Monday, May 4, 2026
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सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम के लिए प्रशासन सख्त, ओवरस्पीडिंग पर विशेष अभियान

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)जनपद में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट सभागार में जिला सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी श्री प्रवीण मिश्र ने की। इस दौरान सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम, हिट एंड रन मामलों में सहायता राशि वितरण, ओवरस्पीडिंग पर नियंत्रण तथा कमर्शियल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की गई।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। समीक्षा के दौरान सामने आया कि सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण ओवरस्पीडिंग है। आंकड़ों के अनुसार करीब 70 प्रतिशत सड़क हादसे तेज रफ्तार के कारण हो रहे हैं। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को विशेष प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए।
सड़क निर्माण एजेंसियों को दिए गए निर्देश
बैठक के दौरान अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी ने बताया कि जनप्रतिनिधियों, यातायात पुलिस और सेव लाइफ फाउंडेशन द्वारा चिन्हित कई सड़क सुरक्षा संबंधी कार्य अभी भी लंबित हैं। उन्होंने बताया कि पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर 113 दुर्घटना संभावित स्थलों की पहचान की गई है।
जिलाधिकारी ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) गोरखपुर और गाजीपुर के अधिकारियों को चिन्हित स्थानों पर जल्द से जल्द सुधार कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही पीडब्ल्यूडी को चिन्हित 113 स्थानों का सर्वे कर प्रस्ताव शासन को भेजने को कहा गया, ताकि दुर्घटना संभावित स्थानों पर समय रहते सुरक्षा उपाय लागू किए जा सकें।
हिट एंड रन मामलों में पीड़ितों को आर्थिक सहायता
बैठक में हिट एंड रन मामलों की समीक्षा भी की गई। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024 के बाद से अब तक 60 हिट एंड रन मामलों को चिन्हित किया गया है। सरकार द्वारा ऐसे मामलों में मृतकों के आश्रितों को दो लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को सहायता राशि जल्द उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने पीड़ितों और उनके परिजनों से उपजिलाधिकारी कार्यालय में आवेदन करने की अपील भी की, ताकि सहायता वितरण में किसी प्रकार की देरी न हो।
कमर्शियल वाहनों की सुरक्षा पर विशेष जोर
सड़क दुर्घटनाओं में भारी और कमर्शियल वाहनों की भूमिका को देखते हुए जिलाधिकारी ने एआरटीओ और यातायात विभाग को बड़े वाहन मालिकों के साथ बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कमर्शियल वाहनों में प्रशिक्षित ड्राइवरों की तैनाती अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का मानना है कि प्रशिक्षित चालकों की कमी और लापरवाही भी सड़क हादसों का एक बड़ा कारण बन रही है। इसलिए वाहन मालिकों की जिम्मेदारी तय करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
पैदल और दोपहिया वाहन चालकों की लापरवाही भी बड़ी समस्या
बैठक में यह भी सामने आया कि सड़क दुर्घटनाओं में पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और दोपहिया वाहन चालकों की लापरवाही भी प्रमुख कारण बन रही है। हेलमेट का उपयोग न करना, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और गलत दिशा में वाहन चलाना दुर्घटनाओं की आशंका को बढ़ा रहा है।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को यातायात नियमों के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना बेहद आवश्यक है।
अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाने के निर्देश
बैठक में सड़क किनारे बढ़ते अतिक्रमण को भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण माना गया। जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद और पुलिस विभाग को संयुक्त अभियान चलाकर सड़क किनारे से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियमित कार्रवाई से यातायात व्यवस्था सुचारू होगी और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
क्रिटिकल कॉरिडोर और ब्लैक स्पॉट चिन्हित करने पर जोर
प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जनपद के तीन क्रिटिकल कॉरिडोर और दस क्रिटिकल प्वाइंट चिन्हित करने का निर्णय लिया है। इन स्थानों पर विशेष निगरानी, संकेतक बोर्ड, स्पीड कंट्रोल उपाय और अन्य सुरक्षा संसाधन विकसित किए जाएंगे।
यातायात नियम उल्लंघन पर कार्रवाई के आंकड़े
बैठक में एआरटीओ ने प्रवर्तन कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी महीने में कई यातायात नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की गई। इसमें बिना हेलमेट 304 चालान, बिना सीट बेल्ट 52 चालान, गलत दिशा में वाहन चलाने पर 17 चालान और ड्रंक एंड ड्राइव के 7 मामलों में कार्रवाई शामिल है।
इसके अलावा वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करने वाले 23 चालकों पर कार्रवाई की गई। ओवरलोडिंग करने वाले 14 वाहनों पर चालान किया गया। बिना लाइसेंस वाहन चलाने वाले 2, स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले 4 और बिना फिटनेस प्रमाणपत्र के 17 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को प्रवर्तन अभियान और तेज करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य सेवाओं को भी जोड़ा गया सड़क सुरक्षा से
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि ऐसे अस्पतालों की सूची तैयार की जाए जहां दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस इलाज और आयुष्मान कार्ड धारकों का उपचार संभव हो। इसका उद्देश्य दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन सख्त
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सड़क सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच बेहतर समन्वय और नियमित समीक्षा से सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। प्रशासन सड़क सुरक्षा को लेकर जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर देगा।
बैठक में पुलिस विभाग, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे

डॉ कोस्तुभ ने सुनी फरियाद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
लखनऊ से कर रहे सीधी
निगरानी

