Tuesday, May 5, 2026
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SIR प्रक्रिया पर सवाल: रामपुर कारखाना में 122 वोटरों के नाम काटने का आरोप

SIR के नाम पर मताधिकार पर डाका! रामपुर कारखाना में 122 वोटरों की काग़ज़ी अनुपस्थिति, फर्जी हस्ताक्षर से नाम काटने का आरोप

गौरव कुशवाहा


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान मतदाता सूची से नाम काटे जाने के कथित खेल ने रामपुर कारखाना विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। चिरकिहंवा गांव से सामने आए इस मामले ने SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि 122 मतदाताओं को “अनुपस्थित” दिखाते हुए फॉर्म-7 भरकर उनके मताधिकार पर एकमुश्त प्रहार किया गया।
यह मामला बूथ नंबर-39 से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां कथित तौर पर 122 फॉर्म-7 एक साथ जमा कराए गए। जैसे ही जानकारी सामने आई, गांव में आक्रोश फैल गया। समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और रामपुर कारखाना की पूर्व विधायक फसीहा मंजर गजाला लारी मौके पर पहुंचीं और प्राथमिक विद्यालय परिसर में बीएलओ से जवाब-तलब किया। उनका आरोप है कि जिन मतदाताओं को अनुपस्थित दिखाया गया है, वे सभी अपने पते पर मौजूद हैं।
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू फर्जी हस्ताक्षरों से जुड़ा है। आरोप है कि फॉर्म-7 पर “बिकाऊ” नामक व्यक्ति के हस्ताक्षर दर्शाए गए, जबकि गांव निवासी बिकाऊ ने लिखित रूप में कहा है कि ये हस्ताक्षर उसके नहीं हैं। उसने एफिडेविट देने की बात कही है। इससे दस्तावेजी जालसाजी और संगठित षड्यंत्र की आशंका और गहरी हो गई है।

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पूर्व विधायक गजाला लारी ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया राजनीतिक हस्तक्षेप के तहत कराई गई। उनके अनुसार फॉर्म-7 एक श्रृंखला में होते हुए बीएलओ तक पहुंचे। उन्होंने जिला निर्वाचन अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की बात कही है। उनका कहना है कि मताधिकार से वंचित करना लोकतंत्र पर सीधा हमला है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि रामपुर कारखाना विधानसभा के अन्य बूथों पर भी 100 से 150 मतदाताओं के फॉर्म-7 एक साथ भरकर भेजे गए हैं और बूथ स्तर पर स्वीकार करने का दबाव बनाया गया। यदि यह तथ्य सही साबित होता है तो मामला केवल एक गांव तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में व्यवस्थित वोट-कटौती की ओर संकेत करता है।
प्रशासन का कहना है कि मामले की औपचारिक जांच शुरू की जा रही है। लेकिन सवाल यही है कि क्या समय रहते जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी, या फिर SIR के नाम पर मतदाता सूची से खेल चलता रहेगा। यह प्रकरण अब राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है।

बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त, एडीएम ने की स्कूली वाहनों की समीक्षा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी आलोक कुमार के निर्देश के क्रम में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) चंद्रेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जनपद के विद्यालयों में संचालित स्कूली वाहनों एवं परिवहन व्यवस्था से संबंधित समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित हुई।
बैठक में एआरटीओ प्रियंवदा सिंह ने जनपद के समस्त विद्यालयों में चल रहे वाहनों की परमिट, फिटनेस एवं अन्य अभिलेखों की अद्यतन स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यदि किसी विद्यालय का कोई वाहन बेच दिया गया हो अथवा निष्प्रयोज्य हो गया हो, तो उसकी परमिट निरस्त कराने हेतु परिवहन विभाग को अनिवार्य रूप से सूचना दी जाए, जिससे उसे सूची से हटाया जा सके। इस पर एडीएम ने समस्त विद्यालयों को उक्त निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में विद्यालय प्रबंधन को निर्देशित किया गया कि स्कूली वाहनों को सड़क किनारे खड़ा न किया जाए। विद्यालय परिसर अथवा उसके आसपास समुचित पार्किंग व्यवस्था बनाकर ही वाहनों को खड़ा किया जाए, ताकि यातायात व्यवस्था बाधित न हो।
यह भी निर्देश दिए गए कि समस्त विद्यालय अपने स्कूली वाहनों पर तैनात चालक एवं परिचालक को निर्धारित लाइट ग्रे रंग की वर्दी अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं, जिससे उनकी पहचान आसानी से हो सके। साथ ही सभी वाहन चालकों का लाइसेंस एवं चरित्र सत्यापन कराकर उसकी रिपोर्ट परिवहन विभाग को उपलब्ध कराई जाए। बिना फिटनेस के किसी भी वाहन का संचालन न होने देने पर विशेष जोर दिया गया।
एडीएम ने परिवहन विभाग को निर्देशित किया कि जनपद के सभी स्कूली वाहनों का शत-प्रतिशत सत्यापन कराया जाए तथा वाहनों की परमिट और फिटनेस की जांच एक निश्चित समय अंतराल पर नियमित रूप से की जाती रहे। अनफिट पाए जाने वाले वाहनों का चालान कर उन्हें तत्काल बंद कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विद्यालय में एक भी अनफिट वाहन संचालित नहीं होना चाहिए। साथ ही 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एआरटीओ प्रियंवदा सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक हरिश्चंद्र नाथ, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह, टीएसआई परमहंस सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रबंधक उपस्थित रहे।

माध्यमिक विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण पर जिला प्रशासन का फोकस

