंने अदालत में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ पेश करते हुए न्यायाधीशों से उन्हें देखने और ऑनलाइन सार्वजनिक (publish) करने का अनुरोध किया। श्याम दीवान ने दलील दी कि मामले में जिस “तार्किक विसंगति” की बात कही जा रही है, उसका कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

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सुनवाई के दौरान बदली सीट, पहली पंक्ति में बैठीं ममता
शुरुआत में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आगे की पंक्ति में नहीं बैठीं थीं, लेकिन सुनवाई शुरू होने के कुछ समय बाद उन्होंने अपनी सीट बदल ली और पहली पंक्ति में आकर बैठ गईं। यह दृश्य कोर्ट रूम में मौजूद लोगों के लिए खासा ध्यान आकर्षित करने वाला रहा।
32 लाख लोगों की सुनवाई शेष, समयसीमा पर सवाल
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि अंतिम सूची प्रकाशित करने के लिए केवल 11 दिन शेष हैं, जबकि अभी करीब 32 लाख लोगों की सुनवाई बाकी है। दलील दी गई कि यदि चार दिनों में प्रक्रिया पूरी करनी है तो प्रतिदिन लगभग 15 लाख लोगों की सुनवाई करनी होगी, जो व्यावहारिक रूप से कठिन है। कई स्थानों पर लोग चार से पांच घंटे तक लाइन में इंतजार कर रहे हैं, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है।
कपिल सिबल की बहस के बीच मुख्यमंत्री की भावुक अपील
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल की दलील के दौरान ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोलने की कोशिश की। इस पर न्यायाधीशों ने उन्हें बोलने की अनुमति दी। मुख्यमंत्री ने पहले अदालत का धन्यवाद किया और फिर भावुक स्वर में कहा—
“हमें न्याय नहीं मिल रहा है। मैंने राष्ट्रीय चुनाव आयोग को छह बार पत्र लिखा, लेकिन एक बार भी जवाब नहीं मिला।”
उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद को “एक आम आदमी” मानती हैं और शायद उनकी बात को कम महत्व दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने देश की स्थिति की तुलना बेनजीर भुट्टो जैसे हालात से करते हुए न्याय की गुहार लगाई। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने विधिवत मुकदमा दायर किया है और उसकी पैरवी कपिल सिबल कर रहे हैं, इसलिए मामले को कानून के दायरे में ही सुना जाएगा।
7 फरवरी तक चलेगी सुनवाई
अदालत ने संकेत दिए हैं कि एसआईआर मामला सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई 7 फरवरी तक जारी रह सकती है। इस दौरान सभी पक्षों की दलीलें सुनकर कोर्ट आगे का फैसला करेगा।

🔴 सालों से गायब 10 केवीए ट्रांसफार्मर का ढांचा बरामद, पूरा सामान पहले ही चोरी


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत लखिमा में बिजली विभाग की भारी लापरवाही और सुनियोजित चोरी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। करीब एक वर्ष से गायब 10 केवीए ट्रांसफार्मर का केवल खाली ढांचा गांव के तालाब से बरामद हुआ है, जबकि इसके भीतर लगे सभी कीमती उपकरण पहले ही चोरी हो चुके थे। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली उपकरण सुरक्षा की पोल खोल दी है।
तालाब का जल स्तर कम होने के बाद सुबह टहलने निकले ग्रामीणों की नजर पानी में पड़ी भारी लोहे की संरचना पर पड़ी। नजदीक जाकर देखने पर पता चला कि यह वही 10 केवीए ट्रांसफार्मर है, जो पिछले साल रहस्यमय तरीके से पोल से गायब हो गया था। ग्रामीणों ने तुरंत बिजली विभाग को सूचना दी, जिसके बाद विभागीय कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर ट्रांसफार्मर को तालाब से बाहर निकलवाया।

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विद्युत विभाग के अवर अभियंता जुगनू अंसारी ने बताया कि ट्रांसफार्मर के गायब होने की सूचना करीब एक वर्ष पहले मिली थी। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि ट्रांसफार्मर चोरी एक सुनियोजित योजना के तहत की गई। पहले ट्रांसफार्मर को तालाब में छिपाया गया और फिर समय-समय पर उसके भीतर लगे कॉपर कॉयल, ऑयल और अन्य कीमती पुर्जे निकालकर बाजार में बेच दिए गए। फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की बात कही जा रही है।
इस घटना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जब 10 केवीए ट्रांसफार्मर पोल से गायब हुआ था, तब न तो लाइनमैन ने गंभीरता दिखाई और न ही संबंधित जेई या उच्च अधिकारियों ने इसकी खोजबीन कराई। यदि समय रहते जांच होती, तो लाखों रुपये के बिजली उपकरण चोरी होने से बचाए जा सकते थे।

