यूपी में चाइनीज मांझे का खूनी खेल! वाराणसी में साड़ी कारोबारी की मौत, आखिर प्रतिबंध के बाद भी कौन बेच रहा जानलेवा धागा?

वाराणसी (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का खूनी खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पतंग उड़ाने के शौक में इस्तेमाल होने वाला यही जानलेवा धागा अब राह चलते लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। वाराणसी में नवरात्रि के पहले दिन मंदिर में दर्शन कर बाइक से घर लौट रहे 55 वर्षीय साड़ी कारोबारी सुनील कुमार गुजराती की गर्दन चाइनीज मांझे की चपेट में आ गई। धारदार मांझे से गर्दन बुरी तरह कटने के कारण उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर प्रतिबंध के बावजूद बाजार में बिक रहे जानलेवा मांझे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि करीब 20 घंटे के भीतर प्रदेश में चाइनीज मांझे से मौत की यह दूसरी घटना है। कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर अचानक टूटी जिंदगी की डोर हादसा रविवार सुबह करीब नौ बजे वाराणसी के कज्जाकपुरा फ्लाईओवर पर हुआ। आशापुर निवासी सुनील कुमार गुजराती सुबह करीब सात बजे घर से चौखंभा स्थित गोपाल मंदिर में दर्शन करने निकले थे। दर्शन के बाद वह बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान अचानक पतंग का मांझा उनके गले में उलझ गया। इससे पहले कि वह संभल पाते, धारदार धागे ने उनकी गर्दन को गंभीर रूप से काट दिया। वह बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े और खून बहने लगा। राहगीरों ने बचाने की कोशिश की, अस्पताल में तोड़ा दम घटना के समय फ्लाईओवर पर मौजूद अमन जायसवाल और विकास कुमार सोनकर ने बताया कि वे वहां टहल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने एक बाइक सवार को सड़क पर गिरा देखा। उसकी गर्दन से खून बह रहा था और वह तड़प रहा था। दोनों ने तत्काल मदद की पहल की और दूसरे बाइक सवारों को रोककर घायल कारोबारी को कबीरचौरा अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बेटे की तबीयत खराब थी, मंदिर में दर्शन करने निकले थे कारोबारी सुनील कुमार गुजराती के छोटे भाई सुशील कुमार के मुताबिक, उनके बड़े भाई साड़ी का कारोबार करते थे और परिवार आशापुर में रहता है। सुनील के बेटे यश गुजराती की पिछले दो दिनों से तबीयत खराब थी। इसी वजह से वह सुबह मंदिर में दर्शन करने गए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर लौटते समय एक पतंग का मांझा उनकी जिंदगी छीन लेगा। परिवार को घटना की जानकारी तब मिली, जब दो युवक उन्हें तलाशते हुए चौखंभा पहुंचे। गोरखपुर में भी गई थी युवक की जान, 20 घंटे में दूसरी मौत वाराणसी की इस घटना से पहले शनिवार दोपहर गोरखपुर में भी चाइनीज मांझे की चपेट में आने से 35 वर्षीय एक युवक की मौत होने की खबर सामने आई थी। उसकी गर्दन कटने से जान चली गई थी। लगातार दो घटनाओं ने प्रदेश में सड़क पर चलने वाले बाइक सवारों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। सवाल यह है कि जब एक जानलेवा धागा लोगों की जान ले रहा है, तो इसकी बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है? 2016 से प्रतिबंधित, फिर भी जानलेवा मांझा बाजार तक कैसे पहुंच रहा है? उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे पर वर्ष 2016 से प्रतिबंध है। इसके बावजूद इसकी बिक्री और इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं। फरवरी 2026 में योगी सरकार ने भी स्पष्ट किया था कि चाइनीज मांझे से मौत के मामलों में हत्या के तहत एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद वाराणसी और गोरखपुर में लगातार हुई मौतों ने प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पतंग का शौक किसी की मौत की वजह न बने चाइनीज मांझा सामान्य धागा नहीं, बल्कि लोगों की जान के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। बाइक सवारों की गर्दन, राहगीरों और पक्षियों के लिए यह बेहद घातक साबित होता है। ऐसे में केवल प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं है। इसकी बिक्री करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई, दुकानों की नियमित जांच और आम लोगों में जागरूकता भी जरूरी है। नागरिकों को भी प्रतिबंधित मांझे की खरीद-बिक्री से दूर रहना चाहिए और इसकी बिक्री की जानकारी संबंधित प्रशासन या पुलिस को देनी चाहिए। पतंग उड़ाने का आनंद किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का मातम न बन जाए, इसके लिए प्रशासन और समाज दोनों को जिम्मेदारी निभानी होगी।

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