आगरा(राष्ट्र की परम्परा)l जनपद में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में जिला प्रशासन ने ठोस कदम बढ़ाए हैं। इसी क्रम में कलेक्ट्रेट सभागार में प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के जीर्णोद्धार, मरम्मत, पुनर्निर्माण और अवस्थापन सुविधाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी अरविन्द मल्लप्पा बंगारी ने की।बैठक का उद्देश्य उन विद्यालयों की स्थिति में सुधार लाना है, जिनके भवन समय के साथ जर्जर हो चुके हैं और जहां विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। जिलाधिकारी ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त विद्यालय भवन आवश्यक हैं, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।बैठक में बताया गया कि प्रोजेक्ट अलंकार सहयोगी अनुदान योजना के तहत उन अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनकी मान्यता अवधि 01 अप्रैल 2023 तक 75 वर्ष पूर्ण हो चुकी है और जिनके भवन अत्यधिक जर्जर अवस्था में हैं। वहीं, 75 वर्ष से कम मान्यता अवधि वाले विद्यालयों को भी, यदि भवन की स्थिति अत्यंत खराब है, तो जिला स्तरीय समिति की संस्तुति और शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) के अनुमोदन के बाद योजना में शामिल किया जा सकेगा।जिला विद्यालय निरीक्षक ने बैठक में जानकारी दी कि जिन विद्यालयों में छात्र संख्या 300 से कम है, उन्हें इस योजना से आच्छादित नहीं किया जाएगा। यह निर्णय योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और संसाधनों के समुचित उपयोग को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।प्रोजेक्ट अलंकार के तहत चयनित विद्यालयों में व्यापक अवस्थापन विकास कार्य कराए जाएंगे। इनमें विद्यालय की बाउंड्री वॉल का निर्माण एवं मरम्मत, शौचालयों का निर्माण व नवीनीकरण, कक्षाओं का जीर्णोद्धार, पुस्तकालय और कॉमन रूम का विकास, प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण, शुद्ध पेयजल व्यवस्था, छत, फर्श, दरवाजे और खिड़कियों की मरम्मत के साथ-साथ रंगाई-पुताई एवं अन्य संरचनात्मक सुधार शामिल हैं। इन कार्यों से विद्यालयों का शैक्षणिक माहौल सुरक्षित और प्रेरक बनेगा।बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि योजना के अंतर्गत होने वाले कार्यों की कुल लागत 75:25 के अनुपात में वहन की जाएगी। इसमें 75 प्रतिशत धनराशि राज्य सरकार और 25 प्रतिशत धनराशि संबंधित संस्था द्वारा दी जाएगी। संस्थाएं अपनी हिस्सेदारी सांसद या विधायक निधि, सीएसआर फंड, एलुमनाई सहयोग अथवा क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तियों और संस्थाओं से जुटा सकेंगी।गाइडलाइन के अनुसार जनपद आगरा में प्रथम चरण में 8 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का चयन किया गया है। इनमें बजाज राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, फतेहपुर सीकरी; जनता इंटर कॉलेज, फतेहाबाद; जनता इंटर कॉलेज, मिढ़ाकुर; गोपीचन्द्र शिवहरे सनातन धर्म कन्या इंटर कॉलेज, मुफीद एवं आम; डी.ए.वी. इंटर कॉलेज, कुण्डौल; रत्नमुनि जैन इंटर कॉलेज, आगरा; तथा मोतीलाल इंटर कॉलेज, सैया शामिल हैं। इन विद्यालयों का प्रोजेक्ट अलंकार के तहत व्यापक कायाकल्प किया जाएगा।जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए कार्यदायी संस्था नामित कर विस्तृत एस्टीमेट तैयार किया जाए और उसे शीघ्र शासन को भेजा जाए, ताकि समयबद्ध रूप से कार्य प्रारंभ हो सके। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित समयसीमा का विशेष ध्यान रखने पर जोर दिया।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह, विनय तिवारी, वित्त एवं लेखा अनुभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारी, हरीश कुमार सिंह, सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

ग्रीक मुद्राओं में दिखता है भारतीय संस्कृति से संवाद: प्रो. राजवन्त राव

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग तथा राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय प्राचीन भारतीय अभिलेख एवं मुद्राएं–अभिरुचि कार्यशाला की राष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत तृतीय व्याख्यान बुधवार को राजकीय बौद्ध संग्रहालय के यशोधरा सभागार में सम्पन्न हुआ।
कार्यशाला के अंतर्गत प्रो. राजवन्त राव, आचार्य, प्राचीन इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने “भारत का ग्रीक संस्कृति से संवाद—मुद्राओं के विशेष संदर्भ में” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक काल में वित्तीय लेनदेन एवं वस्तु-विनिमय के लिए आंतरिक मूल्य वाली वस्तुओं का उपयोग किया जाता था, लेकिन भंडारण और आवागमन की कठिनाइयों के कारण धातु मुद्राओं का प्रचलन प्रारंभ हुआ।
उन्होंने कहा कि चांदी, स्वर्ण और ताम्र से निर्मित मुद्राएं प्रारंभ में उच्च सामाजिक वर्ग द्वारा उपयोग की जाती थीं, जिन्हें बाद में राजनीतिक प्रमाणिकता मिली। धातु मुद्राएं संग्रह और आवागमन की दृष्टि से सुविधाजनक थीं। मुद्रा एक ऐसी वस्तु है जो किसी भी वस्तु को प्राप्त करने का माध्यम बनती है और यह जाति, लिंग अथवा सामाजिक भेद नहीं करती।
प्रो. राजवन्त राव ने मावेस, एंटीआलकिडस, अगाथाक्लीज और मिनांडर जैसे ग्रीक शासकों की मुद्राओं का उल्लेख करते हुए बताया कि उन पर भारतीय संस्कृति का प्रभाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। अगाथाक्लीज की मुद्राओं पर बलराम और कृष्ण का अंकन मिलता है, हालांकि उनकी वेशभूषा पर विदेशी प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने बताया कि पहली बार ब्राह्मी लिपि का प्रयोग भी अगाथाक्लीज की मुद्राओं पर देखने को मिलता है। वेदिका में वृक्ष का अंकन ग्रीक मुद्राओं पर भारतीय सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाता है।
ग्रीक मुद्राओं के अग्रभाग में राजसत्ता सूचक आकृतियों तथा पृष्ठभाग में देवी-देवताओं का अंकन किया गया है। मिनांडर भारतीय संस्कृति से प्रभावित होकर बौद्ध अनुयायी बने, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति से संवाद करते हुए ग्रीक संस्कृति विकसित हुई, जिसके प्रमाण मुद्राओं में मिलते हैं।
कार्यशाला संयोजक डॉ. यशवन्त सिंह राठौर, उप निदेशक, राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर ने बताया कि ग्रीक मुद्राओं पर आक्रामकता के प्रतीक अंकित हैं, जबकि भारतीय मुद्राओं में सांस्कृतिक सौम्यता और प्रतीकात्मकता दिखाई देती है। भारतीय संस्कृति ने सदैव विदेशी संस्कृतियों को आकर्षित किया है और भारत आए शासक इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सके।
कार्यशाला के तृतीय व्याख्यान में लगभग 73 प्रतिभागियों के साथ संग्रहालय के कार्मिक भी उपस्थित रहे।

