सत्ता की ताक़त और
ऐश्वर्य का अहंकार,
जीवन में मीठे फलों
की तरह स्थान पाते हैं।
पर प्रभुता पाकर इंसानियत
से इंसान दूर चला जाता है,
प्रभुता का अहंकार आख़िर
में नष्ट भ्रष्ट हो जाता है।
इसीलिये यह कहा गया है
कि मित्र और परिवार हमारे,
जीवन की सुखद, शान्त,
गहरी सी मज़बूत जड़ें हैं।
मीठे फल खाये बिना हम
निश्चित जीवित रहते हैं,
जड़ें अगर मजबूत नहीं तो,
नहीं खड़े भी रह सकते हैं।
अहंकार के मद में नीचे
इतना मत गिर जायें,
धरती माता से सुदूर हो,
नभ मंडल में मंडरायें।
शक्ति के मद में चूर चूर,
निर्बल को बल दिखलायें,
अपनी बनावटी ख़ुशियों से
औरों को दुःख पहुँचायें।
होशियारी इतनी न भली,
हमसे अपने ही छले जायें,
ऐसी ईर्ष्या प्रभु मत देना हम
खुद जलकर ख़ाक हो जायें।
अभिमान ज्ञान का मत देना,
कि पर उपकार भूल जाऊँ,
आदित्य यही विनती प्रभु से,
सच्चे पथ पर चलता जाऊँ।
•कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
जाम पुलिया की सफाई रोकने पर महुआनी चौराहे पर चक्का जाम, सड़क पर उतरे ग्रामीण…
इंदिरा गांधी के बलिदान दिवस पर भावुक हुआ गांधी परिवार, सोनिया-प्रियंका ने दी श्रद्धांजलि; खड़गे…
मॉर्निंग वॉकर्स और बुजुर्गों से किया संवाद, एंटी रोमियो टीम ने बालिकाओं को हेल्पलाइन नंबरों…
Ai निर्मित नई दिल्ली/लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। भारत की एकता, अखंडता और मजबूत राष्ट्र…
https://twitter.com/ceoup/status/2116199183543890078?a=aNZ5bov-ljZ0Wrotwro&s=19 मतदाता सूची में लापरवाही पड़ी भारी! अब सीधे निशाने पर जिला निर्वाचन अधिकारी, रोज…
व्यंग्य: ऊपर वाले मालामाल, नीचे वाले बेहाल!छोटी मछली पर शिकंजा, बड़ी मछली को संरक्षण क्यों?…