Monday, May 4, 2026
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Canada School Shooting: ब्रिटिश कोलंबिया में 8 की मौत, 24 घायल; हमलावर ने की आत्महत्या

Canada School Shooting: कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत में हुए एक दर्दनाक स्कूल शूटिंग मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। Canada School Shooting British Columbia की इस घटना में कुल 8 लोगों की मौत हो गई, जिनमें हमलावर भी शामिल है, जबकि 24 अन्य घायल हुए हैं। यह हमला मंगलवार (10 फरवरी 2026) को टंबलर रिज नाम के छोटे कस्बे में हुआ, जहां करीब 2,400 लोग रहते हैं। पुलिस के अनुसार, यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गोलीबारी की घटनाओं में से एक है।

18 वर्षीय हमलावर की पहचान, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी सामने आई

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने हमलावर की पहचान 18 वर्षीय जेसी वैन रूटसेलार के रूप में की है। पुलिस अधिकारी ड्वेन मैकडोनाल्ड ने बताया कि हमलावर एक ट्रांसजेंडर महिला थी, जो जन्म से पुरुष थी और चार साल पहले उसी हाई स्कूल से पढ़ाई छोड़ चुकी थी।

पुलिस के अनुसार, हमलावर के पास पहले हथियार रखने का लाइसेंस था, जो समाप्त हो चुका था। उसके घर से पहले भी हथियार जब्त किए गए थे, लेकिन बाद में वापस कर दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि उसे मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं और कई बार पुलिस को उसके घर जाना पड़ा था। प्रांतीय मानसिक स्वास्थ्य कानून के तहत उसे जांच के लिए हिरासत में भी लिया गया था।

पहले घर में हत्या, फिर स्कूल में अंधाधुंध फायरिंग

पुलिस के मुताबिक, हमलावर ने सबसे पहले अपने घर में अपनी 39 वर्षीय मां और 11 वर्षीय सौतेले भाई की हत्या की। इसके बाद वह पास के हाई स्कूल पहुंची और वहां गोलीबारी की।

स्कूल के अंदर 6 लोग मृत पाए गए, जिनमें एक 39 वर्षीय महिला शिक्षक और पांच छात्र शामिल थे। मृतकों में तीन 12 वर्षीय लड़कियां और दो लड़के (12 और 13 वर्ष) शामिल हैं। एक छात्र सीढ़ियों के पास मिला, जबकि अन्य लाइब्रेरी में पाए गए।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि स्कूल में मारे गए लोगों से हमलावर का कोई पारिवारिक संबंध नहीं था। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि किसी विशेष व्यक्ति को निशाना बनाया गया था या नहीं। हमलावर ने बाद में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटनास्थल से एक लंबी बंदूक और संशोधित पिस्तौल बरामद की गई।

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प्रधानमंत्री और प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस दो मिनट के भीतर स्कूल पहुंच गई थी। अधिकारियों के पहुंचने पर उनकी दिशा में भी गोली चलाई गई।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि पूरा देश टंबलर रिज के लोगों के साथ खड़ा है। सरकारी इमारतों पर सात दिनों तक झंडे आधे झुके रहेंगे। ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने इसे बड़ी त्रासदी बताया और लोगों से एकजुट रहने की अपील की।

कनाडा में गन कंट्रोल कानून पर फिर बहस

कनाडा में सख्त गन कंट्रोल कानून लागू हैं और स्कूल शूटिंग की घटनाएं अपेक्षाकृत कम होती हैं। 2020 में नोवा स्कोटिया में 13 लोगों की हत्या के बाद सरकार ने कई नए हथियारों पर प्रतिबंध लगाए थे। इस ताजा घटना के बाद एक बार फिर बंदूक नियंत्रण कानूनों पर बहस तेज होने की संभावना है।

स्कूल जिला प्रशासन ने हाई स्कूल और एलीमेंट्री स्कूल को पूरे सप्ताह के लिए बंद कर दिया है। यह घटना कनाडा के इतिहास की सबसे दुखद घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

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बार-बार मिल रही धमकियों से पटना कोर्ट की सुरक्षा पर सवाल

पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, पांच दिनों में तीसरी बार हाई अलर्ट Patna Civil Court Bomb Threat से हिली राजधानी, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में


पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राजधानी पटना में न्याय व्यवस्था एक बार फिर गंभीर खतरे के साये में आ गई है। Patna Civil Court Bomb Threat को लेकर गुरुवार, 12 फरवरी को एक और धमकी भरा ईमेल सामने आया, जिससे पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। बीते पांच दिनों में यह तीसरी बार है जब पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इससे पहले 9 फरवरी और 11 फरवरी को भी इसी तरह के ईमेल भेजे जा चुके हैं।
ईमेल मिलते ही एहतियातन पटना सिविल कोर्ट परिसर को खाली करा लिया गया। पीरबहोर थाना पुलिस, बम डिस्पोजल स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंची और पूरे परिसर की सघन तलाशी शुरू की गई। फिलहाल कोर्ट में आम लोगों, वकीलों और कर्मचारियों की एंट्री पर रोक लगा दी गई है। सभी प्रवेश और निकास मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस साल अब तक Patna Civil Court Bomb Threat से जुड़े सात से आठ धमकी भरे ईमेल मिल चुके हैं। हालांकि अब तक किसी भी जांच में कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला है, लेकिन बार-बार आ रही धमकियों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है और जजों, वकीलों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
11 फरवरी को आए ईमेल में दावा किया गया था कि कोर्ट परिसर में पांच बम लगाए गए हैं और पूरी इमारत को उड़ाने की योजना है। उस दिन भी घंटों तलाशी अभियान चला, लेकिन कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। इसके बावजूद Patna Civil Court Bomb Threat की पुनरावृत्ति ने प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी है।
टाउन डीएसपी राजेश रंजन ने बताया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सामान्य न्यायिक कार्य शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की जान की सुरक्षा है, उसके बाद ही कामकाज को सामान्य किया जाएगा।

