Tuesday, May 5, 2026
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लोक अदालत महराजगंज: वर्षों पुराने मामलों को मिलेगा अंतिम निस्तारण

14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत की बड़ी चौपाल, महराजगंज में हजारों मामलों के निस्तारण का सुनहरा अवसर


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद न्यायालय परिसर, महराजगंज में 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश एवं जनपद न्यायाधीश के आदेशानुसार किया जा रहा है। राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य आमजन को त्वरित, सुलभ और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है, ताकि वर्षों से लंबित वादों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव हो सके।
राष्ट्रीय लोक अदालत महराजगंज: बिना देरी, बिना खर्च समाधान
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, महराजगंज के सचिव सुनील कुमार नागर ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में वादों का निस्तारण किया जाएगा। इसमें आपराधिक शमनीय वाद, धारा-138 (चेक बाउंस) से जुड़े मामले, बैंक वसूली प्रकरण, मोटर वाहन अधिनियम (एम.वी. एक्ट) के चालान, मोटर दुर्घटना प्रतिकर याचिकाएं, पारिवारिक विवाद, श्रम वाद, भूमि अधिग्रहण, विद्युत एवं जल बिल विवाद (चोरी सहित), सेवा संबंधी वेतन विवाद व सेवानिवृत्ति लाभ, स्टाम्प, राजस्व एवं चकबंदी वाद, किराया, सुखाधिकार, अन्य सिविल वाद तथा प्री-लिटिगेशन मामले शामिल हैं।

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समझौते से स्थायी समाधान
राष्ट्रीय लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां मामलों का निस्तारण आपसी सहमति से होता है। इससे समय और धन—दोनों की बचत होती है। समझौते के आधार पर निस्तारित मामलों में अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे वादकारियों को स्थायी और अंतिम समाधान मिलता है। यही कारण है कि राष्ट्रीय लोक अदालत को आमजन के लिए न्याय का सबसे भरोसेमंद मंच माना जाता है।

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सभी न्यायालयों में लोक अदालत की पीठ
इस अवसर पर जनपद के समस्त पीठासीन अधिकारी अपने-अपने न्यायालयों में लोक अदालत की पीठ के रूप में बैठेंगे। लंबित मामलों के साथ-साथ पूर्व-वाद (प्री-लिटिगेशन) मामलों का भी निस्तारण किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक नागरिक राष्ट्रीय लोक अदालत महराजगंज का लाभ उठाएं और वर्षों से चल रहे विवादों से राहत पाएं।
क्यों आएं राष्ट्रीय लोक अदालत में?
त्वरित न्याय और सौहार्दपूर्ण समाधान
न्यूनतम खर्च, अधिकतम राहत
अपील से मुक्ति, स्थायी निस्तारण
विशेषज्ञों की मौजूदगी में समझौता
आमजन के लिए सरल और सशक्त मंच
राष्ट्रीय लोक अदालत वास्तव में वह मंच है जहां विवाद नहीं, समाधान होता है। 14 मार्च को महराजगंज न्यायालय परिसर में आयोजित इस बड़ी चौपाल में पहुंचकर नागरिक अपने मामलों का सरल और स्थायी समाधान पा सकते हैं।

जनस्वास्थ्य से खिलवाड़: श्यामदेउरवां–भिटौली में नियमों की अनदेखी

एनएच रोड बना कत्लखाना: श्यामदेउरवां–भिटौली क्षेत्र में खुलेआम मुर्गा-बकरी कटान, कानून व्यवस्था पर सवाल


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय राजमार्ग (NH रोड) पर कानून व्यवस्था की स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही है। थाना श्यामदेउरवां और भिटौली क्षेत्र के अंतर्गत एनएच रोड के किनारे खुलेआम मुर्गों और बकरियों की कटान की जा रही है। यह अवैध गतिविधि न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रही है, बल्कि जनस्वास्थ्य, स्वच्छता और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह से देर शाम तक हाईवे किनारे जानवरों का वध किया जा रहा है। कटान के बाद खून, अवशेष और गंदगी सड़क पर फैल जाती है, जिससे तेज रफ्तार वाहनों के फिसलने और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। एनएच रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर इस तरह की गतिविधियां कभी भी बड़े हादसे को न्योता दे सकती हैं।

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कानूनी दृष्टि से यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता की धारा 285 (सार्वजनिक मार्ग पर खतरनाक कार्य), धारा 270 (जनस्वास्थ्य को खतरे में डालना), पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। नियमों के अनुसार खुले सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर पशु कटान पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद प्रशासन की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अवैध पशु कटान की शिकायतें कई बार की गईं, लेकिन न तो पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई की और न ही संबंधित विभागों ने सख्ती दिखाई। इसका नतीजा यह है कि अवैध धंधा करने वालों के हौसले बुलंद हैं और कानून की साख कमजोर पड़ती दिख रही है। एनएच रोड पर खुलेआम कटान यह दर्शाता है कि नियमों का डर खत्म होता जा रहा है।

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सबसे गंभीर पहलू जनस्वास्थ्य से जुड़ा है। खुले में मुर्गा-बकरी कटान से संक्रामक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। मांस के अवशेष, खून और गंदगी से न केवल दुर्गंध फैलती है, बल्कि आसपास के इलाकों में महामारी फैलने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। यह स्थिति खासकर बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या थाना श्यामदेउरवां और भिटौली पुलिस इस अवैध कटान से अनजान है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई से परहेज किया जा रहा है। जिला प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से स्थानीय जनता की अपेक्षा है कि वे तत्काल संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें। जब तक एनएच रोड पर कानून का सख्ती से पालन नहीं होगा, तब तक आमजन की सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करना मुश्किल है।

बिहार में सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील गानों पर सख्त रोक, विशेष अभियान शुरू

बच्चों की सुरक्षा के लिए सांस्कृतिक प्रदूषण पर प्रहार

बिहार में महिला सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला: सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील गानों पर सख्त रोक, विशेष अभियान शुरू