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एक वर्ष तक ट्रांसफार्मर का कोई सुराग न मिलना, बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग की लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण ऐसे अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। इस घटना के बाद क्षेत्र में बिजली ट्रांसफार्मर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में ट्रांसफार्मरों की नियमित निगरानी, जीपीएस टैगिंग और समय-समय पर भौतिक सत्यापन न होने के कारण ट्रांसफार्मर चोरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यदि विभाग समय रहते सख्त कदम नहीं उठाता, तो आने वाले समय में बिजली आपूर्ति और राजस्व दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पुलिस का मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान, सुबह-सुबह सुरक्षा का भरोसा और सख्त कार्रवाई

देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)जनपद देवरिया में शांति व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में देवरिया पुलिस मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान एक प्रभावी पहल के रूप में सामने आया है। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में सुबह 5 बजे से 8 बजे तक जिलेभर में विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य आमजन के साथ सीधा संवाद स्थापित कर सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करना रहा।देवरिया पुलिस मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के दौरान सभी थाना प्रभारी एवं थानाध्यक्ष अपने-अपने क्षेत्रों में मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से मिले, उनकी समस्याएं सुनीं और पुलिस की तत्परता का भरोसा दिलाया। मित्र पुलिसिंग की भावना को बढ़ावा देते हुए छोटे-मोटे विवादों का मौके पर समाधान भी किया गया, जिससे जनता में सकारात्मक संदेश गया।

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अभियान के तहत संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन जांच की गई। देवरिया पुलिस मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के दौरान चोरी की गाड़ियों की धरपकड़, तीन सवारी चलने वालों पर कार्रवाई, मॉडिफाइड साइलेंसर वाले दुपहिया वाहनों का चालान, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर सख्ती तथा अवैध असलहा व मादक पदार्थों के खिलाफ निगरानी रखी गई।पुलिस द्वारा चलाए गए इस अभियान की आम नागरिकों ने सराहना की और सुबह के समय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर संतोष जताया। जनपदीय पुलिस ने स्पष्ट किया कि देवरिया पुलिस मॉर्निंग वॉकर चेकिंग अभियान जैसे प्रयास लगातार जारी रहेंगे ताकि अपराध पर अंकुश लगे और कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे।इस विशेष अभियान के अंतर्गत जनपद के कुल 19 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 433 व्यक्तियों और 215 वाहनों की जांच की गई।

पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 30 लीटर अंग्रेजी शराब के साथ तीन तस्कर गिरफ्तार

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)जनपद देवरिया में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार असर दिखा रहा है। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन प्रहार” के तहत थाना भाटपाररानी पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने रेलवे स्टेशन भाटपाररानी के पास से तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में अंग्रेजी शराब बरामद की है।अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह के निर्देशन एवं क्षेत्राधिकारी भाटपाररानी अंशुमान श्रीवास्तव के पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार राय के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ लोग अवैध शराब लेकर बिक्री के उद्देश्य से रेलवे स्टेशन क्षेत्र में मौजूद हैं।

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सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दो पुरुष अभियुक्त और एक महिला अभियुक्त को मौके से गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनिल कुमार निवासी मोतिहारी (बिहार), मुन्ना कुमार एवं पार्वती निवासी समस्तीपुर (बिहार) के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान तीन झोलों से कुल 167 पैक अंग्रेजी शराब बरामद की गई, जिसमें ऑफिसर च्वाइस और आफ्टर डार्क ब्लू ब्रांड शामिल हैं। जब्त शराब की कुल मात्रा लगभग 30 लीटर बताई गई है।पुलिस ने बरामद शराब को कब्जे में लेकर थाना भाटपाररानी में मु0अ0सं0 0021/2026 धारा 60 आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध शराब तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी सख्ती से जारी रहेगा।

