मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले गांवों में ग्राम प्रहरी की भूमिका सीसीटीवी कैमरे जैसी, सूचना तंत्र मजबूत करने पर जोर

गोरखपुर(राष्ट्र की परम्परा)
प्रदेश में ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और ग्राम प्रहरियों की भूमिका को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को पुलिस लाइन में ग्राम प्रहरियों का सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बरेली से ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने प्रदेश के ग्राम प्रहरियों का मानदेय 2500 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की। इसके साथ ही प्रदेश के 68 हजार ग्राम प्रहरियों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम प्रहरी गांव की सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनकी सजगता, सूचनाओं के आदान-प्रदान और पुलिस के साथ बेहतर तालमेल से अपराधों की रोकथाम तथा ग्रामीण क्षेत्रों में शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।
पुलिस लाइन में आयोजित सम्मेलन में ग्रामीण विधायक विपिन सिंह, खजनी विधायक श्रीराम चौहान, एडीजी जोन रामकुमार, डीआईजी रेंज एस. चनप्पा, मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी दीपक मीणा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ, सहायक पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक अपराध अयोध्या प्रसाद सिंह और क्षेत्राधिकारी कोतवाली ओंकार दत्त तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सम्मेलन में लगभग 500 ग्राम प्रहरियों ने भाग लिया। इस दौरान ग्राम प्रहरियों की जिम्मेदारियों, ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना तंत्र मजबूत करने, अपराध नियंत्रण और पुलिस के साथ समन्वय बनाकर काम करने के महत्व पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि प्रदेश में सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया जा रहा है। टीम वर्क के माध्यम से बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। ग्राम प्रहरी गांव के स्तर पर पुलिस और आम लोगों के बीच संपर्क की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। गांव में होने वाली गतिविधियों, संदिग्ध व्यक्तियों की आवाजाही और संभावित विवादों की जानकारी समय रहते पुलिस तक पहुंचाना उनकी अहम जिम्मेदारी है। यदि ग्राम प्रहरी अपने क्षेत्र की सही सूचना संबंधित हलके के दरोगा और थाने तक पहुंचा दें, तो किसी भी असामाजिक तत्व के लिए कानून-व्यवस्था को चुनौती देना आसान नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 57,000 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं और ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने में ग्राम प्रहरियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। गांव के अंतिम पायदान तक सुरक्षा व्यवस्था की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत सूचना तंत्र आवश्यक है। ग्राम प्रहरी अपने क्षेत्र की परिस्थितियों से परिचित होते हैं। उन्हें पता होता है कि गांव में कौन-सी गतिविधियां चल रही हैं, कहां विवाद की आशंका है और किन परिस्थितियों में पुलिस को तत्काल सूचना देने की आवश्यकता है। उनकी सतर्कता से समय रहते कार्रवाई संभव हो सकती है और छोटी घटनाओं को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों की भूमिका को सीसीटीवी कैमरे से जोड़कर समझाया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शहरों में सीसीटीवी कैमरों की मदद से घटनाओं की जानकारी मिलती है और अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई करने में सहायता मिलती है, उसी प्रकार गांवों में ग्राम प्रहरी सुरक्षा व्यवस्था की आंख और कान के रूप में काम करते हैं। यदि किसी की बेटी या महिला के साथ कोई गलत हरकत करने का प्रयास करता है, तो ग्राम प्रहरी की ओर से समय पर दी गई सूचना के आधार पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरियों को अपने क्षेत्र में सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी बिना देरी किए पुलिस को उपलब्ध करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरी का काम केवल सूचना देना नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। गांव में लोगों के बीच संवाद स्थापित कर समस्याओं की जानकारी जुटाना, विवाद की स्थिति में पुलिस तक सूचना पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को उचित सहयोग के लिए प्रेरित करना उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा है। वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आने वाली विभिन्न परिस्थितियों की जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाने में भी ग्राम प्रहरी उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने टीम भावना पर विशेष जोर देते हुए कहा कि ग्राम प्रहरी, थाना पुलिस और ग्रामीण समुदाय के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। गांव में किसी समस्या की जानकारी मिलने पर उसे दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय उचित माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाना चाहिए। पुलिस और ग्राम प्रहरी एक-दूसरे के सहयोग से काम करेंगे, तभी ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए। जब गांव सुरक्षित होगा, तभी वहां विकास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सौहार्द का वातावरण मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के उन गांवों में भी ग्राम प्रहरियों की नियुक्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया, जहां अभी यह व्यवस्था प्रभावी रूप से उपलब्ध नहीं है या गांव खाली पड़े हैं। उनका कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था को किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। प्रत्येक गांव तक सूचना तंत्र की पहुंच होनी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में पुलिस को समय रहते जानकारी मिल सके। ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ग्राम प्रहरियों की उपलब्धता और उनकी सक्रियता महत्वपूर्ण है।
मानदेय बढ़ाने की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 में ग्राम प्रहरियों का मानदेय बढ़ाकर 2500 रुपये प्रतिमाह किया गया था। अब इसे बढ़ाकर 3500 रुपये प्रतिमाह किया जा रहा है। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 68 हजार ग्राम प्रहरियों को लाभ मिलेगा। मानदेय में वृद्धि का उद्देश्य उनकी सेवाओं को सम्मान देना और ग्रामीण सुरक्षा में उनकी भूमिका को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रहरी कठिन परिस्थितियों में अपने क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को सहयोग देते हैं। उनके योगदान को पहचानना और उनकी सुविधाओं में सुधार करना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रहरियों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा भी की। इससे उन्हें और उनके परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के समय आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में योगदान देने वाले कर्मियों के सम्मान, सुविधा और स्वावलंबन का ध्यान रखना सरकार की प्राथमिकता है। ग्राम प्रहरियों को बेहतर सुविधाएं मिलने से वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन और अधिक उत्साह के साथ कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास के लिए शांतिपूर्ण वातावरण आवश्यक है। जब दंगा और अराजकता जैसी स्थितियों पर प्रभावी नियंत्रण रहता है, तब निवेश, रोजगार और विकास की गतिविधियों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और प्रदेश की प्रगति में कानून-व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। गांवों से लेकर शहरों तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहेगी, तभी विकास की गति को बनाए रखा जा सकेगा।
सम्मेलन में ग्रामीण विधायक विपिन सिंह और खजनी विधायक श्रीराम चौहान ने भी ग्राम प्रहरियों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने में ग्राम प्रहरियों का योगदान महत्वपूर्ण है। गांव के स्तर पर उनकी सक्रियता से पुलिस को स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी मिलती है और अपराध नियंत्रण में सहायता मिलती है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि ग्राम प्रहरी ग्रामीण समाज और पुलिस के बीच भरोसे का माध्यम हैं। उनकी सतर्कता से गांवों में शांति व्यवस्था बनाए रखने और लोगों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत करने में मदद मिलती है।
सम्मेलन में अधिकारियों ने भी ग्राम प्रहरियों के साथ समन्वय मजबूत करने और सूचनाओं का समयबद्ध आदान-प्रदान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा कि ग्रामीण सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस और ग्राम प्रहरियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। मानदेय में वृद्धि और कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा से ग्राम प्रहरियों को आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अब गांवों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्राम प्रहरियों की सक्रियता, जिम्मेदारी और पुलिस के साथ समन्वय पर विशेष ध्यान रहेगा।