संबंधित अधिकारियों को तत्काल निस्तारण के निर्देश

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
आमजन की शिकायतों के त्वरित समाधान को लेकर गोरखपुर पुलिस प्रशासन पूरी सक्रियता के साथ कार्य करता नजर आया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. कोस्तुभ ने अपने कार्यालय में पहुंचे फरियादियों की समस्याएं की सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए। खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ से की जा रही थी।
एसएसपी कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग विभिन्न समस्याओं को लेकर पहुंचे। इनमें भूमि विवाद से जुड़े पुलिस प्रकरण, मुकदमे में कार्रवाई की मांग, लंबित विवेचना, पारिवारिक विवाद, मारपीट, साइबर अपराध, धोखाधड़ी तथा थाना स्तर पर सुनवाई न होने जैसी शिकायतें प्रमुख रहीं। डॉ. कोस्तुभ ने प्रत्येक फरियादी की बात गंभीरता से सुनी और संबंधित क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी या विवेचक को फोन पर निर्देशित किया।
जनसुनवाई के दौरान कई मामलों में एसएसपी ने संबंधित अधिकारी को सीधे फोन मिलाकर शिकायतकर्ता से बात कराई, ताकि समस्या की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि प्रकरण का निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी पीड़ित को अनावश्यक रूप से थाने के चक्कर न लगाने पड़ें।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ से की जा रही थी। मुख्यमंत्री ने कुछ मामलों में स्वयं संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता अनिवार्य है। पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी के चलते पुलिस अधिकारियों में अतिरिक्त सक्रियता देखी गई। जिन मामलों में लापरवाही की आशंका जताई गई, उनमें तत्काल रिपोर्ट तलब की गई। एसएसपी डॉ. कोस्तुभ ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक शिकायत का विधिवत पंजीकरण किया जाएगा और उसकी प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को निर्देश दिया कि जनसुनवाई से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
एसएसपी ने यह भी कहा कि फरियादियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी समस्या को पूरी संवेदनशीलता से सुना जाए। पुलिस का उद्देश्य केवल मुकदमा दर्ज करना नहीं, बल्कि पीड़ित को वास्तविक राहत दिलाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जनसुनवाई में आए कई फरियादियों ने मौके पर ही अपनी शिकायतों पर कार्रवाई शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया। कुछ मामलों में तत्काल निर्देश जारी किए गए, तो कुछ में निर्धारित समयसीमा तय कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
गोरखपुर एसएसपी कार्यालय में यह जनसुनवाई न केवल शिकायतों के समाधान का माध्यम बनी, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास को भी मजबूत करती नजर आई। मुख्यमंत्री की निगरानी और एसएसपी की सक्रियता से यह स्पष्ट संदेश गया कि शासन और पुलिस प्रशासन आमजन को त्वरित न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

राफेल फैक्ट्री में कैमरा कांड, भारत को 114 जेट की मंजूरी

भारत द्वारा राफेल फाइटर जेट को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में बनाने की मंजूरी के बीच फ्रांस में बड़ा सुरक्षा उल्लंघन सामने आया है।

Dassault Aviation के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में एक कर्मचारी को कैमरा लगे चश्मे के साथ काम करते हुए पकड़ा गया है। बिना अनुमति रिकॉर्डिंग करने के आरोप में उसे हिरासत में लिया गया है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला दर्ज करने की तैयारी की जा रही है।

राफेल प्लांट में सुरक्षा में बड़ी सेंध

Rafale 4.5 जेनरेशन का ओमनी-रोल फाइटर जेट है, जो परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। इसमें AESA रडार, उन्नत मिसाइल सिस्टम और आधुनिक एवियोनिक्स लगे हैं।

लड़ाकू विमानों में हथियारों और मिसाइलों का इंटीग्रेशन अत्यंत संवेदनशील तकनीक माना जाता है। यही वजह है कि कंपनी ने मामले को गंभीर मानते हुए आरोपी कर्मचारी को फ्रांसीसी पुलिस के हवाले कर दिया।

भारत में बनेगा राफेल, 114 विमानों को मंजूरी

Ministry of Defence ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों के निर्माण को मंजूरी दी है। प्रस्ताव के तहत:

• 18 विमान सीधे फ्रांस से खरीदे जाएंगे
• 96 विमान भारत में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बनाए जाएंगे
• कुछ दो-सीटर विमान पायलट प्रशिक्षण के लिए होंगे

राफेल जैसे आधुनिक फाइटर जेट भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को मजबूत करेंगे।

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कई देशों के पास है राफेल

राफेल फाइटर जेट भारत और फ्रांस के अलावा यूएई, मिस्र और इंडोनेशिया जैसे देशों की वायुसेना में भी शामिल है।

फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron इस समय भारत दौरे पर हैं। उनके दौरे से पहले भारत में राफेल निर्माण को मंजूरी मिलना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग मजबूत

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने कहा कि भारत-फ्रांस साझेदारी असीमित है और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने डिजिटल माध्यम से H125 हेलीकॉप्टरों की फाइनल असेंबली लाइन का उद्घाटन किया।

रणनीतिक महत्व क्यों है बड़ा?

राफेल प्लांट में हुई यह सुरक्षा घटना ऐसे समय सामने आई है जब भारत में इसके निर्माण की प्रक्रिया को गति दी जा रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाई-टेक डिफेंस टेक्नोलॉजी से जुड़े प्लांट में किसी भी तरह की जासूसी या रिकॉर्डिंग की कोशिश गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।

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दिल्ली के रोहिणी में सनसनी, नवजात अपहरण कांड का खुलासा

दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा)। राजधानी में सनसनीखेज घटना सामने आई है। Baba Saheb Ambedkar Hospital, रोहिणी से 14 फरवरी को जन्मे नवजात शिशु के चोरी होने का मामला सामने आया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार कर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

शिकायतकर्ता जाकिर अली की पत्नी 12 फरवरी को अस्पताल में भर्ती हुई थीं और 14 फरवरी को उन्होंने पुत्र को जन्म दिया।
बताया जा रहा है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान करीब 30 वर्षीय एक अज्ञात महिला लगातार उनसे मिलती रही और भरोसा जीत लिया।

17 फरवरी की सुबह करीब 5 बजे उक्त महिला नवजात को गोद में लेकर मां से आराम करने को कहकर पास बैठ गई। सुबह करीब 8 बजे जब मां की नींद खुली तो महिला और बच्चा दोनों वार्ड से गायब थे। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस ने कैसे की कार्रवाई?