हल्की बारिश से किसानों के चेहरे खिले, रबी फसलों को मिली राहत

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले में मंगलवार को मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिला। सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और दोपहर बाद तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हुई, जिससे किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई।
इस बारिश को गेहूं, चना, सरसों समेत रबी फसलों के लिए लाभकारी माना जा रहा है। किसानों का कहना है कि बूंदाबांदी से खेतों में नमी बढ़ी है, जिससे फसलों की बढ़वार बेहतर होगी और सिंचाई की आवश्यकता भी कम पड़ेगी।

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मौसम में आए बदलाव से जिले में ठंडक बढ़ गई। हालांकि तेज हवाओं के कारण कुछ स्थानों पर फसलों को हल्का नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई, लेकिन अधिकांश किसानों ने इसे फसलों के लिए संजीवनी बताया।

ड्यूटी के दौरान गार्ड की संदिग्ध मौत से हड़कंप, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद महराजगंज के निचलौल थाना क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य के दौरान तैनात एक गार्ड की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। ड्यूटी के दौरान गार्ड की संदिग्ध मौत की यह घटना ग्राम कनमिसवा के पास सामने आई, जहां गार्ड अचानक अचेत अवस्था में पाया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान सूरज सिंह (45 वर्ष) पुत्र उमाशंकर सिंह, निवासी ग्राम ठठवली, थाना गगहा, जनपद गोरखपुर के रूप में हुई है। सूरज सिंह निचलौल क्षेत्र में चल रहे सड़क निर्माण कार्य में बतौर गार्ड तैनात था। मंगलवार को ड्यूटी के दौरान अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। साथ काम कर रहे कर्मचारियों ने तत्काल उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

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घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। वहीं ड्यूटी के दौरान गार्ड की संदिग्ध मौत की जानकारी मिलते ही निचलौल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। प्रारंभिक जांच में मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो सके हैं, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस संबंध में थानाध्यक्ष अखिलेश वर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया किसी ठोस कारण की पुष्टि नहीं हो पाई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। निर्माण स्थल पर मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है और ड्यूटी से जुड़ी परिस्थितियों की भी समीक्षा की जा रही है।

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घटना के बाद निर्माण स्थल पर कार्यरत कर्मचारियों में भय और चर्चा का माहौल है। सुरक्षा व्यवस्था, कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सुविधाएं और ड्यूटी के दौरान निगरानी जैसे मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण जैसे कार्यों में लंबे समय तक ड्यूटी और तनावपूर्ण माहौल में काम करने वाले कर्मियों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच आवश्यक है।

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गौरतलब है कि महराजगंज में गार्ड की संदिग्ध मौत का यह मामला प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के लिए भी एक चेतावनी है। जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट मिलते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अन्य कारण सामने आते हैं तो नियमानुसार कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, पूरे मामले पर सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे ड्यूटी के दौरान गार्ड की संदिग्ध मौत के पीछे का सच सामने आ सके।

ऐतिहासिक धर्मसिंहवा बौद्ध स्तूप मार्ग को मिलेगा नया स्वरूप, ‘गौरव पथ’ के रूप में होगा विकसित

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के नगर पंचायत धर्मसिंहवा में स्थित ऐतिहासिक बौद्ध स्तूप तक पहुंचने वाले मार्ग को आकर्षक और सुविधायुक्त बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर पंचायत प्रशासन ने मार्ग के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलते ही इस मार्ग का कायाकल्प किया जाएगा, जिससे इलाके में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की संभावना बढ़ेगी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रशासन की योजना के तहत धर्मसिंहवा बौद्ध स्तूप मार्ग को अब ‘गौरव पथ’ के रूप में विकसित किया जाएगा। मार्ग के दोनों किनारों पर स्ट्रीट लाइटें, इंटरलॉकिंग सड़क, पाथवे सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य बौद्ध स्तूप पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर आवागमन और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
धर्मसिंहवा का बौद्ध स्तूप ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से क्षेत्र की अमूल्य धरोहर माना जाता है। पूर्व में यहां सौंदर्यीकरण कार्य कराया गया था, लेकिन नियमित देखरेख न होने के कारण विकास कार्य रुक गया। करीब दो वर्ष पूर्व पर्यटन विभाग की ओर से पुनः सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव बनाया गया था, जो अब तक लंबित है।

