इन्स्पायर अवार्ड योजना में बलिया की हालत खस्ता

सिकंदरपुर तहसील सबसे फिसड्डी

बलिया (राष्ट्र की परम्परा)। नवाचार और प्रतिभा को मंच देने वाली इन्स्पायर अवार्ड-मानक योजना में बलिया जनपद की स्थिति बेहद चिंताजनक है। उच्चाधिकारियों के लगातार निर्देश और चेतावनियों के बावजूद विद्यालयों की लापरवाही जिले की साख पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है। योजना के तहत प्रत्येक विद्यालय को कक्षा 6 से 12 तक कम से कम पाँच छात्र-छात्राओं का नामांकन कराना अनिवार्य है, लेकिन हकीकत यह है कि बलिया के अधिकांश विद्यालय इस दिशा में बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं।जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, जनपद की छह तहसीलों से अब तक केवल 74 विद्यालयों ने 370 बच्चों का नामांकन पोर्टल पर अपलोड किया है। जबकि लक्ष्य प्रत्येक विद्यालय से पाँच नामांकन का था। यह स्थिति साफ बताती है कि विद्यालय स्तर पर योजना को लेकर उदासीनता हावी है। तहसीलवार आंकड़े इस प्रकार है बलिया सदर : 15 विद्यालय
बेल्थरारोड : 14 विद्यालय
रसड़ा : 13 विद्यालय
बैरिया : 11 विद्यालय
बांसडीह : 11 विद्यालय
सिकंदरपुर : केवल 10 विद्यालय
सिकंदरपुर सबसे पीछे 237 विद्यालयों वाली सिकंदरपुर तहसील में अब तक केवल 10 विद्यालयों ने नामांकन किया है। इनमें गांधी इंटर कॉलेज सिकंदरपुर, जूनियर हाई स्कूल खटंगी, जूनियर हाई स्कूल बिछीबोझ, आदर्श इंटर कॉलेज सिवान कला, जूनियर हाई स्कूल डुहा बिहरा, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय एकइल, जूनियर हाई स्कूल फुलवरिया, राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोथ, जूनियर हाई स्कूल जमुई और जूनियर हाई स्कूल साहूलाई शामिल हैं। कुल विद्यालयों के मुकाबले इतना कम नामांकन सिकंदरपुर तहसील की ढिलाई और लापरवाही को उजागर करता है। डीआईओएस ने जताई नाराजगी जिला विद्यालय निरीक्षक देवेंद्र कुमार गुप्ता ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा–– “बलिया जैसे बड़े जनपद का यह हाल बेहद शर्मनाक है। जब हर विद्यालय को पाँच बच्चों का नामांकन करना है तो इतनी सुस्ती क्यों? सभी विद्यालय 4 सितम्बर तक हर हाल में डाटा पोर्टल पर अपलोड करें, अन्यथा जिम्मेदार प्रधानाचार्य और शिक्षक जवाबदेह होंगे। महानिदेशक के निर्देश की भी अनदेखी महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने यूट्यूब सत्र के माध्यम से स्पष्ट निर्देश दिए थे कि 30 अगस्त से 3 सितम्बर तक सभी विद्यालयों में विशेष कैम्प लगाकर बच्चों को योजना से जोड़ा जाए, उन्हें अभिनव कहानियां सुनाई जाएं और आइडिया लिखने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके बाद 4 सितम्बर तक सर्वश्रेष्ठ पाँच मौलिक विचारों का चयन कर पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है।
लेकिन विद्यालयों की सुस्ती से न सिर्फ बच्चे अवसर से वंचित हो रहे हैं, बल्कि जिले की छवि भी धूमिल हो रही है। खासतौर पर सिकंदरपुर तहसील की लापरवाही ने पूरे जिले को पीछे धकेल दिया है।

Karan Pandey

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