थाना नॉर्थ रोहिणी में FIR संख्या 70/2026 धारा 137(2) BNS के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

पुलिस टीम ने:

• अस्पताल स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ
• सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच
• तकनीकी निगरानी और मानव खुफिया सूचना का इस्तेमाल

तेजी से लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस ने दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से नवजात शिशु को सुरक्षित बरामद कर लिया।

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आरोपी गिरफ्तार, बच्चा सुरक्षित

मामले में 40 वर्षीय रानी (निवासी सिरसपुर, दिल्ली) को गिरफ्तार किया गया है। उसके साथ 20 वर्षीय अहिबरन सक्सेना (निवासी उन्नाव, उत्तर प्रदेश), जो नोएडा के पत्थर मार्केट में कार्यरत है, को भी हिरासत में लिया गया है।
पुलिस के अनुसार नवजात पूरी तरह सुरक्षित है और उसे परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।

अस्पताल सुरक्षा पर सवाल

इस घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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ITI मऊ में 20% सीटों पर सीधा प्रवेश, 23 फरवरी डेडलाइन

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। Government Industrial Training Institute Mau (ITI, मऊ) में आईएमसी कोटे के अंतर्गत 20 प्रतिशत सीटों पर विशेष प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवेदन पत्रों की बिक्री और जमा करने की अंतिम तिथि 23 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है।

यह योजना उद्योगों में कार्यरत कर्मचारियों और उनके नामित अभ्यर्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है।

क्या है IMC कोटा और क्यों है खास?

आईएमसी (Institute Management Committee) कोटा, भारत सरकार की Ministry of Skill Development and Entrepreneurship की पीपीपी (Public Private Partnership) मॉडल योजना के अंतर्गत संचालित प्रावधान है।

इसका उद्देश्य तकनीकी संस्थानों और उद्योगों के बीच तालमेल मजबूत करना है, ताकि प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक और रोजगार उन्मुख बनाया जा सके।
इस कोटे के तहत उद्योगों से जुड़े कर्मचारियों या उनके द्वारा नामित अभ्यर्थियों को सीधे प्रवेश का अवसर मिलता है।

20% सीटें उद्योग से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित

संस्थान प्रशासन के अनुसार कुल सीटों में से 20 प्रतिशत सीटें आईएमसी कोटे के लिए निर्धारित हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था उद्योगों की जरूरत के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है।

कौन कर सकता है आवेदन?

आईएमसी कोटे के अंतर्गत निम्न अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं:

• उद्योगों में कार्यरत कर्मचारी
• उद्योग द्वारा नामित अभ्यर्थी
• कौशल उन्नयन के इच्छुक युवा
• रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण चाहने वाले अभ्यर्थी
• आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑफलाइन

संस्थान प्रशासन के अनुसार आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन रखी गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को संस्थान में उपस्थित होकर आवेदन पत्र प्राप्त करना होगा।

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आवेदन के मुख्य चरण:

• संस्थान से आवेदन पत्र प्राप्त करें
• आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें
• अंतिम तिथि से पहले आवेदन जमा करें
• चयन प्रक्रिया में भाग लें
• जरूरी दस्तावेज
• शैक्षणिक प्रमाण पत्र
• पहचान पत्र
• उद्योग प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
• पासपोर्ट साइज फोटो
• अन्य आवश्यक दस्तावेज

23 फरवरी के बाद नहीं होगा आवेदन स्वीकार

संस्थान ने स्पष्ट किया है कि 23 फरवरी 2026 के बाद किसी भी परिस्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।

रोजगार के बेहतर अवसर

ITI प्रशिक्षण आज के समय में रोजगार प्राप्त करने का सशक्त माध्यम बन चुका है। उद्योगों की सहभागिता से प्रशिक्षण और अधिक व्यावहारिक बनता है, जिससे अभ्यर्थियों को सीधे रोजगार मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

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गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस में युवती से दुष्कर्म की कोशिश, टीटीई फरार; 10 हजार का इनाम घोषित

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। Gorakhpur से अहमदाबाद जा रही गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस के एसी प्रथम श्रेणी कोच में 22 वर्षीय युवती से दुष्कर्म की कोशिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी टीटीई राहुल कुमार को रेलवे प्रशासन ने तत्काल निलंबित कर दिया है, जबकि Government Railway Police (जीआरपी) ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है।

क्या है पूरा मामला?

पीड़िता मूल रूप से Mau की रहने वाली है और गोरखपुर में किराए पर रहकर सेना भर्ती की तैयारी कर रही है। रविवार को वह एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट की परीक्षा देकर लौट रही थी।

बताया जा रहा है कि Ballia स्टेशन पर हड़बड़ी में टिकट न ले पाने के कारण वह ट्रेन में सवार हो गई। आरोप है कि टीटीई राहुल कुमार ने बिना टिकट कार्रवाई का डर दिखाकर पहले सीट दिलाने का भरोसा दिया और फिर एसी फर्स्ट क्लास के केबिन में ले गया।

पीड़िता के अनुसार, इंदारा और देवरिया के बीच चलती ट्रेन में आरोपी ने दुष्कर्म की कोशिश की। विरोध करने पर उसने कार्रवाई की धमकी दी।

