Sunday, May 3, 2026
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साइबर ठगी के शिकार युवक को राहत, पुलिस ने ₹1.90 लाख वापस कराए

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीना के निर्देशन में साइबर थाना पुलिस ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के शिकार युवक को ₹1.90 लाख की शेष धनराशि वापस कराई।

कनाडा में नौकरी का झांसा

थाना चौक क्षेत्र के परसौनी निवासी मोहम्मद सर्फुद्दीन से साइबर अपराधियों ने ईमो और स्नैपचैट के जरिए संपर्क किया। ठगों ने कनाडा की कंपनी में नौकरी दिलाने का लालच देकर प्रक्रिया शुल्क सहित कुल ₹3.51 लाख विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए।

शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की।

तकनीकी जांच से मिली सफलता

अपर पुलिस अधीक्षक (नोडल अधिकारी साइबर क्राइम) सिद्धार्थ के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी फरेन्दा अनिरुद्ध कुमार के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक सजनू यादव के नेतृत्व में टीम गठित की गई।

पहले चरण में ₹1.61 लाख की धनराशि वापस कराई गई थी। जांच में पता चला कि कुछ रकम पश्चिम बंगाल के बांग्लादेश सीमा से सटे क्षेत्र में स्थित एक खाते में ट्रांसफर हुई थी। बैंक अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों से समन्वय कर न्यायालयीन आदेश प्राप्त किए गए, जिसके बाद शेष ₹1.90 लाख भी पीड़ित के खाते में वापस करा दिए गए।

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इनकी रही अहम भूमिका

इस कार्रवाई में कांस्टेबल अर्जुन पासवान और कांस्टेबल पियूष नाथ तिवारी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। धनराशि वापस मिलने पर पीड़ित परिवार ने पुलिस का आभार जताया।

पुलिस की अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि:

• अनजान व्यक्तियों के झांसे में न आएं
• नौकरी या निवेश के नाम पर ऑनलाइन धनराशि ट्रांसफर न करें
• किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में दें

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गोरखपुर: स्वतंत्रता आंदोलन पर शोध विमर्श, ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण के साथ संगोष्ठी सम्पन्न

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य अभिलेखागार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगोष्ठी का द्वितीय दिवस अकादमिक चर्चा और ऐतिहासिक भ्रमण के साथ सम्पन्न हुआ।

तकनीकी सत्र में शोधपत्र प्रस्तुत

दूसरे दिन आयोजित तकनीकी सत्र में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने निम्न विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत किए:

• भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन
• उत्तर प्रदेश की भूमिका
• स्थानीय आंदोलन और गुमनाम नायक
• इतिहास लेखन की नई पद्धतियां

सत्र का संचालन डॉ. आशीष कुमार सिंह ने किया, जबकि कार्यक्रम संयोजक प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने प्रथम दिवस की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए द्वितीय दिवस की रूपरेखा स्पष्ट की।

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प्रश्नोत्तर सत्र रहा सहभागितापूर्ण

शोधपत्र प्रस्तुति के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने विषय विशेषज्ञों से संवाद कर शोध पद्धति, स्रोतों के उपयोग और ऐतिहासिक दृष्टिकोण पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त किया। विशेषज्ञों के सुझावों ने विमर्श को और गहराई प्रदान की।

समापन सत्र में डॉ. सुनीता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, वक्ताओं और शोधार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण

संगोष्ठी के उपरांत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ संयुक्त रूप से शैक्षणिक भ्रमण किया।
इस दौरान प्रतिभागियों ने:

• कुशीनगर
• चौरी चौरा

के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कर स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रसंगों और सांस्कृतिक विरासत का प्रत्यक्ष अध्ययन किया।

अकादमिक विमर्श और अनुभव का संगम

संगोष्ठी का द्वितीय दिवस सैद्धांतिक अध्ययन और स्थल आधारित ज्ञान के समन्वय के साथ सम्पन्न हुआ। प्रतिभागियों को शोध, संवाद और ऐतिहासिक अनुभव का समग्र अवसर प्राप्त हुआ, जिससे उनके अध्ययन को नई दिशा मिली।

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भारत के सामने कांपता है पाकिस्तान: वॉन

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भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट राइवलरी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। जहां टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज Suryakumar Yadav ने हाल ही में कहा था कि अब मैदान पर भारत और पाकिस्तान के बीच कोई बड़ी टक्कर नहीं बची है, वहीं इंग्लैंड के पूर्व कप्तान Michael Vaughan ने इस बहस को और हवा दे दी है।

पॉडकास्ट में छिड़ी बहस

एक क्रिकेट पॉडकास्ट में माइकल वॉन, David Lloyd और Phil Tufnell भारत-पाक मुकाबलों पर चर्चा कर रहे थे।
फिल टफनेल ने साफ कहा कि मौजूदा समय में पाकिस्तान का स्तर भारतीय टीम से काफी नीचे है और वह टीम इंडिया के सामने टिक नहीं पाता।

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“भारत के सामने डर जाता है पाकिस्तान” – माइकल वॉन

माइकल वॉन ने चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा:
“जब भी पाकिस्तान टीम भारत के खिलाफ मैदान पर उतरती है, उसके अंदर डर का भाव दिखता है। खिलाड़ी घबराए हुए नजर आते हैं।”
उन्होंने ‘नो-हैंडशेक’ विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। एशिया कप 2025 के बाद से भारतीय खिलाड़ियों द्वारा पाक खिलाड़ियों से मैदान पर हाथ न मिलाने की खबरें भी सुर्खियों में रही हैं।

टी20 वर्ल्ड कप 2026: भारत की बड़ी जीत

टी20 वर्ल्ड कप 2026 में 15 फरवरी को हुए मुकाबले में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 175 रन बनाए।
जवाब में पाकिस्तान की टीम भारतीय गेंदबाजों के सामने संघर्ष करती नजर आई और 114 रन पर ऑलआउट हो गई। भारत ने यह मुकाबला 61 रन से अपने नाम किया।

क्या खत्म हो गई राइवलरी?

