उतरौला (बलरामपुर)। आज़ादी के 77 साल बाद भी उतरौला तहसील परिसर के अधिवक्ताओं और वादकारियों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। तहसील परिसर में न तो बिजली-पानी की व्यवस्था है और न ही शौचालय की। अधिवक्ताओं का कहना है कि शौच के लिए उन्हें एक किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार दुबे का कहना है कि “तहसील की स्थापना 1853 में बलरामपुर स्टेट द्वारा कराई गई थी, लेकिन तब से अब तक अधिवक्ताओं और वादकारियों की सुविधा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।”
अधिवक्ता अखिलेश कुमार तिवारी ने बताया कि “तहसील परिसर में लगभग 300 अधिवक्ता प्रतिदिन बैठते हैं और करीब 500 वादकारी न्याय के लिए आते हैं, लेकिन सुविधाओं का टोटा सबको परेशान करता है।”
अधिवक्ता दीपक श्रीवास्तव का कहना है कि “एक शौचालय बना तो है, लेकिन वह बंद पड़ा है। केवल कागज़ी खानापूरी हो रही है।” वहीं निराकार कोली ने कहा कि “आज तक सरकार ने वकीलों के हित में कोई कदम नहीं उठाया।”
सैकड़ों अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की तत्काल व्यवस्था की मांग करते हुए कड़ी नाराज़गी जताई है।
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