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112 पर कॉल कर बचाई जान

किसी तरह केबिन से बाहर निकलकर युवती ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। घटना के बाद आरोपी Deoria स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर फरार हो गया।

गोरखपुर पहुंचने पर पीड़िता ने जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज कराई। तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की कोशिश सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। बाद में विवेचना देवरिया ट्रांसफर कर दी गई।

रेलवे प्रशासन ने किया निलंबन

घटना का संज्ञान लेते हुए रेलवे प्रशासन ने आरोपी टीटीई को तत्काल निलंबित कर दिया है।
Lakshmi Niwas Mishra (एसपी रेलवे) ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए जीआरपी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। उसकी गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

उन्होंने कहा कि पीड़िता का मेडिकल और बयान देवरिया में दर्ज कराया जाएगा। परिवार के सदस्य भी पहुंच चुके हैं।

रेलवे सुरक्षा पर उठे सवाल

चलती ट्रेन में एसी प्रथम श्रेणी कोच में हुई इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों, खासकर महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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I-PAC रेड पर SC में घमासान, ED पर आरोप-प्रत्यारोप

पश्चिम बंगाल में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के आवास पर हुई रेड के मामले में बुधवार (18 फरवरी 2026) को Supreme Court of India में तीखी बहस देखने को मिली।

मामले में Enforcement Directorate (ED) और पश्चिम बंगाल सरकार आमने-सामने हैं। कोर्ट ने अगली सुनवाई 18 मार्च के लिए तय की है।

सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई बहस?

जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ईडी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
ईडी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि तलाशी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ जांच स्थल पर पहुंचीं और जांच में बाधा डाली।

पश्चिम बंगाल के एक पुलिस अधिकारी की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने आरोप लगाया कि ईडी को “हथियार” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पर ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने कहा कि एजेंसी को हथियार नहीं बनाया गया, बल्कि उसे “डराया” गया है।

क्या है पूरा मामला?

8 जनवरी 2026 को I-PAC के ऑफिस और प्रतीक जैन के आवास पर ईडी ने छापेमारी की थी।
ईडी के मुताबिक, यह कार्रवाई कोयला तस्करी से जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हवाला लिंक की जांच के तहत की गई।
एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी और कोलकाता पुलिस आयुक्त के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश की मांग की है।

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ममता बनर्जी का जवाब

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने हलफनामे में सभी आरोपों से इनकार किया है।
उनका कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि तलाशी के दौरान तृणमूल कांग्रेस का संवेदनशील राजनीतिक डेटा एक्सेस किया जा रहा है, जो आगामी विधानसभा चुनाव रणनीति से जुड़ा था।

उन्होंने दावा किया कि उन्होंने ईडी अधिकारियों से विनम्रतापूर्वक पार्टी से संबंधित डेटा और उपकरण लेने की अनुमति मांगी थी, जिस पर कोई आपत्ति नहीं की गई।
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि पंचनामा रिपोर्ट में तलाशी शांतिपूर्वक जारी रहने का उल्लेख है।

चुनाव से पहले कार्रवाई पर सवाल

जवाबी हलफनामे में ईडी की कार्रवाई को “दुर्भावनापूर्ण” बताते हुए कहा गया है कि छापेमारी 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की गई।
साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत वैधानिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।

ईडी द्वारा तलाशी की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग पेश न कर पाने को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए हैं।

राजनीतिक हलचल तेज

इस मामले ने बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ ईडी की कार्रवाई, दूसरी तरफ चुनावी रणनीति से जुड़े डेटा का मुद्दा—दोनों ने इसे हाई-प्रोफाइल केस बना दिया है।
अब सबकी नजर 18 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है।

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जनसुनवाई पर सख्ती, CM की ऑनलाइन निगरानी शुरू

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। Gorakhpur में जनसुनवाई व्यवस्था को और अधिक सख्त और प्रभावी बना दिया गया है। CM Yogi Adityanath अब स्वयं ऑनलाइन जुड़कर जनसुनवाई की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वहीं जिलाधिकारी Deepak Meena प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक कलेक्ट्रेट में जनता की समस्याएं सुन रहे हैं।

शासन की इस नई व्यवस्था के बाद प्रशासनिक तंत्र में अतिरिक्त सक्रियता देखी जा रही है।

CM स्तर से सीधी निगरानी

बुधवार से शुरू हुई इस सख्ती के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर विभिन्न मामलों की प्रगति की जानकारी ली। कुछ मामलों में उन्होंने अधिकारियों से सीधे संवाद कर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए।

सरकार की ओर से साफ संदेश दिया गया है कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं होगी और हर शिकायत का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

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जनसुनवाई में उमड़ी भीड़, ये रहीं प्रमुख शिकायतें

जनसुनवाई में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फरियादी पहुंचे। प्रमुख शिकायतें इस प्रकार रहीं:

• भूमि विवाद और राजस्व अभिलेखों में त्रुटि
• पुलिस कार्रवाई में विलंब
• पेंशन और आवास योजना से जुड़ी समस्याएं
• सड़क, जलनिकासी और बिजली आपूर्ति
• वन विभाग से संबंधित मामले

डीएम दीपक मीणा ने सभी मामलों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

शिकायतों की मॉनिटरिंग और फॉलोअप

कलेक्ट्रेट परिसर में पहले से मौजूद व्यवस्थाओं के तहत जनसुनवाई संचालित हो रही है।

• प्रार्थना पत्रों का विधिवत पंजीकरण
• संबंधित विभागों को तत्काल अग्रसारण
• निस्तारण की नियमित मॉनिटरिंग
• शिकायतकर्ता को प्रगति की जानकारी देना

डीएम ने विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि तय समयसीमा में समाधान सुनिश्चित करें और फरियादियों के साथ संवेदनशील व्यवहार बनाए रखें।

