2016 बेदखली प्रकरण पर सुनवाई, गवाहों और वीडियो फुटेज को लेकर उठे सवाल
प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान को बड़ी राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा अंतिम आदेश सुनाए जाने पर रोक की अवधि 28 जुलाई 2025 तक बढ़ा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ ने पारित किया।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.आई. जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट ने 30 मई 2025 को महत्वपूर्ण वीडियो फुटेज और प्रमुख गवाह की दोबारा गवाही की मांग को अनुचित ढंग से खारिज कर दिया।
सह-आरोपियों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एफ.ए. नक़वी और अधिवक्ता सैयद अहमद फैज़ान ने किया।
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल ने पैरवी की। मामला वर्ष 2016 के एक कथित बलपूर्वक बेदखली प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें रामपुर कोतवाली में वर्ष 2019 में 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं (संख्या 528/2019 से 539/2019 और 556/2019)। सभी मामलों को 8 अगस्त 2024 को विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट), रामपुर द्वारा एक वाद में समाहित कर सुनवाई प्रारंभ की गई थी।इन मामलों में डकैती, अनधिकृत प्रवेश, आपराधिक षड्यंत्र सहित अन्य आपराधिक धाराएं शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि यह मुकदमा पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और उनके मौलिक अधिकारों — अनुच्छेद 14, 19, 20 और 21 — का उल्लंघन करता है।
राजनीतिक और कानूनी दृष्टिकोण से अहम मामला
यह मामला केवल कानूनी पहलुओं तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी व्यापक प्रभाव डाल सकता है। मो. आजम खान न केवल एक वरिष्ठ राजनेता हैं, बल्कि अली जौहर विश्वविद्यालय के संस्थापक के रूप में शैक्षणिक क्षेत्र में भी उनका विशेष योगदान रहा है।
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 28 जुलाई 2025 तक ट्रायल कोर्ट कोई अंतिम आदेश पारित नहीं करेगा। अगली सुनवाई में गवाहों की पुनरावृत्ति, डिजिटल साक्ष्य की वैधता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार जैसे संवेदनशील बिंदुओं पर विस्तार से बहस की संभावना है।
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