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पुलिस इस पूरे मामले की जांच साइबर एंगल से भी कर रही है। धमकी भरे ईमेल कहां से और किस मकसद से भेजे जा रहे हैं, इसे लेकर तकनीकी टीम सक्रिय है। आशंका जताई जा रही है कि यह किसी शरारती तत्व की हरकत हो सकती है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
राजधानी की सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक इमारत पर बार-बार मिल रही Patna Civil Court Bomb Threat ने न सिर्फ प्रशासन बल्कि आम नागरिकों में भी डर का माहौल पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि जांच एजेंसियां कब तक इस रहस्य से पर्दा उठाती हैं और दोषियों तक पहुंच पाती हैं।

मवेशी खाना की भूमि पर अतिक्रमण: क्या प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी?

पैमाइश के दो साल बाद भी मवेशी खाना की जमीन खाली क्यों नहीं? प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।नरही थाना क्षेत्र के खमीरपुर चट्टी में सड़क से सटी अराजी संख्या 348, रकबा 65 एअर की जमीन—जो राजस्व अभिलेखों में पुलिस विभाग के नाम मवेशी खाना (जानवर जेल) के रूप में दर्ज है—आज भी अतिक्रमण की गिरफ्त में है। हैरानी की बात यह है कि दो साल पहले पैमाइश और सीमांकन की कार्रवाई पूरी होने के बावजूद जमीन खाली नहीं कराई जा सकी।

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वर्ष 2024 में राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर सीमांकन और पैमाइश की थी। अतिक्रमण पाए जाने पर कथित कब्जेदारों को नोटिस जारी किए गए थे और स्वयं अतिक्रमण हटाने की चेतावनी भी दी गई। उस समय उम्मीद जगी थी कि सरकारी जमीन को जल्द मुक्त कराया जाएगा, लेकिन नोटिस के बाद न तो प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही बुलडोजर की आवाज सुनाई दी। इसके बाद पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
स्थानीय नागरिकों का सवाल सीधा है—जब जमीन पुलिस विभाग के मवेशी खाना के नाम दर्ज है और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित है, तो उसे खाली कराने में देरी क्यों? क्या विभाग को इस जमीन की जरूरत नहीं, या फिर कानूनी पेच, स्थगन आदेश, अथवा प्रभावशाली दबाव के चलते कार्रवाई रुकी हुई है?

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ग्रामीणों के अनुसार, पैमाइश के दौरान भूमि की स्पष्ट नाप-जोख हुई थी। सीमांकन के खंभे भी लगाए गए थे। इसके बावजूद अतिक्रमण जस का तस बना हुआ है। इससे प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोग तंज कसते हुए कहते हैं कि कहीं किसी “अदृश्य साए” के आगे कार्रवाई शिथिल तो नहीं पड़ गई।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कई मामलों में आपत्तियां, अपील, या न्यायालयीय प्रक्रियाएं कार्रवाई को लंबा कर देती हैं। हालांकि, इस प्रकरण में अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और गहराता जा रहा है। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि जनहित का मुद्दा है। मवेशी खाना (जानवर जेल) जैसी भूमि का उद्देश्य आवारा या जब्त पशुओं के रख-रखाव के साथ-साथ प्रशासनिक जरूरतों की पूर्ति करना होता है।

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यदि ऐसी जमीन वर्षों तक अतिक्रमित रहती है, तो इससे न केवल सरकारी योजनाओं में बाधा आती है, बल्कि आम जनता का प्रशासन पर भरोसा भी कमजोर होता है। स्थानीय नागरिकों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि मामले की पुनः समीक्षा कर समयबद्ध कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी भूमि को मुक्त कराया जा सके और भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस प्रश्न का उत्तर कब और किस रूप में देता है—क्या जमीन मुक्त होगी या सवाल यूं ही हवा में तैरते रहेंगे।

अंधविश्वास के जाल में फंसी महिला, आभूषण दुकान में चोरी की नाकाम कोशिश

नकली चेन से असली सोना बदलने की कोशिश, दुकानदार की समझदारी से खुलासा


सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।उपनगर के मोती महल मार्ग स्थित एक आभूषण दुकान पर बुधवार शाम एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहां एक महिला ने कथित तौर पर सोखा के बहकावे में आकर सोने की चेन चोरी करने की कोशिश की। दुकानदार की सतर्कता और त्वरित जांच के कारण बड़ी चोरी टल गई और महिला मौके पर ही पकड़ ली गई।
जानकारी के अनुसार, वार्ड नंबर दस निवासी अविनाश वर्मा पुत्र राजू वर्मा की आभूषण दुकान पर एक महिला ग्राहक बनकर पहुंची। उसने कई डिजाइनों की सोने की चेन देखीं और काफी देर तक चयन करने का नाटक करती रही। इसी दौरान महिला ने दस ग्राम की असली सोने की चेन को छुपा लिया और उसकी जगह पीतल से बनी सोने के रंग की नकली चेन दुकानदार को लौटा दी।

