Monday, May 4, 2026
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बेखौफ चोरों का तांडव: 250 केवी ट्रांसफार्मर न चुरा पाने पर 400 लीटर तेल पार, इलाके की बिजली ध्वस्त

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के चुरेब चौराहे पर देर रात बेखौफ बदमाशों ने 250 केवी क्षमता वाले ट्रांसफार्मर को निशाना बनाते हुए सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया। आशंका है कि चोर ट्रांसफार्मर को ही उखाड़कर ले जाने की तैयारी में थे, लेकिन भारी वजन के कारण सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने सुनियोजित तरीके से ट्रांसफार्मर का ढक्कन खोला और उसमें भरा लगभग 400 लीटर कीमती तेल निकालकर फरार हो गए।
सुबह बिजली आपूर्ति ठप होने पर क्षेत्रवासियों ने विभाग को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने ट्रांसफार्मर को पूरी तरह खाली और क्षतिग्रस्त पाया। तेल निकल जाने से ट्रांसफार्मर के जलने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उसे बदलने की नौबत आ सकती है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार विभाग को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक ट्रांसफार्मर ऑयल की कीमत बाजार में अधिक होने के कारण ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो ग्रामीण और अंधेरे इलाकों में लगे ट्रांसफार्मरों को निशाना बनाते हैं।

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इस ट्रांसफार्मर से जुड़े दर्जनों घरों, दुकानों और छोटे व्यवसायों में घंटों बिजली गुल रही। पानी की सप्लाई और दैनिक कामकाज प्रभावित हुआ, जिससे लोगों में नाराजगी देखी गई। स्थानीय लोगों ने रात में पुलिस गश्त बढ़ाने और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है।
घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में संदिग्धों की गतिविधियां कैद होने की बात सामने आई है। पुलिस फुटेज खंगाल रही है और आसपास के कबाड़ी, तेल कारोबारियों व संदिग्ध तत्वों से पूछताछ की जा रही है। क्षेत्र में रात्रि गश्त बढ़ा दी गई है।

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बिजली विभाग ने कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मामला दर्ज कर जल्द खुलासे का भरोसा दिलाया है।

परीक्षा के दिन लापता हुईं चार छात्राएं सीडब्ल्यूसी की निगरानी में मिलीं सुरक्षित

पलामू जिला पुलिस ने लापता चार नाबालिग छात्राओं को किया रेस्क्यू, मैट्रिक परीक्षा के दौरान कटनी पहुंचीं छात्राएं


पलामू (राष्ट्र की परम्परा क्राइम डेस्क)जिला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लापता चार नाबालिग छात्राओं को सुरक्षित बरामद कर लिया है। यह मामला उस समय सामने आया जब मैट्रिक परीक्षा देने गई चार छात्राएं अचानक घर नहीं लौटीं। घटना के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया और पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, चैनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव की चारों छात्राएं सोमवार को मैट्रिक परीक्षा देने डालटनगंज गई थीं। परीक्षा समाप्त होने के बाद जब वे देर शाम तक घर नहीं पहुंचीं, तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। काफी प्रयास के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार के एक सदस्य ने चैनपुर थाना में गुमशुदगी की प्राथमिकी दर्ज कराई।

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स्टेशन से ट्रेन पकड़कर कटनी पहुंचीं छात्राएं
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि परीक्षा खत्म होने के बाद चारों छात्राएं रेलवे स्टेशन पहुंचीं और वहां से ट्रेन पकड़कर दूसरे राज्य के लिए रवाना हो गईं। तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि छात्राएं मध्य प्रदेश के कटनी के लिए ट्रेन में सवार हुई थीं। इस सूचना के बाद पलामू जिला पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की।
24 घंटे में लोकेशन ट्रेस
चैनपुर थाना प्रभारी श्रीराम शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मानवीय सूचना के आधार पर खोजबीन तेज कर दी। महज 24 घंटे के भीतर लापता चार नाबालिग छात्राओं का लोकेशन ट्रेस कर लिया गया। पता चला कि वे मध्य प्रदेश के कटनी पहुंच चुकी हैं और वहां चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की निगरानी में सुरक्षित हैं।
सीडब्ल्यूसी की निगरानी में सुरक्षित
कटनी पहुंचने के बाद छात्राओं को स्थानीय प्रशासन ने संरक्षण में लिया और उन्हें चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के सुपुर्द किया गया। पुलिस टीम परिजनों के साथ कटनी पहुंची है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सभी छात्राएं सुरक्षित हैं और किसी भी प्रकार की अनहोनी की आशंका नहीं है।

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जांच जारी, कारण स्पष्ट नहीं
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लापता चार नाबालिग छात्राएं किस कारण से घर से दूर चली गईं। पुलिस का कहना है कि छात्राओं से पूछताछ के बाद ही पूरे मामले का खुलासा हो सकेगा। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी ने उन्हें बहलाकर या झांसा देकर तो नहीं ले जाया गया।
पलामू जिला पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी। यदि किसी की संलिप्तता पाई जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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अभिभावकों से सतर्कता की अपील
इस घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें, विशेषकर परीक्षा जैसे संवेदनशील समय में अतिरिक्त सतर्कता बरतें। मोबाइल और सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी ध्यान देने की सलाह दी गई है।
घटना ने इलाके में चिंता जरूर पैदा की, लेकिन पलामू जिला पुलिस की त्वरित कार्रवाई से लापता चार नाबालिग छात्राओं का सुरक्षित रेस्क्यू होना बड़ी राहत की खबर है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पूछताछ में आखिर क्या सच्चाई सामने आती है।

पुरंदर संधि से आगरा दरबार तक: शिवाजी की ऐतिहासिक यात्रा



मुंबई (राष्ट्र की परम्परा लेख डेस्क)महाराष्ट्र का वर्तमान छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व नाम औरंगाबाद) इतिहास के पन्नों में एक विशेष स्थान रखता है। यह शहर कभी मुगल शासन के दक्कन प्रांत की राजधानी था। हालांकि यह तत्कालीन हिंदवी स्वराज का हिस्सा नहीं था, फिर भी छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा ने इसे मराठा इतिहास में अमर कर दिया।
अप्रैल 1666 में जब छत्रपति शिवाजी महाराज आगरा की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उनका यह पड़ाव राजनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था। इस यात्रा के दौरान संभाजीनगर में जो जनसैलाब उमड़ा, वह उनके बढ़ते प्रभाव और लोकप्रियता का प्रमाण था।

