Wednesday, February 11, 2026
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पूर्वांचल के शताब्दियों का अतीत होगा डिजिटल

इंटेक व गोरखपुर विश्वविद्यालय के मध्य एमओयू

इंटेक द्वारा डिजिटलाइज होगा प्राचीन इतिहास विभाग का संग्रहालय

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग तथा इंटेक के बीच महत्वपूर्ण एम.ओ.यू पर हस्ताक्षर हुआ। सांस्कृतिक विरासत से संबंधित इंटेक एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है। इंटेक कला एवं संस्कृति से संबंधित वस्तुओं का संरक्षण करने, उसकी पहचान करने, काल निर्धारण एवं उसके उचित रखरखाव का कार्य करने वाली संस्था है।
प्राचीन इतिहास विभाग में एक प्रतिष्ठित संग्रहालय है। जिसमें सुदूर अतीत से लेकर ऐतिहासिक काल तक की पूरा वस्तुएं संरक्षित हैं। प्राचीन इतिहास विभाग का संग्रहालय पूर्वांचल के शताब्दियों की कहानी को अपने भीतर समेटे हुए है। शुक्रवार को प्राचीन इतिहास विभाग एवं इंटेक के मध्य एमओयू0कुलपति प्रो. पूनम टंडन एवं इंटेक के गोरखपुर चैप्टर के निदेशक महावीर कोंडई द्वारा हस्ताक्षर हुआ।
इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि पूर्वांचल के लोग दुनिया में लंबे अतीत के वंशधर हैं। हमारी गौरवशाली परंपरा है। पूर्वांचल की गौरवशाली परंपरा प्राचीन इतिहास विभाग के संग्रहालय में संरक्षित है। उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि निसंदेह विश्वविद्यालय एवं इंटेक के मध्य हस्ताक्षरित एमओयू दोनों पक्षों के लिए लाभप्रद होगा।
प्राचीन इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर प्रज्ञा चतुर्वेदी ने इस अवसर पर कहा कि हमारा संग्रहालय नव पाषाण काल से लेकर और पूर्व मध्यकाल तक के विगत मनुष्यों की सृष्टि एवं कृतियों को संरक्षित किए हुए है। निश्चय ही इस एम ओ यू से प्राचीन इतिहास विभाग एवं इंटेक विरासत संरक्षण की दिशा में सार्थक जुगलबंदी कर सकेंगे।
इंटेक के निदेशक महावीर प्रसाद कोंडई ने इंटेक के उद्देश्यों एवं पूर्वांचल में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने हर्ष प्रकट करते हुए कहा कि प्राचीन इतिहास विभाग के संग्रहालय को व्यवस्थित रूप दिया जाएगा. इंटेक द्वारा इसका डिजिटलाइजेशन किया जाएगा।
इस एमओयू के हस्ताक्षर में बुनियादी भूमिका कला संकाय के अधिष्ठाता एवं प्राचीन इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर राजवंत राव की रही।
इस अवसर पर अचिनत्य लहिड़ी, मुमताज खान, आशीष अस्थाना, प्रो. दिग्विजय नाथ मौर्या,प्रो.शीतला प्रसाद सिंह, प्रो. कमलेश गौतम एवं शिवेंद्र आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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