लखनऊ।(राष्ट्र की परम्परा डेस्क) सीएम आवास पर गुरुवार को आयोजित जनता दरबार उस समय हड़कंप और अफरा-तफरी का शिकार हो गया, जब ग़ाज़ियाबाद जिले के लोनी निवासी सेवानिवृत्त आर्मी जवान सतवीर सिंह ने अचानक ज़हर खा लिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने तुरंत सतवीर सिंह को संभाला और उन्हें गंभीर हालत में सिविल अस्पताल पहुँचाया गया, जहाँ फिलहाल उनका इलाज जारी है।

यह घटना न केवल वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि जनता दरबार की कार्यप्रणाली पर भी गहरे प्रश्नचिह्न लगाती है। दरअसल, मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित जनता दरबार में बेहद कड़ी सुरक्षा और सघन चेकिंग की व्यवस्था रहती है। फरियादियों को प्रवेश से पहले गहन तलाशी के बाद ही अंदर आने दिया जाता है। इसके बावजूद सतवीर सिंह के पास ज़हर जैसी प्रतिबंधित वस्तु पहुँचना सुरक्षा तंत्र की भारी चूक माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार सतवीर सिंह किसी व्यक्तिगत शिकायत और लंबे समय से चल रहे विवाद को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने आए थे। बताया जा रहा है कि जब उनकी फरियाद पर अपेक्षित समाधान या संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने यह कदम उठाया।

अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। यह भी पड़ताल की जा रही है कि इतनी सख़्त सुरक्षा के बावजूद ज़हर जैसी खतरनाक वस्तु को अंदर ले जाने में वह कैसे सफल हो गए।

सिविल अस्पताल प्रशासन ने जानकारी दी है कि सतवीर सिंह की स्थिति गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। वहीं, पुलिस और प्रशासन इस घटना की गहराई से छानबीन में जुट गया है।

यह घटना दोहरे स्तर पर सवाल उठाती है—

  1. सुरक्षा चूक: इतनी बड़ी सुरक्षा परख के बावजूद ज़हर जैसी वस्तु अंदर तक कैसे पहुँची?
  2. जनता दरबार की संवेदनशीलता: आखिर फरियादी इतने मजबूर क्यों हो रहे हैं कि आत्मघाती कदम तक उठाने पर विवश हो जाएँ?

सतवीर सिंह की स्थिति को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन इस घटना ने सीएम आवास की सुरक्षा और जनता दरबार की संवेदनशीलता दोनों पर ही गहन विमर्श छेड़ दिया है।