ग्रामीणों में आक्रोश जनप्रतिनिधियों के विरोध की चेतावनी, जर्जर तारों को बदलने की उठी मांग

( भाटपार रानी से बृजेश मिश्र की रिपोर्ट)
भाटपार रानी /देवरिया( राष्ट्र की परम्परा) जनपद के भाटपार रानी तहसील अंतर्गत इंगुरी सराय गांव में बीती रात एक बड़ा हादसा टल गया। 29/30 जुलाई की देर रात करीब 65 वर्ष पुराने हाइटेंशन विद्युत तार अचानक गिर गए, जिससे मौके पर बंधी एक गाय की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। संयोगवश उस समय अधिकांश लोग घरों में सो रहे थे और विद्यालय बंद था, अन्यथा यह हादसा बड़े जनहानि का रूप ले सकता था।
हादसा हरिहर यादव के घर के पास हुआ, जहां पास ही एक शेड के बगल में प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूल भी स्थित है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर यह दुर्घटना दिन में होती, तो सैकड़ों छात्र-छात्राएं व ग्रामीणों की जान पर बन आती।
इस घटना के बाद गांव में आक्रोश फैल गया है। ग्रामीण लालाबाबू पांडेय, क्षेत्र पंचायत सदस्य अरुण गुप्ता, पूर्व प्रधान रंजीत खरवार, ग्राम प्रधान बंजरिया विद्यासागर गौड़ और इंगुरी सराय ग्रामसभा के वर्तमान प्रधान धर्मेन्द्र कुशवाहा सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने बनकटिया दुबे विद्युत उपकेंद्र पर संचालित पुराने और जर्जर तारों को तत्काल बदलने की मांग की है।
घटना से क्षुब्ध ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों को गांव में घुसने से रोकने तक की चेतावनी दे दी है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो विभाग चेता और न ही जनप्रतिनिधियों ने संज्ञान लिया।
हैरानी की बात यह है कि हादसे के बावजूद उपकेंद्र के कर्मचारी इन्हीं पुराने और खतरनाक तारों के सहारे बिजली आपूर्ति पुनः शुरू करने में लगे हैं। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अब आपूर्ति केवल नए व मजबूत हाइटेंशन तारों से ही शुरू की जाए, अन्यथा वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
ग्रामीणों ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि दिल्ली से दोगुनी कीमत पर बिजली खरीदने वाला प्रदेश आज भी जर्जर तारों और असुरक्षित आपूर्ति से जूझ रहा है। उपभोक्ताओं को केवल घोषणाएं और आश्वासन ही मिले हैं, ज़मीनी सुधार नदारद है।
पूरे इंगुरी सराय गांव में पुराने हाइटेंशन तारों को अविलंब बदला जाएविद्युत आपूर्ति को केवल नए तारों से ही चालू किया जाएजिम्मेदार कर्मचारियों की जांच हो और कार्रवाई सुनिश्चित हो
एक ओर जहां सरकार स्मार्ट बिजली व्यवस्था की बात कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत इससे उलट है। इस तरह की घटनाएं न सिर्फ लापरवाही को उजागर करती हैं, बल्कि आम जनता की जान पर बन आती हैं। इंगुरी सराय की घटना ने सिस्टम की पोल खोल दी है। अगर अब भी सरकार और विभाग ने आंख नहीं खोली, तो अगली बार यह हादसा और भी बड़ा हो सकता है।