प्रशासन में बढ़ी सक्रियता

मुख्यमंत्री की ऑनलाइन निगरानी शुरू होने के बाद अधिकारियों ने मौके पर ही कई मामलों में त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी।
यह व्यवस्था न केवल शिकायतों के समाधान को तेज कर रही है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को भी मजबूत बना रही है।

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पूर्वांचल में 3251 लड़कियां लापता, 406 की तलाश जारी

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बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। पूर्वांचल के नौ जिलों में वर्ष 2025 के दौरान लड़कियों के लापता होने के मामलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक कुल 3251 लड़कियां घर से गायब हुईं। यानी औसतन हर दिन करीब 9 लड़कियां लापता होने का आंकड़ा सामने आया।

पुलिस के प्रयासों से अब तक 2845 लड़कियों को बरामद किया जा चुका है, जबकि 406 की तलाश जारी है।

जिलावार स्थिति: आजमगढ़ सबसे ऊपर

आंकड़ों के अनुसार:

• Azamgarh – 962 मामले (सबसे अधिक)
• Sonbhadra – 33 मामले (सबसे कम)
• Ballia सहित अन्य जिलों में भी सैकड़ों मामले दर्ज
पुलिस सूत्रों का कहना है कि अधिकांश मामलों में नाबालिग लड़कियां शामिल हैं।

पुलिस की कार्रवाई और चुनौतियां

पुलिस के मुताबिक:

• गुमशुदगी की सूचना मिलते ही मुकदमा दर्ज
• विशेष टीम गठित कर मोबाइल लोकेशन ट्रेस
• संभावित ठिकानों पर दबिश
• कई मामलों में दूसरे जिलों या राज्यों में लोकेशन

बाहर से बरामदगी में समय और खर्च बढ़ जाता है। विभागीय प्रावधान होने के बावजूद जटिल प्रक्रिया के कारण कम लोग लाभ उठा पाते हैं।

Omveer Singh (एसपी बलिया) ने बताया कि लड़कियों और महिलाओं की गुमशुदगी के मामलों को प्राथमिकता पर लिया जाता है और लगातार निगरानी रखी जाती है।

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विशेषज्ञों की राय: संवाद की कमी भी कारण

TD College Ballia के मनोविज्ञान विभाग के डॉ. अनुराग भटनागर के अनुसार किशोरावस्था में:

• भावनात्मक अस्थिरता
• पारिवारिक डांट-फटकार
• प्रेम प्रसंग
• सोशल मीडिया और वेब सीरीज का प्रभाव
घर छोड़ने के प्रमुख कारण हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बेटियों के साथ मित्रवत संवाद रखना चाहिए और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास करना चाहिए।

सामाजिक चेतावनी

पुलिस सूत्रों के अनुसार कई मामलों में लड़कियां अपनी मर्जी से घर छोड़ती हैं, कुछ मामलों में जेवर और नगदी साथ ले जाने की बात भी सामने आती है। हालांकि हर केस की परिस्थितियां अलग होती हैं।

लगातार बढ़ते मामलों ने पारिवारिक संवाद, सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक सतर्कता की आवश्यकता को और मजबूत किया है।

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सुंदर पिचाई की भारत यात्रा: एआई नवाचार पर बड़ी घोषणाओं की उम्मीद

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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026: सुंदर पिचाई की दिल्ली यात्रा, पीएम मोदी से मुलाकात और 20 फरवरी की कीनोट


नई दिल्ली (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। गूगल के सीईओ Sundar Pichai बुधवार को दिल्ली पहुंचे और प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब India AI Impact Summit 2026 का आगाज़ हो चुका है। यह शिखर सम्मेलन 16 से 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है और ग्लोबल साउथ में इस पैमाने पर होने वाला पहला वैश्विक एआई समिट माना जा रहा है।
दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद सुंदर पिचाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए भारत लौटने पर खुशी जताई और गर्मजोशी से स्वागत के लिए धन्यवाद दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में वे 20 फरवरी को कीनोट स्पीच देंगे, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य, भारत की डिजिटल क्षमता और समावेशी एआई नवाचार पर उनकी दृष्टि साझा होगी।
भारत और एआई: रणनीतिक साझेदारी की दिशा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुंदर पिचाई की मुलाकात भारत में एआई इकोसिस्टम को मज़बूत करने के संदर्भ में अहम मानी जा रही है। चर्चा का फोकस स्टार्टअप्स, डिजिटल स्किल्स, डेटा सुरक्षा और एआई के जिम्मेदार उपयोग पर रहा। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत को वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक निर्णायक मंच बनकर उभरा है।
ग्लोबल साउथ के लिए एआई का रोडमैप
समिट का उद्देश्य ग्लोबल साउथ के देशों के लिए एआई के उपयोग को लोकतांत्रिक बनाना, स्थानीय भाषाओं और जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करना और नीति-निर्माताओं, उद्योग तथा शिक्षाविदों को एक मंच पर लाना है। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, गवर्नेंस और जलवायु जैसे क्षेत्रों में एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर सत्र हो रहे हैं।
20 फरवरी की कीनोट से क्या उम्मीद
20 फरवरी को सुंदर पिचाई की कीनोट स्पीच से उम्मीद है कि वे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच से भारत-केंद्रित एआई निवेश, रिसर्च सहयोग और ओपन इनोवेशन पर स्पष्ट रोडमैप रखेंगे। साथ ही, वे यह भी रेखांकित कर सकते हैं कि कैसे Google भारत में एआई-संचालित समाधान, डेवलपर टूल्स और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ा रहा है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 न केवल भारत की एआई नेतृत्व क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित कर रहा है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के लिए जिम्मेदार, सुरक्षित और समावेशी एआई का ब्लूप्रिंट भी पेश कर रहा है। सुंदर पिचाई की मौजूदगी और पीएम मोदी के साथ संवाद इस पहल को नई गति देने वाला साबित हो सकता है।

