Saturday, April 4, 2026
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के० वि० के० बहराइच प्रथम पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण का हुआ समापन

के० वि० के० बहराइच प्रथम पर आयोजित चार दिवसीय प्रशिक्षण का हुआ समापन

बहराइच (राष्ट्र की परम्परा) । आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र बहराइच प्रथम के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ के एम सिंह के दिशा निर्देशन में चार दिवसीय कार्यकारी प्रशिक्षण विषय समन्वित कीट एवं रोग प्रबंधन के आवश्यक उपकरण एवं उनके परिमाप का समापन हुआ।
केन्द्र के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण समन्वयक डॉ पी के सिंह ने बताया कि एकीकृत कीट नियंत्रण कार्यक्रम वास्तव में एक नई विचारधारा है। किन्तु ये विचारधारा सिद्धांतः इतनी सुगम है की आम लोग यह कहते हुए पाए गए कि इस प्रकार इसकी सैद्धांतिक सुगमता हि सभी विशेषताओं को सीमित कर देती है। इस क्रम में डाक्टर अरूण कुमार राजभर ने बताया की इस प्रणाली के कुछ निश्चित लाभ है जो सामान्यतः राष्ट्रीय आय के अनुरूप होते है।
उन्होंने बताया की ये प्रणाली विकसित देशों के लिए ये शैक्षिक है। जबकि भारत जैसे विकाशसील देशों के लिए अति आवश्यक है। डॉ सुनील कुमार ने बताया की ये प्रणाली अति सक्षम है एवं अल्पव्यापी नियंत्रण विधि है। जिसमे नियन्त्रण की समस्त विधियों का समायोजन होता है।
डॉ नीरज सिंह ने बताया की ये प्रणाली प्राकृतिक सन्तुलन को नही बिगाड़ता इसलिए ऐसा दृढ़ता पूर्वक विश्वास किया जा सकता है कि एकीकृत नियन्त्रण विधियां अपनाई जाए तो हर तरह के कुप्रभाव से बचा जा सकता है। केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ के एम. सिंह ने बताया की इस प्रणाली से कीटो की कीटनाशी अवरोधी जातियों का विकाश रोका अथवा निलंबित किया जा सकता है जिससे कीटनाशी अवशेष खतरे को कम किया जा सकता है।
केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ प्रमोद कुमार सिंह (उद्यान) ने कीट नियंत्रण की अन्य विधियों का वर्णन करते हुए इस प्रणाली का पुरजोर किया और उपस्थित लाभार्थियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सम्बन्धित प्रशिक्षण समन्यवक ने बताया की किस तरह से कीटो के आर्थिक क्षति स्तर और आर्थिक सीमा रेखा से कीट नियंत्रण प्रणाली को बल प्राप्त होगा, ताकि नाशीकीटो की संख्या में सीमितता का स्थान प्रमुख होगा और ताकि नाशी कीटो की संख्या न बढ़ सके।

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