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पुरंदर की संधि के बाद आगरा की ओर प्रस्थान
1665 में हुई पुरंदर की संधि मराठा-मुगल संबंधों का निर्णायक मोड़ थी। इस संधि के बाद शिवाजी महाराज को मुगल बादशाह से मिलने आगरा जाना था। यह यात्रा राजनीतिक कूटनीति और रणनीतिक सोच का हिस्सा थी।
इस यात्रा में उनके साथ लगभग 200 से 500 सुसज्जित सैनिक थे। विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों में संख्या में अंतर मिलता है, परंतु यह स्पष्ट है कि उनका काफिला शाही गरिमा से युक्त था।
औरंगाबाद में उमड़ा जनसैलाब
जब छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा के दौरान उनका काफिला शहर में पहुँचा, तो हजारों की भीड़ उनके दर्शन के लिए उमड़ पड़ी।
मुगल प्रशासन के अधिकारी भीमसेन सक्सेना ने अपने फारसी संस्मरण तारीख-ए-दिलकुश में इस घटना का विस्तृत वर्णन किया है। इस ग्रंथ का बाद में प्रसिद्ध इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने अंग्रेजी में अनुवाद किया।
संस्मरण में उल्लेख है कि शिवाजी महाराज के घुड़सवारों का अनुशासन, उनके शाही वस्त्र और जनता का उत्साह अभूतपूर्व था। यह दृश्य बताता है कि मराठा नेता का प्रभाव केवल उनके राज्य तक सीमित नहीं था।

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शाही काफिले का भव्य स्वरूप
29 मई 1666 को आमेर राज्य के अधिकारी परकालदास द्वारा लिखे गए एक पत्र में शिवाजी महाराज के काफिले का सजीव वर्णन मिलता है।
काफिले में शामिल थे:सोने-चांदी से मढ़ी पालकी,हौदे से सुसज्जित दो हाथी,सामान ढोने वाले ऊंट,100 से अधिक घुड़सवार,स्वर्ण जड़ित नारंगी-सिंदूरी ध्वज,परकालदास ने लिखा कि शिवाजी महाराज दुबले-पतले, गोरे रंग के और अत्यंत प्रभावशाली व्यक्तित्व के धनी थे। उनके साथ उनके नौ वर्षीय पुत्र संभाजी महाराज भी उपस्थित थे।
पत्र में एक उल्लेखनीय पंक्ति थी—“उन्हें देखकर सहज ही लगता है कि वे जनता के शासक हैं।”
दक्कन की राजनीति और शिवाजी का बढ़ता प्रभाव
उस समय औरंगाबाद मुगल सत्ता का महत्वपूर्ण केंद्र था। वहां शिवाजी महाराज का भव्य स्वागत इस बात का संकेत था कि दक्कन की राजनीति में उनका प्रभाव बढ़ रहा था।
छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा केवल एक पड़ाव नहीं थी, बल्कि यह उनके कद और नेतृत्व की स्वीकृति का प्रतीक थी। मुगल राजधानी की ओर जाते समय जिस प्रकार जनता ने उनका स्वागत किया, वह मराठा शक्ति के उभार का सार्वजनिक प्रदर्शन था।
आगरा यात्रा और ऐतिहासिक मोड़
आगरा पहुँचने के बाद शिवाजी महाराज और औरंगजेब की भेंट इतिहास का चर्चित प्रसंग है। दरबार में अपेक्षित सम्मान न मिलने के कारण उत्पन्न तनाव ने आगे चलकर शिवाजी की ऐतिहासिक आगरा से पलायन की कहानी को जन्म दिया।
लेकिन उससे पहले छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया था कि वे केवल एक क्षेत्रीय शासक नहीं, बल्कि जननायक बन चुके थे।

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संभाजीनगर नामकरण और ऐतिहासिक स्मृति
औरंगाबाद का नाम पूर्व मुगल शासक औरंगजेब के नाम पर रखा गया था। वर्ष 2023 में इसका नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर कर दिया गया, जो मराठा विरासत के सम्मान का प्रतीक है।
आज जब शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जाती है, तो छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा का यह प्रसंग विशेष रूप से स्मरण किया जाता है।
इतिहास में दर्ज अमिट छाप
इतिहासकारों के अनुसार, यह यात्रा केवल राजनीतिक औपचारिकता नहीं थी। यह एक ऐसे युग की शुरुआत थी, जिसमें मराठा शक्ति ने मुगल साम्राज्य को खुली चुनौती दी।
छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा ने दिखाया कि जनता का समर्थन किसी भी शासक की सबसे बड़ी ताकत होती है। दक्कन की धरती पर उमड़ा वह जनसैलाब आज भी इतिहास की स्मृतियों में जीवित है।
अप्रैल 1666 की यह ऐतिहासिक घटना भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। संभाजीनगर में उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया था कि शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि जन-जन के नेता थे।
छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा मराठा गौरव, कूटनीति और नेतृत्व क्षमता का जीवंत उदाहरण है।

खेरिया एयरपोर्ट पर तेज निर्माण, आगरा को मिलेगी नई हवाई पहचान


आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। आगरा सिविल एयरपोर्ट को आधुनिक हवाई सेवाओं से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्रीय मंत्री एवं सांसद प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने खेरिया एयरपोर्ट परिसर में निर्माणाधीन नए सिविल टर्मिनल का निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आगरा सिविल एयरपोर्ट का निर्माण 30 सितंबर 2026 तक हर हाल में पूरा किया जाए।
आगरा सिविल एयरपोर्ट परियोजना अंतिम चरण में
लंबे समय से प्रतीक्षित आगरा सिविल एयरपोर्ट परियोजना अब तेजी से आगे बढ़ रही है। अधिकारियों के अनुसार लगभग 55 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
करीब 441.79 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा आगरा सिविल एयरपोर्ट लगभग 144.07 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। इसके शुरू होने से आगरा की राष्ट्रीय और संभावित अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्टिविटी को बड़ा विस्तार मिलेगा।