दलित विधवा की आजीविका पर हमला, न्याय की उम्मीद

नौतन में गंडक नहर किनारे जमीन विवाद, दलित विधवा ने की कार्रवाई की मांग

सांकेतिक


नौतन/बिहार (राष्ट्र की परम्परा) नौतन थाना क्षेत्र के मछलीहट्टा पूर्वी इलाके में गंडक नहर किनारे स्थित जमीन को लेकर जमीन विवाद सामने आया है। इस विवाद ने उस वक्त गंभीर रूप ले लिया जब एक दलित विधवा महिला की वर्षों पुरानी गुमटी को कथित तौर पर हटाकर उसी स्थान पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया गया। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई है और पीड़िता ने पुलिस से कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

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गुमटी हटाने का आरोप, आजीविका पर संकट
सुन्दरपुर गांव निवासी सीता देवी ने नौतन थाने में लिखित आवेदन देकर बताया कि वह गंडक नहर पुल के पास अपनी छोटी-सी गुमटी में दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करती थीं। यह दुकान ही उनकी आय का एकमात्र साधन था।
पीड़िता का आरोप है कि शुक्रवार रात कुछ दबंग लोगों ने उनकी गुमटी को जबरन हटा दिया और उसी जगह अपनी गुमटी खड़ी कर ली। इस कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी छिन गई और परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया।
अवैध कब्जे का आरोप, त्वरित जांच की मांग
सीता देवी ने इसे अवैध कब्जा बताते हुए पुलिस से तत्काल जांच, दोषियों की पहचान और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो उनके लिए जीवन-यापन मुश्किल हो जाएगा। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि गंडक नहर किनारे जमीन को लेकर पहले भी विवाद होते रहे हैं, लेकिन इस तरह किसी गरीब महिला की आजीविका पर सीधा प्रहार निंदनीय है।

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पुलिस का पक्ष: आवेदन मिला, जांच जारी
नौतन थाना प्रभारी ने पुष्टि की कि महिला का आवेदन प्राप्त हो गया है। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की हिदायत दी गई है और स्थिति पर नजर रखी जा रही है। पुलिस का कहना है कि दोषी पाए जाने पर विधि के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सामाजिक सरोकार और कानून-व्यवस्था का सवाल
यह मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, दलित अधिकार और महिला सुरक्षा से भी जुड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार सार्वजनिक नहर किनारे अतिक्रमण और गुमटी विवादों में प्रशासन की स्पष्ट नीति और त्वरित कार्रवाई जरूरी है, ताकि कमजोर वर्गों की आजीविका सुरक्षित रह सके।
स्थानीय उम्मीद: निष्पक्ष जांच और शीघ्र न्याय हो
इलाके के नागरिकों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, यथास्थिति बहाल करने और पीड़िता को राहत दिलाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे विवाद बढ़ सकते हैं और सामाजिक तनाव गहरा सकता है।

ध्वनि प्रदूषण पर प्रशासन का बड़ा एक्शन

रात 10 बजे के बाद डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई

प्रशासन ने मैरेज हाल संचालकों और डीजे ऑपरेटरों को जारी किया अल्टीमेटम


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में लगातार बढ़ रही ध्वनि प्रदूषण की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। अब रात 10 बजे के बाद डीजे बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस नियम का उल्लंघन करने पर डीजे संचालक और मैरेज हाल संचालक—दोनों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई तय है। प्रशासन ने इसे लेकर स्पष्ट अल्टीमेटम जारी करते हुए कहा है कि अब नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

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प्रशासन का सख्त संदेश
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजने से आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों, विद्यार्थियों और बीमार लोगों को भारी परेशानी होती है। अस्पतालों, आवासीय इलाकों और शिक्षण संस्थानों के आसपास ध्वनि प्रदूषण से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इन्हीं कारणों से रात 10 बजे के बाद डीजे प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया है।
नियम क्या कहते हैं
अधिकारियों ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियमों के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर, डीजे और तेज ध्वनि वाले उपकरणों के उपयोग पर पहले से ही प्रतिबंध है। इसके बावजूद कई मैरेज हालों और आयोजनों में नियमों की अनदेखी की जा रही थी। अब ऐसी किसी भी लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

उल्लंघन पर क्या होगी कार्रवाई
प्रशासन ने साफ किया है कि यदि रात 10 बजे के बाद डीजे बजता पाया गया, तो मौके पर ही
डीजे उपकरण जब्त किए जा सकते हैं।
संबंधित संचालक पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
बार-बार उल्लंघन पर लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई भी की जाएगी
पुलिस और प्रशासन की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर कानूनी प्रक्रिया पूरी करेगी।
यह कार्रवाई केवल डीजे ऑपरेटर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मैरेज हाल संचालक भी समान रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे।