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार अश्लील गानों पर रोक को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री सह गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बस, ऑटो, टैक्सी, ट्रेन, रेलवे परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील व दोहरे अर्थ वाले गाने बजाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। इस फैसले के बाद पूरे राज्य में पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है और निगरानी बढ़ा दी गई है।
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सार्वजनिक रूप से बजने वाले अश्लील और द्विअर्थी गीत समाज पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। ऐसे गाने सामाजिक मर्यादा को कमजोर करते हैं और महिला सुरक्षा बिहार की भावना को ठेस पहुंचाते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि यह अब केवल नैतिकता का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है।

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सरकार का मानना है कि इस तरह के गीतों का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ता है। सार्वजनिक स्थलों पर जब छोटे बच्चे ऐसे गाने सुनते हैं, तो उनकी सोच और व्यवहार प्रभावित होते हैं। यह सांस्कृतिक प्रदूषण है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी उद्देश्य से बिहार अश्लील गानों पर रोक को प्रभावी बनाने के लिए जिलों में विशेष निगरानी दल गठित किए गए हैं।
सार्वजनिक परिवहन और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर सख्त निगरानी
गृहमंत्री ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बस स्टैंड, ऑटो स्टैंड, टैक्सी स्टैंड, ट्रेनों, रेलवे परिसरों और बाजारों जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में नियमित जांच करें। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी, जिसमें जुर्माना और जेल की सजा तक का प्रावधान है। महिला सुरक्षा बिहार को मजबूत करने के लिए यह कदम निर्णायक माना जा रहा है।

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सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता अभियान
बिहार पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। पोस्टर्स, वीडियो और संदेशों के जरिए बताया जा रहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील गाने बजाना दंडनीय अपराध है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि बिहार अश्लील गानों पर रोक का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

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महिला और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल प्रशासन की प्राथमिकता
सरकार ने साफ किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। महिला सुरक्षा बिहार के तहत यह फैसला सामाजिक बदलाव की दिशा में अहम माना जा रहा है, जिससे महिलाओं और बच्चों को सम्मानजनक वातावरण मिल सके।

UPSC CSE 2026 नोटिफिकेशन जारी, 933 पदों पर होगी भर्ती, 24 फरवरी तक आवेदन

राष्ट्र की परम्परा जॉब्स डेस्क
संघ लोक सेवा आयोग ने सिविल सेवा परीक्षा 2026 के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही IAS, IPS, IFS समेत विभिन्न सिविल सेवाओं में भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 4 फरवरी 2026 से 24 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।
आयोग की ओर से जारी इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से कुल 933 पदों को भरा जाएगा। इनमें से 33 पद बेंचमार्क दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए गए हैं। आवेदन केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

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मई 2026 में होगी प्रारंभिक परीक्षा
UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2026 की प्रारंभिक परीक्षा मई माह में आयोजित की जाएगी। इसके बाद मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कराई जाएगी।
शैक्षणिक योग्यता
IAS और अन्य सिविल सेवाएं: किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में स्नातक डिग्री आवश्यक
IFS (वन सेवा): कृषि, एनिमल हसबेंडरी, वेटरनरी साइंस, बॉटनी, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, गणित, भौतिकी, सांख्यिकी, जूलॉजी जैसे विषयों में स्नातक डिग्री अनिवार्य आयु सीमा
उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2026 को न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी अभ्यर्थी का जन्म 2 अगस्त 1994 से पहले और 1 अगस्त 2005 के बाद नहीं होना चाहिए। आरक्षित वर्गों को नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी।

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परीक्षा में हुआ बड़ा बदलाव
इस बार UPSC ने परीक्षा प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की पहचान के लिए AI आधारित फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। सभी अभ्यर्थियों के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य होगी।
आवेदन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
आवेदन फॉर्म में नवीनतम और स्पष्ट फोटो अपलोड करें
पुरानी या धुंधली फोटो होने पर परीक्षा केंद्र पर समस्या आ सकती है
परीक्षा केंद्र पर कम से कम एक घंटे पहले पहुंचना अनिवार्य
एडमिट कार्ड और वैध फोटो पहचान पत्र साथ ले जाना जरूरी

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फेस ऑथेंटिकेशन का उद्देश्य
AI फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम का उद्देश्य फर्जी उम्मीदवारों और डमी कैंडिडेट्स पर रोक लगाना है। यह तकनीक पहचान सत्यापन को अधिक तेज, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएगी।
उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि परीक्षा और भर्ती से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल UPSC की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ही भरोसा करें।

45 दिन तक प्लेटफॉर्म बंद, पटना–गया पैसेंजर रद्द, कई ट्रेनें डायवर्ट

गया (राष्ट्र की परम्परा)गया जंक्शन मेगा ब्लॉक के तहत रेलवे ने 5 फरवरी से 21 मार्च 2026 तक कुल 45 दिनों का बड़ा ब्लॉक लिया है। इस दौरान गया जंक्शन के प्लेटफॉर्म संख्या 2 और 3 पूरी तरह बंद रहेंगे। जंक्शन के पुनर्विकास और आधुनिकीकरण कार्य की वजह से पटना–गया रेलखंड पर चलने वाली ट्रेनों पर सीधा और व्यापक असर पड़ा है। सबसे अधिक परेशानी दैनिक यात्रियों को हो रही है, जो पैसेंजर और मेमू ट्रेनों पर निर्भर रहते हैं।
पूर्व मध्य रेलवे (पूमरे) के अनुसार, ट्रेन संख्या 53213/53214 पटना–गया–पटना पैसेंजर को पूरे ब्लॉक अवधि के लिए रद्द कर दिया गया है। इसके अलावा कई ट्रेनों के समय, मार्ग और समापन स्टेशनों में बदलाव किया गया है। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि सफर से पहले NTES ऐप पर लाइव ट्रेन स्टेटस जरूर जांच लें।