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दुकानदार को तब शक हुआ जब वजन करने पर लगभग पांच ग्राम का अंतर सामने आया। गहन जांच में यह स्पष्ट हो गया कि लौटाई गई चेन नकली है। इस पर दुकानदार ने शोर मचाया, जिससे महिला घबरा गई और चोरी की गई असली सोने की चेन वापस कर दी।
पूछताछ के दौरान महिला ने दावा किया कि उसने यह कदम किसी सोखा की सलाह पर “लाभ प्राप्ति” के लालच में उठाया था। घटना की सूचना तत्काल पीआरबी 112 को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और कोतवाली टीम ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
प्रभारी निरीक्षक महेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि आभूषण दुकान में सोने की चेन चोरी की सूचना मिली थी। महिला से पूछताछ की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह या ठगी का नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।

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यह घटना न केवल दुकानदारों के लिए सतर्क रहने का संदेश देती है, बल्कि आम नागरिकों को भी अंधविश्वास और झूठे लालच से बचने की सीख देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोखा, तांत्रिक या किसी भी तरह के झांसे में आकर अपराध करना कानूनन गंभीर अपराध है, जिसके परिणाम भविष्य में भारी पड़ सकते हैं।

वीआईपी रोड पर 10 करोड़ की लैंबॉर्गिनी से मचा हड़कंप, शिवम मिश्रा पुलिस हिरासत में

कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा: वीआईपी रोड दुर्घटना में शिवम मिश्रा गिरफ्तार, ड्राइवर बदलने का दावा पुलिस ने किया खारिज


कानपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। कानपुर की वीआईपी रोड पर हुए बहुचर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तंबाकू कारोबारी के.के. मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला अपनी हाई-प्रोफाइल कार, कथित समझौते और ड्राइवर बदलने के दावे के कारण लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। गिरफ्तारी के बाद सामने आए वीडियो में शिवम मिश्रा डरे-सहमे नजर आ रहे हैं, जिसे न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया है।
कानपुर के पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने पुष्टि की कि 35 वर्षीय शिवम मिश्रा को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें अदालत में पेश किया जाएगा। यह हादसा रविवार दोपहर करीब तीन बजे पॉश ग्वाल्टोली इलाके में हुआ, जब करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाली इटली की लग्जरी स्पोर्ट्स कार लैंबॉर्गिनी रेवुएल्टो ने पैदल यात्रियों और कई वाहनों को टक्कर मार दी। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी।

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इस कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसे में घायल हुए लोगों में ई-रिक्शा चालक मोहम्मद तौफीक (18) भी शामिल हैं। तौफीक ने ही इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। हालांकि, बाद में आरोपी पक्ष के वकील धर्मेंद्र सिंह ने दावा किया कि पीड़ित से समझौता हो गया है और अब वह कानूनी कार्रवाई नहीं चाहता। बावजूद इसके, पुलिस ने स्पष्ट किया कि गंभीर सड़क दुर्घटना और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई कानून के अनुसार जारी रहती है।
बुधवार को मामले ने नया मोड़ तब लिया, जब मोहन नामक एक व्यक्ति सामने आया और खुद को कार का ड्राइवर बताते हुए दावा किया कि हादसे के वक्त वही वाहन चला रहा था, न कि शिवम मिश्रा। पुलिस ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और प्रत्यक्ष गवाहों के आधार पर यह साफ है कि दुर्घटना के समय लैंबॉर्गिनी कार शिवम मिश्रा ही चला रहा था।

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पुलिस का कहना है कि कानपुर वीआईपी रोड दुर्घटना में नियमों की अनदेखी, तेज रफ्तार और सार्वजनिक जीवन को खतरे में डालने जैसे पहलुओं की गहन जांच की गई। इसी आधार पर गिरफ्तारी की गई है। यह मामला एक बार फिर शहर में लग्जरी कारों की रफ्तार, सड़क सुरक्षा और कानून के सख्त पालन पर बहस को तेज करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लैंबॉर्गिनी रेवुएल्टो हादसा कानपुर जैसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई से ही सड़क सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि केस को फास्ट-ट्रैक आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाई जाएगी।

ऊर्जा नीति और आयात शुल्क पर विपक्ष बनाम सरकार की सीधी टक्कर

लोकसभा में राहुल गांधी पर बड़ा राजनीतिक हमला: निशिकांत दुबे ने पेश किया प्रस्ताव, सदस्यता रद्द करने की मांग


नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में गुरुवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर देश को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। निशिकांत दुबे राहुल गांधी प्रस्ताव के जरिए उनकी संसदीय सदस्यता रद्द करने और आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि उन्होंने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ प्रस्ताव इसलिए पेश किया क्योंकि राहुल गांधी कथित रूप से जॉर्ज सोरोस जैसी विदेशी ताकतों के प्रभाव में आकर देश को भ्रमित करने वाले बयान दे रहे हैं। दुबे का आरोप है कि इस तरह के बयान भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
यह निशिकांत दुबे राहुल गांधी प्रस्ताव राहुल गांधी द्वारा एक दिन पहले लोकसभा में दिए गए भाषण के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाया था।
राहुल गांधी का सरकार पर तीखा प्रहार
लोकसभा में अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि दुनिया एक वैश्विक संकट के दौर से गुजर रही है। उन्होंने कहा कि एक महाशक्ति का युग समाप्त हो रहा है, भू-राजनीतिक संघर्ष तेज हो रहे हैं और ऊर्जा व वित्त को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन सच्चाइयों को जानते हुए भी सरकार ने अमेरिका को ऊर्जा और वित्तीय प्रणालियों का दुरुपयोग करने की अनुमति दी, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि जब अमेरिका यह तय करता है कि भारत किस देश से तेल खरीदे या न खरीदे, तो यह सीधे तौर पर भारत की स्वतंत्र नीति पर सवाल खड़ा करता है।
शुल्क और आयात पर सवाल
राहुल गांधी ने आयात शुल्क को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि औसत शुल्क करीब 3 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत हो गया है, यानी लगभग छह गुना वृद्धि। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत में अमेरिकी आयात 46 अरब डॉलर से बढ़कर 146 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। गांधी ने इस स्थिति को “बेतुका” बताते हुए कहा कि बिना ठोस प्रतिबद्धता के भारत हर साल करीब 100 अरब डॉलर का अतिरिक्त आयात बढ़ाने को मजबूर किया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
निशिकांत दुबे राहुल गांधी प्रस्ताव के बाद संसद और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया है, जबकि भाजपा का कहना है कि राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयान बर्दाश्त नहीं किए जा सकते।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और भारतीय राजनीति दोनों में बड़े टकराव का कारण बन सकता है।

डांट से नाराज़ भाई ने पार की हैवानियत की हद

डांट से नाराज़ छोटे भाई की खौफनाक साजिश, बड़े भाई को कमरे में बंद कर पेट्रोल डालकर लगाई आग


सलेमपुर/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)।उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक दिल दहला देने वाली अपराध खबर सामने आई है। कोतवाली सलेमपुर क्षेत्र के ठोका बंसी गांव में पारिवारिक विवाद इस कदर बढ़ गया कि छोटे भाई ने बड़े भाई को जिंदा जलाने की साजिश रच डाली। गनीमत रही कि समय रहते ग्रामीणों की मदद से पीड़ित की जान बच गई।
पीड़ित अरुण यादव ने कोतवाली में दी गई तहरीर में बताया कि 2 फरवरी की रात करीब 9 बजे वह अपने कमरे में सो रहे थे। इसी दौरान उनके छोटे भाई आशीष यादव ने कथित रूप से कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर ताला लगा दिया। इसके बाद जंगले का शीशा तोड़कर पेट्रोल और थिनर अंदर छिड़क दिया और आग लगा दी।

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आग की लपटों और धुएं से अरुण की नींद खुली। उन्होंने दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन बाहर से ताला बंद था। जान बचाने के लिए उन्होंने पास में रहने वाले अपने मित्र को फोन किया। सूचना मिलते ही मित्र गांव के अन्य लोगों के साथ मौके पर पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपी दरवाजे के पास खड़ा होकर लोगों को रोकने की कोशिश कर रहा था। ग्रामीणों ने किसी तरह उसे हटाया, दरवाजा तोड़ा और अरुण को बाहर निकाला।
पीड़ित का आरोप है कि घटना को सात दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इतना ही नहीं, आरोपी लगातार जान से मारने की धमकी भी दे रहा है। इससे पूरा परिवार दहशत में है।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि घर में पहले भी विवाद होते रहे हैं। घटना से कुछ समय पहले बड़े भाई ने छोटे भाई को किसी बात पर डांट दिया था, जिससे वह नाराज था। इसी नाराजगी ने उसे इस खौफनाक कदम तक पहुंचा दिया।
पुलिस का कहना है कि मामला गंभीर है, जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, परिजन और ग्रामीण देवरिया पुलिस से आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
यह घटना न सिर्फ देवरिया अपराध समाचार में चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि पारिवारिक कलह के बढ़ते अपराधों पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

किसानों और व्यापारियों के लिए जीवनरेखा बनी मझवारा सब्जी मंडी वर्षों से बंद

मऊ में जर्जर सड़कें, बंद सब्जी मंडी और मझवारा चौकी को थाना बनाने की उठी जोरदार मांग


मऊ ( राष्ट्र की परम्परा) मऊ जनपद के घोसी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मझवारा, रसरी, गोडसरा, बरूहा सहित आसपास के गांवों में लंबे समय से चली आ रही मूलभूत समस्याओं को लेकर नागरिकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आया है। समाजसेवी ए.के. सहाय के नेतृत्व में क्षेत्रीय लोगों ने प्रभारी मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए जर्जर सड़कों के निर्माण, बंद पड़ी मझवारा सब्जी मंडी को पुनः चालू करने और मझवारा पुलिस चौकी को थाना का दर्जा देने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि वर्षों की उपेक्षा के चलते क्षेत्र में सड़क, यातायात, सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं। खराब सड़कों के कारण जहां आम लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं बंद सब्जी मंडी के कारण किसान और छोटे व्यापारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इसके साथ ही मझवारा पुलिस चौकी को थाना का दर्जा न मिलने से कानून-व्यवस्था पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