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स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि धर्मसिंहवा क्षेत्र बौद्ध परंपरा से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण स्थल है। प्राचीन काल में यहां बौद्ध भिक्षुओं का आगमन होता था और यह स्थान ‘धम्मसिंहवा’ नाम से भी प्रसिद्ध रहा है। बौद्ध स्तूप क्षेत्र की पहचान का प्रमुख प्रतीक है, लेकिन संरक्षण की कमी के चलते इसकी ऐतिहासिक महत्ता धीरे-धीरे उपेक्षा का शिकार हो रही है।

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नगर पंचायत द्वारा वर्ष 2022 के बाद क्षेत्र में सड़कों, नालियों, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया गया, लेकिन बौद्ध स्तूप और उससे जुड़े मार्ग को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल पाई। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि इस मार्ग का सौंदर्यीकरण किया जाए और बौद्ध स्तूप को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान मिले, तो रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और क्षेत्र की पहचान और मजबूत होगी।
प्रशासन को उम्मीद है कि शासन से जल्द ही प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाएगी। इसके बाद धर्मसिंहवा बौद्ध स्तूप मार्ग का विकास कार्य शुरू होगा, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति मिलेगी।

अलाव संग ग्राम सुरक्षा समिति की बैठकें, साइबर जागरूकता पर दिया जोर


संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीणों को आधुनिक अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में सभी थानों द्वारा ग्राम स्तर पर अलाव के साथ ग्राम सुरक्षा समिति की बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता देखने को मिली, जहां साइबर जागरूकता को लेकर विशेष रूप से चर्चा की गई।
बैठकों के दौरान पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि आज के डिजिटल युग में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया हैकिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों से बचने के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। ग्रामीणों को किसी भी अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करने की सख्त सलाह दी गई।

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ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत सीसीटीवी लगाने की अपील
बैठकों में ऑपरेशन त्रिनेत्र अभियान के महत्व को विस्तार से समझाया गया। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने घरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर अधिक से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगवाएं। अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे न केवल अपराधों की रोकथाम में सहायक होते हैं, बल्कि किसी घटना के बाद अपराधियों की पहचान और अनावरण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीणों को यह भी समझाया गया कि सीसीटीवी फुटेज समय पर उपलब्ध होने से पुलिस की कार्रवाई तेज और प्रभावी होती है।

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आपसी सहयोग और सतर्कता पर जोर
ग्राम सुरक्षा समिति की बैठकों में पुलिस ने आपसी सहयोग, सामुदायिक सहभागिता और सतर्कता को सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत बताया। ग्रामीणों से कहा गया कि गांव में किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अजनबी व्यक्ति या असामान्य घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
इसके साथ ही डिजिटल भुगतान करते समय सुरक्षित ऐप्स का उपयोग, मजबूत पासवर्ड रखने और समय-समय पर पासवर्ड बदलने की भी सलाह दी गई।

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ग्रामीणों में दिखा सकारात्मक उत्साह
अलाव के बीच हुई इन बैठकों ने न केवल ठंड के मौसम में संवाद को सहज बनाया, बल्कि पुलिस और ग्रामीणों के बीच विश्वास भी मजबूत किया। ग्रामीणों ने साइबर सुरक्षा और सीसीटीवी से जुड़ी जानकारियों को उपयोगी बताया और भविष्य में सहयोग का भरोसा दिलाया।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ग्राम सुरक्षा समिति बैठकें और साइबर जागरूकता अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे, ताकि अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और सुरक्षित समाज का निर्माण किया जा सके।


स्कूलों में खसरा-रूबेला टीका: अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारी


देवरिया में एमआर टीकाकरण अभियान 2026: 16 फरवरी से स्कूलों में बच्चों को लगेगा खसरा-रूबेला टीका


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद देवरिया में बच्चों को खसरा और रूबेला जैसी गंभीर संक्रामक बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए एमआर टीकाकरण अभियान 2026 की व्यापक तैयारी पूरी कर ली गई है। स्वास्थ्य विभाग के नेतृत्व में यह विशेष अभियान 16 फरवरी से 27 फरवरी 2026 तक चलाया जाएगा। अभियान के तहत कक्षा 1 से 5वीं तक पढ़ने वाले सरकारी, निजी विद्यालयों और मदरसों में अध्ययनरत 5 से 10 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को एमआर (Measles-Rubella) टीके की अतिरिक्त खुराक दी जाएगी, भले ही पहले टीकाकरण हो चुका हो।

