फोटो goo


बाराबंकी में चलती CNG कार बनी आग का गोला, चालक की जिंदा जलकर मौत; छह महीने पहले खरीदी थी गाड़ी


बाराबंकी (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में शुक्रवार की आधी रात एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। सफदरगंज थाना क्षेत्र में सैदनपुर नहर के पास हमीनपुर गांव के निकट चलती टाटा टियागो सीएनजी कार अचानक आग की लपटों से घिर गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कार चला रहे 42 वर्षीय प्रदीप कुमार को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला। इस भयावह हादसे में उनकी जिंदा जलकर मौत हो गई। शनिवार सुबह जली हुई कार देखकर राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद घटना का खुलासा हुआ। पुलिस के अनुसार, मृतक प्रदीप कुमार सफदरगंज थाना क्षेत्र के प्यारेपुर गांव के निवासी थे। वह लखनऊ एयरपोर्ट से सवारियों को बाराबंकी छोड़कर अपने घर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात करीब 1:30 बजे उनकी कार हमीनपुर गांव के पास पहुंची, तभी उसमें अचानक आग लग गई। रात का समय और सुनसान इलाका होने के कारण हादसे की जानकारी तत्काल किसी को नहीं हो सकी। शनिवार सुबह करीब छह बजे राहगीरों की नजर पूरी तरह जली कार पर पड़ी, जिसके बाद पुलिस को खबर दी गई। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार पूरी तरह जलकर राख हो चुकी थी। मौके पर पहुंचे लोगों को ड्राइविंग सीट पर चालक के जले हुए अवशेष मिले। सूचना मिलते ही सफदरगंज थाना पुलिस और दमकल कर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। कार के नंबर के आधार पर मृतक की पहचान की गई और परिजनों को सूचना दी गई। परिवार को हादसे की जानकारी मिलते ही घर में कोहराम मच गया। परिजनों के मुताबिक, प्रदीप ने महज छह महीने पहले ही नई सीएनजी कार खरीदी थी। इतनी कम अवधि में नई गाड़ी का इस तरह आग की चपेट में आना कई सवाल खड़े कर रहा है। शुरुआती आशंकाओं में सीएनजी रिसाव या शॉर्ट सर्किट जैसी वजहों की चर्चा है, हालांकि आग लगने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तकनीकी जांच जरूरी है। पुलिस ने आग बुझाए जाने के बाद फॉरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया। टीम ने घटनास्थल से जले हुए अवशेष, हड्डियों और राख के नमूने एकत्र कर जांच के लिए सुरक्षित किए हैं। पुलिस हादसे के सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही है। जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि आग तकनीकी खराबी, ईंधन रिसाव या किसी अन्य कारण से लगी थी। बाराबंकी की यह घटना अकेली नहीं है। इससे पहले झांसी के चिरगांव थाना क्षेत्र में निवी बॉर्डर के पास परिवार के साथ मंदिर दर्शन के लिए जा रही एक थार गाड़ी में भी अचानक आग लग गई थी। बताया गया कि वाहन से धुआं उठते ही उसमें सवार लोगों ने बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। देखते ही देखते गाड़ी आग की लपटों में घिर गई और दमकल कर्मियों को काफी मशक्कत के बाद आग बुझानी पड़ी। उस घटना में सभी लोगों के समय रहते बाहर निकल आने से बड़ा हादसा टल गया था। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं वाहन सुरक्षा और समय पर तकनीकी जांच की अहमियत को रेखांकित करती हैं। सीएनजी वाहन चलाने वालों को गैस की गंध, ईंधन प्रणाली में खराबी, वायरिंग से धुआं निकलने या जलने की गंध जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में वाहन को सुरक्षित स्थान पर रोककर इंजन बंद करें, सभी यात्रियों को दूर ले जाएं और आग या गैस रिसाव का संदेह होने पर खुद मरम्मत करने की कोशिश न करें। आपात स्थिति में दमकल सेवा 101 या एकीकृत आपातकालीन नंबर 112 पर संपर्क करें। सीएनजी सिस्टम और इलेक्ट्रिकल वायरिंग की जांच अधिकृत तकनीशियन से कराना भी जरूरी है। बाराबंकी में प्रदीप कुमार की दर्दनाक मौत ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। अब पुलिस जांच से ही हादसे की असली वजह सामने आएगी। यह घटना याद दिलाती है कि वाहन में आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ पल बेहद अहम होते हैं और सुरक्षा संबंधी छोटी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।