भले ही कुछ खिलाड़ी मान रहे हों कि अब दोनों टीमों के बीच स्तर का फर्क बढ़ गया है, लेकिन नो-हैंडशेक विवाद, मैच बहिष्कार की चर्चाएं और बड़े टूर्नामेंट में आमना-सामना इस राइवलरी को लगातार चर्चा में बनाए रखते हैं।

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मेरठ दौरे से पहले तैयारियां तेज, आज समीक्षा करेंगे मुख्यमंत्री योगी

मेरठ (राष्ट्र की परम्परा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रविवार को प्रस्तावित मेरठ दौरे को लेकर प्रशासनिक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। पीएम के आगमन से पहले शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरठ पहुंचकर सभास्थल और अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे।

सीएम करेंगे तैयारियों की समीक्षा

मुख्यमंत्री दोपहर दो बजे मेरठ पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, मंच व्यवस्था, सुरक्षा घेरा, यातायात प्रबंधन, पार्किंग और वीआईपी मूवमेंट की समीक्षा करेंगे। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी तैयारियां तय समय सीमा में पूरी कर ली जाएं।

सूत्रों के अनुसार सीएम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक भी कर सकते हैं, जिसमें सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर रहेगा।

बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था

प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए शहर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं।

• प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग
• ट्रैफिक डायवर्जन प्लान
• चेकिंग अभियान तेज
• बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की तैनाती

एसपीजी कमांडो पहले ही मेरठ पहुंचकर सभास्थल, हेलिपैड और अन्य स्थानों का निरीक्षण कर चुके हैं।

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क्या बोले डीएम?

जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री दोपहर दो बजे मेरठ पहुंचकर तैयारियों का जायजा लेंगे। सुरक्षा और यातायात से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है।

रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 फरवरी को मेरठ में रैपिड रेल के मोदीपुरम तक के कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो परियोजना का उद्घाटन करेंगे।
मोहिउद्दीनपुर में जनसभा स्थल के अलावा शताब्दीनगर और मेरठ साउथ मेट्रो स्टेशनों का भी निरीक्षण किया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, 10% ग्लोबल टैरिफ का नया ऐलान

वाशिंगटन (राष्ट्र की परम्परा)। अमेरिका में व्यापार नीति को लेकर बड़ा संवैधानिक विवाद सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उनकी वैश्विक टैरिफ नीति को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया गया।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए इसे “अमेरिकी श्रमिकों की पीठ में छुरा घोंपना” बताया और कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे।

ट्रंप बोले – ‘फैसला शर्मनाक, हम जीतेंगे’

ट्रंप ने लिखा,
“मेरी टैरिफ नीति अमेरिका को फिर से महान बना रही थी, नौकरियां वापस ला रही थी। 6-3 का यह फैसला शर्मनाक है। हम वापस लड़ेंगे और जीतेंगे।”

व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रशासन दूसरे कानूनी प्रावधानों के जरिए टैरिफ दोबारा लागू करने की कोशिश करेगा।

10% अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ का ऐलान

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद ट्रंप ने बड़ा कदम उठाते हुए 10% अतिरिक्त ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है।

उन्होंने कहा कि:

• Section 232 (National Security Tariff) के तहत लगाए गए टैरिफ जारी रहेंगे।
• Section 301 टैरिफ भी प्रभावी रहेंगे।
• वे Trade Act 1974 के Section 122 के तहत 10% नया ग्लोबल टैरिफ लागू करेंगे।
• यह नया टैरिफ मौजूदा सामान्य टैरिफ के ऊपर होगा।

ट्रंप आज ही इस संबंध में एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करेंगे।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की नीति?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया।

मुख्य न्यायाधीश John Roberts ने बहुमत का निर्णय लिखते हुए कहा कि:

“राष्ट्रपति की शक्तियां सीमित हैं और IEEPA के तहत इतने व्यापक टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

कोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय आपातकालीन कानून का उपयोग इतने बड़े पैमाने पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाने के लिए नहीं किया जा सकता।

क्या बढ़ेगा वैश्विक व्यापार तनाव?

ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो वे:

• किसी खास देश के साथ व्यापार बंद कर सकते हैं
• पूर्ण प्रतिबंध लगा सकते हैं
• वैकल्पिक कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं

हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि कोर्ट के फैसले के तहत वे “जुर्माना नहीं लगा सकते”।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले और नई टैरिफ घोषणा से अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदार देशों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

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सुखपुरा में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, पोषण व मानदेय वृद्धि पर फोकस

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बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।सुखपुरा ब्लॉक मुख्यालय के दवकरा हाल में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष अभियान के तहत आयोजित इस आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आई कार्यकत्रियों को पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी अद्यतन जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रमोद सिंह एवं विशिष्ट अतिथि खंड विकास अधिकारी बेरूआरबारी शैलेश कुमार मुरारी ने दीप प्रज्वलन कर किया। पहले दिन के सत्र में विशेषज्ञों ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के समग्र विकास की पहली कड़ी हैं और यहां दी जाने वाली शिक्षा व पोषण भविष्य की नींव मजबूत करते हैं।
मुख्य अतिथि ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सही पोषण, स्वच्छता और संस्कार की शिक्षा से ही मजबूत समाज का निर्माण संभव है।
इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधान परिषद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा वर्करों के मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई है। संभावना है कि यह निर्णय होली पर्व से पहले लागू किया जाएगा। इस घोषणा से उपस्थित कार्यकत्रियों में उत्साह देखा गया।
पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
खंड विकास अधिकारी शैलेश कुमार मुरारी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी बच्चा कुपोषण या शिक्षा से वंचित न रहे। आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से कार्यकत्रियों को संतुलित आहार, कुपोषण की पहचान, टीकाकरण की समय-सारिणी और रिकॉर्ड संधारण की तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए शुरुआती पांच वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक शिक्षा अत्यावश्यक है। प्रशिक्षण में पोषण ट्रैकिंग, डिजिटल रिपोर्टिंग और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई।
जमीनी अनुभव और चुनौतियां
आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण संवादात्मक शैली में आयोजित किया गया, जहां कार्यकत्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, जागरूकता की कमी और संसाधनों की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा हुई।
मुख्य सेविका अनीता यादव, स्नेहा गुप्ता, अनुज दुबे एवं विनोद सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अगले दो दिनों में व्यावहारिक सत्र, केस स्टडी और योजनाओं की मॉनिटरिंग पर विशेष फोकस रहेगा।
गुणवत्ता सुधार की उम्मीद
इस आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम से क्षेत्र में आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित कार्यकत्रियां बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने, गर्भवती व धात्री महिलाओं को बेहतर परामर्श देने और समयबद्ध टीकाकरण सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि की घोषणा से कार्यकत्रियों का मनोबल भी बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगी।

सड़क हादसे में युवक की मौत, भाई गंभीर घायल

संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। जिले के खलीलाबाद कोतवाली क्षेत्र में शुक्रवार को हुए सड़क हादसे में 25 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि उसका छोटा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को जिला अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर किया गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जांच शुरू कर दी है।