एचआईवी/एड्स पर नियंत्रण के लिए जिला स्तरीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित

देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा)l
एचआईवी/एड्स जैसी गंभीर और संवेदनशील बीमारी के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर कर सही जानकारी के माध्यम से जागरूकता बढ़ाने से ही संक्रमण की दर में कमी लाई जा सकती है। यह बात मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) राजेश कुमार सिंह ने कही। वे बुधवार को विकास भवन स्थित गांधी सभागार में आयोजित ‘सुरक्षा से संपूर्ण सुरक्षा तक रणनीति’ विषयक जिला स्तरीय जागरूकता एवं संवेदनशीलता कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
सीडीओ ने कहा कि एचआईवी/एड्स को लेकर आज भी समाज में कई तरह की गलत धारणाएं मौजूद हैं, जिसके कारण संक्रमित व्यक्ति सामाजिक भेदभाव और मानसिक दबाव का सामना करता है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही जानकारी, परामर्श और जांच की सुविधा उपलब्ध करा दी जाए, तो इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। उन्होंने सभी विभागों से समन्वय बनाकर कार्य करने की अपील की।
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले सम्मानित
कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लेखनीय कार्य करने वाले जिले के 39 स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सीडीओ ने सभी सम्मानित कर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका एचआईवी/एड्स की रोकथाम में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका सतत प्रयास ही समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
एचआईवी/एड्स से जुड़ी भ्रांतियां दूर करना आवश्यक: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. शैलजा मिश्रा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि एचआईवी/एड्स के प्रति समाज में फैली नकारात्मक सोच और भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने एचआईवी/एड्स (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम 2017 के प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि यह कानून एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करता है।
उन्होंने कहा कि एचआईवी केवल शहरी क्षेत्रों की समस्या नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। जोखिमग्रस्त समूहों तक प्रभावी पहुंच बनाकर उन्हें समय पर जांच, परामर्श और उपचार सेवाओं से जोड़ना बेहद जरूरी है।
जिले में जांच और परामर्श सेवाएं हो रही हैं सुदृढ़: सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, जांच और परामर्श सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकास खंड में चरणबद्ध तरीके से उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि स्वास्थ्य कर्मी अद्यतन जानकारी के साथ कार्य कर सकें।
एचआईवी के कारण, लक्षण और बचाव पर दी गई विस्तृत जानकारी
कार्यशाला में क्लस्टर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. नितीश राय ने एचआईवी/एड्स के कारण, लक्षण, संक्रमण के तरीके, बचाव के उपाय, जांच प्रक्रिया और उपचार से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि एचआईवी संक्रमण की समय पर पहचान और नियमित उपचार से संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।
उन्होंने आगामी माह तक जिले के उन 10 चिन्हित गांवों का माइक्रोप्लान भी प्रस्तुत किया, जहां एचआईवी पॉजिटिव मामलों और प्रवासी आबादी की संख्या अधिक है। इन गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर जांच, परामर्श और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
बहु-विभागीय सहभागिता पर दिया गया जोर
कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि एचआईवी/एड्स की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, विधिक सेवा प्राधिकरण और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम में डीटीओ डॉ. राजेश कुमार, समस्त अपर एवं उप मुख्य चिकित्साधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, दिशा कमेटी से बृजेश और अफजल, संपूर्ण सुरक्षा केंद्र से सीएम उपाध्याय, आईटीएसिटी से शिरीष त्रिपाठी, विद्या प्रकाश गौतम, चंद्र प्रकाश त्रिपाठी, शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग, मेडिकल कॉलेज, एआरटी सेंटर, आईसीटीसी और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समाज में संवेदनशीलता और स्वीकार्यता की जरूरत
वक्ताओं ने कहा कि एचआईवी/एड्स से पीड़ित व्यक्तियों को सहानुभूति, सम्मान और समान अधिकार मिलना चाहिए। भेदभाव और डर के कारण कई लोग जांच और उपचार से दूर रहते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समाज को संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।
जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार
कार्यशाला के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि जागरूकता, समय पर जांच और नियमित उपचार ही एचआईवी/एड्स के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों में जनसहयोग से ही इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

नगर निकायों में विकास कार्यों की समीक्षा, अपर जिलाधिकारी ने दिए सख्त निर्देश

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)l नगर निकायों में कराए जा रहे विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों की प्रगति की समीक्षा को लेकर अपर जिलाधिकारी एवं प्रभारी अधिकारी नगरीय निकाय सत्यप्रिय सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक अपर जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक में जनपद के समस्त नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी उपस्थित रहे, जहां शासन द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति, राजस्व वसूली, स्वच्छता व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अपर जिलाधिकारी ने बैठक के दौरान नगर निकायों द्वारा कराए गए कार्यों का एक-एक कर सत्यापन किया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शासन की सभी योजनाओं को शत-प्रतिशत पूर्णता के साथ धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कर एवं करेंत्तर देयों की शत-प्रतिशत वसूली के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान अपर जिलाधिकारी ने कर एवं करेंत्तर देयों की स्थिति की गहन समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया कि नगर निकायों में लंबित कर वसूली को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। राजस्व वसूली में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि नगर निकायों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करने के लिए कर संग्रहण अत्यंत आवश्यक है, जिससे विकास कार्यों को समय पर पूरा किया जा सके।
विकास योजनाओं की प्रगति पर विशेष फोकस
बैठक में 15वें वित्त आयोग एवं अवस्थापना निधि से स्वीकृत विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराया जाए।
इसके अलावा वंदन योजना, मुख्यमंत्री नगर सृजन योजना, मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना, पंडित दीनदयाल नगर विकास योजना एवं आकांक्षी योजना सहित अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं के अंतर्गत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे, इसमें किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
स्वच्छता व्यवस्था में लापरवाही पर चेतावनी

