भीषण आग की त्रासदी के बीच मानवता की मिसाल, समाजसेवियों ने संभाली बेटियों की शादी की जिम्मेदारी


बलिया (राष्ट्र की परम्परा)।जनपद के बेल्थरा रोड तहसील क्षेत्र के हल्दीहामपुर छपिया गांव में हाल ही में लगी भीषण आग ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी को गहरे संकट में डाल दिया। आग की इस विनाशकारी घटना में न केवल लोगों के घर जलकर खाक हो गए, बल्कि अनाज, कपड़े और वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई जमा पूंजी भी राख में तब्दील हो गई। इस हादसे के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में पीड़ा और असहायता का माहौल व्याप्त है।
इस कठिन परिस्थिति में समाज के विभिन्न वर्गों से लोग आगे आकर पीड़ितों की सहायता कर रहे हैं, जो मानवता और सामाजिक एकता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन रही है। इसी क्रम में समाजसेवी राकेश लाइट (मालदा) और उनके सहयोगियों ने एक सराहनीय पहल करते हुए उन परिवारों की मदद का बीड़ा उठाया है, जिनकी बेटियों की शादी इस त्रासदी के कारण संकट में पड़ गई थी।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित परिवारों में बबलू की पुत्री वंदना की शादी 14 मई को तथा विक्रमा राजभर की पुत्री प्रियंका की शादी 25 जून को तय थी। आग लगने के कारण दोनों परिवारों के सामने शादी की तैयारियां पूरी करना एक बड़ी चुनौती बन गया था। ऐसे समय में जब परिवार पूरी तरह टूट चुके थे, तब समाजसेवियों ने आगे बढ़कर न केवल उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि उनकी जिम्मेदारियों को भी साझा किया।
राकेश लाइट और उनकी टीम ने दोनों शादियों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं जैसे जनरेटर, टेंट और जयमाल की व्यवस्था नि:शुल्क उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उन्होंने आर्थिक सहायता देने का भी संकल्प लिया, ताकि दोनों परिवार बिना किसी बाधा के अपनी बेटियों का विवाह संपन्न कर सकें। यह सहयोग पीड़ित परिवारों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।

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बुधवार को राकेश लाइट अपने सहयोगियों के साथ हल्दीहामपुर गांव पहुंचे, जहां उन्होंने दोनों परिवारों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की। इस दौरान गांव का माहौल भावुक हो उठा। एक ओर जहां लोग अपने नुकसान से व्यथित थे, वहीं दूसरी ओर समाजसेवियों की इस पहल से उनके चेहरे पर उम्मीद की झलक साफ दिखाई दी।
इस अवसर पर नमोद तिवारी, पुरुषोत्तम गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि इस संकट की घड़ी में समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए और पीड़ितों की मदद करनी चाहिए, ताकि वे जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौट सकें।
यह घटना न केवल एक त्रासदी की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब समाज एकजुट होकर खड़ा होता है, तो बड़े से बड़ा संकट भी छोटा पड़ जाता है। हल्दीहामपुर गांव में समाजसेवियों की यह पहल पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है और यह संदेश देती है कि कठिन समय में सहयोग और संवेदनशीलता ही समाज की सबसे बड़ी ताकत होती है।

Editor CP pandey

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