
कसारा गांव में दोबारा मेडिकल कैंप लगाने, व्यापक सफाई और जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश
मऊ (राष्ट्र की परम्परा)। कोपागंज विकास खंड की ग्राम पंचायत कसारा में गंदगी, जलजमाव और खुले में शौच से उत्पन्न हो रही बीमारियों की समस्या को लेकर स्थायी लोक अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय के निर्देशों का प्रभावी अनुपालन नहीं होने पर अदालत ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) समेत संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। साथ ही गांव में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई कराने, मेडिकल कैंप आयोजित करने और सरकारी योजनाओं के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने का निर्देश दिया है।
कसारा गांव निवासी राधिका, सोनी, रविंद्र समेत आठ लोगों ने गांव में व्याप्त गंदगी, जलजमाव और खुले में शौच से होने वाली बीमारियों की समस्या को लेकर स्थायी लोक अदालत में वाद दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष हीरा लाल और न्यायपीठ के सदस्य विकास भाई निकुम्भ ने ग्राम पंचायत में साफ-सफाई कराने, मेडिकल कैंप आयोजित करने तथा ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश दिए थे।
न्यायालय के आदेशों का अपेक्षित अनुपालन नहीं होने पर पीठ ने नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान सामने आया कि कसारा गांव में आयोजित मेडिकल कैंप से केवल 24 लोगों को ही लाभ मिला, जबकि गांव की आबादी लगभग आठ हजार है। इस पर अदालत ने सीएमओ को नोटिस जारी करते हुए डिप्टी सीएमओ की मौजूदगी में दोबारा मेडिकल कैंप आयोजित कराने का निर्देश दिया।
अदालत ने निर्देश दिया कि मेडिकल कैंप के माध्यम से ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाए और उन्हें संक्रामक बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों को सफाईकर्मियों की टोली गठित कर गांव में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई कराने को कहा गया, ताकि गंदगी और जलजमाव से फैलने वाली बीमारियों की आशंका को कम किया जा सके।
खंड विकास अधिकारी को भी जागरूकता शिविर आयोजित कर विभिन्न सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य पात्र लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाना और गांव की मूलभूत समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष हीरा लाल और न्यायपीठ के सदस्य विकास भाई निकुम्भ ने संबंधित अधिकारियों को 21 अक्टूबर तक न्यायालय के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने की हिदायत दी। पीठ ने स्पष्ट किया कि आदेशों के अनुपालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। निर्धारित समयसीमा में निर्देशों का पालन नहीं होने पर न्यायालय की अवमानना के संबंध में कार्रवाई की जा सकती है।