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इस संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भलुनी के सभागार में ब्लॉक टास्क फोर्स की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एस. के. सिन्हा ने की। बैठक में अभियान की रणनीति, माइक्रो-प्लान और विभागीय समन्वय पर विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. सिन्हा ने स्पष्ट किया कि एक भी पात्र बच्चा एमआर टीकाकरण से वंचित न रहे, इसके लिए सभी विभागों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।

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अतिरिक्त डोज क्यों जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खसरा और रूबेला बच्चों के लिए अत्यंत घातक हो सकते हैं। कई बार पहली डोज के बाद पर्याप्त प्रतिरक्षा नहीं बन पाती, ऐसे में एमआर टीके की अतिरिक्त खुराक रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है। यह अभियान पूरी तरह सुरक्षित, वैज्ञानिक और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सिफारिशों के अनुरूप है।

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माइक्रो-प्लान और विद्यालय स्तर की तैयारी
अभियान की सफलता के लिए प्रत्येक विद्यालय और मदरसे का अलग-अलग माइक्रो-प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें टीकाकरण सत्रों की संख्या, टीम, समय और स्थान स्पष्ट होंगे। टीकाकरण से 1–2 दिन पहले विद्यालय प्रशासन, डॉक्टर, शिक्षा विभाग, आईसीडीएस और सहयोगी विभागों के साथ पूर्व बैठक अनिवार्य होगी, ताकि अभिभावकों की शंकाएं दूर हों और टीकाकरण के दिन कोई अव्यवस्था न रहे।

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अभिभावकों से सहयोग की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें, बच्चों को निर्धारित तिथि पर विद्यालय भेजें और विद्यालय द्वारा दी गई सूचना का पालन करें। एमआर टीका सुरक्षित है और इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

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विभागीय समन्वय से सफल होगा अभियान
बैठक में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. शम्भू प्रसाद, एआरओ राकेश चंद्र, बीपीएम विशाल प्रताप सिंह, बीसीपीएम बांसवीर, सीफार व जेएसआई के जिला प्रतिनिधि, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग तथा एएनएम उपस्थित रहीं। सभी को निर्देश दिए गए कि आपसी समन्वय से कार्य कर शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करें।
एमआर टीकाकरण अभियान 2026 खसरा-रूबेला मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में अहम कदम है। समय पर टीकाकरण से बाल मृत्यु दर में कमी, बच्चों का बेहतर विकास और स्वस्थ समाज का निर्माण संभव है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है—देवरिया का हर बच्चा सुरक्षित।

14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत, एक ही दिन में सुलझेंगे सैकड़ों मामले

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)।न्याय प्रक्रिया को सरल, सुलभ और त्वरित बनाने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मऊ द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत मऊ का आयोजन 14 मार्च 2026 (शनिवार) को किया जा रहा है। यह लोक अदालत मऊ माननीय जनपद न्यायाधीश, मऊ के निर्देशन में दीवानी न्यायालय मऊ परिसर में प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक आयोजित होगी। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों को वर्षों से लंबित मामलों से राहत दिलाना और आपसी सुलह से विवादों का स्थायी समाधान करना है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव साक्षी सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत मऊ के माध्यम से जनसामान्य को त्वरित न्याय मिलेगा। लोक अदालत मऊ में निस्तारण आपसी सहमति के आधार पर होता है, जिससे समय और धन—दोनों की बचत होती है। खास बात यह है कि यहां निस्तारित मामलों में कोई अदालत शुल्क नहीं लिया जाता, और पहले से जमा शुल्क भी नियमानुसार वापस किया जाता है।

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आपसी सुलह से स्थायी समाधान
राष्ट्रीय लोक अदालत मऊ की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि विवादों का निपटारा सौहार्दपूर्ण समझौते से किया जाता है। इससे लंबी न्यायिक प्रक्रिया से बचाव होता है और पक्षकारों के बीच रिश्ते भी सुरक्षित रहते हैं। यही कारण है कि लोक अदालत मऊ आम नागरिकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है।