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आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा आगरा सिविल एयरपोर्ट
नए टर्मिनल भवन को अत्याधुनिक सुविधाओं से तैयार किया जा रहा है। प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार होंगी:
33,845 वर्ग मीटर में विस्तृत टर्मिनल भवन
400 वाहनों की क्षमता वाली मल्टीलेवल पार्किंग
200 कारों के लिए अतिरिक्त पार्किंग
19 चेक-इन काउंटर और 12 ई-चेक-इन काउंटर
6 सुरक्षा जांच काउंटर
3 फुल बॉडी स्कैनर
3 एरो ब्रिज
6 एस्केलेटर और 12 लिफ्ट
33 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन
500 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट
22 डिजी यात्रा डिवाइस
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ग्राउंड वाटर रिचार्ज सिस्टम और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की व्यवस्था भी की जा रही है।
नई उड़ानों पर चर्चा
एयरपोर्ट सलाहकार समिति की बैठक में आगरा सिविल एयरपोर्ट से गोवा, सूरत, गुवाहाटी, जम्मू-कश्मीर और धार्मिक पर्यटन स्थलों के लिए उड़ान शुरू करने पर चर्चा हुई।
विशेष रूप से बौद्ध सर्किट के अंतर्गत वाराणसी को जोड़ने की संभावना पर विचार किया गया। इससे धार्मिक पर्यटन को मजबूती मिलेगी।

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सीआईएसएफ के लिए अतिरिक्त भूमि प्रस्ताव
एयरपोर्ट के पूर्ण संचालन के बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के लगभग 250 जवान तैनात किए जाएंगे। सुरक्षा और आवासीय जरूरतों के लिए 5 एकड़ अतिरिक्त भूमि की मांग रखी गई है। इस प्रस्ताव पर प्रशासनिक स्तर पर विचार जारी है।
पर्यटन उद्योग को मिलेगा बड़ा लाभ
आगरा सिविल एयरपोर्ट के शुरू होने से पर्यटन उद्योग को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। विश्व धरोहर ताजमहल देखने आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को बेहतर और तेज हवाई सुविधा मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट संचालन से होटल उद्योग, ट्रैवल एजेंसियों, टैक्सी सेवाओं और स्थानीय व्यापार में तेज वृद्धि होगी। इससे रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
श्रमिकों से संवाद और सामाजिक योजनाओं पर जोर
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से मुलाकात की। उन्होंने श्रमिकों के पंजीकरण, ई-लेबर कार्ड, आयुष्मान कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
70 वर्ष से अधिक आयु के पात्र बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनवाने पर भी विशेष जोर दिया गया।

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नगर निगम सीमा विस्तार का प्रस्ताव
धनौली गांव स्थित एयरपोर्ट क्षेत्र को नगर निगम सीमा में शामिल करने का आश्वासन दिया गया है। इससे आसपास के क्षेत्र का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा और नियोजित शहरी विकास संभव हो सकेगा।
आगरा सिविल एयरपोर्ट परियोजना उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में से एक बनकर उभर रही है। यदि निर्धारित समय सीमा में निर्माण कार्य पूरा हो जाता है, तो यह परियोजना आगरा के पर्यटन, व्यापार और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

गौआश्रय स्थल मामले में तीन सदस्यीय जांच समिति, दोषियों पर होगी कार्रवाई

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। सक्सेना चौक पर सामने आए गोवंश अस्थि प्रकरण को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। महराजगंज जिला प्रशासन ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा के निर्देश पर गठित समिति में अपर जिलाधिकारी (वि/रा), अपर पुलिस अधीक्षक तथा मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को शामिल किया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस गोवंश अस्थि प्रकरण को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील मामला मान रहा है।

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क्या है पूरा मामला?
जिला विकास अधिकारी/प्रभारी खंड विकास अधिकारी सदर के अनुसार, गौआश्रय स्थल अहमदपुर हड़हवा में वर्तमान में 123 गोवंश संरक्षित हैं। बुधवार को नगर पालिका परिषद महराजगंज के वाहन से सात निराश्रित गोवंश दोपहर 12:30 बजे आश्रय स्थल लाए गए।
इनमें एक बछड़े की हालत गंभीर बताई गई थी। उपचार के दौरान अपराह्न 1:30 बजे उसकी मृत्यु हो गई। पशु चिकित्सकीय पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण पेट में अत्यधिक प्लास्टिक पाए जाने से उत्पन्न टिम्पेनाइटिस (पेट फूलना) बताया गया है।
प्रशासन का कहना है कि यह प्राकृतिक चिकित्सकीय कारण था, लेकिन इसके बाद कुछ अराजक तत्वों द्वारा स्थिति को भड़काने का प्रयास किया गया।

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प्रदर्शन और आरोप
प्रशासन के अनुसार, घटना के दौरान कुछ लोगों ने गोशाला परिसर में प्रदर्शन किया और मृत गोवंश के शव को जबरन कब्जे में लेने की कोशिश की। आरोप है कि बाद में अन्य स्थान से अस्थियां लाकर उन्हें गोशाला से संबंधित बताकर सड़क पर प्रदर्शन किया गया।
इस घटनाक्रम को ही प्रशासन ने गोवंश अस्थि प्रकरण के रूप में गंभीरता से लिया है। संबंधित सचिव द्वारा इस मामले में तहरीर दी जा रही है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना फैलाने या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौआश्रय स्थलों का निरीक्षण
प्रभारी खंड विकास अधिकारी ने दोनों गौआश्रय स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया।
अहमदपुर हड़हवा गौआश्रय स्थल में—
50 कुंतल भूसा
12 कुंतल चोकर
6 कुंतल पशु आहार
1 एकड़ बरसीम (हरा चारा)
3 कुंतल साइलेज
3.5 कुंतल चूना
पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध पाया गया।
वहीं चेहरी गौआश्रय स्थल में 535 गोवंश संरक्षित मिले। यहां—
880 किलोग्राम चोकर
650 किलोग्राम पशु आहार
100 किलोग्राम साइलेज
3500 किलोग्राम भूसा
उपलब्ध पाया गया।
प्रशासन ने कहा कि गोवंश की सुरक्षा और देखभाल को लेकर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं।