अपर जिलाधिकारी सत्यप्रिय सिंह ने कूड़ा निस्तारण और साफ-सफाई व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी नगर निकाय क्षेत्र में गंदगी या कूड़ा जमा नहीं होना चाहिए। यदि साफ-सफाई व्यवस्था में लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिशासी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। स्वच्छ नगर ही स्वस्थ समाज की नींव रखता है।
पालीथिन जब्ती एवं जागरूकता अभियान के निर्देश

बैठक का एक प्रमुख बिंदु पालीथिन मुक्त नगर अभियान रहा। अपर जिलाधिकारी ने सभी नगर निकायों में पालीथिन जब्ती अभियान चलाने और आमजन को पालीथिन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के सख्त निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित प्लास्टिक और पालीथिन का उपयोग पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा है। इसके खिलाफ निरंतर अभियान चलाकर न केवल जब्ती की जाए, बल्कि दुकानदारों और नागरिकों को इसके विकल्प अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाए।
निराश्रित गोवंश संरक्षण पर जोर
बैठक में निराश्रित गोवंश के संरक्षण की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि नगर निकाय क्षेत्र में संचालित गौशालाओं में भूसा, चारा, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि गोवंश संरक्षण शासन की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी प्रकार की कोताही स्वीकार्य नहीं होगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना और पीएम स्वनिधि की समीक्षा
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 और पीएम स्वनिधि योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों को समय पर योजनाओं का लाभ दिलाया जाए और किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो।
उन्होंने कहा कि ये योजनाएं शहरी गरीबों और छोटे व्यापारियों के आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी हैं, इसलिए इनके क्रियान्वयन में विशेष संवेदनशीलता बरती जाए।
नगर निकायों को दी गई स्पष्ट चेतावनी
अपर जिलाधिकारी ने बैठक के अंत में दो टूक शब्दों में कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। लापरवाही, उदासीनता या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने सभी अधिशासी अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे अपने-अपने निकायों में नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाएं और जनता को बेहतर नागरिक सुविधाएं प्रदान करें।
बैठक में रहे सभी अधिशासी अधिकारी उपस्थित
इस समीक्षा बैठक में जनपद के सभी नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के माध्यम से प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि नगर विकास, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

देवरिया में ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

देवरिया।(राष्ट्र की परम्परा)
सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाने और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से देवरिया यातायात पुलिस द्वारा व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। पुलिस अधीक्षक देवरिया श्री संजीव सुमन के निर्देशन में बुधवार, 05 फरवरी 2026 को यातायात प्रभारी श्री गुलाब सिंह के नेतृत्व में शहर क्षेत्र के प्रमुख मार्गों और चौराहों पर विशेष अभियान संचालित किया गया।
इस अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते हुए कुल 136 वाहनों का ई-चालान किया गया, जबकि 15 वाहनों को सीज किया गया। यातायात पुलिस की इस कार्रवाई से शहर में नियमों का पालन सुनिश्चित करने का स्पष्ट संदेश दिया गया है।
ई-रिक्शा और सार्वजनिक वाहनों पर विशेष नजर
अभियान के दौरान कोतवाली क्षेत्र में संचालित ई-रिक्शा वाहनों की गहन जांच की गई। जिन ई-रिक्शा चालकों के पास वैध कागजात पाए गए, उनके वाहनों पर नियमानुसार नंबरिंग कराई गई, जबकि बिना कागजात या नियमों का उल्लंघन करने वाले ई-रिक्शा चालकों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
इसके अलावा गोरखपुर ओवरब्रिज, कसया ओवरब्रिज, मालवीय रोड और बस स्टैंड जैसे व्यस्त इलाकों में सड़क पर वाहन खड़ा कर सवारी भरने वाले अनुबंधित बसों, ऑटो और ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए गए। यातायात को बाधित करने वाले इन वाहनों पर चालान के साथ-साथ सीज की कार्रवाई की गई।
नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्ती
अभियान के दौरान मादक पदार्थ का सेवन कर वाहन चलाने वाले चालकों पर भी विशेष नजर रखी गई। यातायात पुलिस द्वारा ब्रिथ एनालाइजर की सहायता से जांच की गई और नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई की गई।
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नशे में वाहन चलाना न केवल चालक की, बल्कि सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान के लिए भी गंभीर खतरा है। इसी कारण ऐसे मामलों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी।
यातायात नियमों के प्रति जागरूकता का प्रयास
यातायात प्रभारी गुलाब सिंह ने बताया कि इस प्रकार के अभियान केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका उद्देश्य आमजन में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। अभियान के दौरान वाहन चालकों को हेल्मेट, सीट बेल्ट, वैध कागजात, निर्धारित लेन और गति सीमा के पालन के महत्व के बारे में भी समझाया गया।
उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन करने से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आती है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था भी सुचारु बनी रहती है।
पुलिस अधीक्षक का सख्त संदेश
पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि जो भी वाहन चालक यातायात नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके विरुद्ध मोटर वाहन अधिनियम के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में भी ऐसे विशेष चेकिंग अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे, ताकि दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लाई जा सके और आमजन सुरक्षित यात्रा कर सके।
दुर्घटना रोकथाम की दिशा में अहम कदम
देवरिया में चलाया गया यह यातायात चेकिंग अभियान दुर्घटना रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमों के सख्त अनुपालन और लगातार चेकिंग से न केवल लापरवाह वाहन चालकों में भय बना रहता है, बल्कि जिम्मेदार ड्राइविंग की संस्कृति भी विकसित होती है।
यातायात पुलिस की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सड़क को लापरवाही का स्थान नहीं बनने दिया जाएगा और नियम तोड़ने वालों के लिए कोई रियायत नहीं होगी।
आमजन से पुलिस की अपील
यातायात पुलिस देवरिया ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय सभी नियमों का पालन करें। हेल्मेट और सीट बेल्ट का नियमित उपयोग करें, शराब या नशीले पदार्थों का सेवन कर वाहन न चलाएं और सड़क पर वाहन खड़ा कर यातायात बाधित न करें।
पुलिस का कहना है कि जनसहयोग से ही सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। यदि प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे, तो सड़कें अधिक सुरक्षित बन सकती हैं।
आने वाले दिनों में और सख्ती
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में देवरिया शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात नियमों को लेकर और अधिक सख्त अभियान चलाया जाएगा। विशेष रूप से ई-रिक्शा, ऑटो, बस और दोपहिया वाहनों की नियमित जांच की जाएगी।
यातायात पुलिस का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि सुरक्षित और अनुशासित यातायात व्यवस्था को मजबूत करना है।

