नागपुर में फडणवीस-गडकरी के गढ़ में कांग्रेस का बड़ा धमाका! अभिजीत वंजारी ने BJP को 3,271 वोटों से दी पटखनी


41 घंटे से ज्यादा चली मतगणना के बाद आया नतीजा, स्नातक सीट पर कांग्रेस ने फिर जमाया कब्जा


नागपुर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क विशेष राजनीतिक रिपोर्ट)। महाराष्ट्र की राजनीति में नागपुर से कांग्रेस ने ऐसा सियासी संदेश दिया है, जिसने भाजपा के मजबूत गढ़ में मुकाबले को चर्चा का विषय बना दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गृहक्षेत्र नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार अभिजीत वंजारी ने भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। इस जीत से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह है, वहीं भाजपा के लिए यह परिणाम राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि चुनाव का फैसला कुछ घंटों में नहीं, बल्कि 41 घंटे से अधिक समय तक चली मतगणना के बाद सामने आया। लंबी गिनती, वरीयता के मतों की गणना और कांटे की टक्कर ने इस मुकाबले को खास बना दिया।
नागपुर के मानकापुर स्थित डिविजनल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में 27 अक्टूबर की सुबह आठ बजे मतगणना शुरू हुई थी। इसके लिए 84 टेबल लगाई गई थीं। कई चरणों में चली मतगणना के बाद 29 अक्टूबर को अंतिम परिणाम घोषित किया गया।
अंतिम आंकड़ों के मुताबिक, कांग्रेस के अभिजीत वंजारी को कुल 67,231 वोट मिले, जबकि भाजपा के सुधाकर कोहले को 63,960 मत प्राप्त हुए। इस तरह वंजारी ने 3,271 मतों के अंतर से जीत दर्ज की। निर्वाचन अधिकारी एवं संभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने उन्हें जीत का प्रमाणपत्र सौंपा।
पहली पसंद के वोटों से नहीं निकला नतीजा, दूसरी वरीयता बनी निर्णायक
इस चुनाव में कुल 1,65,906 मतों की गणना की गई। इनमें 15,032 मत अवैध पाए गए, जबकि 1,50,874 मत वैध घोषित हुए। पहली पसंद के मतों की गणना के बाद भी कोई उम्मीदवार जीत के लिए निर्धारित 75,438 मतों का कोटा हासिल नहीं कर सका। इसके बाद वरीयता आधारित मतदान प्रणाली के तहत दूसरी पसंद के मतों की गणना की गई।
लंबी प्रक्रिया के बावजूद निर्धारित कोटा पूरा नहीं होने पर चुनाव नियमों के अनुसार आगे की गणना और उम्मीदवारों के निष्कासन की प्रक्रिया अपनाई गई। अंततः सर्वाधिक मत हासिल करने वाले अभिजीत वंजारी को विजेता घोषित किया गया। यही वजह रही कि इस चुनाव का परिणाम आने में असाधारण रूप से लंबा समय लगा।
वंजारी का दावा—भाजपा ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन मतदाताओं ने कांग्रेस पर जताया भरोसा
जीत के बाद अभिजीत वंजारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि नागपुर में भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी चुनाव प्रचार में सक्रिय रहे, लेकिन मतदाताओं ने कांग्रेस के पक्ष में अपना विश्वास कायम रखा।
वंजारी ने अपनी जीत का श्रेय कांग्रेस की एकजुटता और महाविकास अघाड़ी के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं के सामूहिक प्रयासों को दिया। उनके मुताबिक, चुनाव में संगठनात्मक तालमेल और जमीनी स्तर पर किए गए प्रचार ने अहम भूमिका निभाई।
48 संगठनों के समर्थन को बताया जीत की बड़ी ताकत
अभिजीत वंजारी ने अपनी जीत का श्रेय केवल कांग्रेस संगठन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें 48 सामाजिक और अन्य संगठनों का समर्थन मिला। उनके अनुसार, इन संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने मतदाताओं तक पहुंचने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वंजारी ने इस जीत को सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताते हुए समर्थक संगठनों की भूमिका को रेखांकित किया। उनके इस बयान से साफ है कि वह परिणाम को संगठनात्मक एकजुटता और विभिन्न समूहों के समर्थन से जोड़कर देख रहे हैं।
भाजपा के लिए क्यों अहम है नागपुर का नतीजा?
नागपुर महाराष्ट्र की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का इस क्षेत्र से गहरा राजनीतिक जुड़ाव है। ऐसे में यहां स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर कांग्रेस की जीत को भाजपा के लिए प्रतीकात्मक राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि, विधान परिषद की एक सीट का परिणाम पूरे प्रदेश के राजनीतिक रुझान का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन नागपुर जैसे प्रभावशाली क्षेत्र में मिली जीत कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली जरूर है। अभिजीत वंजारी ने अपनी सीट बचाकर यह भी दिखाया कि स्थानीय चुनावों में संगठन, उम्मीदवार की पकड़ और मतदाताओं से संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
23 अक्टूबर को हुआ था मतदान
निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। इसके बाद 29 सितंबर को अधिसूचना जारी की गई। नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 23 अक्टूबर को सुबह आठ बजे से शाम चार बजे तक मतदान कराया गया था। मतदान के बाद शुरू हुई मतगणना का अंतिम परिणाम 29 अक्टूबर को सामने आया।
नागपुर में कांग्रेस की इस जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि कांग्रेस इस परिणाम को संगठन मजबूत करने के अवसर में कैसे बदलती है और भाजपा अपने मजबूत क्षेत्र में मिली हार की समीक्षा किस तरह करती है।
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