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प्रशासन का स्पष्ट संदेश
महराजगंज जिला प्रशासन ने दोहराया है कि गोवंश अस्थि प्रकरण की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी ताकि तथ्य सामने आ सकें और अफवाहों पर रोक लगे।
प्रशासन ने अपील की है कि नागरिक बिना पुष्टि के किसी भी सूचना पर विश्वास न करें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

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क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
उत्तर प्रदेश में गौसंरक्षण से जुड़े विषय सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे में गोवंश अस्थि प्रकरण जैसे मामलों में त्वरित और पारदर्शी जांच आवश्यक हो जाती है।
यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही, पशु संरक्षण व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की स्थिति—तीनों से जुड़ी है।
जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

एकमुश्त कर जमा योजना से वाहन स्वामियों को बड़ी राहत

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कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। कुशीनगर में आयोजित परिवहन कर मेला छोटे व्यवसायिक वाहन स्वामियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। शासन द्वारा लागू एकमुश्त कर जमा योजना के तहत अब वाहन स्वामी बार-बार कार्यालय जाने की परेशानी से बच सकेंगे। परिवहन कार्यालय में हुई बैठक की अध्यक्षता सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी मो. अजीम ने की, जिसमें बस यूनियन, ट्रक यूनियन और छोटे व्यवसायिक वाहन स्वामियों ने भाग लिया।
बैठक में बताया गया कि परिवहन कर मेला 20 और 21 फरवरी 2026 को एआरटीओ कार्यालय में आयोजित होगा। इस दौरान वाहन स्वामी एक ही स्थान पर कर जमा कर एकमुश्त कर जमा योजना का लाभ उठा सकेंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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एकमुश्त कर जमा योजना से क्या लाभ?
एकमुश्त कर जमा योजना के अंतर्गत पहले की तरह दो माह, तीन माह या वार्षिक किश्तों के बजाय एक बार में कर जमा करने की सुविधा मिलेगी। इससे समय की बचत, प्रशासनिक सरलता और डिजिटल पारदर्शिता बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि परिवहन कर मेला और यह नई व्यवस्था छोटे वाहन स्वामियों को आर्थिक रूप से स्थिर बनाने में सहायक होगी।
विभिन्न वाहनों पर निर्धारित कर दरें
भाड़े पर चलने वाली दोपहिया मोटरसाइकिल: वाहन मूल्य का 12.5%
तिपहिया मोटर कैब: 7%
10 लाख रुपये तक की मोटर/मैक्सी कैब: 10.5%
10 लाख रुपये से अधिक मूल्य की कैब: 12.5%
निर्माण कार्य विशेष प्रयोजन वाहन: 6%
3000 किग्रा तक माल वाहन: 3%
3000 से 7500 किग्रा तक माल वाहन: 6%
इन दरों की जानकारी परिवहन कर मेला में विस्तार से दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक वाहन स्वामी एकमुश्त कर जमा योजना से जुड़ सकें।

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प्रवर्तन अभियान में सख्ती
बैठक के दौरान परिवहन विभाग ने प्रवर्तन अभियान चलाया। परमिट शर्तों के उल्लंघन और ओवरलोडिंग पर कार्रवाई करते हुए एक ट्रक को निरुद्ध किया गया।
बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और एचएसआरपी प्लेट से जुड़े मामलों में 32 वाहनों का चालान किया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि भविष्य में भी नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था
अधिकारियों ने कहा कि एकमुश्त कर जमा योजना के साथ ऑनलाइन भुगतान प्रणाली को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी और वाहन स्वामियों को पारदर्शी सेवा मिलेगी।
यूनियन पदाधिकारियों ने भी परिवहन कर मेला को सफल बनाने का आश्वासन दिया।

आगरा मंडल में कर वसूली समीक्षा, जिलों को सख्त निर्देश

आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के आगरा मंडल में राजस्व संग्रह और जन शिकायत निस्तारण प्रणाली को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंडलायुक्त Nagendra Pratap की अध्यक्षता में मंडल स्तरीय कर-करेत्तर एवं आईजीआरएस समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कर वसूली की स्थिति, विभागवार लक्ष्य प्राप्ति, नए करदाताओं का पंजीकरण और शिकायत निस्तारण की गुणवत्ता पर विस्तार से चर्चा हुई।

समीक्षा के दौरान कई जिलों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को लक्ष्य हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए।

कर वसूली में कई जिले लक्ष्य से पीछे

वाणिज्य कर विभाग की समीक्षा में पाया गया कि Mathura को छोड़कर मंडल के अन्य जिले लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं। आयुक्त ने विशेष अभियान चलाकर मासिक लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन मद में Firozabad और Agra की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई गई। इसी तरह आबकारी, परिवहन, विद्युत और खनिज विभाग में भी कई जिले निर्धारित लक्ष्य से पीछे रहे।

नए करदाताओं के पंजीकरण में सुस्ती

समीक्षा में सामने आया कि आगरा और मथुरा में नए करदाताओं के पंजीकरण की गति धीमी है। आयुक्त ने सेक्टरवार सूची तैयार कर पंजीकरण प्रक्रिया तेज करने और डिजिटल माध्यमों से करदाताओं को जोड़ने के निर्देश दिए।

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IGRS शिकायत निस्तारण पर भी सख्ती

आईजीआरएस प्रणाली की समीक्षा में जनवरी माह में मंडल की रैंकिंग 9वीं रही, जिसे संतोषजनक बताया गया। हालांकि शिकायतकर्ताओं से सीधे संपर्क कम होने पर चिंता जताई गई।

संभागीय खाद्य विपणन, सिंचाई, विद्युत, शिक्षा और श्रम विभागों के शिकायत निस्तारण में लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की गई। आयुक्त ने निर्देश दिया कि शिकायतों का समाधान केवल औपचारिकता न हो, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और स्थायी हो।

डिजिटल मॉनिटरिंग पर जोर

बैठक में कर वसूली और शिकायत निस्तारण की प्रक्रिया में डिजिटल निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही से राजस्व वृद्धि और जन विश्वास दोनों मजबूत होंगे।