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पुलिस के अनुसार बखिरा थाना क्षेत्र के ग्राम चंदनी उर्फ देउरवा निवासी जितेंद्र यादव अपने छोटे भाई राजन को हाईस्कूल की परीक्षा दिलाने के लिए मोटरसाइकिल से खलीलाबाद स्थित सीबी मिश्रा इंटर कॉलेज, पटखौली जा रहे थे। बनकटिया बड़गो के पास सामने से आए अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी, जिससे दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए।
स्थानीय लोगों की मदद से एंबुलेंस द्वारा दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जितेंद्र को मृत घोषित कर दिया। राजन के हाथ और सिर में गंभीर चोटें आई हैं।
परिजनों ने बताया कि जितेंद्र चार भाइयों में सबसे बड़ा था और वह अपने छोटे भाई को परीक्षा केंद्र तक छोड़ने जा रहा था। पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी है।

मुख्यमंत्री का विधानसभा में घोषणा: यूपी शिक्षामित्र वेतन बढ़ा, अनुदेशक भी लाभान्वित

यूपी में शिक्षामित्र और अनुदेशकों को बड़ा तोहफा: मानदेय बढ़कर ₹18,000, 5 लाख कैशलेस इलाज की सुविधा

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के लाखों शिक्षामित्र और अनुदेशक के लिए बड़ा ऐलान किया है। विधानसभा में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने घोषणा करते हुए कहा कि अब शिक्षामित्र का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रतिमाह किया जाएगा, जबकि अनुदेशकों का मानदेय ₹10,000 से बढ़ाकर ₹17,000 प्रतिमाह किया जाएगा।

यह फैसला अप्रैल से लागू होगा।

इस निर्णय से प्रदेश के करीब 1.47 लाख शिक्षामित्र और 28,000 से अधिक अनुदेशक सीधे लाभान्वित होंगे। सात वर्षों बाद मानदेय में हुई इस बढ़ोतरी को सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।शिक्षामित्र मानदेय बढ़ोतरी: क्या बदला?शिक्षामित्र मानदेय बढ़ोतरी लंबे समय से चर्चा में थी। वर्ष 2014-15 में पूर्व सरकार के दौरान शिक्षामित्रों को अस्थायी रूप से समायोजित किया गया था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह समायोजन रद्द हो गया।भाजपा सरकार ने जुलाई 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय ₹3,000 से बढ़ाकर ₹10,000 किया था। अब एक बार फिर शिक्षामित्र मानदेय बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹18,000 कर दिया गया है।सरकार के अनुसार यह फैसला शिक्षामित्रों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेगा और प्राथमिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाएगा।अनुदेशक मानदेय में भी बढ़ोतरीसिर्फ शिक्षामित्र ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अनुदेशकों को भी राहत मिली है। अनुदेशक मानदेय बढ़ोतरी के तहत उनका मासिक भुगतान ₹17,000 किया गया है। यह बढ़ोतरी शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मियों के मनोबल को बढ़ाने वाली मानी जा रही है।

5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा सरकार ने शिक्षामित्रों और उनके परिवार के लिए ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की भी घोषणा की है। यह सुविधा राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत दी जाएगी, जिससे शिक्षामित्र और अनुदेशक गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक संकट से बच सकेंगे।शिक्षामित्र मानदेय बढ़ोतरी के साथ स्वास्थ्य सुरक्षा का यह कदम कर्मचारियों के लिए दोहरी राहत है।ट्रांसफर नीति भी लागूसरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब शिक्षामित्रों को ट्रांसफर की सुविधा भी मिलेगी। लंबे समय से इस मांग को लेकर आंदोलन हो रहे थे। नई व्यवस्था से पारिवारिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार स्थानांतरण संभव होगा।

कितने लोग होंगे लाभान्वित?लगभग 1.47 लाख शिक्षामित्र28,000 से अधिक अनुदेशकलाखों परिवारों को अप्रत्यक्ष लाभविशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षामित्र मानदेय बढ़ोतरी से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा।शिक्षा व्यवस्था पर संभावित असरउत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां प्राथमिक शिक्षा का बड़ा ढांचा शिक्षामित्रों और अनुदेशकों पर निर्भर करता है। शिक्षामित्र मानदेय बढ़ोतरी से उनकी आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी, जिससे वे बेहतर ढंग से शिक्षण कार्य कर सकेंगे।सरकार का कहना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य—दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा प्रदान करना उसकी प्राथमिकता है।

योगी सरकार का यह निर्णय प्रदेश के लाखों शिक्षामित्र और अनुदेशक परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। शिक्षामित्र मानदेय बढ़ोतरी और स्वास्थ्य बीमा सुविधा से आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। अप्रैल से लागू होने वाली यह योजना शिक्षा क्षेत्र में नई ऊर्जा भर सकती है।

21 फ़रवरी की पुण्यतिथि: इन महान हस्तियों को आज भी करता है देश नमन

21 फ़रवरी को हुए निधन: भारतीय इतिहास और सिनेमा जगत की प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि

21 फरवरी इस दिन कई ऐसी महान विभूतियों ने दुनिया को अलविदा कहा, जिनका योगदान आज भी प्रेरणा देता है। 21 फ़रवरी को हुए निधन की सूची में कानूनविद, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, पार्श्वगायिका और फिल्म जगत की महान हस्तियां शामिल हैं। आइए विस्तार से जानते हैं 21 फ़रवरी को हुए निधन से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में।

