वैश्विक क्षमा दिवस 7 जुलाई
क्षमा दिवस मनाने से खुद को व दूसरों को क्षमा करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है,जिससे एक अधिक दयालू और सहानुभूतिपूर्ण दुनियाँ को बढ़ावा मिलता है
गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारतीय सभ्यता,संस्कृति, मूल्यों मर्यादा और आध्यात्मिकता की सजगता दुनिया में कहीं नहीं है हमारी सभ्यता के अनेक मोतियों में से एक माफ़ी मांगना या देना है, बड़े बुजुर्गों का कहना है जो माफ़ करता है पुरानी बातों को भूल जाता है वही सबसे बड़ा दानी है क्योंकि क्षमादान जैसा कोई दान नहीं यहभारतीय सभ्यता की वैचारिक शक्ति है ! मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह मानता हूं कि, हमसे अगर गलती हो जाए तो हमें शांत स्वभाव से अपनी गलती को स्वीकार कर लेना चाहिए और माफ़ी मांगनी चहिए, क्योंकि हमेशा याद रखें कि माफी मांगने से हमेशा रिश्ते मजबूत ही होंगे, दो लोगों के बीच कभी बैर नहीं होगा। माफ करने या माफी मांगने की आदत से यह मालूम पड़ता है कि व्यक्ति तुच्छ भावों के मुकाबले में रिश्ते को ज्यादा अहमियत देता है।आज हम इस विषय पर चर्चा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 7 जुलाई 2025 को वैश्विक माफी दिवस है,चूँकि क्षमा दिवस मनाने से खुद को व दूसरों को क्षमा करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है, जिससे एक अधिक दयालू और सहानुभूतिपूर्ण दुनियाँ को बढ़ावा मिलता है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे,क्षमा मांगना या देना भावनात्मक और मानसिक कल्याण का एक पहलू है जो सद्भाव और शांति स्थापित करने में मदद करता है।
साथियों बात अगर हम वैश्विक क्षमा दिवस 7 जुलाई 2025 के महत्व और शक्तियों को समझने की करें तो,यह दिवस हमारे जीवन में क्षमा की शक्ति और महत्व को समर्पित एक वार्षिक कार्यक्रम है। यह द्वेष को दूर करने, पिछले घावों को भरने और समझ और सुलह की संस्कृति को बढ़ावा देने के महत्व पर चिंतन करने का दिन है। क्षमा भावनात्मक और मानसिक कल्याण का एक पहलू है, जो व्यक्तियों और समुदायों को सद्भाव और शांति में आगे बढ़ने में मदद करता है। वैश्विक क्षमा दिवस लोगों को खुद को और दूसरों को क्षमा करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे एक अधिक दयालु और सहानुभूति पूर्ण दुनिया को बढ़ावा मिलता है। वैश्विक स्तरपर भारतीय सभ्यता, संस्कृति, मूल्यों मर्यादा और आध्यात्मिकता की सजगता दुनिया में कहीं नहीं है हमारी सभ्यता के अनेक मोतियों में से एक माफ़ी मांगना या देना है, बड़े बुजुर्गों का कहना है जो माफ़ करता है पुरानी बातों को भूल जाता है वही सबसे बड़ा दानी है क्योंकि क्षमादान जैसा कोई दान नहीं यहभारतीय सभ्यता की वैचारिक शक्ति है!
साथियों बात अगर हम मानव जीव में क्षमा भाव की करें तो, क्षमा भाव जिसके भीतर विकसित हो जाता है,वह व्यक्ति समाज में आदरणीय माना जाता है। किसी को किसी की भूल के लिए क्षमा करना औरआत्मग्लानि से मुक्ति दिलाना एक बहुत बड़ा परोपकार है। कितना आसान है किसी से अपनी गलती की माफी मांगना और उससे भी ज्यादा आनंद तब मिलता है, जब वह व्यक्ति हमें माफ कर देता है। क्षमा का शस्त्र जिसके पास है, उसका दुष्ट मानव कुछ नहीं बिगाड़ सकते। जिस तरह बिना तिनकों की पृथ्वी पर गिर कर अग्नि खुद ही शांत हो जाती है।
साथियों बात अगर हम क्षमा मांगने की परिस्थिति की करें तो, यदि हमसे वाकई गलती हो गई है तो गंभीरता से क्षमा मांगें। कोई स्पष्टीकरण दें, हमारी गलती से वह विचलित है और हमारे कारणों को समझने की स्थिति में नहीं है।उसे पहले शांत कर सामान्य स्थिति में लाएं। दिल से मांगी गई माफी से स्थिति सामान्य हो जाएगी। यह हमारा बड़प्पन भी होगा कि जो व्यक्ति हमारे कारण दुखी हुआ है और हम अपनी गलती स्वीकार कर उसे सामान्य होने में मदद कर रहे हैं। फिर हुए नुकसान या असुविधा की पूर्ति के लिए तत्काल प्रयास करें। व्यर्थ की दलीलों में समय बर्बाद करने की बजाय तत्काल कदम उठाएं। इस तरह हम अपनी खामियों के बावजूद सम्मान भरोसा हासिल करेंगे। अन्यथा भावनाओं की गलत अभिव्यक्ति से आप हमेशा तनाव में रहेंगे, जो आपको समाधान से दूर और दूर ले जाएगा।