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ट्राम्बे इंजन हटाने पर बवाल, धरोहर बनाम विकास बहस तेज

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। पर्यटन विकास के दावों के बीच एकमा डिपो स्थित ऐतिहासिक ट्राम्बे रेल इंजन को हटाने की कोशिश ने जिले में नया विवाद खड़ा कर दिया है। लंबे समय से उपेक्षित पड़ा यह इंजन अचानक प्रशासनिक कार्रवाई के केंद्र में आ गया, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी और बहस दोनों तेज हो गई हैं।

दक्षिण चौक और लक्ष्मीपुर वन रेंज क्षेत्र में पर्यटन के नाम पर बजट खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर ठोस विकास न दिखने की शिकायत पहले से रही है। ऐसे में इस ऐतिहासिक धरोहर को हटाने की पहल ने लोगों की भावनाओं को और अधिक प्रभावित कर दिया।

रेलवे-वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई

जानकारी के अनुसार पिछले चार महीनों से इंजन को रेलवे संरक्षण में स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही थी। इसी क्रम में रेलवे और वन विभाग की संयुक्त टीम एकमा डिपो पहुंची और इंजन को ले जाने के लिए भारी वाहन भी लगाए गए।

जैसे ही इसकी सूचना लक्ष्मीपुर कस्बे और आसपास के गांवों में पहुंची, सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जुट गए और इंजन हटाने की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। बढ़ते विरोध को देखते हुए अधिकारियों को फिलहाल वाहन वापस करना पड़ा और कार्रवाई रोक दी गई।

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‘कबाड़ नहीं, इतिहास की पहचान’

ग्रामीणों का कहना है कि यह इंजन केवल पुराना ढांचा नहीं बल्कि ब्रिटिश कालीन औद्योगिक विरासत की पहचान है। यदि इसे संरक्षित कर संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र पर्यटन मानचित्र पर उभर सकता है।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इंजन को हटाने के बजाय यहीं हेरिटेज म्यूजियम बनाया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

प्रशासन का पक्ष

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वे शासन के निर्देश पर धरोहर को सुरक्षित संरक्षण में लेने पहुंचे थे। पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है और अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।
फिलहाल ट्राम्बे इंजन का मुद्दा ‘धरोहर बनाम विकास’ की बहस का केंद्र बन गया है। क्षेत्रवासियों की नजरें अब शासन के अगले फैसले पर टिकी हैं।

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जमीन फर्जीवाड़ा केस में लखीसराय उपसभापति गिरफ्तार

बिहार (राष्ट्र की परम्परा)। लखीसराय में जमीन फर्जीवाड़ा मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने नगर परिषद के उप सभापति शिव शंकर राम को गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें पटना जाने के दौरान बड़हिया थाना क्षेत्र से हिरासत में लिया गया।

लखीसराय के पुलिस अधीक्षक Awadhesh Dixit ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि टाउन थाना में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। प्रारंभिक जांच में फर्जी कागजात के जरिए दानपत्र बनाकर जमीन हड़पने की साजिश सामने आई है।

फर्जी दानपत्र से जमीन कब्जाने का आरोप

लोधिया निवासी प्रशांत कुमार की शिकायत पर उप सभापति समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन को अवैध रूप से अपने नाम कराने की कोशिश की गई।

जांच में पाया गया कि जिस जमीन का दानपत्र उप सभापति ने अपनी मां किमला देवी के नाम से बनवाया, वह जमीन किसी अन्य व्यक्ति की थी। निबंधन कार्यालय, अंचल कार्यालय और एडीएम स्तर पर जांच में कथित फर्जीवाड़े की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की।

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कई जमीनों से जुड़ा हो सकता है मामला

एसपी के अनुसार, मामला सिर्फ एक भूखंड तक सीमित नहीं है। दो से तीन अन्य जमीनों से जुड़े फर्जीवाड़े की शिकायतें भी सामने आई हैं। पुलिस पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रही है और अन्य आरोपितों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

उप सभापति की गिरफ्तारी के बाद शहर के राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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महंगा अमेरिकी तेल या सस्ता रूसी? भारत की दुविधा

वैश्विक ऊर्जा बाजार में अमेरिका, रूस, ईरान और चीन के बीच चल रहा तेल खरीद का खेल अब भारत के लिए रणनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत महंगा अमेरिकी कच्चा तेल खरीद रहा है, जबकि चीन रूस और ईरान से रियायती (डिस्काउंटेड) तेल लेकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है। इससे चीन की अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल रहा है।

अमेरिकी दबाव और तेल नीति

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ Brahma Chellaney ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि Donald Trump प्रशासन भारत पर रूसी तेल कम करने और अमेरिकी क्रूड बढ़ाने का दबाव बना रहा है। उनके अनुसार, ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी इसी तरह के दबाव के चलते भारत ने ईरान से सस्ता तेल लगभग बंद कर दिया था और अमेरिका बड़ा सप्लायर बनकर उभरा था।

वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal ने भी ‘इंपोर्ट डाइवर्सिफिकेशन’ की बात स्वीकार की है, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि शिपिंग कॉस्ट जोड़ने पर अमेरिकी तेल मिडिल ईस्ट के मुकाबले महंगा पड़ता है।

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चीन को फायदा, भारत पर बोझ?

रूस और ईरान का तेल ब्रेंट बेंचमार्क से 9–11 डॉलर प्रति बैरल तक डिस्काउंट पर मिलता है। ऐसे में चीन रिकॉर्ड मात्रा में सस्ता तेल खरीद रहा है, जिससे उसकी ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा मजबूत हो रही है।

भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, 2025-26 में रूसी तेल की हिस्सेदारी घटाकर 33–35% पर ला चुका है। वहीं अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़ रही है। फरवरी 2026 में चीन ने रूस से 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ज्यादा तेल आयात किया, जबकि भारत का आयात घटकर लगभग 1.1–1.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया।

क्या है भारत के लिए जोखिम?