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लंबी दूरी की ट्रेनों पर भी असर
गया जंक्शन मेगा ब्लॉक का प्रभाव सिर्फ लोकल ट्रेनों तक सीमित नहीं है।
पटना से धनबाद जाने वाली प्रसिद्ध गंगा दामोदर एक्सप्रेस अब अपने नियमित मार्ग के बजाय फतुहा–इस्लामपुर–नटेसर–तिलैया होते हुए चलेगी।
राजगीर–वाराणसी बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस और पटना–भभुआ रोड इंटरसिटी को आरा–सासाराम रूट से डायवर्ट किया गया है।
वहीं पूर्णिया कोर्ट–हटिया कोसी एक्सप्रेस अब बख्तियारपुर से बिहारशरीफ, राजगीर और तिलैया होकर रांची जाएगी।

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MEMU और गरीब रथ में बदलाव
निर्माण कार्य के कारण पटना से गया आने वाली कई MEMU ट्रेनें अब गया जंक्शन तक नहीं जाएंगी। इनका आंशिक समापन चाकंद स्टेशन पर किया जाएगा। चाकंद से गया की दूरी करीब 10 किलोमीटर है, जिसे यात्रियों को सड़क मार्ग से तय करना होगा।
इसके अलावा आनंद विहार–गया गरीब रथ एक्सप्रेस अब पंडित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) जंक्शन तक ही संचालित होगी।

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यात्रियों के लिए राहत और भविष्य की योजना
रेलवे प्रशासन ने बताया है कि गया जंक्शन पर आने वाली अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों को प्लेटफॉर्म संख्या 6 और 7 से चलाया जा रहा है, ताकि यात्रियों को कम से कम असुविधा हो। अधिकारियों का कहना है कि यह परेशानी अस्थायी है।
पुनर्विकास पूरा होने के बाद गया जंक्शन पर आधुनिक प्लेटफॉर्म, बेहतर यात्री सुविधाएं और सुचारु रेल परिचालन मिलेगा। इसी बीच एक सकारात्मक खबर यह भी है कि पटना–हावड़ा जनशताब्दी एक्सप्रेस के आरा तक विस्तार की योजना पर विचार किया जा रहा है, जिससे भोजपुर और बक्सर के यात्रियों को सीधा लाभ मिल सकता है।

एक रात, तीन मौतें: बड़कीपुन्नू गांव में हाथियों का कहर

बोकारो के गोमिया में हाथियों का कहर: महुआटांड़ के बड़कीपुन्नू गांव में तीन बुजुर्गों की दर्दनाक मौत

बोकारो के गोमिया प्रखंड के महुआटांड़ में हाथी हमला, बड़कीपुन्नू गांव में तीन बुजुर्गों की मौत, ग्रामीणों में दहशत, वन विभाग से समाधान की मांग


बोकारो (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)झारखंड के बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया प्रखंड के महुआटांड़ क्षेत्र में हाथी हमला लगातार गंभीर होता जा रहा है। गुरुवार की अहले भोर बड़कीपुन्नू गांव में हाथियों के झुंड ने ऐसा तांडव मचाया कि पूरा इलाका दहशत में डूब गया। इस दर्दनाक घटना में तीन बुजुर्ग ग्रामीणों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल है। एक ही रात में हुई इस त्रासदी से गांव में मातम पसरा है और लोगों में भय व आक्रोश दोनों साफ नजर आ रहे हैं।

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स्थानीय जानकारी के अनुसार, घटना गुरुवार सुबह करीब 3:20 बजे की है। हाथियों का झुंड बड़कीपुन्नू के करमाली टोला में घुस आया। ग्रामीण गहरी नींद में थे। अचानक हाथियों ने घरों पर हमला शुरू कर दिया। गंगा करमाली (65) और उनकी पत्नी कमली देवी (62) अपने घर में सो रहे थे। हाथियों ने पहले मकान को क्षतिग्रस्त किया और फिर गंगा करमाली को पटककर कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पति पर हमले की आवाज सुनकर कमली देवी जान बचाने बाहर निकलीं, लेकिन हाथियों ने उन्हें भी कुचल दिया।
इसी दौरान बगल के घर में रह रहीं भगिया देवी (65) को भी हाथियों ने नहीं बख्शा। हमले में उनकी भी जान चली गई। इस घटना में करमी देवी (50) गंभीर रूप से घायल हो गईं। ग्रामीणों की मदद से उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है।

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महुआटांड़ और आसपास के इलाकों में मानव-हाथी संघर्ष बीते तीन महीनों में जानलेवा रूप ले चुका है। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में हाथी हमले में आठ लोगों की मौत हो चुकी है। इससे पहले नवंबर में तिलैया रेलवे अंडरपास के पास दो युवकों की जान गई थी। इसके अलावा सांझो देवी और सिमराबेड़ा के सब्जी विक्रेता रवींद्र दांगी की मौत ने क्षेत्र में डर और बढ़ा दिया है।
हाथियों के उत्पात से तिरला, होन्हें, कंडेर, बारीडारी, बड़कीपुन्नू, महुआटांड़, टीकाहारा, केंदुआ, चोरगांवां, कुंदा, खखंडा और मुरपा सहित करीब ढाई दर्जन गांव प्रभावित हैं। ग्रामीणों के घर, चहारदीवारी, वाहन और फसलें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं। लोगों का कहना है कि वन विभाग की ओर से अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

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ग्रामीणों ने हाथियों की निगरानी, रेस्क्यू टीम की तैनाती, सोलर फेंसिंग और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। रात होते ही गांवों में सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों से बाहर निकलने से डरने लगे हैं।

5 फरवरी का इतिहास: जानिए भारत और दुनिया की महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ

5 फरवरी का इतिहास विश्व और भारत की कई बड़ी राजनीतिक, सामाजिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक घटनाओं का साक्षी रहा है। आज का इतिहास 5 फरवरी न सिर्फ प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उपयोगी है, बल्कि सामान्य ज्ञान और समसामयिक संदर्भों के लिए भी बेहद महत्त्वपूर्ण माना जाता है। आइए जानते हैं 5 फरवरी की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदली।
5 फरवरी की ऐतिहासिक घटनाएँ (Chronology)
664 – प्रसिद्ध चीनी बौद्ध भिक्षु और यात्री ह्वेन त्सांग का निधन हुआ, जिनकी भारत यात्रा ने बौद्ध इतिहास को नई दृष्टि दी।
1679 – जर्मन शासक लियोपोल्ड प्रथम ने फ्रांस के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
1783 – इटली के कालाब्रिया क्षेत्र में भीषण भूकंप, करीब 30,000 लोगों की मृत्यु।
1870 – अमेरिका के फिलाडेल्फिया में थिएटर में पहली बार चलचित्र का प्रदर्शन किया गया।
1900 – अमेरिका और ब्रिटेन के बीच पनामा नहर से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर।
1904 – क्यूबा, अमेरिका के सैन्य कब्जे से मुक्त हुआ।
1917 – मैक्सिको ने नया संविधान अंगीकृत किया।
1922 – उत्तर प्रदेश के चौरी चौरा कांड में उग्र भीड़ द्वारा थाना जलाए जाने से 22 पुलिसकर्मियों की मृत्यु।
1924 – ग्रीनविच (GMT) समय संकेत का पहला रेडियो प्रसारण।
1931 – मैक्सिने डनलप पहली महिला ग्लाइडर पायलट बनीं।
1961 – ब्रिटेन में संडे टेलीग्राफ अख़बार का पहला संस्करण प्रकाशित।
1970 – अमेरिका ने नेवादा में परमाणु परीक्षण किया।
1994 – सरायेवो नरसंहार, बाजार में मोर्टार बम विस्फोट से 68 लोगों की मौत।
2004 – पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने डॉ. ए.क्यू. ख़ान को माफी दी।
2006 – ईरान ने यूरेनियम संवर्धन शुरू किया।
2007 – भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाली महिला बनीं।
2008 – कंधार विमान अपहरण मामला: तीन आरोपियों को आजीवन कारावास। इसी वर्ष महर्षि महेश योगी का निधन।
2009 – मायावती ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में 5056 करोड़ की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण।
2010 – अभिनव बिंद्रा ने इंटरनेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
2020 – डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया अमेरिकी सीनेट द्वारा खारिज।
क्यों खास है 5 फरवरी?
5 फरवरी का इतिहास राजनीति, विज्ञान, खेल, स्वतंत्रता आंदोलनों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की कई निर्णायक घटनाओं को समेटे हुए है। आज का इतिहास 5 फरवरी जानना छात्रों, शोधकर्ताओं और सामान्य पाठकों—सबके लिए उपयोगी है।

‘सॉरी पापा, आई एम रियली सॉरी’… ऑनलाइन गेम की लत में गाजियाबाद की तीन बहनों ने दी जान

गाजियाबाद (राष्ट्र की परम्परा)। “सॉरी पापा, आई एम रियली सॉरी”—ये शब्द गाजियाबाद की उन तीन मासूम बहनों के सुसाइड नोट में लिखे मिले, जिन्होंने ऑनलाइन गेम की लत के चलते अपनी जिंदगी खत्म कर ली। नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली नाबालिग बहनें निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

यह घटना साहिबाबाद के टीलामोड़ थाना क्षेत्र स्थित भारत सिटी सोसायटी में मंगलवार देर रात करीब दो बजे हुई। पुलिस के अनुसार, तीनों किशोरियां मोबाइल फोन की लत और टास्क आधारित कोरियाई लव गेम से बुरी तरह प्रभावित थीं। फोन छीन लिए जाने से आहत होकर उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाया।

कमरे से मिला आठ पन्नों का सुसाइड नोट

पुलिस को किशोरियों के कमरे से एक पॉकेट डायरी मिली है, जिसमें आठ पन्नों का सुसाइड नोट लिखा हुआ है। नोट में रोती हुई इमोजी भी बनाई गई है। इसमें पिता से माफी मांगते हुए लिखा गया है—“सॉरी पापा, आई एम रियली सॉरी।” इसके साथ ही कोरियाई संस्कृति के प्रति अपने प्रेम और आकर्षण का जिक्र किया गया है।

रोज घंटों खेलती थीं कोरियाई गेम

पिता चेतन कुमार ने पुलिस को बताया कि तीनों बेटियों को मोबाइल फोन की गंभीर लत थी और वे रोज घंटों कोरियाई गेम खेला करती थीं। उन्होंने अपने कोरियाई नाम भी रख लिए थे—मारिया, अलीजा और सिंडी। चेतन के अनुसार, तीन दिन पहले उन्होंने बेटियों से मोबाइल फोन छीन लिए थे, जिसके बाद से वे बेहद परेशान थीं और छिपकर माता-पिता के फोन का इस्तेमाल कर रही थीं।

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दो साल से स्कूल भी नहीं जा रही थीं

पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों किशोरियां टास्क आधारित कोरियाई लव गेम के प्रभाव में थीं और पिछले करीब दो साल से स्कूल भी नहीं जा रही थीं। ऑनलाइन दुनिया में उनकी दिलचस्पी इतनी बढ़ चुकी थी कि वे वास्तविक सामाजिक जीवन से लगभग कट गई थीं।

परिवार की पृष्ठभूमि

चेतन कुमार ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग का काम करते हैं। वह पिछले तीन साल से भारत सिटी सोसायटी में किराये के फ्लैट में रह रहे थे। परिवार में दो पत्नियां—सुजाता और हिना—और कुल पांच बच्चे हैं। आत्महत्या करने वाली निशिका पहली पत्नी सुजाता की बेटी थी, जबकि प्राची और पाखी दूसरी पत्नी हिना की बेटियां थीं।

