यूपी MLC चुनाव: 11 सीटों पर 152 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला, 14.81 लाख मतदाता करेंगे मतदान

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अभिषेक कुमार यादव की रिपोर्ट

लखनऊ (राष्ट्र की परम्परा)। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 खंड स्नातक और खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर होने वाले चुनाव में नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सियासी मुकाबले की तस्वीर साफ हो गई है। अब कुल 152 प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। शुक्रवार को सात उम्मीदवारों ने अपने नामांकन वापस ले लिए। इनमें खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के तीन और खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के चार प्रत्याशी शामिल हैं। सभी 11 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और प्रत्याशियों की नजर अब मतदाताओं को अपने पक्ष में करने पर टिकी है।
इन चुनावों में प्रदेश के करीब 14.81 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान के लिए कुल 2,697 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। मतदान सुबह आठ बजे से शुरू होकर शाम चार बजे तक चलेगा। निर्धारित समय में मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे। मतदान संपन्न होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया के जरिए प्रत्याशियों की चुनावी किस्मत का फैसला होगा।
प्रत्याशियों की संख्या के लिहाज से वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सबसे आगे है। यहां कुल 24 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 17 प्रत्याशी आमने-सामने हैं। लखनऊ खंड स्नातक और गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 16-16 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, आगरा खंड स्नातक, इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक और लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 13-13 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 12 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि वाराणसी खंड शिक्षक और मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 10-10 प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं। मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे कम आठ उम्मीदवार मैदान में हैं। अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में प्रत्याशियों की संख्या को देखते हुए कई सीटों पर मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना है।
मतदान के लिए पहचान पत्र रखना जरूरी
विधान परिषद चुनाव में मतदान करने वाले मतदाताओं को अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए निर्धारित पहचान पत्र प्रस्तुत करना होगा। जिन मतदाताओं के पास मतदाता पहचान पत्र यानी वोटर आईडी कार्ड उपलब्ध नहीं है, वे निर्वाचन संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत मान्य वैकल्पिक पहचान पत्रों में से किसी एक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
मान्य वैकल्पिक पहचान पत्रों में आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और भारतीय पासपोर्ट शामिल हैं। इसके अलावा केंद्र या राज्य सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्थानीय निकायों अथवा अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों की ओर से कर्मचारियों को जारी पहचान पत्र भी निर्धारित शर्तों के अधीन स्वीकार किए जा सकते हैं।
सांसदों, विधायकों और पार्षदों को जारी सरकारी पहचान पत्र, विश्वविद्यालय की ओर से जारी डिग्री या डिप्लोमा का मूल प्रमाण पत्र, सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से जारी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी कार्ड भी वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों में शामिल हैं। हालांकि, मतदान केंद्र पर जाने से पहले मतदाताओं को निर्वाचन आयोग के लागू निर्देशों के अनुसार पहचान पत्र की स्वीकार्यता सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन 11 सीटों पर होने वाला चुनाव राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। अब नाम वापसी के बाद प्रत्याशियों के सामने मतदाताओं तक पहुंचने, समर्थन जुटाने और मतदान के दिन अधिक से अधिक वोट हासिल करने की चुनौती होगी। 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान में मतदाताओं का रुख किसके पक्ष में जाता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।