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नियमित जांच और पुलिस निगरानी
हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में प्रशासन ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित रूप से मैरेज हालों और आयोजन स्थलों की जांच करें। पुलिस विभाग को विशेष निगरानी के आदेश दिए गए हैं ताकि रात 10 बजे के बाद डीजे प्रतिबंध का पूरी तरह पालन सुनिश्चित हो सके। संवेदनशील इलाकों में पेट्रोलिंग भी बढ़ाई जाएगी।
आयोजकों और संचालकों के लिए निर्देश।
प्रशासन ने मैरेज हाल संचालकों से अपील की है कि वे।
आयोजकों को पहले से नियमों की जानकारी दें।
समय सीमा का स्पष्ट उल्लेख बुकिंग के समय करें।
डीजे संचालकों के साथ लिखित समझौता करें कि रात 10 बजे के बाद डीजे बंद रहेगा।
वहीं डीजे संचालकों को चेतावनी दी गई है कि समय का उल्लंघन करने पर सीधे कानूनी कार्रवाई होगी, इसलिए वे अपने व्यवसाय में नियमों का सख्ती से पालन करें।
आम जनता ने किया फैसले का स्वागत
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन के इस कदम का खुले दिल से स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि देर रात तक डीजे बजने से नींद, पढ़ाई और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता था। इस सख्ती से अब शोर-शराबे पर अंकुश लगेगा और शांतिपूर्ण माहौल बना रहेगा।
भविष्य में और सख्ती के संकेत
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में नियमों का बार-बार उल्लंघन हुआ, तो और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। साफ संदेश है—
“रात 10 बजे के बाद डीजे बजा तो कार्रवाई तय है, चाहे वह कोई भी हो।”

मंदिर, कुआं, श्मशान सबके लिए हों खुले, करियर का अर्थ सेवा और संस्कार: मोहन भागवत

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि मंदिर, कुआं और श्मशान सभी हिन्दुओं के लिए खुले होने चाहिए और उनमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। वह निराला नगर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर के माधव सभागार में आयोजित “कार्यकर्ता कुटुम्ब मिलन” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि बच्चों को करियर का सही अर्थ समझाना होगा। केवल पेट भरना, अधिक कमाना और उपभोग करना करियर नहीं है, बल्कि कमाने से अधिक बांटने में करियर का सार है। ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जिससे बच्चे समृद्ध होकर दान देना और दूसरों के लिए जीना सीखें। उन्होंने कहा कि हमारे संस्कार ऐसे हों कि बच्चे समझें—हमारा हित देश के हित से जुड़ा है और देश सर्वोपरि है। विद्या और धन देश के लिए कमाया जाना चाहिए।

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सामाजिक समरसता पर जोर

भागवत ने कहा कि सामाजिक समरसता भाषणों से नहीं, आचरण से आएगी। संघ पूरे हिन्दू समाज को एक मानता है, इसलिए व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर मेलजोल बढ़ाना आवश्यक है। संघ के कुटुम्ब में जात-पात का भेद नहीं है, समाज में भी ऐसा ही वातावरण बनाना होगा। उन्होंने कहा कि संघ को पुस्तकों से अधिक स्वयंसेवकों के आचरण से समझा जा सकता है।

परिवार है समाज की इकाई

उन्होंने कहा कि समाज की मूल इकाई व्यक्ति नहीं, परिवार है। सामाजिक व्यवहार का पहला परीक्षण परिवार में ही होता है। बचत की आदत हमारे परिवारों की विशेषता है और देश की पूंजी घरों में सुरक्षित रहती है। बच्चों को मातृभाषा का ज्ञान सही ढंग से दिया जाना चाहिए तथा उनमें देशभक्ति, प्रमाणिकता, अनुशासन और कुटुम्ब गौरव का भाव विकसित करना चाहिए।

बस्ती और शाखा स्तर पर कुटुम्ब मिलन

भागवत ने कहा कि 100 से 70 परिवारों की संख्या में बस्ती और शाखा स्तर पर कुटुम्ब मिलन कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। अभाव में नहीं रहना है, लेकिन किसी के प्रभाव में भी नहीं आना है। उन्होंने पंच परिवर्तन कार्यक्रमों में मातृशक्ति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

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हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हिन्दुस्थान हिन्दू राष्ट्र है और सभी हिन्दू सहोदर हैं। समाज के जो वर्ग संघ के निकट नहीं हैं, उनके पास जाकर आत्मीय संबंध विकसित करने चाहिए। यह संबंध चौराहे से शुरू होकर परिवार तक पहुंचने चाहिए।

तकनीक के उपयोग में अनुशासन

भागवत ने कहा कि तकनीक को रोका नहीं जा सकता, लेकिन उसका उपयोग अनुशासन के साथ होना चाहिए। स्क्रीन टाइम निर्धारित हो और नई पीढ़ी को एआई, टीवी, मोबाइल और फिल्मों के दुष्प्रभावों की जानकारी दी जानी चाहिए।

संघ चिरतरुण संगठन

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आज वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। बच्चों को यह बताया जाना चाहिए ताकि वे अपनी पहचान समझ सकें। संघ को उन्होंने चिरतरुण संगठन बताते हुए कहा कि देश के सर्वाधिक युवा स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं।

परीक्षा छूटने के बाद छात्रा ने की आत्महत्या, विशेष परीक्षा की घोषणा

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पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की मैट्रिक परीक्षा 2026 की शुरुआत के पहले ही दिन एक बेहद दुखद घटना सामने आई। पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र में परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने के कारण एक छात्रा को परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली। परीक्षा छूटने से आहत होकर छात्रा ने ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है।
परीक्षा केंद्र पर देर, टूट गया हौसला
मसौढ़ी के खरजंबा गांव की रहने वाली 22 वर्षीय मैट्रिक परीक्षार्थी कोमल कुमारी निर्धारित समय से देरी से अपने परीक्षा केंद्र पहुंची थीं। नियमों के अनुसार समय सीमा के बाद परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया, जिसके चलते उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। परीक्षा से वंचित होने की निराशा ने छात्रा को मानसिक रूप से तोड़ दिया।