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत ने ऊर्जा नीति को राजनीतिक दबाव से अलग नहीं रखा, तो दीर्घकाल में इसका असर महंगाई, व्यापार घाटे और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है।

हालांकि भारत ने आधिकारिक तौर पर रूसी तेल बंद करने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन वैश्विक प्रतिबंधों और दबाव के कारण डिस्काउंट घट रहे हैं। ऐसे में भारत को वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं।

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महराजगंज: साजिश या लापरवाही? कशमरिंया में पराली भंडार में भीषण आग, किसानों को लाखों का नुकसान

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के मिठौरा ब्लॉक अंतर्गत सिंदुरिया थाना क्षेत्र के ग्राम कशमरिंया में बुधवार दोपहर पराली के विशाल भंडार में भीषण आग लगने से सैकड़ों किसानों पर आर्थिक संकट टूट पड़ा। देखते ही देखते कई टन पराली जलकर राख हो गई, जिससे किसानों की अतिरिक्त आय की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।

कैसे लगी आग, क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों के अनुसार धान कटाई के बाद आसपास के गांवों से पराली खरीदकर बंडल बनवाकर एक खेत में सुरक्षित रखी गई थी। यह कार्य HTM Warsi Farmer Producer Company द्वारा कराया जा रहा था।
खरीदी गई पराली का उपयोग पशुपालन, जैविक खाद और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किया जाना था, जिससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलनी थी।

बुधवार दोपहर अचानक खेत की दिशा से धुआं उठता दिखाई दिया। जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, आग तेजी से फैल चुकी थी। तेज हवा के कारण लपटें विकराल रूप लेती गईं और आसपास के खेतों तक फैलने का खतरा पैदा हो गया।

पुलिस और दमकल की टीम ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। किसान, कंपनी कर्मचारी और ग्रामीण घंटों तक आग बुझाने में जुटे रहे। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक भारी मात्रा में पराली जल चुकी थी।

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साजिश का शक, मुआवजे की मांग तेज

किसानों और ग्रामीणों ने इस घटना को संदिग्ध बताते हुए साजिश की आशंका जताई है। उनका कहना है कि सुरक्षित रखी गई पराली में अचानक आग लगना कई सवाल खड़े करता है।

किसानों ने प्रशासन से:

• निष्पक्ष जांच
• दोषियों की पहचान
• नुकसान का आकलन
• उचित मुआवजा
की मांग की है।

किसानों पर आर्थिक कहर

बताया जा रहा है कि लाखों रुपये मूल्य की पराली जलने से किसानों की अतिरिक्त आय पूरी तरह खत्म हो गई। इससे पशुपालन और जैविक खाद उत्पादन से जुड़ी योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।

घटना के बाद क्षेत्र में आक्रोश और चिंता का माहौल है। किसानों का कहना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर सख्ती नहीं हुई तो उनकी मेहनत और निवेश लगातार जोखिम में रहेगा।

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पुण्यतिथि विशेष: 19 फरवरी को खोए भारत के ये अनमोल रत्न

19 फ़रवरी को हुए निधन भारतीय इतिहास और संस्कृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दिन कई महान स्वतंत्रता सेनानी, साहित्यकार, कलाकार और न्यायविद इस दुनिया को अलविदा कह गए। 19 फ़रवरी को हुए निधन के अवसर पर आइए जानते हैं उन विभूतियों के जीवन, योगदान और विरासत के बारे में, जिन्होंने समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी।

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🕊️ 1. गोपाल कृष्ण गोखले (1915)
गोपाल कृष्ण गोखले का निधन 19 फ़रवरी 1915 को हुआ। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता, समाज सुधारक और विचारक थे।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल।
उदारवादी विचारधारा के समर्थक।
महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु माने जाते हैं।
गोखले ने शिक्षा और सामाजिक सुधारों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की नींव मजबूत की।
🕊️ 2. नरेन्द्र देव (1956)
नरेन्द्र देव का निधन 19 फ़रवरी 1956 को हुआ। वे प्रख्यात समाजवादी नेता, शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी थे।
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक नेताओं में से एक।
लखनऊ विश्वविद्यालय और काशी विद्यापीठ के कुलपति रहे।
उनकी वैचारिक स्पष्टता और नैतिक राजनीति आज भी प्रेरणास्रोत है।

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🕊️ 3. पंकज मलिक (1978)
पंकज मलिक का निधन 19 फ़रवरी 1978 को हुआ। वे बांग्ला और हिन्दी सिनेमा के प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और अभिनेता थे।
भारतीय फिल्म संगीत के शुरुआती दौर के अग्रदूत।
आकाशवाणी से जुड़े प्रमुख कलाकार।
उनकी मधुर आवाज़ और संगीत ने भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी।
🕊️ 4. नारायण श्रीधर बेन्द्रे (1992)
नारायण श्रीधर बेन्द्रे का निधन 19 फ़रवरी 1992 को हुआ।
आधुनिक भारतीय चित्रकला के प्रमुख स्तंभ।
पद्मश्री से सम्मानित।
उनकी कलाकृतियों में भारतीय परंपरा और आधुनिक शैली का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

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🕊️ 5. ख़ुमार बाराबंकवी (1999)
ख़ुमार बाराबंकवी का निधन 19 फ़रवरी 1999 को हुआ।
असली नाम: मोहम्मद हैदर ख़ान।
उर्दू शायरी में रोमांटिक और भावनात्मक अंदाज़ के लिए प्रसिद्ध।
उनकी ग़ज़लें आज भी साहित्य प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं।
🕊️ 6. निर्मल पांडे (2010)
निर्मल पांडे का निधन 19 फ़रवरी 2010 को हुआ।
समानांतर सिनेमा और रंगमंच के सशक्त अभिनेता।
कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में अभिनय।
उनकी अभिनय प्रतिभा ने भारतीय सिनेमा को नई गहराई दी।
🕊️ 7. अल्तमस कबीर (2017)
अल्तमस कबीर का निधन 19 फ़रवरी 2017 को हुआ।
भारत के 39वें मुख्य न्यायाधीश।
न्यायपालिका में पारदर्शिता और सुधार के समर्थक।
उन्होंने न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
🕊️ 8. नामवर सिंह (2019)
नामवर सिंह का निधन 19 फ़रवरी 2019 को हुआ।
हिन्दी साहित्य के प्रमुख आलोचक और विचारक।
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित।
उन्होंने हिन्दी आलोचना को नई वैचारिक ऊंचाई दी।

