Sunday, May 3, 2026
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स्कूल सुरक्षा नीति पर बड़ा सवाल: क्या प्रशासन तैयार है?

35 बच्चों की सामूहिक घटना ने बढ़ाई चिंता: क्या सुरक्षित हैं हमारे स्कूल?

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत 142 करोड़ से अधिक आबादी वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है। इतनी विशाल जनसंख्या में करोड़ों बच्चे प्रतिदिन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। स्कूल केवल ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिकविकास और भविष्य की नींव का आधार होते हैं। ऐसे में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई घटनाएँ चाहे वह छत्तीसगढ़ के धमतरी जैसी दर्दनाक घटना हो या अन्य राज्यों में स्कूल परिसरों में हुई दुर्घटनाएँ,यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि अब केवल शिक्षा की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की समग्र व्यवस्था पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक लागू करने की आवश्यकता है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि किसी भी सभ्य समाज की प्रगति का वास्तविक मापदंड उसके विद्यालयों की स्थिति और वहाँ पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा से निर्धारित होता है। विद्यालय केवल ज्ञान अर्जन का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण की प्रयोगशाला होते हैं। यदि यह प्रयोगशाला ही असुरक्षित हो जाए तो राष्ट्र की नींव कमजोर हो जाती है। हाल के वर्षों में भारत के विभिन्न राज्यों से सामने आई घटनाएँ चाहे वह छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की चौंकाने वाली घटना हो या अनेक राज्यों से जर्जर स्कूल भवनों के गिरने की खबरें,यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि अब समय आ गया है जब स्कूल सुरक्षा को शिक्षा नीति के पूरक तत्व के रूप में नहीं, बल्कि उसके मूल स्तंभ के रूप में स्थापित किया जाए। शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की चर्चा तब तक अधूरी है जब तक बच्चों का जीवन और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित न हो। 

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साथियों बात अगर हम छत्तीसगढ़ के एक स्कूल में हाल में हुई घटना को समझने की करें तो,धमतरी जिले के कुरूद स्थित एक सरकारी स्कूल में 7वीं-8वीं कक्षा के 35 बच्चों द्वारा ब्लेड से अपनी कलाई काटने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। यह घटना केवल अनुशासन या प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है,बल्कि यह बच्चों की मनोवैज्ञानिक स्थिति,स्कूल वातावरण और सामाजिक संवाद की कमी की गंभीर चेतावनी है। जब काउंसलिंग में यह सामने आया कि बच्चों ने देखा-देखी में यह कदम उठाया, तो यह स्पष्ट हो गया कि किशोरावस्था में सामूहिक प्रभाव और आकर्षण की प्रवृत्ति कितनी तीव्र होती है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है? क्या बच्चों को अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का सुरक्षित मंच मिल रहा है?क्या शिक्षक औरअभिभावक उनके व्यवहार में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को समझ पा रहे हैं? यदि इन प्रश्नों का उत्तर नकारात्मक है,तो हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं को पुनर्संतुलित करना होगा। 

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साथियों बात अगर हम 2 दिन पूर्व हाईकोर्ट द्वारा चिंता व्यक्त करने की करें तो,राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों पर चिंता व्यक्त करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने राज्य सरकार के बजट को ऊंट के मुंह में जीरा बताया। यह टिप्पणी केवल एक राज्य तक सीमित समस्या नहीं दर्शाती, बल्कि देश के अनेक हिस्सों में स्कूल भवनों की दयनीय स्थिति का प्रतीक है। जब भवनों की छतें कमजोर हों, दीवारों में दरारें हों, विद्युत तार खुले हों और शौचालय अनुपयोगी हों, तब बच्चों की सुरक्षा स्वतः खतरे में पड़ जाती है। बजट आवंटन और वास्तविक आवश्यकता के बीच की खाई को पाटना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर मरम्मत, पुनर्निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करना केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सटीक जीवन रक्षा का कार्य है। 

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साथियों बात अगर हम इस मुद्दे को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समझने की करें तो, विकसित देशों में भी स्कूल सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे तकनीकी और आर्थिक रूप से समृद्ध राष्ट्र में भी विद्यालयों में गोलीबारी की घटनाएँ समय-समय पर होती रही हैं। 2022 में टेक्सास के उवाल्डे स्थित रोब्ब एलिमेंटरी स्कूल में हुई गोलीबारी ने पूरी दुनियाँ को स्तब्ध कर दिया था। इससे पहले 1999 में कोलोराडो के कॉलम्बीने हाई स्कूल में हुई घटना ने स्कूल सुरक्षा पर वैश्विक बहस को जन्म दिया। इन घटनाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि आर्थिक समृद्धि और तकनीकी उन्नति अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं हैं। सुरक्षा एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें जोखिम मूल्यांकन, निगरानी, प्रशिक्षण और सामुदायिक सहयोग की निरंतर आवश्यकता होती है। भारत को इन अनुभवों से सीख लेकर अपने विद्यालयों के लिए बहु-स्तरीय अति महत्वपूर्ण सुरक्षा मॉडल विकसित करना चाहिए। 

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साथियों बात अगर हम भारत में शिक्षा का संचालन मुख्यतः राज्यों के अधीन है, इसको समझने की करें तो राष्ट्रीय स्तरपर नीति निर्माण में मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन की केंद्रीय भूमिका है। नेशनल एजुकेशन पालिसी 2020 ने शिक्षा की गुणवत्ता,समावेशिता और नवाचार पर जोर दिया है, परंतु सुरक्षा को एक स्वतंत्र और अनिवार्य स्तंभ के रूपमें संस्थागत रूपसे स्थापित करने कीआवश्यकता अभी शेष है। स्कूल सुरक्षा नीति को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ लागू किया जाना चाहिए, जिसमें भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, विद्युत मानक, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय, सीसीटीवी निगरानी, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल हों। प्रत्येक विद्यालय के लिए अनिवार्य स्कूल सेफ्टी ऑडिट प्रणाली लागू की जानी चाहिए,जिसका वार्षिक नवीनीकरण हो और जिसकी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो।जिला स्तर पर कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट प्रशासनिक व्यवस्था के प्रमुख होते हैं। यदि वे नियमित औचक निरीक्षण करें तो जमीनी स्तर की सच्चाई सामने आ सकती है। औचक निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता, अग्निशामक यंत्रों की सर्विसिंग, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता और खेल मैदानों की सुरक्षा का वास्तविक मूल्यांकन शामिल होना चाहिए। कई बार स्कूलों में उपकरण तो लगे होते हैं, परंतु वे निष्क्रिय पड़े रहते हैं। ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने पर केवल कागजी प्रमाण किसी बच्चे का जीवन नहीं बचा सकते। इसलिए निरीक्षण प्रणाली को परिणामोन्मुख और जवाबदेह बनाना अत्यंत ही आवश्यक है। 