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इन प्रमुख मामलों का होगा निस्तारण
लोक अदालत मऊ में सुलह योग्य आपराधिक मामलों सहित अनेक प्रकार के वाद शामिल किए जाएंगे, जैसे—
मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, धारा 138 (पराकम्य लिखित अधिनियम) के मामले, पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद, दीवानी वाद, मेड़बंदी/दाखिल-खारिज/चकबंदी, पंजीयन एवं स्टाम्प, धारा 446 दंड प्रक्रिया संहिता, पब्लिक प्रीमाइसेज एक्ट, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, भूमि अधिग्रहण, बैंक वसूली व ऋण विवाद, किरायेदारी विवाद आदि।

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चालान और राजस्व मामलों का भी समाधान
राष्ट्रीय लोक अदालत मऊ में विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत लंबित चालान और राजस्व प्रकरण भी निस्तारित होंगे—
मोटरयान अधिनियम (RTO), पुलिस अधिनियम, वन अधिनियम, आबकारी अधिनियम, नगर निगम/नगर पालिका, विकास प्राधिकरण, मनोरंजन कर, बाट एवं माप, उत्तर प्रदेश दुकान एवं वाणिज्य अधिनियम, चलचित्र अधिनियम, गैम्बलिंग एक्ट, मोबाइल व केबल नेटवर्क से संबंधित अंतिम आख्या। साथ ही प्री-लिटिगेशन और मध्यस्थता (Arbitration) योग्य मामलों का निपटारा विशेष लोक अदालत के जरिए किया जाएगा।

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जनसामान्य के लिए बड़ा लाभ
लोक अदालत मऊ से वर्षों से लंबित मामलों का त्वरित समाधान, न्यायालयीन खर्च से मुक्ति, सौहार्दपूर्ण समझौते से विवादों का अंत और न्याय प्रणाली में विश्वास—ये सभी लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंचते हैं।
पक्षकारों से अपील
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी वादकारियों, अधिवक्ताओं और विभागों से अपील की है कि वे अपने मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत मऊ में सूचीबद्ध कराकर इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं।

2.5 करोड़ की Range Rover: बिहार CM की Z+ सुरक्षा के लिए नई तैयारी

पटना (राष्ट्र की परम्परा )बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द ही देश की सबसे सुरक्षित और हाईटेक Range Rover बुलेटप्रूफ SUV में सफर करते नजर आएंगे। सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार ने लगभग 2.5 करोड़ रुपये कीमत की Range Rover खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पहली बार होगा जब मुख्यमंत्री Range Rover जैसी लग्जरी और हाई-एंड SUV का उपयोग करेंगे, जिसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में खास चर्चा है।

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सुरक्षा जरूरतों के तहत बड़ा फैसला
फिलहाल CM Nitish Kumar पटना में Hyundai Ioniq 5 से यात्रा करते हैं, जबकि पटना से बाहर जाने पर वे Tata Safari बुलेटप्रूफ गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं। बदलते सुरक्षा परिदृश्य और वीवीआईपी प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए अब Range Rover बुलेटप्रूफ SUV को काफिले में शामिल किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला पूरी तरह से सुरक्षा आकलन पर आधारित है।

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चार गाड़ियों का होगा विशेष काफिला
सूत्रों की मानें तो CM Nitish Kumar convoy में एक या दो नहीं, बल्कि चार Range Rover गाड़ियां शामिल होंगी। इससे रूट मूवमेंट, बैकअप और आपात स्थितियों में सुरक्षा कवच और मजबूत होगा। प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था मुख्यमंत्री की Z+ श्रेणी सुरक्षा के अनुरूप की जा रही है।
क्यों खास है Range Rover बुलेटप्रूफ SUV
Range Rover दुनिया की सबसे सुरक्षित SUVs में गिनी जाती है। इसकी बुलेटप्रूफ बॉडी, रन-फ्लैट टायर्स, ब्लास्ट रेसिस्टेंट स्ट्रक्चर और एडवांस सर्विलांस फीचर्स इसे वीवीआईपी मूवमेंट के लिए आदर्श बनाते हैं। यही वजह है कि देश-विदेश के कई बड़े नेता और शीर्ष अधिकारी Range Rover security vehicle का इस्तेमाल करते हैं।