औरैया में किसान पंजीकरण पर प्रशासन की पैनी नजर

औरैया।(राष्ट्र की परम्परा)
किसानों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों का पारदर्शी एवं सुगम लाभ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन स्तर पर शुरू की गई फार्मर रजिस्ट्री योजना को औरैया जनपद में गंभीरता से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने जनपद के विभिन्न ग्राम पंचायतों का दौरा कर किसान पंजीकरण की प्रगति, वास्तविक स्थिति और जमीनी सच्चाई का निरीक्षण किया।
जिलाधिकारी ने ग्राम पंचायत बरकापुर, साहसपुर, राजपुर, ग्राम पंचायत ऐरवा टिकटा के मजरा लालपुर, ग्राम पंचायत सचिवालय ऐरवा टिकटा तथा ग्राम पंचायत कुदरकोट में पहुंचकर संबंधित लेखपालों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन किसानों के अभिलेखों में खतौनी और आधार कार्ड के विवरण मेल नहीं खाते हैं, उनकी अलग-अलग सूची तैयार कर त्रुटि संशोधन कराया जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान फार्मर रजिस्ट्री से वंचित न रह जाए।
अपात्र किसानों की पहचान पर भी जोर
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने यह भी निर्देशित किया कि जिन व्यक्तियों के नाम पर भूमि दर्ज नहीं है अथवा जो फार्मर रजिस्ट्री के लिए अपात्र हैं, उनकी स्पष्ट पहचान कर सूची तैयार की जाए। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही सीमित रहेगा।
प्रशासन का मानना है कि Farmer Registry योजना औरैया के सफल क्रियान्वयन से किसानों की भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड एकीकृत होगा और भविष्य में किसी भी प्रकार की विसंगति से बचा जा सकेगा।
किसानों को बताए गए फार्मर रजिस्ट्री के लाभ
जिलाधिकारी डॉ. इन्द्रमणि त्रिपाठी ने किसानों से सीधा संवाद कर फार्मर रजिस्ट्री के दीर्घकालिक लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस पंजीकरण के बाद किसानों को फसली ऋण प्राप्त करने, फसल बीमा की क्षतिपूर्ति, प्राकृतिक आपदा के समय राहत राशि पाने में आसानी होगी।
इसके अलावा किसानों को विभिन्न योजनाओं में बार-बार भौतिक सत्यापन से मुक्ति मिलेगी। कृषि विभाग के साथ-साथ उद्यान, मत्स्य, खाद्य एवं विपणन जैसे अन्य विभाग भी फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों को अपनी योजनाओं का लाभ दे सकेंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों के विपणन में भी सुविधा मिलेगी तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभ प्राप्त करने में प्रक्रिया और सरल होगी।
फार्मर रजिस्ट्री के लिए आवश्यक दस्तावेज
जिलाधिकारी ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री के लिए आवश्यक अभिलेखों की जानकारी देते हुए बताया कि पंजीकरण के लिए आधार कार्ड, खतौनी तथा आधार से लिंक मोबाइल नंबर अनिवार्य है। किसान स्वयं https://upfr.agristack.gov.in वेब पोर्टल के माध्यम से सेल्फ मोड में पंजीकरण कर सकते हैं।
इसके अलावा मोबाइल ऐप Farmer Registry UP के जरिए भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। जो किसान स्वयं पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं, वे जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से निर्धारित शुल्क देकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
निर्माण कार्यों में लापरवाही पर जिलाधिकारी नाराज
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ग्राम पंचायत बरकापुर पहुंचे, जहां उन्होंने निर्माणाधीन मिनी सचिवालय के कार्यों का जायजा लिया। निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और कार्य की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न पाए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान को निर्देश दिए कि मानक विहीन निर्माण को हटाकर पुनः मानकों के अनुसार निर्माण कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
तालाब पर अतिक्रमण के आरोप, तत्काल कार्रवाई के निर्देश
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने वर्तमान ग्राम प्रधान पर तालाब पर अतिक्रमण किए जाने के गंभीर आरोप लगाए। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित लेखपाल को निर्देश दिए कि उसी दिन अतिक्रमण हटवाकर फोटोग्राफ्स सहित आख्या प्रस्तुत की जाए।
साथ ही उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि एक सप्ताह के भीतर तालाब को उसके पूर्व स्वरूप में पुनः स्थापित कराना सुनिश्चित किया जाए, ताकि ग्राम पंचायत की सार्वजनिक संपत्ति सुरक्षित रह सके।
सफाई व्यवस्था में लापरवाही पर सख्त रुख
ग्राम पंचायत ऐरवा टिकटा के मजरा लालपुर में निरीक्षण के दौरान नालियों की गंदगी, सड़क की खराब स्थिति और सफाई कर्मी के नियमित न आने की शिकायत सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी जताते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी को संबंधित सफाई कर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही सफाई व्यवस्था सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक सफाई कर्मी की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया। पर्यवेक्षण और विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर एडीओ पंचायत एरवाकटरा को प्रतिकूल प्रविष्टि देने के भी निर्देश दिए गए।
स्थानीय समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश
जिलाधिकारी ने विनोद यादव के घर के सामने ध्वस्त नाली और सड़क की समस्या को गंभीरता से लेते हुए ग्राम पंचायत सचिव को आवश्यक कार्रवाई कर शीघ्र निर्माण कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्थानीय समस्याओं का समयबद्ध समाधान प्रशासन की प्राथमिकता है।
निरीक्षण के दौरान रहे अधिकारी उपस्थित
इस अवसर पर नायब तहसीलदार बिधूना राकेश कुमार, लेखपाल मोहिनी पाल, संध्या राजपूत, शिवम, राज शेखर, बीटीएम कृषि सुनील कुमार मिश्रा, ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