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साथियों बात अगर हम  ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों की स्थिति को समझने की करें तो यह विशेष चिंता का विषय है।कई स्कूल अस्थायी भवनों में संचालित होते हैं या दशकों पुराने ढाँचों में चल रहे हैं। वर्षा, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ये भवन अतिरिक्त जोखिम उत्पन्न करते हैं।राज्य सरकारों को वार्षिक स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य करना चाहिए और जर्जर भवनों को तुरंत उपयोग से बाहर कर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। निजी विद्यालयों के लिए भी समान मानक लागू होने चाहिए। यदि कोई निजी संस्था सुरक्षा मानकों की अनदेखी करती है तो उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई जुर्माना, मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण की व्यवस्था होनी चाहिए।भौतिक संरचना के अतिरिक्त मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। धमतरी की घटना ने यह स्पष्ट किया कि बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य की अनदेखी गंभीर परिणाम दे सकती है।विद्यालयों में प्रशिक्षित काउंसलर नियुक्त किए जाने चाहिए। प्रत्येक स्कूल में ‘बाल संरक्षण समिति’ का गठन हो और शिक्षकों को लैंगिक संवेदनशीलता तथा बाल अधिकारों पर नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। बुलिंग, शारीरिक दंड और लैंगिक उत्पीड़न के मामलों के लिए स्पष्ट शिकायत तंत्र हो। बच्चों को यह विश्वास दिलाना आवश्यक है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।यह विश्वास ही सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।

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साथियों बात अगर हम  स्कूल परिवहन भी सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष है इसको समझने की करें तो, ओवरलोडेड बसें, अप्रशिक्षित चालक औरफिटनेस प्रमाणपत्र की अनदेखी अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त निरीक्षण अभियान अनिवार्य होने चाहिए। प्रत्येक स्कूल बस में जीपीएस प्रणाली, फर्स्ट एड किट, अग्निशामक यंत्र और प्रशिक्षित परिचारक होना चाहिए। बस चालकों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और पृष्ठभूमि सत्यापन भी अनिवार्य किया जाना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा स्कूल के गेट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; घर से स्कूल और स्कूल से घर तक की पूरी यात्रा सुरक्षित होनी चाहिए,सामाजिक भागीदारी सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बना सकती है। अभिभावक-शिक्षक संघ को केवल परीक्षा परिणाम या शुल्क संरचना तक सीमित न रखकर सुरक्षा समीक्षा में सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए।स्थानीय पुलिस, प्रशासन और समुदाय के बीच समन्वय सेसंदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई संभव है। स्कूल सेफ्टी कम्युनिटी नेटवर्क जैसे मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जहाँ समुदाय स्वयं निगरानी में सहयोग करे।डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अभिभावकों को सुरक्षा रिपोर्ट और निरीक्षण निष्कर्ष उपलब्ध कराए जा सकते हैं। 

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साथियों बात अगर हम  स्कूल सुरक्षा को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है;इसको समझने की करें तो  यह एक सामाजिक अनुबंध है जिसमें सरकार, शिक्षक,अभिभावक और समुदाय सभी सहभागी हैं। यदि किसी एक कड़ी में कमजोरी आती है तो पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है। इसलिए समन्वित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन और निगरानी तक हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।यदि मुख्यमंत्री स्वयं समय-समय पर स्कूलों की सुरक्षा संबंधी समीक्षा बैठकें लें, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला अधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त करें, और आकस्मिक निरीक्षण करें, तो प्रशासनिक तंत्र में गंभीरता स्वतः आ जाती है। जब शीर्ष नेतृत्व संवेदनशील और सक्रिय होता है, तो निचले स्तर पर भी जवाबदेही बढ़ती है। बच्चों की सुरक्षा केवल शिक्षा विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि गृह विभाग, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग का भी समन्वित उत्तरदायित्व है। 

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साथियों बात अगर  हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने स्कूल सुरक्षा को बहु-आयामी दृष्टिकोण से अपनाया है। आपदा प्रबंधन अभ्यास, नियमित मॉक ड्रिल, मनो वैज्ञानिक सहायता कार्यक्रम और सामुदायिक जागरूकता अभियान को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाया गया है। भारत में भी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। भूकंप, आग या अन्य आपात स्थितियों के लिए छात्रों और शिक्षकों को प्रशिक्षित करना आवश्यक है ताकि संकट की घड़ी में घबराहट के बजाय संगठित प्रतिक्रिया हो। 

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि बच्चों की सुरक्षा केवल कानूनी या प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व है। जिस राष्ट्र में बच्चे सुरक्षित नहीं, वहाँ विकास की कोई भी परिकल्पना अधूरी है। धमतरी जैसी घटनाएँ चेतावनी हैं कि हमें शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीख लेते हुए,स्थानीयआवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत नीतियाँ बनाकर और उनका कठोर क्रियान्वयन सुनिश्चित करके ही हम अपने विद्यालयों को वास्तविक अर्थों में सुरक्षित बना सकते हैं।जब प्रत्येक अभिभावक यह विश्वास कर सके कि उसका बच्चा विद्यालय में सुरक्षित है, तभी शिक्षा व्यवस्था पर समाज का भरोसा पूर्ण रूप से स्थापित होगा। यही विश्वास राष्ट्र की प्रगति की सबसे सुदृढ़ आधारशिला है।

लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र

मानदेय वृद्धि की घोषणा के बीच आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का विशेष प्रशिक्षण

सुखपुरा में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।सुखपुरा ब्लॉक मुख्यालय के दवकरा हाल में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष अभियान के तहत आयोजित इस आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आई कार्यकत्रियों को पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी अद्यतन जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रमोद सिंह एवं विशिष्ट अतिथि खंड विकास अधिकारी बेरूआरबारी शैलेश कुमार मुरारी ने दीप प्रज्वलन कर किया। पहले दिन के सत्र में विशेषज्ञों ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के समग्र विकास की पहली कड़ी हैं और यहां दी जाने वाली शिक्षा व पोषण भविष्य की नींव मजबूत करते हैं।
मुख्य अतिथि ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सही पोषण, स्वच्छता और संस्कार की शिक्षा से ही मजबूत समाज का निर्माण संभव है।
इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधान परिषद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा वर्करों के मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई है। संभावना है कि यह निर्णय होली पर्व से पहले लागू किया जाएगा। इस घोषणा से उपस्थित कार्यकत्रियों में उत्साह देखा गया।

