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यूपी पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट सख्त! ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर उठाए सवाल, 12 अक्टूबर को फिर सुनवाई

प्रयागराज (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर कराने की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठे हैं। शुक्रवार को 11 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर असंतोष जताया। कोर्ट की टिप्पणी से संकेत मिला कि पिछड़ेपन के आकलन के लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त पड़ताल करने के बजाय कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट तैयार किए जाने की आशंका है। करीब सवा घंटे चली सुनवाई में अदालत ने रिपोर्ट से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा। अब इस मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर, सोमवार को होगी। पंचायत चुनाव को समय पर संपन्न कराने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं में चुनाव कार्यक्रम जारी करने और चुनावी तैयारियों से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। इन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हो रही है। मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि चुनाव की समयसीमा और निर्धारित प्रक्रिया को लेकर अदालत में स्थिति स्पष्ट की जानी है। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को लेकर अदालत की नाराजगी अब इस मामले का अहम पहलू बन गई है। पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण से संबंधित प्रक्रिया के लिए पिछड़ेपन का आकलन और रिपोर्ट की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में रिपोर्ट तैयार करने के तरीके पर उठे सवालों के बाद संबंधित पक्षों के जवाब पर सबकी निगाहें टिकी हैं। हालांकि, अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि अदालत ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। फिलहाल न्यायालय ने रिपोर्ट की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जवाब मांगा है। इस मामले में गुरुवार को भी करीब दो घंटे तक सुनवाई हुई थी। उस दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें रखीं। इसके बाद शुक्रवार को हुई सुनवाई में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा हुई। मामले में पहले भी कई बार सुनवाई टल चुकी है और अब अगली तारीख 12 अक्टूबर तय होने के बाद पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पंचायत चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी कराने की मांग से जुड़ी याचिकाओं में इम्तियाज हुसैन की याचिका भी शामिल है। इससे पहले 28 अप्रैल को पंचायत चुनाव कार्यक्रम जारी करने की मांग वाली एक अन्य याचिका को इम्तियाज हुसैन की पहले से लंबित याचिका के साथ संबद्ध करने का आदेश दिया गया था। उस समय न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इसी विषय से संबंधित दूसरी याचिका लंबित होने की जानकारी दी थी। इसके बाद अदालत ने दोनों याचिकाओं को साथ सुनने का निर्देश दिया। अब 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में सरकार, राज्य निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों की दलीलों के साथ ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर उठे सवाल अहम रहेंगे। प्रदेश में पंचायत चुनाव कब होंगे और चुनावी कार्यक्रम को लेकर अदालत में क्या स्थिति स्पष्ट होती है, इस पर राजनीतिक दलों, संभावित उम्मीदवारों और ग्रामीण मतदाताओं की नजरें लगी हैं। हालांकि, फिलहाल पंचायत चुनाव की अंतिम तारीख या देरी को लेकर अदालत के किसी अंतिम फैसले की पुष्टि नहीं हुई है। मामला अभी विचाराधीन है।