जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील

एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार का संदेश

सरकारी बैठकों में पानी की बर्बादी पर जताई चिंता

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
बढ़ते जल संकट और लगातार गिरते भूजल स्तर को लेकर प्रशासन अब और अधिक सतर्क नजर आ रहा है। इसी क्रम में एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार ने जनपदवासियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जल संरक्षण को लेकर एक विस्तृत अपील जारी की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है और इसकी एक-एक बूंद को बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
एडीएम सिटी ने अपने संदेश में विशेष रूप से शासकीय बैठकों, समीक्षा सम्मेलनों और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में पानी के उपयोग की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अक्सर यह देखा जाता है कि अधिकारियों और कर्मचारियों को जो छोटी या मध्यम आकार की पानी की बोतलें उपलब्ध कराई जाती हैं, उनका पूरा उपयोग नहीं हो पाता। कई बार बोतलें आधी या उससे भी कम उपयोग के बाद छोड़ दी जाती हैं और शेष पानी व्यर्थ हो जाता है। यह प्रवृत्ति न केवल जल की बर्बादी है, बल्कि संसाधनों के प्रति लापरवाही को भी दर्शाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पानी की बर्बादी का प्रभाव केवल उतने ही पानी तक सीमित नहीं होता, जितना हम देख पाते हैं। आरओ (RO) प्रणाली का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि एक लीटर शुद्ध पानी प्राप्त करने के लिए लगभग तीन लीटर पानी अतिरिक्त रूप से नष्ट हो जाता है। ऐसे में यदि हम एक छोटी सी बोतल का भी पूरा उपयोग नहीं करते, तो वास्तव में उससे कई गुना अधिक पानी की बर्बादी होती है। यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है, जब इसे बड़े पैमाने पर देखा जाए, जहां हर दिन सैकड़ों बैठकों और कार्यक्रमों में हजारों बोतलें उपयोग में लाई जाती हैं।
एडीएम सिटी गजेंद्र कुमार ने कहा कि जल संरक्षण को केवल एक औपचारिक विषय न मानते हुए इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा समय-समय पर किए गए जल संरक्षण के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार स्तर पर इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जनसहभागिता के बिना इन प्रयासों को पूर्ण सफलता नहीं मिल सकती।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि जब भी किसी बैठक या कार्यक्रम में पानी की बोतल उपलब्ध कराई जाए, तो उसका पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी कारणवश बैठक के दौरान पूरा पानी नहीं पीया जा सके, तो उस बोतल को अपने साथ ले जाकर बाद में उपयोग करना चाहिए, ताकि पानी व्यर्थ न जाए।
इसके साथ ही उन्होंने संबंधित विभागों को यह भी निर्देश दिया कि जहां संभव हो, वहां बोतलबंद पानी के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाए। जैसे कि गिलास और फिल्टर पानी की व्यवस्था की जाए, जिससे प्लास्टिक बोतलों का उपयोग भी कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल जल संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि प्लास्टिक कचरे को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
एडीएम सिटी ने कार्यालयों में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी सरकारी कार्यालयों में जल संरक्षण से संबंधित संदेशों वाले सूचना पट्ट लगाए जाएं। इन पट्टों पर “जल ही जीवन है, इसका सम्मान करें”, “हर बूंद की कीमत समझें” जैसे प्रेरणादायक संदेश अंकित किए जाएं, ताकि कर्मचारियों और आमजन को लगातार इस विषय की याद दिलाई जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी का उपयोग सोच-समझकर करना चाहिए। छोटी-छोटी आदतें, जैसे कि नल को खुला न छोड़ना, जरूरत के अनुसार ही पानी का उपयोग करना और वर्षा जल संचयन को अपनाना, बड़े बदलाव ला सकती हैं।
गजेंद्र कुमार ने यह भी रेखांकित किया कि यदि अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में पहले से ही पानी की कमी देखी जा रही है और भविष्य में यह समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अभी से जागरूक हों और जल संरक्षण को प्राथमिकता दें।
एडीएम सिटी ने सभी जनपदवासियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि जल केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। इसे बचाना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर थोड़ा-सा प्रयास करे, तो मिलकर एक बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। जल संरक्षण की दिशा में उठाया गया हर छोटा कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करेगा।

rkpnews@somnath

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