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पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
खंड विकास अधिकारी शैलेश कुमार मुरारी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी बच्चा कुपोषण या शिक्षा से वंचित न रहे। आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से कार्यकत्रियों को संतुलित आहार, कुपोषण की पहचान, टीकाकरण की समय-सारिणी और रिकॉर्ड संधारण की तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए शुरुआती पांच वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक शिक्षा अत्यावश्यक है। प्रशिक्षण में पोषण ट्रैकिंग, डिजिटल रिपोर्टिंग और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई।

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जमीनी अनुभव और चुनौतियां
आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण संवादात्मक शैली में आयोजित किया गया, जहां कार्यकत्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, जागरूकता की कमी और संसाधनों की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा हुई।
मुख्य सेविका अनीता यादव, स्नेहा गुप्ता, अनुज दुबे एवं विनोद सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अगले दो दिनों में व्यावहारिक सत्र, केस स्टडी और योजनाओं की मॉनिटरिंग पर विशेष फोकस रहेगा।

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गुणवत्ता सुधार की उम्मीद
इस आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम से क्षेत्र में आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित कार्यकत्रियां बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने, गर्भवती व धात्री महिलाओं को बेहतर परामर्श देने और समयबद्ध टीकाकरण सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि की घोषणा से कार्यकत्रियों का मनोबल भी बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगी।

21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व

21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व भारतीय और विश्व इतिहास में विशेष स्थान रखते हैं। 21 फ़रवरी जन्मदिन विशेष के इस लेख में हम उन महान लोगों के जीवन, योगदान और उपलब्धियों को विस्तार से जानेंगे, जिनका जन्म 21 फ़रवरी को हुआ और जिन्होंने समाज, साहित्य, विज्ञान, राजनीति और आध्यात्म के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी।
🪔 मिर्रा अलफ़ासा (दा मदर) – आध्यात्मिक चेतना की अग्रदूत (1878)
21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व में दा मदर का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। फ्रांस में जन्मी मिर्रा अलफ़ासा बाद में भारत आईं और Sri Aurobindo Ashram की प्रमुख आध्यात्मिक शक्ति बनीं।
उन्होंने Auroville की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन मानव एकता, आत्मिक विकास और वैश्विक शांति के लिए समर्पित रहा।

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🧪 शान्ति स्वरूप भटनागर – भारतीय विज्ञान के शिल्पकार (1894)
21 फ़रवरी जन्मदिन विशेष में वैज्ञानिक शान्ति स्वरूप भटनागर का योगदान अत्यंत उल्लेखनीय है।
वे Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) के संस्थापक महानिदेशक थे।
उनके सम्मान में दिया जाने वाला भटनागर पुरस्कार आज भी भारत का प्रतिष्ठित विज्ञान सम्मान है।
✍️ सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला – छायावाद के स्तंभ (1896)
21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व में निराला जी का साहित्यिक स्थान अत्यंत ऊँचा है।
वे छायावाद युग के प्रमुख कवि थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और क्रांतिकारी विचार स्पष्ट दिखाई देते हैं।

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🗡️ विश्वनाथ नारायण लवांडे – गोवा मुक्ति संग्राम के नायक (1923)
21 फ़रवरी जन्मदिन विशेष में स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ नारायण लवांडे का नाम गर्व से लिया जाता है।
उन्होंने Goa Liberation Movement में सक्रिय भूमिका निभाई और पुर्तगाली शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।
🌍 एलेक्सी कोज़ीगिन – सोवियत संघ के प्रधानमंत्री (1904)
एलेक्सी कोज़ीगिन 1964 से 1980 तक सोवियत संघ के प्रधानमंत्री रहे।
उनकी आर्थिक नीतियों ने सोवियत उद्योग और प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा दी।
👑 जिग्मे खेसर नामग्याल वांग्चुक – भूटान के पाँचवें राजा
21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व में भूटान के वर्तमान राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांग्चुक भी शामिल हैं।
वे भूटान के विकास, शिक्षा और खुशहाली (Gross National Happiness) की नीति को आगे बढ़ा रहे हैं।
🏛️ टी. आर. जेलियांग – नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री (1952)
टी. आर. जेलियांग ने नागालैंड की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राज्य के विकास के लिए कई पहल कीं।
✒️ अमीर मीनाई – उर्दू साहित्य के रत्न (1829)
अमीर मीनाई उर्दू के महान शायर थे। उनकी ग़ज़लें और नज़्में आज भी साहित्य प्रेमियों द्वारा सराही जाती हैं।

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🏎️ प्रतिभा सुरेश्वरन – भारतीय मोटरस्पोर्ट की पहचान (1980)
प्रतिभा सुरेश्वरन भारत की अग्रणी महिला रेसिंग ड्राइवरों में गिनी जाती हैं। उन्होंने मोटरस्पोर्ट में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान दी।
21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ चुके हैं। 21 फ़रवरी जन्मदिन विशेष हमें यह प्रेरणा देता है कि एक दिन में जन्मे लोग भी अलग-अलग क्षेत्रों में इतिहास रच सकते हैं।