चेतन की पहली पत्नी सुजाता से लंबे समय तक संतान नहीं हुई थी, जिसके बाद उन्होंने सुजाता की बहन हिना से दूसरी शादी की। कुछ समय बाद सुजाता से निशिका का जन्म हुआ। बाद में पहली पत्नी से एक बेटा लविश (7) भी पैदा हुआ, जो मानसिक रूप से कमजोर है और बोल नहीं पाता।

कमरे की दीवारों पर लिखे थे भावनात्मक स्लोगन

जिस कमरे की खिड़की से तीनों बहनों ने छलांग लगाई, उसकी दीवारों पर “आई एम वेरी वेरी अलोन” और “मेक मी ए हार्ट ऑफ ब्रोकन” जैसे स्लोगन लिखे हुए थे। कमरे के फर्श पर तीनों बहनों की बचपन की तस्वीरें अलग कलाकृति के रूप में रखी थीं और बीच में उनकी मां का मोबाइल फोन भी मिला।

पुलिस जांच जारी

पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। सुसाइड नोट की लिखावट और मोबाइल फोन को फोरेंसिक लैब भेजा गया है। डीसीपी ट्रांस हिंडन निमिष पाटील ने बताया कि शुरुआती जांच में किशोरियों के कोरियाई संस्कृति से प्रभावित होने की बात सामने आई है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

यह घटना इंटरनेट और ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत के खतरों की गंभीर चेतावनी मानी जा रही है, जिसने एक पूरे परिवार को उजाड़ दिया।

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लखनऊ-कानपुर हाईवे पर भीषण हादसा, दंपती समेत 4 की मौत

उन्नाव (राष्ट्र की परम्परा)। लखनऊ-कानपुर हाईवे पर बुधवार रात एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया। सोहरामऊ थाना क्षेत्र के भल्ला फार्म तिराहे के पास रात करीब 11:30 बजे वैवाहिक कार्यक्रम से लौट रहा एक बाइक सवार परिवार तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आ गया। हादसे में पति-पत्नी और उनके दो छोटे बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बड़ी बेटी बाल-बाल बच गई।

जानकारी के अनुसार, अजगैन कोतवाली क्षेत्र के कस्बा निवासी वीरेंद्र (35) पुत्र गुरुचरण बुधवार को अपने परिवार के साथ लखनऊ के बंथरा थाना क्षेत्र के दयालखेड़ा गांव में एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वह देर रात बाइक से पत्नी रीतू (33), बेटी अनुराधा (9) और बेटे रुद्र (6) के साथ घर लौट रहे थे। उनकी बड़ी बेटी नैनसी (15) उनके साढ़ू रंजीत की बाइक पर सवार थी, जो पीछे-पीछे चल रहे थे।

साढ़ू का इंतजार करना पड़ा भारी

बताया जा रहा है कि वीरेंद्र अपनी बाइक से आगे चल रहे थे। भल्ला फार्म तिराहे के पास उन्होंने पीछे आ रहे साढ़ू रंजीत को न देखकर बाइक रोक दी और उसका इंतजार करने लगे। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने आगे चल रहे कंटेनर में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कंटेनर हाईवे पर पलट गया।

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भागने की कोशिश में ट्रक ने कुचला परिवार

कंटेनर से टकराने के बाद ट्रक चालक मौके से भागने की कोशिश करने लगा। इसी दौरान ट्रक अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे खड़े बाइक सवार परिवार को कुचलता चला गया। हादसे में वीरेंद्र, उनकी पत्नी रीतू और दोनों बच्चे अनुराधा व रुद्र की मौके पर ही मौत हो गई। चूंकि बड़ी बेटी नैनसी पीछे से आ रहे साढ़ू रंजीत की बाइक पर थी, इसलिए उसकी जान बच गई।

मौके पर पहुंची पुलिस, शव पोस्टमार्टम को भेजे

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आनन-फानन में चारों शवों को सड़क से हटाकर किनारे कराया। घटना से हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सोहरामऊ थाना प्रभारी अरविंद पांडेय ने बताया कि मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। हादसे में शामिल ट्रक को पुलिस ने कब्जे में ले लिया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

परिवार में मचा कोहराम

एक ही परिवार के चार सदस्यों की अचानक हुई मौत से गांव और रिश्तेदारों में शोक की लहर है। वैवाहिक कार्यक्रम से लौटते समय हुआ यह हादसा पूरे परिवार पर भारी पड़ गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और ट्रक चालक की तलाश जारी है।

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर ट्रंप को रूस का दो टूक जवाब

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर रूसी तेल पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद मॉस्को की ओर से दो टूक प्रतिक्रिया सामने आई है। रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और इसमें कोई नई या असामान्य बात नहीं है। यह बयान बुधवार (4 फरवरी 2026) को क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने दिया।

दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत लंबे समय से अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता रहा है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में यह एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ भी इस तथ्य से अच्छी तरह परिचित हैं, इसलिए इस विषय में किसी तरह का आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

ट्रंप के दावे पर पुतिन के करीबी का जवाब

क्रेमलिन के प्रवक्ता से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर सवाल पूछा गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका के साथ-साथ संभावित रूप से वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पेसकोव ने स्पष्ट किया कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने से जुड़ा अब तक कोई आधिकारिक बयान या सूचना प्राप्त नहीं हुई है।

पेसकोव ने यह भी याद दिलाया कि भारत हमेशा से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए विविध स्रोतों पर निर्भर रहा है। ऐसे में यह मान लेना कि भारत केवल किसी एक देश से तेल खरीदेगा या किसी दूसरे देश के कहने पर अपने ऊर्जा आयात की नीति बदलेगा, वास्तविकता से परे है।

‘रूसी तेल को अमेरिकी तेल से पूरी तरह बदलना संभव नहीं’

इस मुद्दे पर रूस के नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने भी अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। इसके पीछे तकनीकी कारण हैं।