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  1. फली एस. नरीमन (2024)
    फली एस. नरीमन भारत के प्रसिद्ध संवैधानिक विशेषज्ञ और उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता थे।
    जन्म: 1929
    निधन: 21 फ़रवरी 2024
    उन्होंने भारतीय संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संघीय ढांचे से जुड़े कई ऐतिहासिक मामलों में पैरवी की।
    21 फ़रवरी को हुए निधन की हालिया घटनाओं में उनका जाना भारतीय न्याय व्यवस्था के लिए बड़ी क्षति माना गया।
  2. नूतन (1991)
    नूतन हिन्दी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
    जन्म: 1936
    निधन: 21 फ़रवरी 1991
    उन्होंने ‘बंदिनी’, ‘सीमा’ और ‘सुजाता’ जैसी फिल्मों में दमदार अभिनय किया।
    21 फ़रवरी को हुए निधन के अवसर पर उन्हें भारतीय सिनेमा की आदर्श अभिनेत्री के रूप में याद किया जाता है।
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  4. ओम प्रकाश (1998)
    ओम प्रकाश भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध चरित्र अभिनेता थे।
    जन्म: 1919
    निधन: 21 फ़रवरी 1998
    उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं और अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने गए।
    21 फ़रवरी को हुए निधन की सूची में उनका नाम सिनेमा प्रेमियों के लिए भावुक स्मृति है।
  5. प्रकाश चंद्र सेठी (1996)
    प्रकाश चंद्र सेठी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री थे।
    निधन: 21 फ़रवरी 1996
    उन्होंने राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    21 फ़रवरी को हुए निधन के दिन उन्हें राजनीतिक नेतृत्व के लिए याद किया जाता है।
  6. ज़ोहराबाई अम्बालेवाली (1990)
    ज़ोहराबाई अम्बालेवाली हिन्दी सिनेमा की प्रसिद्ध पार्श्वगायिका और शास्त्रीय गायिका थीं।
    निधन: 21 फ़रवरी 1990
    1940 के दशक में उनकी आवाज़ ने फिल्म संगीत को नई ऊंचाई दी।
    21 फ़रवरी को हुए निधन के अवसर पर संगीत प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
  7. हरि विनायक पाटस्कर (1970)
    हरि विनायक पाटस्कर भारतीय राजनीतिज्ञ और मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल थे।
    निधन: 21 फ़रवरी 1970
    उन्होंने प्रशासनिक सेवा और सार्वजनिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान दिया।
    21 फ़रवरी को हुए निधन के इतिहास में उनका नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।
  8. रानी चेन्नम्मा (1829)
    रानी चेन्नम्मा कर्नाटक की वीरांगना और स्वतंत्रता सेनानी थीं।
    निधन: 21 फ़रवरी 1829
    उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष किया।
    21 फ़रवरी को हुए निधन के ऐतिहासिक संदर्भ में उन्हें दक्षिण भारत की वीरांगना के रूप में याद किया जाता है।
    21 फ़रवरी को हुए निधन का ऐतिहासिक महत्व
    21 फ़रवरी को हुए निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि महान व्यक्तित्व अपने कार्यों से अमर हो जाते हैं। न्यायपालिका से लेकर राजनीति, संगीत और सिनेमा तक, इस दिन कई युगप्रवर्तक हस्तियों ने दुनिया को अलविदा कहा।
    21 फ़रवरी को हुए निधन का इतिहास प्रेरणादायक भी है और भावनात्मक भी। इन विभूतियों का योगदान भारतीय समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ चुका है।
  9. अस्वीकरण:
  10. प्रस्तुत जानकारी विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। हम किसी भी प्रकार की 100 प्रतिशत प्रमाणित दावा नहीं करते। गहन छानबीन के बाद सामग्री प्रस्तुत की गई है, फिर भी किसी प्रकार की त्रुटि के लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं।

मुखबिर की सूचना पर वाहन चोर गिरफ्तार, अर्टिगा कार बरामद

महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। महराजगंज पुलिस ने अर्टिगा कार चोरी का खुलासा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। थाना पुरन्दरपुर क्षेत्र में हुई अर्टिगा कार चोरी की वारदात का खुलासा करते हुए पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की अर्टिगा कार बरामद कर ली। इस कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का विश्वास और मजबूत हुआ है।
17 फरवरी को हुई थी अर्टिगा कार चोरी
पुलिस अधीक्षक सोमेन्द्र मीना के निर्देशन में अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना पुरन्दरपुर में 17 फरवरी 2026 को अज्ञात चोर द्वारा वादी की अर्टिगा कार (UP 53 FE 0061) चोरी कर ली गई थी। मामले में मु.अ.सं. 50/26 धारा 303(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर टीम गठित कर जांच शुरू की गई। थाना पुरन्दरपुर पुलिस और एसओजी टीम ने संयुक्त रूप से तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर कार्रवाई की।

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मुखबिर की सूचना पर आरोपी गिरफ्तार
जांच के दौरान शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे पुलिस टीम ने आदित्य पब्लिक स्कूल के पास, ग्राम झंगहा, जनपद गोरखपुर से आरोपी विकास यादव (29 वर्ष) पुत्र भगवान दास यादव निवासी विश्वनाथपुर थाना झंगहा को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से चोरी की अर्टिगा कार बरामद की गई।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई पूरी कर उसे महराजगंज न्यायालय भेज दिया गया है।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
अर्टिगा कार चोरी का खुलासा करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार राय, उपनिरीक्षक रविप्रकाश गुप्ता, हेड कांस्टेबल गामा यादव, कांस्टेबल आदित्य यादव, एसओजी प्रभारी महेन्द्र यादव, हेड कांस्टेबल कुतुबुद्दीन, हेड कांस्टेबल शैलेन्द्र नाथ त्रिपाठी, कांस्टेबल राम आशीष यादव तथा स्वाट टीम के हेड कांस्टेबल संदीप यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस अधीक्षक ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि जनपद में वाहन चोरी और अन्य अपराधों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
अर्टिगा कार चोरी का खुलासा: सुरक्षा के लिहाज से अहम
लगातार बढ़ती वाहन चोरी की घटनाओं के बीच अर्टिगा कार चोरी का खुलासा पुलिस की सतर्कता और सक्रियता को दर्शाता है। इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
महराजगंज पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई आमजन में विश्वास बढ़ाने वाली है। वाहन स्वामियों से भी अपील की गई है कि वे अपने वाहनों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

मूलांक अनुसार आज का राशिफल, शुभ अंक और लकी कलर जानें

जन्मतिथि के आधार पर मूलांक और भाग्यांक निकालकर व्यक्ति के स्वभाव, अवसर और चुनौतियों का आकलन किया जाता है। यदि आपकी जन्मतिथि 23 है तो 2+3=5 आपका मूलांक होगा। इसी तरह 11 का मूलांक 1+1=2 माना जाता है।
आज का Daily Ank Jyotish 2026 आपको बताएगा कि करियर, व्यापार, स्वास्थ्य और संबंधों में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पढ़ें पूरा Daily Ank Jyotish 2026 और जानें अपना शुभ अंक व लकी कलर।


🔢 मूलांक 1
आज का दिन थोड़ा उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है। योजनाएं बनेंगी लेकिन अड़चनें भी आ सकती हैं। खर्चों में वृद्धि संभव है। राजनीति और प्रशासन से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है।
पिता की सेहत का विशेष ध्यान रखें।
शुभ अंक: 4
शुभ रंग: केसरिया
🔢 मूलांक 2
मानसिक बेचैनी महसूस हो सकती है। व्यापार में नया निवेश टालें। कार्यक्षेत्र में नया प्रस्ताव मिल सकता है, जिस पर सोच-समझकर निर्णय लें।
मां के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ेगा।
शुभ अंक: 2
शुभ रंग: सफेद