ई-पॉस फेल? घबराएं नहीं, 26 को ओटीपी से मिलेगा राशन

बलिया (राष्ट्र की परम्परा) निःशुल्क राशन वितरण 2026: 8 से 26 फरवरी तक फ्री राशन, ई-पॉस फेल होने पर 26 को ओटीपी से मिलेगा लाभ बलिया निःशुल्क राशन वितरण 2026 के तहत जनपद के अंत्योदय और पात्र गृहस्थी कार्डधारकों को 8 फरवरी से 26 फरवरी 2026 तक मुफ्त खाद्यान्न दिया जाएगा। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि यह वितरण राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत किया जा रहा है। प्रशासन ने सभी उचित दर दुकानदारों को पारदर्शी और समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
किन्हें और कितना मिलेगा फ्री राशन?
अंत्योदय कार्डधारक,प्रति कार्ड 35 किलोग्राम खाद्यान्न,10 किलो गेहूं,25 किलो चावल,पात्र गृहस्थी कार्डधारक,प्रति यूनिट 5 किलोग्राम खाद्यान्न,1 किलो गेहूं,4 किलो फोर्टिफाइड चावल,फोर्टिफाइड चावल में आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन जैसे आवश्यक पोषक तत्व मिलाए जाते हैं, जो कुपोषण कम करने में सहायक होते हैं।
ई-पॉस मशीन से होगा वितरण
बलिया निःशुल्क राशन वितरण 2026 की पूरी प्रक्रिया ई-पॉस मशीन के जरिए आधार प्रमाणीकरण से होगी। लाभार्थी को उचित दर की दुकान पर अंगूठा लगाकर सत्यापन कराना होगा।यदि किसी कारण से अंगूठे का सत्यापन फेल हो जाता है या तकनीकी समस्या आती है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। 26 फरवरी 2026 को ओटीपी आधारित वैकल्पिक व्यवस्था लागू रहेगी। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए ओटीपी के माध्यम से राशन प्राप्त किया जा सकेगा।
समय से पहले उठाएं लाभ
जिला प्रशासन ने अपील की है कि लाभार्थी अंतिम तिथि का इंतजार न करें। 8 से 26 फरवरी के बीच किसी भी कार्यदिवस में राशन ले लें। वितरण के दौरान अनुशासन बनाए रखें और किसी भी अनियमितता की सूचना संबंधित अधिकारी को दें।
प्रशासन द्वारा बलिया निःशुल्क राशन वितरण 2026 की सतत निगरानी की जा रही है ताकि हर पात्र व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राहत,महंगाई के बीच खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित,पोषण सुधार के लिए फोर्टिफाइड चावल,डिजिटल और पारदर्शी वितरण प्रणाली,बलिया निःशुल्क राशन वितरण 2026 से हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। पात्र कार्डधारक तय अवधि में राशन अवश्य प्राप्त करें।

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस क्यों मनाया जाता है? जानें 21 फ़रवरी का इतिहास

21 फ़रवरी का इतिहास: क्यों महत्वपूर्ण है यह दिन?
21 फ़रवरी का इतिहास विश्व और भारत के लिए कई ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस से लेकर साम्राज्यों के उत्थान-पतन, युद्ध, राजनीतिक समझौते और सांस्कृतिक बदलाव तक, 21 फ़रवरी का इतिहास अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं को समेटे हुए है। आइए विस्तार से जानते हैं 21 फ़रवरी की प्रमुख घटनाएँ।
17वीं–18वीं शताब्दी की महत्वपूर्ण घटनाएँ
👑 Michael I of Russia का रूस का जार बनना (1613)
1613 में माइकल रोमानोव रूस के जार बने। उनके शासन से रोमानोव वंश की शुरुआत हुई, जिसने लगभग 300 वर्षों तक रूस पर शासन किया।

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⚔ Aurangzeb की मृत्यु (1707)
मुगल सम्राट औरंगज़ेब की मृत्यु अहमदनगर में हुई। उनकी मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य का पतन तेज़ी से शुरू हुआ।
🌍 सीलोन पर ब्रिटिश कब्ज़ा (1795)
डचों ने सीलोन (वर्तमान श्रीलंका) अंग्रेजों को सौंप दिया, जिससे दक्षिण एशिया में ब्रिटिश प्रभाव और मजबूत हुआ।
19वीं शताब्दी
🧵 सिलाई मशीन का पेटेंट (1842)
अमेरिका में सिलाई मशीन के पेटेंट ने औद्योगिक क्रांति को गति दी और वस्त्र उद्योग में बड़ा बदलाव लाया।
📜 The Communist Manifesto का प्रकाशन (1848)
कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स द्वारा लिखित कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणा पत्र प्रकाशित हुआ, जिसने विश्व राजनीति और विचारधारा को गहराई से प्रभावित किया।

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20वीं शताब्दी की प्रमुख घटनाएँ
🌐 UNESCO और अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस (1952 की पृष्ठभूमि)
1952 में ढाका (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) में बंगाली भाषा को आधिकारिक दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ। पुलिस फायरिंग में कई लोग मारे गए। बाद में यूनेस्को ने 21 फ़रवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस घोषित किया।
21 फ़रवरी का इतिहास भाषाई अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है।
📰 Press Club of India की स्थापना (1959)
नई दिल्ली में प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना हुई, जो पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण संस्था है।
सिनाई विमान दुर्घटना (1973)
इजरायली लड़ाकू विमानों ने लीबिया अरब एयरलाइंस के विमान को मार गिराया, जिसमें 108 लोगों की मृत्यु हुई।

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🤝 Atal Bihari Vajpayee और Nawaz Sharif के बीच लाहौर घोषणा (1999)
भारत और पाकिस्तान के बीच शांति प्रयासों के तहत लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए गए। 21 फ़रवरी का इतिहास दक्षिण एशिया की कूटनीति में भी महत्वपूर्ण रहा।
21वीं सदी की घटनाएँ
🎾 Sania Mirza की ऐतिहासिक उपलब्धि (2004)
सानिया मिर्ज़ा डब्ल्यूटीए खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं।
🏏 Saina Nehwal की जीत (2010)
साइना नेहवाल ने उबेर कप क्वालीफायर में शानदार प्रदर्शन किया, जिससे भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
💥 हैदराबाद बम धमाके (2013)
हैदराबाद में सिलसिलेवार बम धमाकों में 17 लोगों की मौत और 100 से अधिक लोग घायल हुए। यह घटना भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनी।
21 फ़रवरी का इतिहास क्यों याद रखें?
यह दिन अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
साम्राज्य परिवर्तन, क्रांति और राजनीतिक घोषणाओं का दिन रहा।
भारत-पाक शांति पहल और खेल उपलब्धियों से भी जुड़ा है।
21 फ़रवरी का इतिहास वैश्विक राजनीति, संस्कृति और समाज पर गहरा प्रभाव डालता है।
निष्कर्ष
21 फ़रवरी का इतिहास हमें बताता है कि यह दिन केवल कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि विश्व इतिहास की कई निर्णायक घटनाओं का प्रतीक है। भाषा अधिकारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और खेल जगत तक, 21 फ़रवरी की प्रमुख घटनाएँ आज भी प्रेरणा देती हैं।
अस्वीकरण:
उपरोक्त जानकारी विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर संकलित की गई है। हम किसी भी प्रकार का 100% प्रमाणित दावा नहीं करते। गहन छानबीन के बावजूद यदि कोई त्रुटि हो तो उसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।

वरद चतुर्थी, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का संपूर्ण पंचांग

पंचांग 21 फरवरी 2026: वरद चतुर्थी, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और आज का संपूर्ण पंचांग