राज्य कर्मचारी का दर्जा दो… के नारे से गूंजा कलेक्ट्रेट परिसर

आशा बहुओं का जोरदार प्रदर्शन, मानदेय बढ़ाने की मांग

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। राज्य कर्मचारी का दर्जा देने और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर आशा बहुओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान राज्य कर्मचारी का दर्जा दो के नारे गूंजते रहे।
जिलाध्यक्ष सरोज यादव के नेतृत्व में आशा बहुओं ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से आशा बहुओं ने राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, मानदेय में वृद्धि करने तथा सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी।
इस अवसर पर जिले के विभिन्न विकासखंडों से आई सैकड़ों आशा बहुएं उपस्थित रहीं। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन मांगों को लेकर आशा बहुओं में जबरदस्त आक्रोश और एकजुटता देखने को मिली।

कुशीनगर में सड़क सुरक्षा को लेकर सख्ती, बिना हेल्मेट नहीं मिलेगा पेट्रोल

कुशीनगर।(राष्ट्र की परम्परा)
सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और आमजन की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कुशीनगर जिला प्रशासन ने एक सख्त और दूरगामी निर्णय लिया है। अब जनपद में दोपहिया वाहन चालकों को हेल्मेट के बिना पेट्रोल नहीं मिलेगा। प्रशासन द्वारा जिले में “No Helmet No Fuel अभियान कुशीनगर” को लागू किया जा रहा है, जिसे सड़क सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह विशेष अभियान उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र संख्या-3032, दिनांक 31 दिसंबर 2025 के निर्देशों के क्रम में संचालित किया जा रहा है। शासन के निर्देशों के अनुपालन में जिलाधिकारी कुशीनगर महेंद्र सिंह तंवर ने संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने का आदेश दिया है।
पेट्रोल पंपों पर सख्ती, हेल्मेट के बिना नहीं मिलेगा ईंधन
No Helmet No Fuel अभियान कुशीनगर के तहत जनपद के सभी पेट्रोल पंपों पर यह व्यवस्था लागू की जाएगी कि कोई भी दोपहिया वाहन चालक यदि हेल्मेट नहीं पहने होगा तो उसे पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। इस निर्णय को लागू करने के लिए पेट्रोलियम डीलरों का सहयोग लिया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने पेट्रोल पंप मालिकों और प्रबंधकों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने पंप परिसरों में इस अभियान से संबंधित बड़े और स्पष्ट बैनर, पोस्टर तथा सूचना बोर्ड लगाएं, ताकि ग्राहकों को पहले से ही नियम की जानकारी हो। इसके साथ ही पेट्रोल पंप कर्मचारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे ईंधन भरवाने आने वाले वाहन चालकों को हेल्मेट पहनने के लिए प्रेरित करें।
यातायात नियमों के उल्लंघन पर सघन कार्रवाई
इस अभियान के दौरान केवल हेल्मेट ही नहीं, बल्कि अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी सख्त प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से ओवरस्पीडिंग, लेन उल्लंघन, गलत दिशा में वाहन चलाना, मोबाइल फोन का प्रयोग करते हुए वाहन चलाना, शराब के नशे में ड्राइविंग, सीट बेल्ट और हेल्मेट न पहनने जैसे मामलों में नियमित जांच अभियान चलाएंगे।
प्रशासन का मानना है कि No Helmet No Fuel अभियान कुशीनगर केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों की सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत हेल्मेट पहनना अनिवार्य
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 129 के अनुसार, मोटरसाइकिल, स्कूटर अथवा मोपेड चलाने या उस पर सवारी करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए मानक हेल्मेट पहनना अनिवार्य है। यह नियम केवल चालक ही नहीं, बल्कि पीछे बैठने वाले सवार पर भी लागू होता है। इसके अलावा यह प्रावधान 4 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों पर भी प्रभावी है।
अधिनियम की धारा 194D के तहत हेल्मेट न पहनने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति द्वारा भी सभी राज्यों को हेल्मेट अनुपालन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। इन्हीं कानूनी प्रावधानों और न्यायालयीय निर्देशों के आधार पर No Helmet No Fuel अभियान कुशीनगर को लागू किया जा रहा है।
पुलिस और परिवहन विभाग का समन्वय
अभियान को सफल बनाने के लिए परिवहन विभाग और पुलिस विभाग आपसी समन्वय से कार्य करेंगे। पेट्रोल पंपों पर किसी भी प्रकार की असुविधा, विवाद या अवरोध की स्थिति में संबंधित थाना पुलिस तत्काल सहायता प्रदान करेगी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अभियान के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि अभियान का उद्देश्य पूरी तरह सफल हो सके।
दुर्घटनाओं में कमी लाने की दिशा में प्रयास
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली अधिकांश मौतें और गंभीर चोटें हेल्मेट न पहनने के कारण होती हैं। ऐसे में यह अभियान लोगों को अपनी सुरक्षा के प्रति सजग करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना है।
No Helmet No Fuel अभियान कुशीनगर के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि हेल्मेट कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का सबसे प्रभावी साधन है।
जनहित में प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करें और हेल्मेट तथा सीट बेल्ट का नियमित उपयोग करें। सुरक्षित ड्राइविंग को अपनी आदत बनाएं और दूसरों के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत करें।
प्रशासन का मानना है कि जनसहयोग से ही इस अभियान को सफल बनाया जा सकता है। यदि प्रत्येक नागरिक नियमों का पालन करे, तो सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