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जनहित से जुड़ी प्रमुख मांगें
नागरिकों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कई अहम मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है। इनमें नकटा से श्री हनुमान मंदिर रसरी तक जर्जर सड़क का निर्माण, मझवारा सब्जी मंडी को तत्काल पुनः संचालित करना, मझवारा से मां वैष्णो इंटर कॉलेज तक नई सड़क बनवाना शामिल है। इसके अलावा कृषक इंटर कॉलेज से सरवानपुर तक, बेला सुल्तानपुर स्थित चौहान राजभर बस्ती तक, गोडसरा में स्व. कल्पनाथ यादव के घर से प्राथमिक विद्यालय तक तथा मझवारा–गोडसरा मार्ग पर लगभग 500 मीटर क्षतिग्रस्त सड़क के पुनर्निर्माण की मांग की गई है।
बरूहा यादव बस्ती के बीच से गुजरने वाले पिच मार्ग की स्थिति भी बेहद खराब बताई गई है, जिसे तत्काल ठीक कराने की आवश्यकता जताई गई। नागरिकों का कहना है कि यदि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र में जनआक्रोश और बढ़ सकता है।

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मझवारा पुलिस चौकी को थाना बनाने की मांग
सबसे अहम मांगों में मझवारा पुलिस चौकी को थाना का दर्जा दिया जाना शामिल है। क्षेत्रीय लोगों का मानना है कि थाना बनने से अपराध नियंत्रण, त्वरित पुलिस कार्रवाई और आमजन में सुरक्षा की भावना मजबूत होगी। वर्तमान में दूर स्थित थानों पर निर्भरता के कारण पीड़ितों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।

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स्थलीय निरीक्षण की मांग
ज्ञापन में प्रभारी मंत्री से आग्रह किया गया है कि वे स्वयं या संबंधित अधिकारियों के माध्यम से क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण कराएं और संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दें। इस अवसर पर विक्रमजीत सिंह, सुनील गुप्ता, जिलाध्यक्ष रामाश्रय मौर्य सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यह पूरा मामला मऊ की जर्जर सड़कें, मझवारा सब्जी मंडी, और मझवारा पुलिस चौकी को थाना जैसे अहम जनहित मुद्दों से जुड़ा है, जिनका समाधान क्षेत्र के समग्र विकास के लिए आवश्यक माना जा रहा है।

आध्यात्मिक चेतना से राष्ट्र निर्माण की ओर अग्रसर गायत्री यज्ञ

गायत्री यज्ञ: राष्ट्र चेतना के पुनर्जागरण का सशक्त माध्यम


महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जब समाज दिशाहीनता, नैतिक पतन और केवल भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में उलझ जाता है, तब आत्मचिंतन और चेतना के जागरण की आवश्यकता सबसे अधिक महसूस होती है। गायत्री यज्ञ इसी आत्म जागरण और राष्ट्र चेतना के पुनर्जागरण का प्रभावशाली माध्यम है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विचारों की शुद्धि, जीवन के परिष्कार और समाज के उत्थान की संगठित प्रक्रिया है।
ॐ भूर्भुवः स्वः का उच्चारण मात्र मंत्रोच्चार नहीं, बल्कि मानव चेतना को ऊर्ध्वगामी करने का आह्वान है। गायत्री यज्ञ की अग्नि में आहुति देते समय साधक केवल समिधा नहीं अर्पित करता, वह अपने अहंकार, अवगुण और नकारात्मक प्रवृत्तियों का भी त्याग करता है। यही त्याग उसे सामाजिक, नैतिक और राष्ट्रीय उत्तरदायित्वों की ओर अग्रसर करता है।

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आज का समाज नशा, प्रदूषण, पारिवारिक विघटन, बेरोजगारी और संस्कारहीनता जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में गायत्री यज्ञ सात सूत्रीय संकल्प के माध्यम से आत्मबोध, संस्कारयुक्त शिक्षा, नारी सम्मान, स्वावलंबन और पर्यावरण संरक्षण का स्पष्ट संदेश देता है। यही कारण है कि गायत्री यज्ञ को सामाजिक क्रांति का सूत्रधार माना जाता है, जो व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करता है।

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यज्ञ की अग्नि यह स्मरण कराती है कि प्रकाश फैलाने के लिए स्वयं जलना पड़ता है। राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। जब व्यक्ति अपने भीतर की दुर्बलताओं को त्यागकर समाजहित में स्वयं को समर्पित करता है, तभी एक सशक्त, संस्कारवान और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव होता है। गायत्री यज्ञ इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनता है।