पंचांग 21 फरवरी 2026 के अनुसार आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि है। यह दिन वरद चतुर्थी व्रत के रूप में विशेष महत्व रखता है। चंद्रमा आज शाम 07:07 PM तक मीन राशि में और उसके बाद मेष राशि में संचार करेगा। नीचे दिया गया आज का पंचांग 21 फरवरी 2026 शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, नक्षत्र, योग, करण और चौघड़िया सहित विस्तार से प्रस्तुत है।
दैनिक पंचांग 21 फरवरी 2026 (शनिवार)
🗓 तिथि
शुक्ल पक्ष चतुर्थी – 01:01 PM तक
इसके बाद शुक्ल पक्ष पंचमी
🌟 नक्षत्र
रेवती – 07:07 PM तक
उपरांत अश्विनी नक्षत्र
🔯 योग
शुभ योग – 03:50 PM तक
इसके बाद शुक्ल योग
🌓 करण
विष्टि – 01:01 PM तक
बव – 12:07 AM तक
बालव – 11:10 AM (22 फरवरी) तक

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🌅 सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय: 06:58 AM
सूर्यास्त: 06:22 PM
चंद्रोदय: 09:07 AM
चंद्रास्त: 10:14 PM
अयन: उत्तरायण
ऋतु (द्रिक): वसंत
अशुभ मुहूर्त (राहुकाल सहित)
राहुकाल: 09:49 AM – 11:15 AM
यमगण्ड: 02:05 PM – 03:31 PM
कुलिक काल: 06:58 AM – 08:24 AM
दुर्मुहूर्त: 08:29 AM – 09:15 AM
वर्ज्यम्: 07:37 AM – 09:09 AM
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 12:17 PM – 01:03 PM
अमृत काल: 04:48 PM – 06:20 PM
ब्रह्म मुहूर्त: 05:21 AM – 06:09 AM

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🕉 वार एवं व्रत
वार: शनिवार
विशेष व्रत: वरद चतुर्थी
🌙 चंद्र राशि परिवर्तन
07:07 PM तक मीन राशि
उसके बाद मेष राशि
📊 चंद्रबल (21 फरवरी 2026)
07:07 PM तक:
वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन
इसके बाद:
मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुंभ
📌 आज का चौघड़िया (दिन)
काल – 06:58 AM से 08:24 AM
शुभ – 08:24 AM से 09:49 AM
रोग – 09:49 AM से 11:15 AM
उद्बेग – 11:15 AM से 12:40 PM
चर – 12:40 PM से 02:05 PM
लाभ – 02:05 PM से 03:31 PM
अमृत – 03:31 PM से 04:56 PM
काल – 04:56 PM से 06:21 PM

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🔔 विशेष योग
सर्वार्थसिद्धि योग: 22 फरवरी 06:58 AM – 05:54 PM
अमृतसिद्धि योग: 20 फरवरी 08:07 PM – 21 फरवरी 06:58 AM
गण्डमूल नक्षत्र: रेवती एवं अश्विनी
आज का महत्व
पंचांग 21 फरवरी 2026 के अनुसार आज वरद चतुर्थी का व्रत रखने से विघ्नों का नाश और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल उत्तम हैं। राहुकाल में किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए।
जो लोग आज का पंचांग 21 फरवरी 2026 देख रहे हैं, उनके लिए चंद्र राशि परिवर्तन भी महत्वपूर्ण है, विशेषकर मेष और मीन राशि वालों के लिए।
📌 निष्कर्ष
यदि आप पंचांग 21 फरवरी 2026, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और वरद चतुर्थी व्रत की जानकारी खोज रहे हैं, तो यह विस्तृत विवरण आपके लिए उपयोगी है। किसी भी मांगलिक कार्य से पहले आज का पंचांग 21 फरवरी 2026 अवश्य देखें।
⚠️ अस्वीकरण
यह पंचांग सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। हम किसी भी प्रकार की प्रमाणित दावा नहीं करते। किसी योग्य ज्योतिषाचार्य या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ: मनोज सिन्हा ने की प्राण प्रतिष्ठा

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श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया: षष्ठम दिवस पर उमड़ा जनसैलाब

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया के षष्ठम दिवस पर श्रद्धालुओं की आस्था अपने चरम पर दिखी। दिनांक 20 फरवरी 2026, शुक्रवार को नवनिर्मित भव्य मंदिर परिसर में हजारों श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की। गांव से लेकर नगर तक श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया की भव्यता की चर्चा रही।

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ब्रह्म मुहूर्त से सायंकाल तक यज्ञ मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान संपन्न हुआ। यज्ञाचार्य रंगनाथ त्रिपाठी जी एवं 27 आचार्यों ने वेद–पुराणों के मंत्रों से वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया के प्रमुख यजमान डॉ. नंदकिशोर तिवारी, नीलेश्वर राय, घनश्याम राय, विनय राय, सिद्धार्थ राय, राजेश राय, सुरेश राय, धन्नजय राय, सच्चिदानंद तिवारी एवं अशोक तिवारी सपत्नीक अनुष्ठान में सहभागी रहे।

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इस ऐतिहासिक अवसर पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने करकमलों से विग्रह प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई। उनके आगमन से श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया को विशेष गौरव प्राप्त हुआ। प्राण प्रतिष्ठा के साथ ही मंदिर आम जनमानस के लिए खोल दिया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया।
श्रीमद्भागवत कथा और आध्यात्मिक प्रवाह
अयोध्या धाम से पधारी कथावाचिका सुश्री लक्ष्मी प्रिया ने दोपहर में श्रीमद्भागवत कथा का भावपूर्ण वाचन किया। प्रथम से चतुर्थ स्कंध तक मंगलाचरण, भागवत महात्म्य, परीक्षित श्राप, शुकदेव आगमन, सृष्टिक्रम, कपिल गीता, ध्रुव चरित्र और पृथु चरित्र का विस्तार से वर्णन हुआ। कथा श्रवण कर श्रद्धालु भावविभोर दिखे। श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया के दौरान कथा पंडाल में भक्तों की भारी उपस्थिति रही।