युशकोव के अनुसार, अमेरिका जिस शेल ऑयल का निर्यात करता है, वह हल्की श्रेणी का होता है, जबकि रूस भारत को अपेक्षाकृत भारी और सल्फर युक्त यूराल्स कच्चा तेल सप्लाई करता है। भारतीय रिफाइनरियों का ढांचा इसी तरह के भारी कच्चे तेल को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यदि अमेरिकी तेल का इस्तेमाल किया जाता है, तो उसे अन्य श्रेणी के तेल के साथ मिलाना पड़ेगा, जिससे लागत बढ़ेगी। ऐसे में रूसी तेल को पूरी तरह अमेरिकी तेल से बदलना व्यवहारिक नहीं है।

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‘अमेरिका भारत को मिलने वाली तेल आपूर्ति की भरपाई नहीं कर सकता’

इगोर युशकोव ने यह भी कहा कि रूस आमतौर पर भारत को प्रतिदिन 15 से 20 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है। अमेरिका इतनी बड़ी मात्रा में भारत की तेल जरूरतों की भरपाई करने की स्थिति में नहीं है। उनके मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान अधिकतर राजनीतिक संदेश देने और यह दिखाने की कोशिश हो सकता है कि व्यापार वार्ता में अमेरिका को बढ़त मिली है और समझौता पूरी तरह अमेरिकी मांगों के अनुरूप रहा है।

रूसी विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में फैसले केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं लिए जाते, बल्कि तकनीकी क्षमता, लागत और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।

भारत की ऊर्जा नीति पर रूस का स्पष्ट रुख

क्रेमलिन की इस प्रतिक्रिया से यह साफ हो गया है कि रूस भारत की ऊर्जा नीति को एक संप्रभु निर्णय मानता है। रूस का कहना है कि भारत अपनी जरूरतों और हितों के अनुसार किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। इस पूरे मामले पर रूस ने किसी भी तरह का दबाव या नाराज़गी दिखाने के बजाय इसे सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया बताया है।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर ट्रंप के बयान और उस पर रूस की प्रतिक्रिया ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और कूटनीति में एक बार फिर यह दिखा दिया है कि तेल आपूर्ति केवल राजनीतिक दावों से तय नहीं होती। फिलहाल रूस ने यह साफ कर दिया है कि भारत के फैसले को लेकर उसे कोई नई या असामान्य स्थिति नजर नहीं आती।

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पटना कांड के बाद बिहार में गर्ल्स हॉस्टल के नए नियम लागू

पटना (राष्ट्र की परम्परा)। नीट छात्रा कांड ने बिहार सरकार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद राज्य सरकार की काफी फजीहत हुई, जिसके चलते अब नीतीश सरकार ने छात्राओं और कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सख्त और अहम फैसला लिया है। बिहार भर में संचालित सभी गर्ल्स हॉस्टल और लॉज के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसरों वाला माहौल उपलब्ध कराना है।

सरकार द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब राज्य के सभी गर्ल्स हॉस्टल और लॉज का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। बिना रजिस्ट्रेशन के किसी भी हॉस्टल या लॉज का संचालन अवैध माना जाएगा। प्रशासन का कहना है कि इस कदम से हॉस्टलों की निगरानी आसान होगी और छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।

24 घंटे महिला वार्डन की तैनाती अनिवार्य

नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर गर्ल्स हॉस्टल और लॉज में 24 घंटे महिला वार्डन की नियुक्ति करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही वार्डन, सुरक्षा गार्ड, रसोइया और सफाईकर्मी समेत सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन कराना भी जरूरी होगा। सरकार का मानना है कि इससे हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को सुरक्षित वातावरण मिलेगा और किसी भी आपराधिक गतिविधि पर समय रहते रोक लगाई जा सकेगी।

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सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग की अनिवार्यता

सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए हॉस्टल के मुख्य गेट, गलियारों, डायनिंग एरिया और पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। इन कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी, ताकि किसी भी घटना की स्थिति में जांच में मदद मिल सके।

विजिटर रजिस्टर और पुरुषों के प्रवेश पर रोक

हॉस्टल में आने-जाने वाले हर व्यक्ति का नाम, मोबाइल नंबर और आधार नंबर विजिटर रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य होगा। कमरों वाले हिस्से में पुरुषों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा हॉस्टलों में पर्याप्त रोशनी, बेहतर साफ-सफाई, मजबूत दरवाजे-ताले और खिड़कियों में लोहे की जाली लगाना भी जरूरी किया गया है।

बायोमेट्रिक सिस्टम और आपातकालीन व्यवस्था

रात के समय छात्राओं और स्टाफ की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए हॉस्टलों में बायोमेट्रिक सिस्टम लगाने पर जोर दिया गया है। आपात स्थिति से निपटने के लिए हॉस्टल परिसर में 112 नंबर, स्थानीय थाना, महिला हेल्प डेस्क और अभया ब्रिगेड से जुड़ी जानकारी वाले पोस्टर लगाए जाएंगे। इसके साथ ही छात्राओं को 112 इंडिया ऐप के सुरक्षा फीचर्स के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

नियमित जांच और सख्त कार्रवाई

सुरक्षा की निगरानी के लिए पुलिस, महिला हेल्प डेस्क और अभया ब्रिगेड संयुक्त रूप से हॉस्टलों की नियमित जांच करेंगे। किसी भी संदिग्ध या आपराधिक गतिविधि की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि बच्चियों और महिलाओं की सुरक्षा से किसी भी हाल में समझौता नहीं किया जाएगा और दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

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एचआईवी/एड्स पर भ्रांतियां दूर करने के लिए देवरिया में जिला स्तरीय कार्यशाला