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🔢 मूलांक 3
आर्थिक मामलों में सतर्कता जरूरी है। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में मन लगेगा। घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। सांस से जुड़ी समस्या को नजरअंदाज न करें।
शुभ अंक: 7
शुभ रंग: गुलाबी
🔢 मूलांक 4
भाग्य आज आपके साथ है। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। तकनीकी और रिसर्च से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने से बचें।
शुभ अंक: 3
शुभ रंग: पीला
🔢 मूलांक 5
दिन अनुकूल रहेगा। व्यापार में नए अवसर प्राप्त होंगे। कागजी कार्यों में सावधानी बरतें। पिता के सहयोग से लाभ मिलेगा।
शुभ अंक: 6
शुभ रंग: लाल
🔢 मूलांक 6
निजी जीवन को प्राथमिकता दें। प्रेम संबंधों में जल्दबाजी से बचें। कार्यक्षेत्र में सोच-समझकर फैसले लें।
शुभ अंक: 5
शुभ रंग: नीला

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🔢 मूलांक 7
दिन मिला-जुला रहेगा। संतान से जुड़ी चिंता हो सकती है। धार्मिक यात्रा संभव है। नया मोबाइल या लैपटॉप खरीदने से बचें।
शुभ अंक: 6
शुभ रंग: पीला
🔢 मूलांक 8
चुनौतीपूर्ण दिन रह सकता है। कार्यस्थल पर सावधानी रखें। विवादों से दूरी बनाए रखें। वाहन चलाते समय सतर्क रहें।
शुभ अंक: 8
शुभ रंग: हरा
🔢 मूलांक 9
गुस्से पर नियंत्रण रखें। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सावधानी से इस्तेमाल करें। नया वाहन खरीदने की योजना टालें।
शुभ अंक: 18
शुभ रंग: सुनहरा

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📌 अंक ज्योतिष क्या है?
अंक ज्योतिष (Numerology) एक प्राचीन विद्या है जिसमें अंकों के माध्यम से व्यक्ति के स्वभाव, भविष्य और दैनिक जीवन की संभावनाओं को समझा जाता है। Daily Ank Jyotish 2026 के जरिए आप अपनी दैनिक योजनाओं को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
📢 Disclaimer
इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। हम किसी भी प्रकार का प्रमाणित दावा नहीं करते। किसी योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

🔮 21 फरवरी 2026 राशिफल : जानें किस राशि को लाभ और किसे सावधानी की जरूरत


21 फरवरी 2026 राशिफल – ग्रह-नक्षत्रों का प्रभाव
21 फरवरी 2026 राशिफल के अनुसार आज ग्रह-नक्षत्रों की चाल कई राशियों पर विशेष प्रभाव डाल रही है। कुछ राशि वालों के लिए आर्थिक और पारिवारिक लाभ के संकेत हैं, वहीं कुछ को स्वास्थ्य और संबंधों में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक राशि का स्वामी ग्रह उसके जीवन पर गहरा असर डालता है। आइए विस्तार से जानते हैं 21 फरवरी 2026 राशिफल में आपके लिए क्या खास है।
मेष राशि (Aries)
आज मन थोड़ा बेचैन रह सकता है। खर्चों में अचानक वृद्धि से तनाव संभव है। यात्रा का योग है, लेकिन थकान बढ़ सकती है। पिता की सेहत और बच्चों के व्यवहार पर ध्यान दें।
लव लाइफ: छोटी गलतफहमियों से बचें।
करियर: धैर्य रखें, जल्दबाजी नुकसान दे सकती है।
स्वास्थ्य: मानसिक थकान संभव।

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वृषभ राशि (Taurus)
आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव रहेगा। अचानक धन लाभ के साथ खर्च भी बढ़ सकता है। कोर्ट-कचहरी से दूर रहें।
लव लाइफ: संवाद से रिश्ते मजबूत होंगे।
यात्रा: जरूरी न हो तो टालें।
मिथुन राशि (Gemini)
स्वास्थ्य थोड़ा कमजोर रह सकता है। सिरदर्द या नींद की कमी परेशान कर सकती है।
करियर: नए काम की शुरुआत टालें।
लव लाइफ: गुस्से में कोई निर्णय न लें।
कर्क राशि (Cancer)
परिवार से जुड़ी खुशखबरी मिल सकती है। सरकारी कार्यों में सावधानी बरतें।
स्वास्थ्य: सामान्य, लेकिन ध्यान रखें।
परिवार: धैर्य से बात करें।
सिंह राशि (Leo)
पेट संबंधी दिक्कत हो सकती है। पॉजिटिव एनर्जी बनी रहेगी।
लव लाइफ: अच्छा समय।
करियर: फैसले आपके पक्ष में।

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कन्या राशि (Virgo)
व्यवहार में सख्ती से बचें। धन लाभ संभव है, लेकिन निवेश सोच-समझकर करें।
स्वास्थ्य: ब्लड प्रेशर पर ध्यान दें।
तुला राशि (Libra)
दांपत्य जीवन में तनाव संभव। राजनीति या प्रशासन से जुड़े लोगों को पहचान मिल सकती है।
सावधानी: विपरीत लिंग से व्यवहार संतुलित रखें।
वृश्चिक राशि (Scorpio)
खर्चों से मन परेशान रह सकता है। जोखिम भरे निवेश से दूर रहें।
सलाह: धैर्य रखें, समय अनुकूल होगा।
धनु राशि (Sagittarius)
गुस्से पर नियंत्रण रखें। पैरों में दर्द संभव।
शिक्षा: अध्ययन के लिए अनुकूल समय।
फैसले: बड़ा निर्णय टालें।
मकर राशि (Capricorn)
बच्चों को लेकर चिंता रहेगी। प्रॉपर्टी कार्य में रुकावट के बाद सफलता मिलेगी।
स्वास्थ्य: सामान्य।
परिवार: मां की सेहत पर ध्यान दें।

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कुंभ राशि (Aquarius)
नाक-कान-गले की समस्या हो सकती है। भाई-बहन से जुड़े मामलों में सावधानी रखें।
लव लाइफ: अच्छा समय।
मीन राशि (Pisces)
खर्चों में वृद्धि होगी। सिरदर्द और घबराहट हो सकती है।
सलाह: जल्दबाजी से बचें।
भविष्य: धीरे-धीरे हालात सुधरेंगे।
निष्कर्ष – 21 फरवरी 2026 राशिफल का सार
21 फरवरी 2026 राशिफल बताता है कि आज कुछ राशियों के लिए लाभ और कुछ के लिए सावधानी का समय है। विशेषकर मेष, वृश्चिक और मीन राशि को धैर्य रखने की जरूरत है, जबकि सिंह, कर्क और धनु राशि को सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।
📢 डिस्क्लेमर
इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम किसी भी प्रकार का प्रमाणित दावा नहीं करते। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित क्षेत्र के योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

स्कूल सुरक्षा नीति पर बड़ा सवाल: क्या प्रशासन तैयार है?