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भजन संध्या में भक्ति रस की गूंज
सायं 6:30 बजे मुंबई से आए भजन गायक कुमार सत्यम ने भक्ति संध्या को संगीतमय बना दिया। “ऐसी लागी लगन”, “सांसों की माला पर”, “राम को देखकर जनक नंदिनी”, “मइया का दरबार सुहाना लगता है” जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। पूरे पंडाल में भक्ति और उल्लास का वातावरण छाया रहा।
विशिष्ट अतिथियों का सम्मान
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों में अंतर्यामी सिंह (पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा देवरिया), पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन, उप जिलाधिकारी सलेमपुर दिशा श्रीवास्तव एवं क्षेत्रीय अध्यक्ष भाजपा डॉ. जितेंद्र प्रताप राव उपस्थित रहे। आयोजक प्रभात कुमार राय ने सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। अपने संबोधन में मनोज सिन्हा ने भारत की धार्मिक विरासत और विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।

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रामलीला मंचन से रोमांच
दोपहर 10 बजे से आयोजित रामलीला में हनुमान जी का संजीवनी लाना, भरत-हनुमान मिलन एवं कुंभकरण वध का जीवंत मंचन हुआ। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय से दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
आयोजन समिति का आभार
श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया के प्रमुख आयोजक प्रभात कुमार राय ने दूर-दराज से आए संतों, श्रद्धालुओं एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस महायज्ञ को सफल बनाने में जनसहयोग की सराहना की।
श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ एवं विग्रह प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, बनकटाशिव सल्लहपुर देवरिया न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन रहा है, बल्कि क्षेत्रीय सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाई दे रहा है।

शिक्षा का अधिकार 2026: प्रथम चरण की लॉटरी में 519 बच्चों का चयन

कुशीनगर में RTE ऑनलाइन लॉटरी में बच्चों को निजी विद्यालयों में मिला मुफ्त प्रवेश

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)l शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत RTE ऑनलाइन लॉटरी 2026 के प्रथम चरण में 519 बच्चों को निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश आवंटित किया गया। यह प्रक्रिया जिलाधिकारी महेंद्र सिंह के निर्देशानुसार पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न हुई।मुख्य विकास अधिकारी एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में आयोजित RTE ऑनलाइन लॉटरी 2026 के माध्यम से शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अलाभित समूह एवं दुर्बल वर्ग के बच्चों को गैर-सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में प्रवेश दिया गया।जनपद में कुल 1798 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए थे। सत्यापन के बाद 908 आवेदन पात्र घोषित किए गए, जबकि 890 आवेदन विभिन्न कारणों से अपात्र पाए गए। पात्र 908 आवेदनों के सापेक्ष 519 बच्चों को विद्यालय आवंटित किया गया, जबकि 389 पात्र बच्चों को इस चरण में विद्यालय नहीं मिल सका।आवंटन न मिलने के प्रमुख कारणों में एक ही विद्यालय में अत्यधिक आवेदन, वार्ड या क्षेत्र की असंगति, विद्यालय की दूरी और डुप्लीकेट आवेदन शामिल रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शेष पात्र बच्चों को आगामी चरण में अवसर दिया जाएगा।चयनित बच्चों के अभिभावकों से निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित विद्यालय में संपर्क कर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करने की अपील की गई है। आवंटन पत्र आरटीई पोर्टल पर उपलब्ध है। प्रशासन के अनुसार RTE ऑनलाइन लॉटरी 2026 पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और डिजिटल प्रणाली के माध्यम से संपन्न कराई गई है।

बरहज स्टेशन करे पुकार पानी शौचालय दे सरकार – कांग्रेस

ब्रिटिश कॉल मे व्यापार के लिए बना रेलवे स्टेशन हाल्ट मे तब्दील -रविप्रताप सिंह

बरहज/देवरिया(राष्ट्र की परम्परा)l रेलवे स्टेशन बरहज पर मुलभुत सुविधाओं को लेकर चल रहे धरने के तीसरे दिन भी कांग्रेस जन एवं आम जनता कांग्रेस प्रवक्ता रविप्रताप सिंह के नेतृत्व मे जमे रहे।
इस दौरान रविप्रताप सिंह ने प्रतिनिधियों सहित केंद्र एवं प्रदेश की सरकार को आड़े हाथो लेते हुए कहा कि, डबल इंजन कि सरकार कहती है कि हमारी पार्टी हर घर जल देने का कार्य कर रही है, लेकिन ब्रिटिश सरकार के शासन कॉल मे बना बरहज रेलवे स्टेशन जो मुख्यतः व्यापार के लिए शुरू किया गया था। किन्तु यह कैसी बिडंबना है कि यह स्टेशन अपने इतिहास को खोता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बरहजीया ट्रेन से हर रोज हजारों यात्री आते जाते है, लेकिन स्टेशन परिसर मे नही पेयजल और नहीं शौचालय कि कोई व्यवस्था है, जिससे यात्रियों को दिक्क़तो का सामना करना पड़ता है। रविप्रताप सिंह ने कहा की अंग्रेजी हुकूमत के समय बना यह बरहज रेलवे स्टेशन को हाल्ट मे तब्दील कर दिया गया है, जो बरहज विधानसभा क्षेत्र की जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा किया गया है।
इसी क्रम मे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता चंद्रभूषण पाण्डेय कहा कि, यह दम्भी सरकार है, भाजपा कि सरकार को आम जनता कि दिक्क़तो से कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि धर्म की राजनीती करने वाली सरकार केवल भारत के इतिहास को मिटाने का काम कर रही है उसे विकास से कुछ लेना देना नहीं है। बरहज रेलवे स्टेशन परिसर झाड़ियों से पटा पड़ा है कोई साफ सफाई नहीं है।
वही भोला तिवारी ने कहाँ कि अगर रेल प्रशासन शुक्रवार को कोई निराकरण नहीं करता है तो शनिवार को हम सभी कांग्रेसी जन अमजनता के साथ रेल को रोका जायगा, जिसकी जिम्मेदारी रेल प्रशासन कि होंगी।
धरने पर नगर अध्यक्ष जीतेन्द्र जायसवाल,रमेश तिवारी, नागेंद्र शुक्ल, रविप्रकाश तिवारी, राम स्नेही अफजल अंसारी सहीत आदि लोग धरने पर बैठे है।