दीनदयाल उपाध्याय पुण्यतिथि पर विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में त्रिस्तरीय प्रतियोगिताएं

भाषण, निबंध, पोस्टर व वीरांगना परिधान प्रतियोगिता का आयोजन, 01 से 11 फरवरी तक चलेगा कार्यक्रम

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि के अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से सम्बद्ध विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के बौद्धिक, रचनात्मक एवं सांस्कृतिक विकास को लेकर त्रिस्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिताएं महाविद्यालय, नोडल एवं विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित होंगी।
कार्यक्रम के अंतर्गत भाषण प्रतियोगिता का विषय “एकात्म मानववाद और विकसित भारत @2047”, निबंध लेखन का विषय “पं. दीनदयाल उपाध्याय का जीवन दर्शन और सामाजिक समरसता” तथा पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता पं. दीनदयाल उपाध्याय विषय पर आयोजित की जाएगी। साथ ही वीरांगना परिधान प्रतियोगिता में देश की प्रमुख वीरांगनाओं पर आधारित प्रस्तुति दी जाएगी।
महाविद्यालय स्तर की प्रतियोगिताएं 01 से 06 फरवरी 2026 तक आयोजित होंगी। इसके बाद 07 व 08 फरवरी को जनपदवार नोडल केंद्रों पर चयनित प्रतिभागियों की प्रतियोगिताएं होंगी। विश्वविद्यालय स्तर की प्रतियोगिता 10 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी।
सभी प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को 11 फरवरी 2026 को सम्मानित किया जाएगा। दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की निदेशक प्रो. सुषमा पाण्डेय द्वारा जारी सूचना के अनुसार विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधिक से अधिक विद्यार्थियों से सहभागिता की अपील की है।

पत्रकार की चोरी गई बाइक एक माह बाद भी बरामद नहीं

पुलिस पर लगा लापरवाही का आरोप।


सिकंदरपुर /बलिया(राष्ट्र की परम्परा)
थाना क्षेत्र के सिकंदरपुर स्थित श्री ओमशंकर जी संस्कृत महाविद्यालय परिसर से विगत 12 जनवरी को पत्रकार की चोरी हुई मोटरसाइकिल का लगभग एक माह बीतने के बाद भी सुराग न लगने से पत्रकारो में आक्रोश है।
इसी घटना को लेकर प्रगतिशील ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उप्र जिलाध्यक्ष बृजेन्द्र नाथ सिंह के नेतृत्व में सोमवार को पत्रकारों का एक प्रतिनिधि मंडल पुलिस अधीक्षक बलिया से मिला।साथ ही पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र दे कर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
बताया गया कि 12 जनवरी 2026 को रामजी यादव जो वाराणसी से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक अखबार के पत्रकार हैं।साथ ही प्रगतिशील ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन सिकन्दरपुर तहसील इकाई के उपाध्यक्ष भी हैं। इनके पुत्र अंकुश कुमार यादव 12 जनवरी को सिकन्दरपुर कस्बे में स्थित श्री ओम शंकर जी महाविद्यालय में शास्त्री की परीक्षा देने महाविद्यालय गए थे। उन्होंने अपनी सुपर स्प्लेंडर मोटरसाइकिल (संख्या UP60AU-8428) कॉलेज परिसर में खड़ी की थी। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब वे बाहर निकले तो बाइक गायब थी। काफी खोजबीन के बाद भी जब कोई जानकारी नहीं मिली तो यूपी-112 को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच के दौरान पास लगे सीसीटीवी कैमरे में एक युवक को बाइक ले जाते हुए देखा।इस संबंध में पीड़ित द्वारा उसी दिन थाना सिकंदरपुर में लिखित तहरीर दी गई, जिस पर मुकदमा संख्या 0011/2026 दर्ज किया गया। इसके बावजूद अब तक न तो चोरी गई बाइक बरामद हो सकी है और न ही आरोपी की गिरफ्तारी हो पाई है।
पीड़ित पत्रकार का कहना है कि उक्त मोटरसाइकिल से ही वह समाचार संकलन का कार्य करता था। बाइक न मिलने से उसे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से सीसीटीवी फुटेज के आधार पर शीघ्र चोर की गिरफ्तारी और मोटरसाइकिल बरामद कराने के निर्देश देने की मांग की है।मामले में पुलिस की निष्क्रियता को लेकर क्षेत्र में भी चर्चा बनी हुई है।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में सड़क सुरक्षा पर बौद्धिक कार्यक्रम, स्वयंसेवकों ने ली नियम पालन की शपथ

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग स्थित नादायन हाल में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में सड़क सुरक्षा विषय पर एक दिवसीय बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यातायात निरीक्षक मनोज राय ने गोरखपुर की वर्तमान यातायात व्यवस्था की जानकारी देते हुए सड़क सुरक्षा के सैद्धान्तिक एवं व्यवहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का पालन केवल जुर्माने से बचने के लिए नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. अनुभूति दूबे ने सड़क पर चलते समय बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि मानसिक तनाव, असावधानी और जल्दबाजी सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने वाहन चलाते समय मानसिक रूप से सजग रहने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. ऊषा सिंह ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए युवाओं से सड़क पर अनुशासन और संयम बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं स्वागत राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सत्यपाल सिंह ने किया तथा स्वयंसेवकों और सेविकाओं को सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की शपथ दिलाई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रदीप कुमार साहनी, कार्यक्रम अधिकारी ने किया।
इस अवसर पर बालेन्द्र यादव, विनीत सिंह, राजेन्द्र मौर्य सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. सत्यपाल सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