35 बच्चों की सामूहिक घटना ने बढ़ाई चिंता: क्या सुरक्षित हैं हमारे स्कूल?

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारत 142 करोड़ से अधिक आबादी वाला विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है। इतनी विशाल जनसंख्या में करोड़ों बच्चे प्रतिदिन स्कूलों में शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। स्कूल केवल ज्ञान का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिकविकास और भविष्य की नींव का आधार होते हैं। ऐसे में स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई घटनाएँ चाहे वह छत्तीसगढ़ के धमतरी जैसी दर्दनाक घटना हो या अन्य राज्यों में स्कूल परिसरों में हुई दुर्घटनाएँ,यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि अब केवल शिक्षा की गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि सुरक्षा की समग्र व्यवस्था पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानक लागू करने की आवश्यकता है।मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं क़ि किसी भी सभ्य समाज की प्रगति का वास्तविक मापदंड उसके विद्यालयों की स्थिति और वहाँ पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा से निर्धारित होता है। विद्यालय केवल ज्ञान अर्जन का केंद्र नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण की प्रयोगशाला होते हैं। यदि यह प्रयोगशाला ही असुरक्षित हो जाए तो राष्ट्र की नींव कमजोर हो जाती है। हाल के वर्षों में भारत के विभिन्न राज्यों से सामने आई घटनाएँ चाहे वह छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की चौंकाने वाली घटना हो या अनेक राज्यों से जर्जर स्कूल भवनों के गिरने की खबरें,यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि अब समय आ गया है जब स्कूल सुरक्षा को शिक्षा नीति के पूरक तत्व के रूप में नहीं, बल्कि उसके मूल स्तंभ के रूप में स्थापित किया जाए। शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की चर्चा तब तक अधूरी है जब तक बच्चों का जीवन और मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित न हो। 

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साथियों बात अगर हम छत्तीसगढ़ के एक स्कूल में हाल में हुई घटना को समझने की करें तो,धमतरी जिले के कुरूद स्थित एक सरकारी स्कूल में 7वीं-8वीं कक्षा के 35 बच्चों द्वारा ब्लेड से अपनी कलाई काटने की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। यह घटना केवल अनुशासन या प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं है,बल्कि यह बच्चों की मनोवैज्ञानिक स्थिति,स्कूल वातावरण और सामाजिक संवाद की कमी की गंभीर चेतावनी है। जब काउंसलिंग में यह सामने आया कि बच्चों ने देखा-देखी में यह कदम उठाया, तो यह स्पष्ट हो गया कि किशोरावस्था में सामूहिक प्रभाव और आकर्षण की प्रवृत्ति कितनी तीव्र होती है। यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान दिया जा रहा है? क्या बच्चों को अपनी भावनाएँ व्यक्त करने का सुरक्षित मंच मिल रहा है?क्या शिक्षक औरअभिभावक उनके व्यवहार में होने वाले सूक्ष्म बदलावों को समझ पा रहे हैं? यदि इन प्रश्नों का उत्तर नकारात्मक है,तो हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था की प्राथमिकताओं को पुनर्संतुलित करना होगा। 

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साथियों बात अगर हम 2 दिन पूर्व हाईकोर्ट द्वारा चिंता व्यक्त करने की करें तो,राजस्थान में सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों पर चिंता व्यक्त करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने राज्य सरकार के बजट को ऊंट के मुंह में जीरा बताया। यह टिप्पणी केवल एक राज्य तक सीमित समस्या नहीं दर्शाती, बल्कि देश के अनेक हिस्सों में स्कूल भवनों की दयनीय स्थिति का प्रतीक है। जब भवनों की छतें कमजोर हों, दीवारों में दरारें हों, विद्युत तार खुले हों और शौचालय अनुपयोगी हों, तब बच्चों की सुरक्षा स्वतः खतरे में पड़ जाती है। बजट आवंटन और वास्तविक आवश्यकता के बीच की खाई को पाटना सरकारों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर मरम्मत, पुनर्निर्माण और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था करना केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सटीक जीवन रक्षा का कार्य है। 

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साथियों बात अगर हम इस मुद्दे को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में समझने की करें तो, विकसित देशों में भी स्कूल सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे तकनीकी और आर्थिक रूप से समृद्ध राष्ट्र में भी विद्यालयों में गोलीबारी की घटनाएँ समय-समय पर होती रही हैं। 2022 में टेक्सास के उवाल्डे स्थित रोब्ब एलिमेंटरी स्कूल में हुई गोलीबारी ने पूरी दुनियाँ को स्तब्ध कर दिया था। इससे पहले 1999 में कोलोराडो के कॉलम्बीने हाई स्कूल में हुई घटना ने स्कूल सुरक्षा पर वैश्विक बहस को जन्म दिया। इन घटनाओं ने यह सिद्ध कर दिया कि आर्थिक समृद्धि और तकनीकी उन्नति अपने आप में सुरक्षा की गारंटी नहीं हैं। सुरक्षा एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें जोखिम मूल्यांकन, निगरानी, प्रशिक्षण और सामुदायिक सहयोग की निरंतर आवश्यकता होती है। भारत को इन अनुभवों से सीख लेकर अपने विद्यालयों के लिए बहु-स्तरीय अति महत्वपूर्ण सुरक्षा मॉडल विकसित करना चाहिए। 

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साथियों बात अगर हम भारत में शिक्षा का संचालन मुख्यतः राज्यों के अधीन है, इसको समझने की करें तो राष्ट्रीय स्तरपर नीति निर्माण में मिनिस्ट्री ऑफ़ एजुकेशन की केंद्रीय भूमिका है। नेशनल एजुकेशन पालिसी 2020 ने शिक्षा की गुणवत्ता,समावेशिता और नवाचार पर जोर दिया है, परंतु सुरक्षा को एक स्वतंत्र और अनिवार्य स्तंभ के रूपमें संस्थागत रूपसे स्थापित करने कीआवश्यकता अभी शेष है। स्कूल सुरक्षा नीति को स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ लागू किया जाना चाहिए, जिसमें भवन सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, विद्युत मानक, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ शौचालय, सीसीटीवी निगरानी, प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली शामिल हों। प्रत्येक विद्यालय के लिए अनिवार्य स्कूल सेफ्टी ऑडिट प्रणाली लागू की जानी चाहिए,जिसका वार्षिक नवीनीकरण हो और जिसकी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो।जिला स्तर पर कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट प्रशासनिक व्यवस्था के प्रमुख होते हैं। यदि वे नियमित औचक निरीक्षण करें तो जमीनी स्तर की सच्चाई सामने आ सकती है। औचक निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि उसमें सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता, अग्निशामक यंत्रों की सर्विसिंग, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, आपातकालीन निकास मार्गों की उपलब्धता और खेल मैदानों की सुरक्षा का वास्तविक मूल्यांकन शामिल होना चाहिए। कई बार स्कूलों में उपकरण तो लगे होते हैं, परंतु वे निष्क्रिय पड़े रहते हैं। ऐसी स्थिति में दुर्घटना होने पर केवल कागजी प्रमाण किसी बच्चे का जीवन नहीं बचा सकते। इसलिए निरीक्षण प्रणाली को परिणामोन्मुख और जवाबदेह बनाना अत्यंत ही आवश्यक है। 