साथियों बात अगर हम क्षमा देने की करें तो, कमजोर व्यक्ति कभी क्षमा नहीं कर सकता,क्षमा करना तो शक्तिशाली व्यक्ति का गुण है। जो पहले क्षमा मांगता है वह सबसे बहादुर है और जो सबसे पहले क्षमा करता है वह सबसे शक्तिशाली है। शास्त्रों में कहा गया है कि क्षमा वीरों का आभूषण है।बाणभट्ट के हर्षचरित में उल्लेख किया गया है कि क्षमा सभी तपस्याओं का मूल है। महाभारत में कहा गया है कि क्षमा असमर्थ मनुष्यों का गुण और समर्थ मनुष्यों का आभूषण है।’ श्री गुरु ग्रंथ साहिब का वचन है- क्षमाशील को रोग नहीं सताता और न ही यमराज डराता है।
साथियों बात अगर हम क्षमा में भावनात्मक मिश्रण से हानि की करें तो खासकर पारिवारिक झगड़ों में हम देखते हैं कि, पति का पत्नी से झगड़ा हो गया है। उनके बीच कोई समस्या हो सकती है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। चूंकि पत्नी का मूड खराब है तो वह बेटे पर गुस्सा उतारेगी। बेटे पर मां मामूली-सी बात पर चिल्लाई तो वह अपने साथियों से लड़ पड़ा और हम जितनी कल्पना कर सकें उतना इस कहानी को विस्तार दे सकते हैं। भावनाएं यदि समस्या के स्रोत की दिशा में हो तो भी यह उसे सुलझाने की बजाय बड़ा बना देती हैं। यहीं पर बड़ी समस्या है, क्योंकि कोई माफी मांगे इसकी बजाय भावनात्मक विस्फोट के कारण आखिर में स्थिति होगी कि हमें ही माफी मांगनी पड़ सकती है।
साथियों बात अगर हम माफी मांगने में अफसोस और ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी़ के तड़के की करें तो,मुझे अफ़सोस है, इन तीन छोटे शब्दों के बिना माफी वास्तव में माफी नहीं है। उनका उपयोग करने से हम यह प्रदर्शित कर सकते हैं कि हम वास्तव में उस समस्या को उत्पन्न करने के लिए पछताते हैं जिसने शिकायत को प्रेरित किया। इन शब्दों के साथ माफी माँगने से हमको यह दिखाने में मदद मिलती है कि हम अतीत में जो कुछ हुआ है उसकी ज़िम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं। हम सुनिश्चित करेंगे कि ऐसा दोबारा न हो, यह समझाते हुए कि जो हुआ अब आगे हमेशा एक अच्छा विचार होगा, भविष्य में गड़बड़ी से मुक्त रखने के लिए हम जो कुछ भी बदलने की योजना बना रहे हैं उसे रेखांकित करके उस सफलता पर निर्माण करना सबसे अच्छा है।
साथिया बात अगर हम माफी मांगने की व्यवहारिकता की करें तो, यदि हम गलत हैं, आंशिक रूप से भी, किसी की मांग करने से पहले क्षमा मांगना बेहतर है। क्षमायाचना उन समस्याओं को हल करने में मदद कर सकती है जिन्हें हल करना सामान्य शब्दों के लिए बहुत कठिन है। क्षमा की वांछनीयता इसमें शामिल लोगों की संस्कृति पर निर्भर करती है। शर्म की संस्कृति में , एक उच्च स्थिति वाले व्यक्ति से जबरन माफी मांगना एक बहुत ही मूल्यवान चीज के रूप में देखा जाता है, क्योंकि माफी मांगने वाले व्यक्ति के सामाजिक अपमान को एक महत्वपूर्ण कार्रवाई के रूप में देखा जाता है।शिष्टाचार दूसरों से अपेक्षा करने का मानक नहीं है, यह एक ऐसा मानक है जिसका आप स्वयं पालन करते हैं। यह कहना कभी आसान नहीं होता, मुझे क्षमा करें। लेकिन कभी-कभी, गलती के लिए माफी मांगना ही आपकी प्रतिष्ठा की रक्षा करने का एकमात्र तरीका है।
“क्षमा दान महादान है,क्षमा के बराबर कोई दान नहीं है
गलती करना मानवीय विकार है,क्षमा करना ईश्वरय गुणहैं
क्षमा खुशनसीब है,अहंकार बदनसीब हैं।”
अतःअगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि क्षमा मांगना या देना भावनात्मक और मानसिक कल्याण का एक पहलू है जो सद्भाव और शांति स्थापित करने में मदद करता है
वैश्विक क्षमा दिवस 7 जुलाई 2025, विभिन्न संस्कृतियों व पृष्ठभूमियों के लोगों में क्षमा, यह शांति व सुलह की दिशा में एक वैश्विक आंदोलन को प्रेरित करता है,क्षमा दिवस मनाने से खुद को व दूसरों को क्षमा करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है,जिससे एक अधिक दयालू और सहानुभूति पूर्ण दुनियाँ को बढ़ावा मिलता है।
-संकलनकर्ता लेखक-क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यम सीए (एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया
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