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देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।देवरिया जिले में एचआईवी/एड्स के प्रति सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की दिशा में एक अहम पहल की गई। विकास भवन स्थित गांधी सभागार में बुधवार को ‘सुरक्षा से संपूर्ण सुरक्षा तक रणनीति’ विषय पर जिला स्तरीय जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) राजेश कुमार सिंह ने की।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समाज में एचआईवी/एड्स को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना, सही जानकारी का प्रसार करना और रोकथाम, समय पर जांच व उपचार को बढ़ावा देना रहा। सीडीओ ने कहा कि एचआईवी/एड्स केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण और शहरी—दोनों क्षेत्रों में निरंतर अभियान चलाकर ही संक्रमण की दर में कमी लाई जा सकती है।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सम्मान
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले 39 स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानित किया गया। इन स्वास्थ्यकर्मियों ने एचआईवी/एड्स जांच, परामर्श और जागरूकता अभियानों में सराहनीय भूमिका निभाई है। यह सम्मान जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा गया।
कानूनी और सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. शैलजा मिश्रा ने एचआईवी/एड्स एक्ट 2017 की जानकारी देते हुए कहा कि यह विषय स्वास्थ्य के साथ-साथ कानूनी अधिकारों और सामाजिक दायित्वों से भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि एचआईवी से प्रभावित व्यक्तियों के साथ भेदभाव कानूनन अपराध है और समाज को संवेदनशील बनाना अत्यंत आवश्यक है।

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स्वास्थ्य विभाग की रणनीति
जिला मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि जिले में एचआईवी/एड्स की रोकथाम, जांच और उपचार के लिए समग्र स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ की जा रही हैं। प्रत्येक विकास खंड में चरणबद्ध प्रशिक्षण और उन्मुखीकरण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं ताकि स्वास्थ्यकर्मी और समुदाय दोनों जागरूक बन सकें।
कार्यशाला में क्लस्टर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. नितीश राय ने जानकारी दी कि आगामी माह तक जिले के चिन्हित 10 गांवों में, जहां एचआईवी पॉजिटिव और प्रवासी आबादी अधिक है, वहां विशेष स्वास्थ्य शिविरों के लिए माइक्रोप्लान लागू किया जाएगा।
समन्वय और सहभागिता
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग, मेडिकल कॉलेज, एआरटी सेंटर, आईसीटीसी और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जोखिमग्रस्त समूहों तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर सहमति जताई।
भविष्य की दिशा
कार्यशाला के समापन पर निर्णय लिया गया कि नियमित स्वास्थ्य शिविर, परामर्श सेवाएं और कानूनी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। सीडीओ ने कहा कि सही जानकारी, संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास से ही एचआईवी/एड्स के मामलों में प्रभावी कमी लाई जा सकती है।

मतदाता सूची की शुद्धता पर मंथन, 05 फरवरी को आयुक्त की अध्यक्षता में अहम बैठक

आगरा (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जनपद आगरा में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक 05 फरवरी 2026 को अपरान्ह 03:30 बजे कलक्ट्रेट सभागार, आगरा में आयुक्त एवं रोल प्रेक्षक (मतदाता सूची) नागेन्द्र प्रताप की अध्यक्षता में होगी।
इस बैठक में जनपद के सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। उद्देश्य साफ है—मतदाता सूची की गुणवत्ता, शुद्धता और विश्वसनीयता को और मजबूत करना, ताकि कोई भी पात्र नागरिक मतदान अधिकार से वंचित न रहे।
01 जनवरी 2026 अर्हता तिथि पर आधारित पुनरीक्षण
उप जिला निर्वाचन अधिकारी यमुनाधर चौहान ने बताया कि निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 01 जनवरी 2026 अर्हता तिथि के आधार पर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा है। इस क्रम में 06 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का प्रारूप जनपद के सभी मतदान केंद्रों, तहसील मुख्यालयों और जिला निर्वाचन कार्यालय में प्रकाशित किया जा चुका है।
इस प्रकाशन से आम नागरिकों को यह अवसर मिला है कि वे अपना नाम जांचें और नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन या त्रुटि सुधार से संबंधित दावा-आपत्ति तय समय सीमा में दर्ज करा सकें।

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आयुक्त को सौंपी गई निगरानी की जिम्मेदारी
भारत निर्वाचन आयोग ने आयुक्त, आगरा मण्डल को इस कार्यक्रम के लिए रोल प्रेक्षक (मतदाता सूची) नियुक्त किया है। इस भूमिका में आयुक्त नागेन्द्र प्रताप मतदाता सूची से जुड़ी समस्त प्रक्रियाओं की निगरानी कर रहे हैं, ताकि अपात्र नाम हटें और पात्र मतदाता सूची में शामिल हों। यह प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की आधारशिला है।
राजनीतिक दलों से सक्रिय सहभागिता की अपील
05 फरवरी की बैठक में जिलाध्यक्ष, जिला मंत्री, शहर अध्यक्ष सहित सभी मान्यता प्राप्त दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। राजनीतिक दल जमीनी स्तर पर मतदाताओं से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए उनके सुझाव और आपत्तियां इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को और प्रभावी बनाती हैं।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने सभी दलों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि, समय और स्थान पर स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से बैठक में सहभागिता करें, जिससे मतदाता सूची त्रुटिरहित बन सके।
लोकतंत्र की मजबूती की ओर ठोस पहल
मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव होती है। इस विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य है—

  • कोई पात्र नागरिक सूची से वंचित न रहे
  • मृतक/स्थानांतरित/अपात्र नाम हटें
  • नए योग्य मतदाताओं का नाम जुड़े
  • विवरण संबंधी त्रुटियों का सुधार हो
    जनता से भी अपील
    निर्वाचन प्रशासन ने आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे मतदाता सूची अवश्य देखें और किसी भी त्रुटि की स्थिति में निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से दावा या आपत्ति समय रहते दर्ज कराएं। यह प्रक्रिया सशक्त, निष्पक्ष और समावेशी लोकतंत्र के निर्माण की सामूहिक जिम्मेदारी है।

लोकतंत्र बनाम फॉर्म-7: देवरिया में SIR को लेकर सपा का तीखा विरोध

SIR में वोट-कटौती का आरोप: देवरिया में फॉर्म-7 के ज़रिए ‘चुनावी सफ़ाया’ का दावा, सपा का कलेक्ट्रेट घेराव