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साथियों बात अगर हम  ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में स्थित विद्यालयों की स्थिति को समझने की करें तो यह विशेष चिंता का विषय है।कई स्कूल अस्थायी भवनों में संचालित होते हैं या दशकों पुराने ढाँचों में चल रहे हैं। वर्षा, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान ये भवन अतिरिक्त जोखिम उत्पन्न करते हैं।राज्य सरकारों को वार्षिक स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य करना चाहिए और जर्जर भवनों को तुरंत उपयोग से बाहर कर वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए। निजी विद्यालयों के लिए भी समान मानक लागू होने चाहिए। यदि कोई निजी संस्था सुरक्षा मानकों की अनदेखी करती है तो उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई जुर्माना, मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण की व्यवस्था होनी चाहिए।भौतिक संरचना के अतिरिक्त मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। धमतरी की घटना ने यह स्पष्ट किया कि बच्चों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य की अनदेखी गंभीर परिणाम दे सकती है।विद्यालयों में प्रशिक्षित काउंसलर नियुक्त किए जाने चाहिए। प्रत्येक स्कूल में ‘बाल संरक्षण समिति’ का गठन हो और शिक्षकों को लैंगिक संवेदनशीलता तथा बाल अधिकारों पर नियमित प्रशिक्षण दिया जाए। बुलिंग, शारीरिक दंड और लैंगिक उत्पीड़न के मामलों के लिए स्पष्ट शिकायत तंत्र हो। बच्चों को यह विश्वास दिलाना आवश्यक है कि उनकी आवाज सुनी जाएगी और उन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।यह विश्वास ही सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव है।

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साथियों बात अगर हम  स्कूल परिवहन भी सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष है इसको समझने की करें तो, ओवरलोडेड बसें, अप्रशिक्षित चालक औरफिटनेस प्रमाणपत्र की अनदेखी अक्सर दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। परिवहन विभाग और शिक्षा विभाग के संयुक्त निरीक्षण अभियान अनिवार्य होने चाहिए। प्रत्येक स्कूल बस में जीपीएस प्रणाली, फर्स्ट एड किट, अग्निशामक यंत्र और प्रशिक्षित परिचारक होना चाहिए। बस चालकों के लिए नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और पृष्ठभूमि सत्यापन भी अनिवार्य किया जाना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा स्कूल के गेट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए; घर से स्कूल और स्कूल से घर तक की पूरी यात्रा सुरक्षित होनी चाहिए,सामाजिक भागीदारी सुरक्षा तंत्र को और मजबूत बना सकती है। अभिभावक-शिक्षक संघ को केवल परीक्षा परिणाम या शुल्क संरचना तक सीमित न रखकर सुरक्षा समीक्षा में सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए।स्थानीय पुलिस, प्रशासन और समुदाय के बीच समन्वय सेसंदिग्ध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई संभव है। स्कूल सेफ्टी कम्युनिटी नेटवर्क जैसे मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जहाँ समुदाय स्वयं निगरानी में सहयोग करे।डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अभिभावकों को सुरक्षा रिपोर्ट और निरीक्षण निष्कर्ष उपलब्ध कराए जा सकते हैं। 

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साथियों बात अगर हम  स्कूल सुरक्षा को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है;इसको समझने की करें तो  यह एक सामाजिक अनुबंध है जिसमें सरकार, शिक्षक,अभिभावक और समुदाय सभी सहभागी हैं। यदि किसी एक कड़ी में कमजोरी आती है तो पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है। इसलिए समन्वित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। नीति निर्माण से लेकर क्रियान्वयन और निगरानी तक हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।यदि मुख्यमंत्री स्वयं समय-समय पर स्कूलों की सुरक्षा संबंधी समीक्षा बैठकें लें, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला अधिकारियों से रिपोर्ट प्राप्त करें, और आकस्मिक निरीक्षण करें, तो प्रशासनिक तंत्र में गंभीरता स्वतः आ जाती है। जब शीर्ष नेतृत्व संवेदनशील और सक्रिय होता है, तो निचले स्तर पर भी जवाबदेही बढ़ती है। बच्चों की सुरक्षा केवल शिक्षा विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि गृह विभाग, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग का भी समन्वित उत्तरदायित्व है। 

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साथियों बात अगर  हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों ने स्कूल सुरक्षा को बहु-आयामी दृष्टिकोण से अपनाया है। आपदा प्रबंधन अभ्यास, नियमित मॉक ड्रिल, मनो वैज्ञानिक सहायता कार्यक्रम और सामुदायिक जागरूकता अभियान को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाया गया है। भारत में भी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। भूकंप, आग या अन्य आपात स्थितियों के लिए छात्रों और शिक्षकों को प्रशिक्षित करना आवश्यक है ताकि संकट की घड़ी में घबराहट के बजाय संगठित प्रतिक्रिया हो। 

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अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे क़ि बच्चों की सुरक्षा केवल कानूनी या प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि नैतिक दायित्व है। जिस राष्ट्र में बच्चे सुरक्षित नहीं, वहाँ विकास की कोई भी परिकल्पना अधूरी है। धमतरी जैसी घटनाएँ चेतावनी हैं कि हमें शिक्षा के साथ-साथ सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीख लेते हुए,स्थानीयआवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत नीतियाँ बनाकर और उनका कठोर क्रियान्वयन सुनिश्चित करके ही हम अपने विद्यालयों को वास्तविक अर्थों में सुरक्षित बना सकते हैं।जब प्रत्येक अभिभावक यह विश्वास कर सके कि उसका बच्चा विद्यालय में सुरक्षित है, तभी शिक्षा व्यवस्था पर समाज का भरोसा पूर्ण रूप से स्थापित होगा। यही विश्वास राष्ट्र की प्रगति की सबसे सुदृढ़ आधारशिला है।

लेखक: एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी, गोंदिया महाराष्ट्र

मानदेय वृद्धि की घोषणा के बीच आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का विशेष प्रशिक्षण