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सादगी से लग्जरी तक का सफर
अब तक CM Nitish Kumar अपनी सादगी के लिए पहचाने जाते रहे हैं और सामान्य गाड़ियों में सफर करते दिखे हैं। ऐसे में Range Rover जैसी लग्जरी SUV का चयन खास माना जा रहा है। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी लग्जरी प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा मजबूती के उद्देश्य से उठाया गया है।
जल्द सड़कों पर दिखेगी नई Range Rover
जानकारी के मुताबिक, Range Rover खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही मुख्यमंत्री नई गाड़ी से यात्रा करते नजर आएंगे। इसके साथ ही Bihar CM security upgrade को लेकर राज्य सरकार की तैयारी भी साफ झलकती है।

डीएम निरीक्षण के बाद तेज हुई भगौतीपुर ट्रामा सेंटर की तैयारी

औरैया भगौतीपुर ट्रामा सेंटर जल्द होगा शुरू, डीएम के निर्देश से ग्रामीणों को बड़ी राहत



औरैया (राष्ट्र की परम्परा)ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने की दिशा में जिला प्रशासन औरैया ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने ग्राम भगौतीपुर (भाऊपुर) में बने औरैया भगौतीपुर ट्रामा सेंटर का स्थलीय निरीक्षण कर इसके शीघ्र संचालन के स्पष्ट निर्देश दिए। ट्रामा सेंटर शुरू होने से आसपास के दर्जनों गांवों के नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होगी, जिससे समय पर इलाज संभव हो सकेगा।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्साधिकारी सुरेंद्र कुमार को निर्देशित किया कि ट्रामा सेंटर भवन व परिसर में साफ-सफाई सुनिश्चित करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हों।

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भवन, उपकरण और फर्नीचर की समीक्षा
जिलाधिकारी ने ट्रामा सेंटर में उपलब्ध संसाधनों की विस्तृत समीक्षा की। सीएमओ ने बताया कि ट्रामा सेंटर के लिए बेड व फर्नीचर उपलब्ध हैं। चिकित्सालय में मौजूद अतिरिक्त एक्स-रे मशीन को यहां स्थापित किया जा सकता है और उसके संचालन के लिए तकनीशियन की तैनाती भी संभव है। इस पर डीएम ने निर्देश दिए कि उपलब्ध संसाधनों का तुरंत उपयोग कर औरैया भगौतीपुर ट्रामा सेंटर को प्रारंभ किया जाए, ताकि किसी तरह की देरी न हो।

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बिजली आपूर्ति और स्टाफ पर विशेष निर्देश
निरीक्षण में यह बात सामने आई कि ट्रामा सेंटर की बिजली आपूर्ति ग्रामीण फीडर से जुड़ी होने के कारण निर्बाध नहीं है। साथ ही फार्मासिस्ट व अन्य आवश्यक स्टाफ की कमी भी है। डीएम ने निर्देश दिए कि इनवर्टर, जनरेटर या सोलर पावर प्लांट के लिए प्रस्ताव तैयार कर बजट आवंटन हेतु शासन को भेजा जाए। इससे 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

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सुरक्षा और एंबुलेंस व्यवस्था होगी मजबूत
डीएम ने मरीजों व कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और स्थायी एंबुलेंस व्यवस्था के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थान रेफर करने में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। औरैया भगौतीपुर ट्रामा सेंटर को पूर्णतः कार्यशील और जनता के लिए उपयोगी बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

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ग्रामीणों को मिलेगा सीधा लाभ
ट्रामा सेंटर के चालू होने से सड़क दुर्घटनाओं, आकस्मिक चोटों और आपात स्थितियों में तत्काल उपचार संभव होगा। जिला या मंडलीय अस्पताल जाने में लगने वाला कीमती समय बचेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। हाईवे और व्यस्त मार्गों से जुड़े क्षेत्रों के लिए यह केंद्र जीवनरक्षक सिद्ध होगा।

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अन्य योजनाओं की भी समीक्षा
ट्रामा सेंटर निरीक्षण से पहले डीएम ने ग्राम पंचायत नसीराबाद के कॉमन सर्विस सेंटर और ग्राम पंचायत बखरिया के ग्राम सचिवालय का निरीक्षण किया। उन्होंने फार्मर रजिस्ट्री और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए पारदर्शिता के साथ कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
प्रशासनिक सक्रियता को देखते हुए उम्मीद है कि आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी होते ही औरैया भगौतीपुर ट्रामा सेंटर का संचालन शीघ्र शुरू होगा, जिससे जिले के ग्रामीण इलाकों को बड़ी राहत मिलेगी।