मतदाता सूची संशोधन हेतु विशेष अभियान दिवस घोषित

22 फरवरी को विशेष अभियान दिवस, मतदाता सूची में नाम जोड़ने का सुनहरा अवसर

कुशीनगर (राष्ट्र की परम्परा)। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के तहत 22 फरवरी 2026 (रविवार) को जिले के सभी मतदान केंद्रों पर विशेष अभियान दिवस आयोजित किया जाएगा। इस दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन एवं विलोपन से संबंधित दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। दावे एवं आपत्तियां 06 मार्च 2026 तक जमा की जा सकती हैं।
सहायक निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक सभी बूथों पर अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहेंगे। मतदाताओं की सुविधा के लिए फॉर्म-6, 6ए, 7 और 8 उपलब्ध रहेंगे। हर मतदान केंद्र पर हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी, जहां फॉर्म भरने में सहायता दी जाएगी।
विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के अंतर्गत प्राप्त प्रपत्रों का सुव्यवस्थित अभिलेखीकरण किया जाएगा। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट, ग्राम प्रधान, सभासद और स्वयंसेवकों को भी अभियान की जानकारी देकर सहयोग लिया जा रहा है।
विशेष अभियान दिवस का व्यापक प्रचार-प्रसार प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से किया जाएगा। साथ ही शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लाउडस्पीकर से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। निरीक्षण के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी तथा अन्य अधिकारी बूथों का भ्रमण करेंगे।
प्रशासन ने सभी पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण-2026 के अंतर्गत 22 फरवरी को अपने नजदीकी मतदान केंद्र पर पहुंचकर मतदाता सूची में नाम अवश्य जुड़वाएं, ताकि कोई भी मतदाता अपने अधिकार से वंचित न रहे।

देवरिया में झपटमारी गैंग का पर्दाफाश

4 शातिर गिरफ्तार, माल व 2 बाइक बरामद

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। देवरिया में झपटमारी की वारदातों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना बरहज क्षेत्र से 4 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से झपटमारी का माल, 5000 रुपये नकद और घटना में प्रयुक्त 02 मोटरसाइकिल (बजाज पल्सर) बरामद की हैं। इस कार्रवाई से देवरिया झपटमारी गैंग गिरफ्तार मामले में अहम सफलता मिली है।
पुलिस अधीक्षक देवरिया संजीव सुमन के निर्देश पर चलाए जा रहे अपराध नियंत्रण अभियान के तहत अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह व क्षेत्राधिकारी बरहज राजेश चतुर्वेदी के पर्यवेक्षण में यह कार्रवाई की गई। 19 फरवरी 2026 की शाम बालू छापर रेलवे क्रॉसिंग के पास से आरोपियों को पकड़ा गया।
क्या है पूरा मामला?
थाना बरहज पर दर्ज मुकदमा संख्या 43/2026 धारा 304(2) बीएनएस के तहत यह कार्रवाई हुई। वादी विश्वजीत गौतम (निवासी लवरछी, बरहज) ने शिकायत दी थी कि 11 फरवरी 2026 को उनकी माता कस्बा बरहज स्थित सेंट्रल बैंक से पैसे निकालकर घर लौट रही थीं। रास्ते में चारों आरोपियों ने उन्हें झांसा देकर पर्स छीन लिया, जिसमें 6000 रुपये, कान के टॉप्स और मंगलसूत्र था।
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर चारों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। बरामदगी के बाद मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस की बढ़ोतरी की गई है। देवरिया झपटमारी गैंग गिरफ्तार कार्रवाई के तहत आगे की विधिक प्रक्रिया जारी है।
गिरफ्तार अभियुक्त
सनी उर्फ मंगरु, निवासी लालडीगी पार्क, राजघाट, गोरखपुर,करण डोम, निवासी लालडीगी पार्क, राजघाट, गोरखपुर
बन्टी कुमार, निवासी सूरजकुंड कॉलोनी, तिवारीपुर, गोरखपुर,मुन्ना डोम, निवासी मल्लाह टोली, रुद्रपुर, देवरिया
पूछताछ में आरोपियों ने थाना खजनी व चौरी-चौरा (जनपद गोरखपुर) में भी वारदातें कबूल की हैं। पुलिस अब अन्य मामलों में भी इनसे पूछताछ कर रही है।
बरामदगी का विवरण-04 पीली धातु के लॉकेट,02 पीली धातु के कान के टॉप्स,5000 रुपये नकद,02 मोटरसाइकिल (बजाज पल्सर)
आपराधिक इतिहास
मुख्य आरोपी सनी उर्फ मंगरु और करण डोम पर गोरखपुर के विभिन्न थानों में चोरी, लूट, धोखाधड़ी, एनडीपीएस और गैंगेस्टर एक्ट के कई मुकदमे दर्ज हैं। बन्टी कुमार पर भी आर्म्स एक्ट व अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज रहे हैं। इनका आपराधिक रिकॉर्ड देखते हुए देवरिया झपटमारी गैंग गिरफ्तार प्रकरण को बड़ी सफलता माना जा रहा है।
पुलिस टीम थानाध्यक्ष विशाल कुमार उपाध्याय के नेतृत्व में उपनिरीक्षक अभिमित कुमार, संतोष कुमार यादव व अन्य पुलिसकर्मियों की टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया।
कानून व्यवस्था पर सख्ती
पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि जिले में अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान जारी रहेगा। देवरिया झपटमारी गैंग गिरफ्तार कार्रवाई से आमजन में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा है। देवरिया पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों को स्वरोजगार व डिजिटल सशक्तिकरण की दी गई जानकारी

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। आकांक्षी विकास खंड बघौली में पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को पीएम विश्वकर्मा योजना तथा विभिन्न एमएसएमई योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें स्वरोजगार, डिजिटल लेन-देन, विपणन और वित्तीय सशक्तिकरण के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सहायक निदेशक, एमएसएमई-विकास कार्यालय, प्रयागराज संजय कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया। एस.के. गंगल, एमएसएमई-डीएफओ, प्रयागराज ने योजना के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी देते हुए इसके उद्देश्य और मंशा पर प्रकाश डाला।
डोमेन एक्सपर्ट शिवशंकर एवं विवेकानंद वर्मा ने लाभार्थियों को योजना का अधिकतम लाभ लेने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के लिए प्रेरित किया। खंड विकास अधिकारी बघौली अर्जित प्रकाश ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए लाभार्थियों को योजनाओं से जुड़ने का आह्वान किया।
अध्यक्षीय संबोधन में एल.बी.एस. यादव, निदेशक, एमएसएमई-विकास कार्यालय, प्रयागराज ने कहा कि पारंपरिक कारीगरों का कौशल देश की अमूल्य धरोहर है, जिसे आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यम से वैश्विक बाजार से जोड़ना आवश्यक है। उपायुक्त उद्योग राजकुमार शर्मा ने राज्य सरकार की योजनाओं की जानकारी दी, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर पवन कुमार सिन्हा ने बैंकिंग प्रक्रियाओं, डिजिटल साक्षरता और ऋण प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने ऑनलाइन विक्रय, ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर सौरभ श्रीवास्तव, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु ने ब्रांड पहचान विकसित करने पर जोर दिया। एन.के. पांडेय, सीनियर मैनेजर, इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक ने डिजिटल भुगतान और क्यूआर कोड से भुगतान प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई।
कार्यक्रम में लगभग 130 लाभार्थियों, कारीगरों और उद्यमियों ने सहभागिता की। 40 पीएम विश्वकर्मा लाभार्थियों को इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक द्वारा निशुल्क क्यूआर कोड उपलब्ध कराए गए। साथ ही कुछ लाभार्थियों को ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म मीशो पर विक्रेता के रूप में ऑनबोर्ड भी किया गया। अंत में वैभव खरे, सहायक निदेशक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