सुखपुरा में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।सुखपुरा ब्लॉक मुख्यालय के दवकरा हाल में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्साह के साथ प्रारंभ हुआ। उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष अभियान के तहत आयोजित इस आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आई कार्यकत्रियों को पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा से जुड़ी अद्यतन जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रमोद सिंह एवं विशिष्ट अतिथि खंड विकास अधिकारी बेरूआरबारी शैलेश कुमार मुरारी ने दीप प्रज्वलन कर किया। पहले दिन के सत्र में विशेषज्ञों ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के समग्र विकास की पहली कड़ी हैं और यहां दी जाने वाली शिक्षा व पोषण भविष्य की नींव मजबूत करते हैं।
मुख्य अतिथि ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सही पोषण, स्वच्छता और संस्कार की शिक्षा से ही मजबूत समाज का निर्माण संभव है।
इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधान परिषद में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और आशा वर्करों के मानदेय वृद्धि की घोषणा की गई है। संभावना है कि यह निर्णय होली पर्व से पहले लागू किया जाएगा। इस घोषणा से उपस्थित कार्यकत्रियों में उत्साह देखा गया।

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पोषण और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
खंड विकास अधिकारी शैलेश कुमार मुरारी ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी बच्चा कुपोषण या शिक्षा से वंचित न रहे। आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से कार्यकत्रियों को संतुलित आहार, कुपोषण की पहचान, टीकाकरण की समय-सारिणी और रिकॉर्ड संधारण की तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए शुरुआती पांच वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान सही पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक शिक्षा अत्यावश्यक है। प्रशिक्षण में पोषण ट्रैकिंग, डिजिटल रिपोर्टिंग और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई।

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जमीनी अनुभव और चुनौतियां
आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण संवादात्मक शैली में आयोजित किया गया, जहां कार्यकत्रियों ने अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीण क्षेत्रों में कुपोषण, जागरूकता की कमी और संसाधनों की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा हुई।
मुख्य सेविका अनीता यादव, स्नेहा गुप्ता, अनुज दुबे एवं विनोद सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अगले दो दिनों में व्यावहारिक सत्र, केस स्टडी और योजनाओं की मॉनिटरिंग पर विशेष फोकस रहेगा।

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गुणवत्ता सुधार की उम्मीद
इस आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम से क्षेत्र में आंगनवाड़ी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षित कार्यकत्रियां बच्चों के पोषण स्तर में सुधार लाने, गर्भवती व धात्री महिलाओं को बेहतर परामर्श देने और समयबद्ध टीकाकरण सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
सरकार द्वारा मानदेय वृद्धि की घोषणा से कार्यकत्रियों का मनोबल भी बढ़ेगा और वे अधिक समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगी।

21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व

21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व भारतीय और विश्व इतिहास में विशेष स्थान रखते हैं। 21 फ़रवरी जन्मदिन विशेष के इस लेख में हम उन महान लोगों के जीवन, योगदान और उपलब्धियों को विस्तार से जानेंगे, जिनका जन्म 21 फ़रवरी को हुआ और जिन्होंने समाज, साहित्य, विज्ञान, राजनीति और आध्यात्म के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी।
🪔 मिर्रा अलफ़ासा (दा मदर) – आध्यात्मिक चेतना की अग्रदूत (1878)
21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व में दा मदर का नाम अत्यंत श्रद्धा से लिया जाता है। फ्रांस में जन्मी मिर्रा अलफ़ासा बाद में भारत आईं और Sri Aurobindo Ashram की प्रमुख आध्यात्मिक शक्ति बनीं।
उन्होंने Auroville की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन मानव एकता, आत्मिक विकास और वैश्विक शांति के लिए समर्पित रहा।

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🧪 शान्ति स्वरूप भटनागर – भारतीय विज्ञान के शिल्पकार (1894)
21 फ़रवरी जन्मदिन विशेष में वैज्ञानिक शान्ति स्वरूप भटनागर का योगदान अत्यंत उल्लेखनीय है।
वे Council of Scientific and Industrial Research (CSIR) के संस्थापक महानिदेशक थे।
उनके सम्मान में दिया जाने वाला भटनागर पुरस्कार आज भी भारत का प्रतिष्ठित विज्ञान सम्मान है।
✍️ सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला – छायावाद के स्तंभ (1896)
21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व में निराला जी का साहित्यिक स्थान अत्यंत ऊँचा है।
वे छायावाद युग के प्रमुख कवि थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और क्रांतिकारी विचार स्पष्ट दिखाई देते हैं।

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🗡️ विश्वनाथ नारायण लवांडे – गोवा मुक्ति संग्राम के नायक (1923)
21 फ़रवरी जन्मदिन विशेष में स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ नारायण लवांडे का नाम गर्व से लिया जाता है।
उन्होंने Goa Liberation Movement में सक्रिय भूमिका निभाई और पुर्तगाली शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।
🌍 एलेक्सी कोज़ीगिन – सोवियत संघ के प्रधानमंत्री (1904)
एलेक्सी कोज़ीगिन 1964 से 1980 तक सोवियत संघ के प्रधानमंत्री रहे।
उनकी आर्थिक नीतियों ने सोवियत उद्योग और प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा दी।
👑 जिग्मे खेसर नामग्याल वांग्चुक – भूटान के पाँचवें राजा
21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व में भूटान के वर्तमान राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांग्चुक भी शामिल हैं।
वे भूटान के विकास, शिक्षा और खुशहाली (Gross National Happiness) की नीति को आगे बढ़ा रहे हैं।
🏛️ टी. आर. जेलियांग – नागालैंड के पूर्व मुख्यमंत्री (1952)
टी. आर. जेलियांग ने नागालैंड की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राज्य के विकास के लिए कई पहल कीं।
✒️ अमीर मीनाई – उर्दू साहित्य के रत्न (1829)
अमीर मीनाई उर्दू के महान शायर थे। उनकी ग़ज़लें और नज़्में आज भी साहित्य प्रेमियों द्वारा सराही जाती हैं।

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🏎️ प्रतिभा सुरेश्वरन – भारतीय मोटरस्पोर्ट की पहचान (1980)
प्रतिभा सुरेश्वरन भारत की अग्रणी महिला रेसिंग ड्राइवरों में गिनी जाती हैं। उन्होंने मोटरस्पोर्ट में महिलाओं की भागीदारी को नई पहचान दी।
21 फ़रवरी को जन्मे प्रसिद्ध व्यक्तित्व विभिन्न क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप छोड़ चुके हैं। 21 फ़रवरी जन्मदिन विशेष हमें यह प्रेरणा देता है कि एक दिन में जन्मे लोग भी अलग-अलग क्षेत्रों में इतिहास रच सकते हैं।