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दूसरे चरण में कथित अनियमितताओं को लेकर देवरिया की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी ने भाजपा नेताओं व पदाधिकारियों पर फॉर्म-7 के माध्यम से वैध मतदाताओं के नाम कटवाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस मुद्दे पर सपा ने बुधवार को कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) को सौंपा।
सपा जिलाध्यक्ष व्यास यादव के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में पार्टी नेताओं ने दावा किया कि SIR के नाम पर सुनियोजित तरीके से वोटर सूची में छेड़छाड़ की जा रही है। आरोप है कि कई बूथों पर बीएलओ पर दबाव बनाकर सपा समर्थक और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश हो रही है। पार्टी का कहना है कि यह कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।
बरहज विधानसभा में मुस्लिम मतदाताओं के नाम निशाने पर होने का दावा
सपा के अनुसार, बरहज विधानसभा क्षेत्र (342) के सोनारी गांव में शाकिर, सफीक, जमील, सत्तार, बरकतुल्लाह, नूर, समीना, फकरुद्दीन, नजीमा, तसउवर, फैयाज, नफीस और नवाब जैसे मतदाताओं के नाम हटाने के लिए कथित तौर पर ईपीआईसी नंबर के साथ फॉर्म-7 भरा गया। पार्टी का दावा है कि ये सभी मतदाता अपने पते पर स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं और उनके गणना पत्र भी जमा हो चुके हैं, इसके बावजूद नाम ड्राफ्ट सूची से हटाने की कार्रवाई सामने आई है।
SIR की निष्पक्षता पर सवाल, सातों विधानसभाओं से शिकायतें

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सपा नेताओं का कहना है कि यह मामला केवल एक विधानसभा या एक समुदाय तक सीमित नहीं है। जनपद की सातों विधानसभाओं से इसी तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे SIR अभियान की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी ने मांग की कि फॉर्म-7 के जरिए हुई सभी कटौतियों की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
“मताधिकार पर हमला, सड़क से सदन तक संघर्ष”
प्रदर्शन में मौजूद सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और रामपुर कारखाना की पूर्व विधायक फसीहा मंज़र गजाला लारी ने कहा कि यह साधारण प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि मताधिकार पर सीधा हमला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वैध मतदाताओं के नाम नहीं जोड़े गए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो समाजवादी पार्टी सड़क से सदन तक व्यापक आंदोलन करेगी।
प्रदर्शन में पूर्व विधायक आशुतोष उपाध्याय, दीनानाथ चौधरी, अर्जुन यादव (पूर्व एमएलसी), जे.पी. जायसवाल, अशोक कुशवाहा, हाफिज शहादत हुसैन अंसारी, मंजूर हसन, हृदयनारायण जायसवाल, बेचूलाल चौधरी, प्रज्ञानन्द चौधरी, परमहंस यादव, संतोष यादव सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सपा ने स्पष्ट किया कि यदि SIR के नाम पर वोटरों की छंटनी नहीं रुकी, तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन और निर्वाचन तंत्र की होगी।

देवरिया में वोटर लिस्ट अपडेट: फॉर्म 6, 7, 8 से करें आवेदन

देवरिया मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण 2026: आवेदन शुरू, जानें फॉर्म, पात्रता और पूरी प्रक्रिया


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर देवरिया मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हो गई है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और सूची पूरी तरह सटीक, अद्यतन व त्रुटिरहित बनी रहे। जिला निर्वाचन अधिकारी दिव्या मित्तल ने नागरिकों से समय-सीमा के भीतर अपने नाम और विवरण की जांच कर आवश्यक संशोधन कराने की अपील की है।
अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के आधार पर 06 जनवरी 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है। नागरिक अपने नाम, पता, आयु सहित अन्य विवरणों का सत्यापन कर सकते हैं। यदि किसी प्रकार की त्रुटि या नाम छूटने की स्थिति हो, तो निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है। देवरिया मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कौन-सा फॉर्म किस काम के लिए
फॉर्म-6: नए मतदाता का नाम जोड़ने के लिए
फॉर्म-7: मृत्यु/स्थानांतरण आदि कारणों से नाम हटाने के लिए
फॉर्म-8: नाम, पता, आयु या अन्य विवरणों में सुधार के लिए
आवेदन बीएलओ (Booth Level Officer), ईआरओ (Electoral Registration Officer) या संबंधित तहसील कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं। जिन नागरिकों की आयु 01 जनवरी 2026 तक 18 वर्ष पूरी हो चुकी है, वे अनिवार्य रूप से आवेदन करें।

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राजनीतिक दलों के बीएलए की भूमिका
निर्वाचन आयोग ने मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) को भी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर दिया है। बीएलए प्रतिदिन अधिकतम 10 आवेदन बीएलओ को सौंप सकते हैं, बशर्ते:
व्यक्तिगत सत्यापन की पुष्टि संलग्न हो
आवेदन पर नाम, पदनाम, दल, मोबाइल नंबर व हस्ताक्षर स्पष्ट हों
निर्धारित अंडरटेकिंग अनिवार्य रूप से लगी हो
पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित
जिला निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से न हटे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम सूची में न रहे। यदि किसी योग्य नागरिक का नाम गलती से हट जाता है, तो वे निर्धारित अवधि में अपील कर सकते हैं। इससे देवरिया मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 की पारदर्शिता और विश्वसनीयता और मजबूत होगी।
प्रशासन की तैयारी
समस्त बीएलओ और ईआरओ क्षेत्रवार सत्यापन करेंगे। तहसील कार्यालयों में फॉर्म उपलब्ध हैं और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। प्रक्रिया को सरल, त्वरित और पारदर्शी रखने पर विशेष जोर है, ताकि नागरिक बिना किसी परेशानी के आवेदन कर सकें।
अपील: समय रहते सूची की जांच करें, त्रुटि दिखे तो तुरंत सुधार कराएं—क्योंकि हर योग्य मतदाता का नाम सूची में होना ही लोकतंत्र की मजबूती है।