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19 फ़रवरी को हुए निधन: ऐतिहासिक महत्व
19 फ़रवरी को हुए निधन केवल तिथियां नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। इन महान विभूतियों ने स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य, कला, न्याय और सिनेमा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया।
19 फ़रवरी को हुए निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि राष्ट्र निर्माण में विचार, कला और न्याय की कितनी महत्वपूर्ण भूमिका है।
डिस्क्लेमर
प्रस्तुत इतिहास के प्रमुख निधन के बारे में विस्तृत जानकारी देने का प्रयास किया गया है। किसी भी प्रकार की 100 प्रतिशत प्रमाणित दावा हम नहीं करते। बड़ी सहजता से गहन छानबीन किया गया, फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।

राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के तहत युवाओं का जनजागरण अभियान शुरू

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)।जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज, महराजगंज की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाइयों द्वारा आयोजित एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ पीएम कम्पोजिट विद्यालय, सोंनरा में विधिवत किया गया। इस एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर में कुल 150 स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविकाएं भाग ले रहे हैं, जो पूरे सप्ताह गांव में जनजागरण, स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता के कार्यक्रम संचालित करेंगे।
यह एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर युवाओं को समाज सेवा से जोड़ने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। उद्घाटन सत्र के दौरान परिसर में सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का उत्साहपूर्ण वातावरण देखने को मिला।

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उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने रखा दृष्टिकोण
मुख्य अतिथि महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. बलराम भट्ट ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना युवाओं के सर्वांगीण विकास का सशक्त मंच है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन और समर्पण के साथ एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर को सफल बनाने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. उमेश प्रसाद यादव ने राष्ट्रीय सेवा योजना की स्थापना, उद्देश्य और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे राष्ट्र निर्माण का आधार स्तंभ बताया।
विद्यालय की प्रधानाचार्या शशिबाला पटेल ने शिविर में हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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सात दिनों तक चलेंगे जनहित कार्यक्रम
कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पीयूष कुमार जायसवाल ने बताया कि एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर के दौरान विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर विशेष अभियान चलाए जाएंगे। इनमें प्रमुख रूप से—
स्वच्छता अभियान
दहेज उन्मूलन जागरूकता
जल संरक्षण अभियान
शिक्षा के प्रति जागरूकता
पर्यावरण संरक्षण रैली
ग्राम सर्वेक्षण एवं संवाद कार्यक्रम
इन गतिविधियों के माध्यम से स्वयंसेवक ग्रामीणों को जागरूक करेंगे और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संदेश देंगे।
युवाओं में सेवा भावना का विकास
राष्ट्रीय सेवा योजना का मूल उद्देश्य “Not Me, But You” की भावना को बढ़ावा देना है। एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर के जरिए विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारी, नेतृत्व क्षमता और टीमवर्क का व्यावहारिक अनुभव मिलता है।
इस शिविर में छात्र-छात्राएं गांव में रहकर स्थानीय समस्याओं को समझेंगे और समाधान के लिए जनसहभागिता सुनिश्चित करेंगे।

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सामाजिक सरोकार से जुड़ा अभियान
आज के दौर में युवाओं का सामाजिक गतिविधियों से जुड़ना बेहद आवश्यक है। एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर के माध्यम से युवाओं को जमीनी स्तर पर समाज की वास्तविकताओं से रूबरू कराया जाता है।
स्वच्छता, जल संरक्षण और दहेज उन्मूलन जैसे मुद्दों पर जनजागरण अभियान ग्रामीण समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम का संचालन और सहभागिता
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. धर्मवीर ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. प्राची ने किया।
इस अवसर पर शाहिदा खातून, किरन गुप्ता, ज्योति, चंदा गौड़, हिमाचल मौर्या, राजू गौतम, अंशु यादव, दिवाकर वर्मा, दिव्यांशु जायसवाल, अन्नू कन्नौजिया, धीरज मद्धेशिया, ज्योतिराज मिश्रा, अर्चना वर्मा, नीतीश सहित सभी स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

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क्यों महत्वपूर्ण है एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर?
✔ ग्रामीण विकास में प्रत्यक्ष योगदान
✔ युवाओं में नेतृत्व कौशल का विकास
✔ सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता
✔ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
✔ शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर
इस प्रकार, एनएसएस सात दिवसीय विशेष शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की दिशा में एक संगठित प्रयास है।

19 फरवरी राशिफल: गुरुवार का दैनिक राशिफल, जानें मेष से मीन तक किसे मिलेगा लाभ

19 फरवरी राशिफल के अनुसार आज गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना गया है। ज्योतिषीय गणनाओं और ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर 19 फरवरी राशिफल बताता है कि कुछ राशियों के लिए यह दिन सफलता और धन लाभ लेकर आएगा, जबकि कुछ को सतर्क रहने की आवश्यकता है। आइए विस्तार से पढ़ें 19 फरवरी राशिफल और जानें आपका दिन कैसा रहेगा।