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घर लौटने के बाद उठाया खौफनाक कदम
परिजनों के साथ घर लौटने के बाद कोमल कुमारी ने कपड़े बदले और बिना किसी को कुछ बताए घर से निकल गईं। कुछ समय बाद मसौढ़ी थाना क्षेत्र के महाराजचक गांव के पास पटना–गया रेलखंड पर उनका शव रेलवे ट्रैक के समीप मिला। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच भेजा। बाद में सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के जरिए परिजनों ने शव की पहचान की।
परिजनों का बयान और पुलिस की कार्रवाई
थानाध्यक्ष विवेक भारती के अनुसार मृतका की मां संगीता देवी ने बताया कि कोमल कुमारी इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा दे रही थीं और धनरूआ के बरनी परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने गई थीं। देर से पहुंचने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिला, जिससे वे गहरे तनाव में चली गईं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं।
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026: पहले दिन के आंकड़े
मंगलवार को बिहार भर में 1699 परीक्षा केंद्रों पर 15 लाख से अधिक परीक्षार्थियों ने मैट्रिक की परीक्षा दी। नकल के आरोप में 5 परीक्षार्थियों को परीक्षा से बाहर किया गया, जबकि 9 फर्जी परीक्षार्थियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन की सख्ती के बीच यह घटना छात्रों के मानसिक दबाव को भी उजागर करती है।

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विशेष परीक्षा का मिलेगा मौका
इस दुखद घटना के बीच बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने उन छात्रों के लिए राहत भरी घोषणा की है, जिनकी परीक्षा जाम, देरी या अन्य कारणों से छूट गई। बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने स्पष्ट किया कि ऐसे परीक्षार्थियों के लिए अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई की शुरुआत में विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसका परिणाम मई–जून तक घोषित कर दिया जाएगा, ताकि छात्रों का शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।
मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल
यह घटना परीक्षा के दौरान छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और काउंसलिंग की कमी की ओर भी इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा छूटने या असफलता की स्थिति में छात्रों को भावनात्मक सहारा और सही मार्गदर्शन मिलना बेहद जरूरी है।
बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 के पहले ही दिन हुई यह घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। जहां एक ओर प्रशासन परीक्षा की पारदर्शिता और अनुशासन पर जोर दे रहा है, वहीं छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और वैकल्पिक अवसरों की जानकारी समय पर पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। बोर्ड द्वारा घोषित विशेष परीक्षा उन छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनकी परीक्षा किसी कारणवश छूट गई।

लोक अदालत देवरिया से घटेगा एनपीए बोझ, आम जनता को मिलेगा त्वरित न्याय

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देवरिया में राष्ट्रीय लोक अदालत 2026 को लेकर बैंकों की बड़ी तैयारी, ऋण वसूली मामलों पर विशेष फोकस


देवरिया। (राष्ट्र की परम्परा) जनपद देवरिया में आगामी 14 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत देवरिया को सफल बनाने के लिए प्रशासन और बैंकिंग संस्थान पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवरिया द्वारा बैंक प्रबंधकों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम प्री-ट्रायल बैठक आयोजित की गई, जिसमें लोक अदालत में ऋण वसूली मामलों के अधिकतम निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया।
यह बैठक माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवरिया धनेन्द्र प्रताप सिंह के निर्देश पर आयोजित हुई, जबकि संचालन सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं सिविल जज (सीडी) शैलजा मिश्रा ने किया।

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लोक अदालत देवरिया में ऋण वसूली मामलों के निस्तारण पर जोर
बैठक में सचिव शैलजा मिश्रा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत देवरिया 2026 के अंतर्गत प्री-लिटिगेशन स्तर पर अधिक से अधिक बैंक ऋण वसूली मामलों को चिन्हित किया जाए। सुलह-समझौते के माध्यम से मामलों के निस्तारण से न केवल न्यायिक प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि आम नागरिकों और बैंकों—दोनों को त्वरित राहत मिलेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लोक अदालत आम जनता को सस्ता, सरल और शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम है।

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प्रत्येक बैंक में नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश
राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने निर्देश दिया कि प्रत्येक बैंक अपने यहां एक नोडल अधिकारी अनिवार्य रूप से नियुक्त करे। नोडल अधिकारी मामलों के चयन, दस्तावेजों की तैयारी और लोक अदालत में प्रभावी निस्तारण की जिम्मेदारी निभाएंगे, जिससे लोक अदालत देवरिया में अधिक मामलों का समाधान संभव हो सकेगा।

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प्रचार-प्रसार अभियान तेज करने पर सहमति
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय लोक अदालत देवरिया 14 मार्च 2026 की जानकारी आम जनता तक पहुंचाने के लिए पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इससे अधिक से अधिक लोग लोक अदालत का लाभ उठा सकेंगे।
प्रमुख बैंकों की भागीदारी
बैठक में यूपी ग्रामीण बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया सहित कई बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने लोक अदालत में ऋण वसूली मामलों के समाधान में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
आम नागरिकों और बैंकों—दोनों को लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार लोक अदालत में निस्तारित मामलों के निर्णय को न्यायालय की डिक्री का दर्जा प्राप्त होता है और सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं होता। इससे विवादों का स्थायी समाधान होता है। वहीं, बैंकों को एनपीए मामलों में कमी और ग्राहकों को शीघ्र राहत मिलती है।

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14 मार्च 2026 को होगा व्यापक निस्तारण
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार राष्ट्रीय लोक अदालत देवरिया में बैंकिंग, विद्युत, राजस्व, पारिवारिक विवाद, मोटर दुर्घटना, श्रम विवाद सहित अनेक मामलों का निस्तारण किया जाएगा। आम नागरिकों से अपील है कि वे अपने विवादों का समाधान लोक अदालत देवरिया के माध्यम से कराएं।
राष्ट्रीय लोक अदालत देवरिया 2026 न्यायिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन और बैंकिंग संस्थानों के समन्वय से यदि यह अभियान सफल होता है, तो हजारों लंबित मामलों का समाधान संभव होगा और जनता का न्याय प्रणाली पर विश्वास और मजबूत होगा।