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गायत्री यज्ञ का वास्तविक अर्थ है—विचारों की शुद्धि, चरित्र का निर्माण और समाज का उत्थान। यदि हम इसे केवल एक परंपरागत अनुष्ठान मानने के बजाय इसके संदेशों को अपने दैनिक जीवन में उतारें, तो यही आयोजन राष्ट्र चेतना के पुनर्जागरण का आंदोलन बन सकता है। आज आवश्यकता है कि यज्ञ की लौ हमारे भीतर भी प्रज्वलित हो—संस्कारों की, सद्भाव की और सामाजिक जिम्मेदारी की। तभी यह महायज्ञ अपने वास्तविक उद्देश्य में सफल होगा।

गैस डिलीवरी पिकअप पर हमला, 11 हजार रुपये लूटे

देवरिया में पिकअप चालक पर जानलेवा हमला, चाकू मारकर 11 हजार रुपये लूटे
भलुअनी–बरहज मार्ग पर सुबह-सुबह हुई वारदात से क्षेत्र में दहशत



देवरिया (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)जनपद में पिकअप चालक पर हमला और देवरिया लूट की घटना ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार सुबह करीब 6:25 बजे बलुअनी से आगे जल जीवन मिशन गोदाम के पास अज्ञात बदमाशों ने एक पिकअप वाहन चालक को निशाना बनाया। बदमाशों ने पहले वाहन रोकने की कोशिश की, फिर शीशा तोड़कर हमला किया और अंततः चाकू मारकर 11 हजार रुपये लूट लिए।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित बबन यादव पुत्र रामदेश यादव, निवासी ग्राम व पोस्ट मरहवां, थाना खुखुन्दू, जनपद देवरिया, बरहन गैस सर्विस में पिकअप वाहन (UP52 AT 1788) से होम डिलीवरी का कार्य करते हैं। रोज की तरह वह सुबह गैस लेने बरहज जा रहे थे। इसी दौरान बलुअनी के आगे कुछ अज्ञात लोगों ने उनका वाहन रोकने का प्रयास किया। चालक द्वारा वाहन न रोकने पर बदमाशों ने पत्थर मारकर शीशा तोड़ दिया।

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इसके बाद मोटरसाइकिल से आए करीब आधा दर्जन बदमाशों ने ओवरटेक कर वाहन के आगे गाड़ी रोक दी और पिकअप को घेर लिया। आरोप है कि बदमाशों ने चालक को जबरन नीचे खींच लिया और दाहिने हाथ में चाकू मारकर घायल कर दिया। हमलावर मौके से नकद 11,000 रुपये लूटकर फरार हो गए। घायल चालक को स्थानीय लोगों की मदद से उपचार के लिए भेजा गया।

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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और बदमाशों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं से आमजन में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों ने देवरिया अपराध समाचार में बढ़ती वारदातों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पीड़ित ने पुलिस से लिखित शिकायत कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर मामले का खुलासा किया जाएगा।
यह देवरिया लूट की घटना एक बार फिर दिखाती है कि सुबह के समय भी राहगीर सुरक्षित नहीं हैं। लोगों ने गश्त बढ़ाने और संवेदनशील मार्गों पर निगरानी की मांग की है।

यातायात नियम उल्लंघन पर सख्ती, अवैध गतिविधियों पर कड़ा पहरा

देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान: 332 लोगों व 203 वाहनों का सघन सत्यापन, पुलिस ने बढ़ाया सुरक्षा कवच


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) जनपद में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के तहत बुधवार सुबह व्यापक पुलिस कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देशन में यह विशेष अभियान सुबह 5 बजे से 8 बजे तक जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में एक साथ चलाया गया। अभियान का फोकस नागरिकों से सीधा संवाद, अपराध की रोकथाम और सामुदायिक पुलिसिंग को मजबूत करना रहा।

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अभियान के दौरान थाना प्रभारी, क्षेत्राधिकारी और पुलिस बल पार्कों, प्रमुख सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचे। मॉर्निंग वॉक पर निकले नागरिकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी गईं और सुरक्षा को लेकर भरोसा दिलाया गया। देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान के माध्यम से पुलिस ने यह संदेश दिया कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विशेष चेकिंग में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन जांच की गई। तीन सवारी, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाना, मॉडिफाइड साइलेंसर वाले दुपहिया वाहन तथा यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई हुई। साथ ही अवैध असलहा, मादक पदार्थ और चोरी की गाड़ियों की तलाश में अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।

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आंकड़ों के अनुसार, जिले के 20 स्थानों पर चेकिंग की गई, जिसमें 332 व्यक्तियों और 203 वाहनों का सत्यापन किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान जैसे कार्यक्रम आगे भी नियमित रूप से चलाए जाएंगे ताकि अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और आमजन में सुरक्षा की भावना को और मजबूत किया जा सके।

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स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की। मॉर्निंग वॉक के दौरान मौजूद नागरिकों ने सुरक्षा व्यवस्था को संतोषजनक बताया और पुलिस के संवादात्मक रवैये की प्रशंसा की। जनपदीय पुलिस ने स्पष्ट किया कि शांति, सुरक्षा और विश्वास बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा देवरिया मार्निंग वॉकर चेकिंग अभियान इसी दिशा में एक ठोस कदम है।