युवा गांधीवादियों की मनरेगा बचाओ यात्रा पहुंची जनपद केअदरी

कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव के नेतृत्व में यात्रा का किया गया स्वागत

मऊ ( राष्ट्र की परम्परा )मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए मजदूर विरोधी बदलावों के विरोध में निकाली जा रही ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ अपने 20 वें दिन अदरी पहुंची। यह यात्रा घोसी से अदरी की ओर आगे बढ़ी । यात्रा में कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव संग सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने साइकिल चलाकर किया समर्थन।

17 जनवरी को चौरी-चौरा (गोरखपुर) से प्रारंभ हुई मनरेगा बचाओ यात्रा जो देवरिया और बलिया होते हुए वर्तमान में मऊ ज़िले में है, घोसी स्थित गांधी चौक पर महात्मा गांधी को नमन कर यह यात्रा रास्ते में पड़ने वाले गाँव और बाज़ार में जनसंवाद और जनसभा करते हुए आगे अदरी की ओर बढ़ी। 4 फ़रवरी को यात्रा घोसी से शुरू होकर घोसी बाजार,कल्याणपुर, आरियासो, जयरामगढ़, कसारा चट्टी, महुआर, इंदारा होते हुए अदरी पहुंची। जनसभा के साथ यात्रियों ने यात्रा का समापन किया।

जनसभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव ने कहा कि सरकार VB-GRAM-G जैसे मजदूर विरोधी कानून लाकर मनरेगा को कमजोर और खत्म करने की साजिश कर रही है। इससे पिछड़े वर्ग, दलित, भूमिहीन मजदूर और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार संविधान पर लगातार हमला कर रही है और अपने पूंजीपति मित्रों को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा को कमजोर किया जा रहा है।

मनरेगा को खत्म करने की साजिश’ का आरोप लगाते हुए कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजमंगल यादव ने मोदी सरकार की कॉर्पोरेटपरस्त नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की अदानी अंबानी से दोस्ती किसी से छुपी नहीं है और उनके फायदे के लिए मनरेगा कानून समाप्त किया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि यह यात्रा गोरखपुर, देवरिया, बलिया, मऊ और गाजीपुर होते हुए प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचेगी, जहां 17 फरवरी को इसका औपचारिक समापन किया जाएगा।

यात्रा की प्रमुख मांगें.

1) काम के संवैधानिक अधिकार को बहाल किया जाए

2) मजदूर विरोधी कानून VB-G RAM G को तुरंत वापस लिया जाए

3) मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जाए

यात्रा में शामिल हुए प्रमुख लोग

राजमंगल यादव(ज़िलाध्यक्ष, कांग्रेस) सुरेश राजभर (ब्लाक अध्यक्ष घोसी)हरेंद्र यादव(जिला महासचिव, कांग्रेस), मृत्युंजय मौर्या (मऊ), सतीश साहनी (देवरिया), हिमांशु, रजत सिंह, प्रियेश, विवेक मिश्र (बलिया), नीरज कुमार (आजमगढ़), गौरव राय, तौहीद बेग, सूफी सलीम, विवेक विराट (समस्तीपुर), सुमन आनंद(BHU),कन्हैया साहनी, प्रवीण, गौरव पुरोहित (पश्चिम बंगाल), बृजेश साहनी, गौरव, आलोक यादव (बक्सर), संगम गुप्ता, राशिद (बेगूसराय), राजू कुमार (सहरसा), अंबिका प्रसाद, विवेक कुमार(नालंदा) आदि।

चाइनीज मांझे से मौत अब हादसा नहीं, हत्या मानी जाएगी: CM योगी

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा) । उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे से हो रही लगातार दुर्घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए CM योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चाइनीज मांझे से होने वाली मौत अब हादसा नहीं, बल्कि हत्या मानी जाएगी। उन्होंने प्रदेश में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की बिक्री और स्टॉक पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री को रोकने के लिए विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाए। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि प्रतिबंध के बावजूद यह जानलेवा मांझा आखिर बाजारों में कैसे उपलब्ध हो रहा है।

चाइनीज मांझे से होने वाली मौतें गंभीर अपराध की श्रेणी में

मुख्यमंत्री ने कहा कि चाइनीज मांझे से होने वाली मौतों को अब गंभीर अपराध की श्रेणी में लिया जाए और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पूरे प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर अवैध मांझा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में प्रदेशव्यापी कार्रवाई की उच्च स्तर पर समीक्षा की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो और प्रतिबंध का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

लखनऊ में दर्दनाक हादसे के बाद बढ़ी सख्ती

हाल ही में राजधानी लखनऊ में चाइनीज मांझे से जुड़ा एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है। हैदरगंज पुल पर पतंग की डोर की चपेट में आने से एक युवक की गर्दन गंभीर रूप से कट गई थी। घायल अवस्था में युवक को तत्काल ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना ने एक बार फिर चाइनीज मांझे की खतरनाक सच्चाई को उजागर कर दिया है और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मृतक शोएब परिवार का इकलौता बेटा था

हादसे में जान गंवाने वाले युवक की पहचान शोएब के रूप में हुई है। बताया गया है कि शोएब अपने परिवार का इकलौता बेटा था और मेहनत-मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाता था। उसकी मौत के बाद परिवार सदमे में है और पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल देखने को मिल रहा है।

स्थानीय लोगों ने चाइनीज मांझे की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद जानलेवा मांझे की बिक्री पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है।

प्रशासन सख्त कार्रवाई की तैयारी में

लगातार हो रही घटनाओं के चलते चाइनीज मांझा एक बार फिर आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन अब अवैध मांझा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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