Monday, February 16, 2026
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मेरी रचना, मेरी कविता

इंसान की शक्ल सूरत का क्या
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हर इंसान दूसरे इंसान के लिये शायद
अच्छा भी और बुरा भी हो सकता है,
पर यह निश्चित है कि हर इंसान में
स्वयं कुछ अच्छा तो कुछ बुरा होता है।

लफ्ज ही होते हैं इंसान का आईना,
इंसान की शक्ल सूरत का क्या है,
शक्ल सूरत तो उम्र और हालात के
साथ अक्सर बदलती ही जाती है।

लफ़्ज़ सुंदर हों तो आईने में अपने
चेहरे भी सुंदर से दिखने लगते हैं,
लफ़्ज़ बुरे हों तब खुद का चेहरा व
आइना दोनो ही बदसूरत लगते हैं।

उम्र का बढ़ना ज़िन्दगी का दस्तूर है,
उससे कुछ छिपा पाना फ़िज़ूल है,
अनुभव, प्रयास बहुत कुछ सिखाते हैं,
आइये हम हर पल प्रयास करते हैं।

परिस्थितियाँ मजबूर कर देती हैं,
स्वभाव भी बदल कर रख देती हैं,
वरना हम तो कल तक जैसे रहे थे,
आज भी पहले की तरह वैसे ही हैं।

चाहे कुछ बन जायँ, कुछ मिल जाय,
या भले ही कुछ भी मुझसे छिन जाय,
अपने स्वार्थ हित किसी का कभी भी,
अहित न होने देंगे, चाहे कुछ हो जाय।

सुखी व सफल जीवन इतना आसान
व सरल न कभी था, न कभी होता है,
पर सफलता मिलने के बाद अवश्य
ही सरल और सुखमय हो जाता है।

इसीलिये किसी इंसान के बारे में,
कोई स्थिर विचार नहीं रखना चाहिये,
आदित्य इंसान को इंसान के अनुसार
अलग अलग व्यवहार करना चाहिये।

कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’
लखनऊ

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