आईटीआई देवरिया में जॉब फेयर, इंटरव्यू देकर पाएं तुरंत नौकरी

देवरिया रोजगार महोत्सव 2026: 24 फरवरी को राजकीय आईटीआई में जॉब का सुनहरा मौका, 15+ कंपनियां करेंगी चयन

देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए 24 फरवरी 2026 को बड़ा अवसर मिलने जा रहा है। रोजगार महोत्सव 2026 के तहत जनपद देवरिया में राजकीय आईटीआई परिसर में जॉब फेयर का आयोजन किया जाएगा, जहां 15 से अधिक प्रतिष्ठित कंपनियां सीधे साक्षात्कार के माध्यम से अभ्यर्थियों का चयन करेंगी।यह रोजगार महोत्सव उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन और आईटीआई के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहा है। कार्यक्रम प्रातः 10 बजे से शुरू होगा। आयोजकों के अनुसार, हजारों रिक्त पदों पर चयन की संभावना है, जिससे जिले के युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार पाने का अवसर मिलेगा।रोजगार महोत्सव में आईटी सेक्टर, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, सेल्स और सर्विस सेक्टर सहित विभिन्न उद्योगों की कंपनियां भाग लेंगी। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक, आईटीआई और कौशल विकास मिशन से प्रशिक्षित अभ्यर्थी अपनी प्रोफाइल एवं सभी शैक्षिक प्रमाण-पत्रों के साथ साक्षात्कार में शामिल हो सकते हैं।

24 फरवरी को देवरिया में रोजगार का बड़ा मौका, 15 से अधिक कंपनियां करेंगी सीधी भर्तीयुवाओं के लिए सुनहरा अवसर: देवरिया रोजगार महोत्सव 2026 में हजारों पद खालीआईटीआई देवरिया में जॉब फेयर, इंटरव्यू देकर पाएं तुरंत नौकरी

इस आयोजन की खास बात यह है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और अभ्यर्थियों को बिना किसी बिचौलिये के सीधे इंटरव्यू देकर ऑन-द-स्पॉट चयन का अवसर मिलेगा। विभिन्न शैक्षिक योग्यताओं वाले युवाओं के लिए अलग-अलग पद उपलब्ध रहेंगे।अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे सभी शैक्षिक प्रमाण-पत्रों की मूल प्रति और छायाप्रति साथ लाएं, अपडेटेड बायोडाटा तैयार रखें, समय से पहले आयोजन स्थल पर पहुंचें तथा औपचारिक परिधान में उपस्थित हों।रोजगार महोत्सव 2026 न केवल युवाओं को नौकरी दिलाने का माध्यम बनेगा, बल्कि जिले की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा। इच्छुक और पात्र अभ्यर्थियों से अपील है कि वे 24 फरवरी को राजकीय आईटीआई, देवरिया पहुंचकर इस अवसर का लाभ उठाएं।

22 फरवरी को एचआरपीजी कॉलेज में लगेगा मेगा विधिक सहायता शिविर, तैयारियों की समीक्षा

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में 22 फरवरी 2026, रविवार को हीरालाल रामनिवास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद में प्रस्तावित मेगा/वृहद विधिक सहायता एवं सेवा शिविर के सफल आयोजन को लेकर मुख्य विकास अधिकारी जयकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागीय तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए लाभार्थीपरक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सुनील कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए तथा शिविर स्थल पर विभागीय स्टॉल लगाकर योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने बताया कि शिविर का उद्देश्य पात्र व्यक्तियों तक विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और एक ही स्थान पर विधिक परामर्श व सहायता उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी विभागों से लाभार्थियों की सूची तैयार कर शिविर के दिन उपलब्ध कराने को कहा गया है।
बैठक में समाज कल्याण, दिव्यांगजन सशक्तिकरण, बाल विकास, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, कृषि, पिछड़ा वर्ग कल्याण, पंचायती राज, उद्योग, मत्स्य, पशुपालन, श्रम, युवा कल्याण, चिकित्सा, डूडा, प्रोबेशन, नेडा समेत अन्य विभागों को सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

लव रिवर, लव लाइफ मार्च से गूंजा गायघाट

मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। जिला गंगा समिति, मऊ और राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), डीसीएसके पीजी कॉलेज, मऊ के संयुक्त तत्वावधान में ‘लव रिवर, लव लाइफ मार्च’ का आयोजन किया गया। यह स्वच्छ गंगा अभियान गायघाट, मऊ से मोरिया मैडईया मढ़िया घाट तक निकाला गया। मार्च का उद्देश्य नदी स्वच्छता जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विशाल जायसवाल ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छ गंगा अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। यदि हम नदी स्वच्छता जागरूकता को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, तो स्वच्छ और अविरल नदियां संभव हैं।
कार्यक्रम अधिकारी रविंद्र तिवारी ने बताया कि लव रिवर, लव लाइफ मार्च जैसे अभियान युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि वे स्वच्छ गंगा अभियान और नदी स्वच्छता जागरूकता को आगे बढ़ाएं।
जिला गंगा समिति के जिला परियोजना अधिकारी डॉ. हेमंत यादव ने कहा कि जिस प्रकार हम परिवार से प्रेम करते हैं, उसी प्रकार हमें नदियों और पर्यावरण से भी प्रेम करना चाहिए। जब समाज में लव रिवर, लव लाइफ मार्च की भावना मजबूत होगी, तब स्वच्छ गंगा अभियान को स्थायी सफलता मिलेगी।
इस नदी स्वच्छता जागरूकता कार्यक्रम में 100 से अधिक स्वयंसेवकों ने भाग लिया और स्वच्छ पर्यावरण का संदेश दिया। मऊ में आयोजित लव रिवर, लव लाइफ मार्च ने जनभागीदारी का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया।