संत कबीर नगर (राष्ट्र की परम्परा)। एक सदी का जीवन पार कर चुके बलिया निवासी भोला चौधरी के लिए शुक्रवार की सुबह नई उम्मीद लेकर आई। हत्या के एक पुराने मामले में आजीवन कारावास भुगत रहे सौ वर्षीय बंदी को राज्यपाल द्वारा दया याचिका स्वीकार किए जाने के बाद जिला कारागार संत कबीर नगर से रिहा कर दिया गया। उम्र और बीमारी से जूझते भोला ने तकरीबन 12 वर्ष जेल की चारदीवारियों में बिताए।
जेल अधीक्षक कुलदीप सिंह ने बताया कि भोला चौधरी, पुत्र कालिका चौधरी, ग्राम आमघाट, थाना बांसडीह रोड, जनपद बलिया के निवासी हैं। वह सत्र परीक्षण संख्या 235/1978 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 149, 307 में दोषी पाए गए थे। उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
ज्ञात हो भोला चौधरी को 2 अप्रैल 2023 को जिला कारागार आजमगढ़ से स्थानांतरित कर संत कबीर नगर लाया गया था। तब से वे जेल अस्पताल में विशेष देखरेख में थे, क्योंकि वृद्धावस्था के कारण उनकी स्वास्थ्य स्थिति लगातार निगरानी में रखी जा रही थी।
जेल अधीक्षक के अनुसार बंदी ने लगभग 12 वर्ष कारावास में व्यतीत किए हैं। उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए जिलाधिकारी संत कबीर नगर द्वारा दो बार कारागार मुख्यालय को उनकी समयपूर्व रिहाई की संस्तुति भेजी गई थी। अंततः राज्यपाल उत्तर प्रदेश द्वारा दया याचिका को स्वीकार कर लिया गया।
इसके बाद जिलाधिकारी बलिया के आदेशानुसार शुक्रवार को उन्हें औपचारिक रूप से रिहा कर दिया गया। रिहाई के समय जेल प्रशासन ने आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण कीं और उन्हें भावनात्मक विदाई दी गई।
भोला चौधरी की रिहाई यह संकेत देती है कि सजा का उद्देश्य केवल दंड नहीं, बल्कि परिस्थितियों के अनुरूप मानवीय दृष्टिकोण अपनाना भी है।
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