अर्ध निर्मित नाली के बीच खड़ा बिजली पोल बना खतरे का खंभा

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सिंदुरिया चौराहे पर बन रही अर्धनिर्मित नाली इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। करीब 36 लाख रुपये की लागत से 400 मीटर लंबी इस नाली का निर्माण जिला पंचायत विभाग द्वारा कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य के बीचो- बीच खड़ा बिजली का पोल अब हादसों को खुला निमंत्रण देता नजर आ रहा है।
जानकारी के अनुसार मुख्य चौराहे से झनझनपुर मार्ग होते हुए पोखरे तक बनाई जा रही यह नाली धीमी गति और अनियमितताओं के आरोपों से घिर गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है, वहीं बीच नाली में खड़े पेड़ और बिजली के खंभे खतरे का कारण बने हुए है।
नाली निर्माण के चलते जहां सड़क संकरी हो गई है, वहीं दुकानदारों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। ऊपर से बीच नाली में खड़ा बिजली पोल राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। बारिश या करंट की आशंका की स्थिति में यह पोल कभी भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है।
स्थानीय व्यापारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माणाधीन नाली के बीच से पेड़ों और बिजली के खंभों को तत्काल हटवाया जाए, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी से बचा जा सके।
अवर अभियंता दीपक साहनी ने बताया कि प्रस्ताव में पेड़ों और विद्युत पोल को हटवाने का उल्लेख था, लेकिन कार्य शुरू होने के बाद किसी भी स्तर पर पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि फिलहाल पोल को नाली के बीच ही जाम किया जा सकता है और बाद में असुविधा होने पर हटवाया जाएगा।
यह बयान खुद कई सवाल खड़े करता है—क्या पहले खतरा खड़ा किया जाएगा और फिर समाधान तलाशा जाएगा।
सिंदुरिया चौराहे पर खड़ा यह ‘खतरे का खंभा’ अब प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर किस बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग समय रहते पहल करता है या फिर यह अर्धनिर्मित नाली और बीच का पोल किसी अनहोनी की वजह बनता है।

25 वर्ष पूरे होने पर प्रभा परिवार का ऊर्जा उत्सव: कर्मयोगियों का गौरवगान, सम्मान और पुरस्कारों से सजा भव्य आयोजन

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। प्रभा देवी शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित ब्लूमिंग बड्स स्कूल, खलीलाबाद के विशाल प्रांगण में वार्षिक ‘ऊर्जा समारोह’ इस वर्ष विशेष उल्लास के साथ आयोजित किया गया। संस्थान के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने उत्सव का रूप ले लिया। समारोह में संस्थान से जुड़े विभिन्न शिक्षण संस्थानों तथा ऑटोमोबाइल, औद्योगिक और स्वास्थ्य क्षेत्रों में कार्यरत कर्मयोगियों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि राम प्रसाद पांडेय, रामा प्रसाद शुक्ला, रमाशंकर शुक्ला, प्रबंध निर्देशिका पुष्पा चतुर्वेदी एवं अध्यक्ष विनय कुमार चतुर्वेदी ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया। मंच संचालन अमरीन निशा और मनीला मिंज ने संयुक्त रूप से किया।
समारोह में शिक्षकों, कर्मचारियों, वाहन चालकों-परिचालकों, चैनल प्रबंधकों तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कर्मयोगियों को 2,500 रुपये से लेकर 3.25 लाख रुपये तक के चेक, मोटरसाइकिल सहित अन्य आकर्षक उपहार प्रदान किए गए। सम्मान पाकर कर्मयोगियों के चेहरे पर गर्व और उत्साह साफ दिखाई दिया।
अध्यक्ष विनय कुमार चतुर्वेदी और प्रबंध निर्देशिका पुष्पा चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि संस्थान की प्रगति कर्मयोगियों की निष्ठा और परिश्रम का परिणाम है। निदेशक वैभव चतुर्वेदी ने कहा कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और निरंतर प्रयास ही संस्थान की पहचान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मयोगियों को आगे बढ़ने के अवसर देना और उनकी प्रतिभा को मंच प्रदान करना ही संस्थान का मूल उद्देश्य है। उन्होंने जानकारी दी कि 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सिल्वर जुबली समारोह के अंतर्गत बुधवार देर शाम गायक स्टेबिन बेन की प्रस्तुति प्रस्तावित है। कार्यक्रम में अधिक से अधिक सहभागिता की अपील की गई।
‘ऊर्जा समारोह’ ने न केवल कर्मयोगियों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि संस्थान की एकता, समर्पण और प्रगतिशील दृष्टिकोण को भी सशक्त रूप में प्रदर्शित किया।
इस अवसर पर संस्थान की संरक्षक श्रीमती प्रतिष्ठा चतुर्वेदी, उप निदेशक अदिति शुक्ला, नीलम दुबे, अजय कुमार दुबे, राजेश पांडेय सहित विभिन्न संस्थानों के प्राचार्यगण, प्रधानाचार्य गण, प्राध्यापक प्राध्यापिकायें व सभी कर्मयोगी उपस्थित रहेl

कुशीनगर में सैनिक सम्मान के साथ अंतिम विदाई, ‘अमर रहे’ के नारों से गूंजा गांव

राइफलमैन ओमप्रकाश गुप्ता का सैनिक सम्मान के साथ पुरैनी घाट पर अंतिम संस्कार, गांव में उमड़ा जनसैलाब


कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद कुशीनगर के रामकोला थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पुरैनी (टोला विजयपुर) निवासी राइफलमैन ओमप्रकाश गुप्ता का पार्थिव शरीर मंगलवार को गांव पहुंचते ही शोक की लहर दौड़ गई। मणिपुर–म्यांमार सीमा के दुर्गम क्षेत्र में तैनात रहे राइफलमैन ओमप्रकाश गुप्ता (उम्र 52 वर्ष), पुत्र कोटयी गुप्ता, का इलाज के दौरान 9 फरवरी की रात्रि दिल्ली में निधन हो गया था।
सेना के संरक्षण में पार्थिव शरीर को पैतृक गांव लाया गया। इसके बाद पुरैनी नदी घाट पर सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सेना की टुकड़ी ने राष्ट्रीय ध्वज से लिपटे पार्थिव शरीर को सलामी दी और पुष्पचक्र अर्पित कर वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
अंतिम संस्कार के समय घाट पर हजारों ग्रामीणों की आंखें नम थीं। हर ओर “भारत माता की जय” और “अमर रहे” के नारों के बीच माहौल गमगीन रहा। शहीद सैनिक के परिवार को ढांढस बंधाते हुए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने देश सेवा में उनके योगदान को याद किया।

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सेना, पूर्व सैनिकों और जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में राइफलमैन बिजेंद्र कुमार, पूर्व सैनिक पारस नाथ गुप्ता, एसएसबी, एनसीसी, अन्य पूर्व सैनिक अधिकारी, तथा जनप्रतिनिधियों में पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह, द्विग्विजय सिंह, राजेश प्रताप राव, बंटी राव, भगवन्त यादव, पूर्व प्रधान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग शामिल रहे। महिलाओं और युवाओं ने भी नम आंखों से पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

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देश सेवा का प्रेरणादायी जीवन
राइफलमैन ओमप्रकाश गुप्ता ने वर्षों तक सीमांत क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में देश की सेवा की। मणिपुर–म्यांमार जैसे दुर्गम इलाकों में तैनाती के दौरान उन्होंने अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और साहस का परिचय दिया। उनका निधन न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।

बिहार शिक्षक भर्ती 2026: कक्षा 1 से 12 तक हजारों पदों पर नियुक्ति तय

BPSC TRE 4 शिक्षक बहाली 2026: बिहार में 46 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी तेज, डोमिसाइल नीति पहली बार लागू

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)बिहार में सरकारी शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। BPSC TRE 4 शिक्षक बहाली और प्रधानाध्यापक भर्ती को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को शिक्षा विभाग की ओर से करीब 46 हजार पदों के लिए अधियाचना प्राप्त हो चुकी है। यह प्रस्ताव सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से आयोग को भेजा गया है, जिसके बाद BPSC ने आधिकारिक नोटिस भी जारी कर दिया है।
TRE-4 के तहत 44 हजार से अधिक शिक्षक पद
TRE-4 के अंतर्गत राज्य के सरकारी विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। विभागीय जानकारी के अनुसार—
कक्षा 1 से 8 : लगभग 20,000 पद,कक्षा 9 से 10 : करीब 12,000 पद
कक्षा 11 से 12 : लगभग 13,000 पद,इस भर्ती में गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और कॉमर्स विषयों में सर्वाधिक पद रहने की संभावना है। लंबे समय से रिक्त चल रहे पदों के भरने से राज्य की शिक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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प्रदर्शन से पहले आया नोटिस, बढ़ी उम्मीद
16 फरवरी को पटना में प्रस्तावित छात्र प्रदर्शन से पहले ही आयोग द्वारा नोटिस जारी कर दिया गया। इससे यह संकेत मिला है कि BPSC TRE 4 शिक्षक बहाली को लेकर सरकार और आयोग दोनों गंभीर हैं। अब जल्द ही समेकित विज्ञापन जारी किया जाएगा, जिसके बाद ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
बिहार में शिक्षकों की वर्तमान स्थिति
फिलहाल बिहार में लगभग 6 लाख शिक्षक कार्यरत हैं। बीते दो वर्षों में TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के माध्यम से करीब 2.27 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। इसके अलावा लगभग 3 लाख नियोजित शिक्षक सक्षमता परीक्षा पास कर राज्यकर्मी बन चुके हैं। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने भी TRE-4 की वैकेंसी जल्द जारी होने के संकेत दिए हैं।

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महिलाओं को 35% आरक्षण
इस भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा, जो केवल बिहार के मूल निवासी महिला अभ्यर्थियों के लिए मान्य होगा। साथ ही इस बार एक अभ्यर्थी का एक ही रिजल्ट जारी किया जाएगा, जिससे चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी।
पहली बार लागू होगी डोमिसाइल नीति
BPSC TRE 4 शिक्षक बहाली में पहली बार डोमिसाइल नीति लागू की जा रही है। इसके तहत शिक्षा विभाग के साथ-साथ SC-ST एवं पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग में भी शिक्षक और प्रधानाध्यापक पदों पर भर्ती होगी। आयोग के अनुसार, विज्ञापन जारी होते ही उम्मीदवार BPSC की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन कर सकेंगे।