
मोदी के गढ़ में स्नातक व शिक्षक दोनों सीट पर सपा का कब्जा
11 सीटों के नतीजों ने 2027 से पहले बढ़ाई सियासी हलचल
लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा डेस्क) उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। 11 सीटों के चुनावी मुकाबले में भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर कब्जा जमाकर अपनी ताकत का एहसास कराया। नतीजों ने साफ कर दिया कि शिक्षित और शिक्षक मतदाताओं के बीच दोनों दलों के बीच मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। खास बात यह रही कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा का प्रदर्शन मजबूत रहा, वहीं स्नातक सीटों पर सपा ने तीन सीटें जीतकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई।
चुनाव परिणामों में बरेली-मुरादाबाद और मेरठ शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों पर भाजपा उम्मीदवारों की बड़ी जीत चर्चा में रही। दूसरी ओर, इलाहाबाद-झांसी और लखनऊ समेत स्नातक सीटों पर सपा की सफलता ने पार्टी को उत्साहित होने का मौका दिया। विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इन नतीजों को राजनीतिक दलों के लिए एक अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि विधान परिषद के चुनावों से विधानसभा चुनाव के परिणामों का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की छह सीटों पर किसने मारी बाजी?
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की छह सीटों में भाजपा ने चार और सपा ने दो सीटों पर जीत हासिल की। गोरखपुर-फैजाबाद सीट पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजीव यादव को 307 वोटों से हराया। वाराणसी में सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के प्रमोद मिश्रा को 4,898 वोटों से मात दी। लखनऊ सीट पर भाजपा के उमेश द्विवेदी ने सपा के सुशील कुमार को 4,808 वोटों से पराजित किया।
आगरा-अलीगढ़ शिक्षक सीट पर सपा के डॉ. आकाश अग्रवाल ने भाजपा के हरि किशोर तिवारी को 4,263 वोटों से हराकर जीत दर्ज की। बरेली-मुरादाबाद में भाजपा के डॉ. हरी सिंह ढिल्लों ने सपा के दानिश अख्तर को 17,676 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी। वहीं, मेरठ शिक्षक सीट पर भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने सपा के नितिन तोमर को 13,241 वोटों से हराया। इन नतीजों ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा की मजबूत स्थिति को रेखांकित किया।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सपा का पलड़ा भारी
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की पांच सीटों पर सपा ने तीन और भाजपा ने दो सीटों पर जीत हासिल की। इलाहाबाद-झांसी सीट पर सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने भाजपा के अशोक कुमार राठौड़ को 27,663 वोटों के बड़े अंतर से हराया। लखनऊ स्नातक सीट पर सपा की कांति सिंह ने भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को 17,225 वोटों से मात दी।
वाराणसी स्नातक सीट पर भी सपा ने जीत दर्ज की। पार्टी के आशुतोष सिन्हा ने भाजपा के केदार नाथ सिंह को हराया। उपलब्ध विवरण में इस जीत का अंतर 7,195 वोट बताया गया है। आगरा सीट पर भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने सपा के शशांक यादव को 8,856 वोटों से पराजित किया। मेरठ स्नातक सीट पर भाजपा के दिनेश कुमार गोयल ने सपा के परमेंद्र सिंह को करीब 13 हजार वोटों से हराकर पार्टी की प्रतिष्ठा बचाई।
बरेली-मुरादाबाद और मेरठ में भाजपा की बड़ी जीत
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में बरेली-मुरादाबाद और मेरठ के नतीजे भाजपा के लिए खास रहे। डॉ. हरी सिंह ढिल्लों और श्रीचंद शर्मा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इन परिणामों ने पार्टी को शिक्षक वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत होने का संदेश देने का अवसर दिया। हालांकि, वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों पर सपा की जीत ने मुकाबले को एकतरफा होने से रोक दिया।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले क्या हैं इन नतीजों के मायने?
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की इन 11 सीटों के परिणामों ने भाजपा और सपा, दोनों को राजनीतिक संदेश दिया है। भाजपा ने कुल छह सीटें जीतकर बढ़त बनाई, जबकि सपा पांच सीटों पर जीत के साथ उसके करीब रही। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा की चार सीटों की सफलता और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में सपा की तीन सीटों की जीत दोनों दलों के अलग-अलग मजबूत पक्षों को सामने लाती है।
राजनीतिक दृष्टि से इन नतीजों पर आगे भी चर्चा हो सकती है, लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सीमित और विशिष्ट होता है। इसलिए इन चुनावों के परिणामों को पूरे प्रदेश के मतदाताओं की राय या विधानसभा चुनाव का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता। फिर भी, 2027 की सियासी जंग से पहले भाजपा और सपा के लिए ये नतीजे अपनी रणनीति, संगठन और मतदाता संपर्क की समीक्षा करने का अवसर जरूर हैं।