मेष राशि – 19 फरवरी राशिफल
आज ऑफिस में व्यस्तता रहेगी लेकिन परिणाम सकारात्मक मिलेंगे। प्रेम जीवन मधुर रहेगा। धन खर्च सोच-समझकर करें। हल्की स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं।
वृषभ राशि – 19 फरवरी राशिफल
प्रेम और कार्यस्थल की चुनौतियों को समझदारी से सुलझाएं। निवेश के नए विकल्पों पर विचार करें। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा।
मिथुन राशि – 19 फरवरी राशिफल
आज चेकलिस्ट बनाकर काम करें। घर में मधुर व्यवहार शांति लाएगा। खर्च नियंत्रित रखें। धैर्य और ईमानदारी से किया गया कार्य सफलता देगा।
कर्क राशि – 19 फरवरी राशिफल
सरल योजनाएं भरोसेमंद परिणाम देंगी। प्रोजेक्ट को छोटे हिस्सों में बांटें। धैर्य और फोकस सफलता दिलाएगा।
सिंह राशि – 19 फरवरी राशिफल
आज आत्मविश्वास बढ़ेगा। छोटे निर्णय भी बड़े परिणाम देंगे। प्रेम संबंधों में मधुरता रखें।
कन्या राशि – 19 फरवरी राशिफल
रचनात्मक विचार आएंगे। भावनाओं को संयमित रखें। शांत मन से लिए गए निर्णय लाभ देंगे।
तुला राशि – 19 फरवरी राशिफल
जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न दें। संयमित व्यवहार से रिश्तों में मजबूती आएगी। कार्यस्थल पर ध्यान केंद्रित रखें।
वृश्चिक राशि – 19 फरवरी राशिफल
प्रेम संबंधों में सुधार होगा। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना होगी। धन और स्वास्थ्य दोनों में भाग्य साथ देगा।
धनु राशि – 19 फरवरी राशिफल
धैर्य से कार्य करें। छोटे लक्ष्यों पर फोकस करें। सोच-समझकर बोलें।
मकर राशि – 19 फरवरी राशिफल
आर्थिक मामलों में सतर्क रहें। जोखिम से बचें। शांत और स्पष्ट योजना सफलता दिलाएगी।

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कुंभ राशि – 19 फरवरी राशिफल
रचनात्मकता नए अवसर देगी। परिवार में सहयोग का वातावरण रहेगा।
♓ मीन राशि – 19 फरवरी राशिफल
करियर में सफलता मिलेगी। प्रेम जीवन सुखद रहेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
🔮 19 फरवरी राशिफल का विशेष निष्कर्ष
19 फरवरी राशिफल के अनुसार आज का दिन संयम, धैर्य और विवेक से कार्य करने का है। गुरुवार होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य करना शुभ फलदायक रहेगा।

डिजिटल मार्केटिंग से पारंपरिक शिल्प को मिलेगा वैश्विक बाजार

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना से पारंपरिक कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की मजबूत पहल


देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। पारंपरिक शिल्प और कारीगरी को आधुनिक बाजार से जोड़कर कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से देवरिया जनपद में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विकास खंड सभागार, गौरी बाजार में आयोजित इस एक दिवसीय कार्यक्रम में 135 से अधिक विश्वकर्मा कारीगरों ने भाग लिया। आयोजन एमएसएमई-विकास कार्यालय, कानपुर (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय) के तत्वावधान में हुआ।
कार्यक्रम में बढ़ई, लोहार, सोनार, दर्जी, मोची, धोबी, नाई, गुड़िया एवं खिलौना निर्माता जैसे अनेक पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगर शामिल हुए। उन्हें डिजिटल मार्केटिंग, ई-कॉमर्स, सरल ऋण सुविधा, कौशल प्रशिक्षण और टूलकिट सहायता जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।
पारंपरिक कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक नीरज कुमार ने किया। स्वागत संबोधन में अविनाश कुमार अपूर्व ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को संजोए रखने में पारंपरिक कारीगरों की भूमिका केंद्रीय है। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का लक्ष्य इन्हें आधुनिक तकनीक, वित्तीय संसाधन और बाजार से जोड़कर स्थायी आय का मार्ग प्रशस्त करना है।
स्वरोजगार, उद्योग योजनाएं और सरकारी सहयोग की विस्तृत जानकारी
सहायक प्रबंधक (उद्योग) मनीष वर्मा ने योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभों के साथ राज्य सरकार की औद्योगिक एवं स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कारीगरों को प्रशिक्षण, पूंजी और बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

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डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स से बढ़ेंगे अवसर
उद्यमी डॉ. संजय भारती ने कारीगरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने के व्यावहारिक तरीके बताए। उन्होंने समझाया कि ऑनलाइन बाजार में पारंपरिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। यदि कारीगर डिजिटल मार्केटिंग अपनाएं तो वे अपने उत्पाद देश-विदेश तक पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिक्री पारंपरिक व्यवसायों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है।
बैंकिंग सुविधाएं और आसान ऋण प्रक्रिया
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की वरिष्ठ शाखा प्रबंधक मोना वर्मा ने योजना के तहत ऋण प्रक्रिया, पात्रता, ब्याज दर और बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत कारीगरों को सरल शर्तों पर ऋण दिया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक उपकरण खरीदकर अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें।

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डाक विभाग, लॉजिस्टिक्स और प्रशिक्षण कार्यक्रम
भारतीय डाक विभाग के प्रतिनिधि अरविंद गोंड ने बताया कि डाक विभाग पार्सल और लॉजिस्टिक सेवाओं के जरिए कारीगरों को उत्पादों की सुरक्षित और समयबद्ध डिलीवरी में सहयोग दे रहा है।
डीपीएमयू देवरिया के प्रतिनिधि विशाल वर्मा ने कहा कि कौशल प्रशिक्षण से कारीगरों की उत्पाद गुणवत्ता और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हो रहा है।
योजना की प्रगति: रिकॉर्ड उपलब्धि
सहायक निदेशक एवं समन्वयक नीरज कुमार ने प्रगति रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि देशभर में पांच वर्षों में 30 लाख कारीगरों को लाभ देने का लक्ष्य था, जिसे मात्र डेढ़ वर्ष में ही प्राप्त कर लिया गया है।
उत्तर प्रदेश में अब तक 1,78,031 लाभार्थियों का पंजीकरण, 1,40,440 को प्रशिक्षण, 14,927 को ऋण स्वीकृति और 66,821 कारीगरों को टूलकिट वितरित की जा चुकी है। यह उपलब्धि कारीगरों के सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर है।

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प्रशासन की प्रतिबद्धता और समाधान का आश्वासन
खंड विकास अधिकारी साबिर अनवर ने कहा कि एमएसएमई कार्यालय कारीगरों की हर समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। ऋण, प्रशिक्षण या तकनीकी सहायता से जुड़ी समस्याओं का त्वरित निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाएगा।
आत्मनिर्भर भारत को मिल रही मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक बाजार से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती दे रही है। इससे रोजगार सृजन के नए अवसर बन रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है।
कार्यक्रम के अंत में उद्यमी अमरेश कुमार ने अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम कारीगरों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें नई पहचान दिलाने में सहायक हैं।