
आगरा (राष्ट्र की परम्परा)। जिलाधिकारी मनीष बंसल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला तकनीकी समन्वय समिति की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में वर्षा जल संचयन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, भूजल रिचार्ज, तालाबों के पुनर्जीवन और जल दोहन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें धरातल पर प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि बारिश की एक-एक बूंद को सहेजकर भूजल स्तर सुधारने की दिशा में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने अति-दोहित, क्रिटिकल और सेमी-क्रिटिकल क्षेत्रों में स्थित सरकारी तथा अर्द्धसरकारी भवनों को चिन्हित कर वहां प्राथमिकता के आधार पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित कराने के निर्देश दिए। छतों से बहने वाले वर्षा जल को संग्रहित कर भूजल रिचार्ज में उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में तालाबों की खुदाई, गहरीकरण और जीर्णोद्धार को भी प्राथमिकता देने का फैसला लिया गया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को अगले दो-तीन दिनों में कम से कम 10 ऐसे उपयुक्त तालाब चिन्हित करने के निर्देश दिए, जहां जल संचयन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रभावी कार्य कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि केवल कागजों पर तालाबों की सूची तैयार करने के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए। सूखे या कम पानी वाले तालाबों में खुदाई अथवा पुनर्जीवन से जलधारण क्षमता में कितनी वृद्धि हो सकती है, इसका तकनीकी मूल्यांकन संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ स्थलीय निरीक्षण कर किया जाए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि तालाबों का पुनर्जीवन महज मिट्टी हटाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को अधिक समय तक रोकना, भूजल रिचार्ज बढ़ाना और भविष्य में जल उपलब्धता को मजबूत करना होना चाहिए। कार्य पूरा होने के बाद तालाब की जलधारण क्षमता में हुए सुधार का भी आकलन करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में चेकडैम और अन्य जल संरक्षण संरचनाओं की भी समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने भौगोलिक एवं तकनीकी रूप से अनुकूल स्थानों पर इन संरचनाओं का उपयोग बढ़ाने तथा बारिश के पानी को अधिक समय तक संरक्षित रखने के निर्देश दिए।
उन्होंने भूजल स्तर में सुधार को मापने के लिए प्री-मानसून और पोस्ट-मानसून जलस्तर का तुलनात्मक वैज्ञानिक अध्ययन कराने को कहा। साथ ही अति-दोहित, क्रिटिकल, सेमी-क्रिटिकल और सुरक्षित क्षेत्रों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग कार्ययोजना तैयार कर उसकी नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी मनीष बंसल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल संरक्षण योजनाओं का असर सिर्फ रिपोर्टों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए। बढ़ी हुई जल संचयन क्षमता, बेहतर भूजल रिचार्ज और जल उपलब्धता में सुधार को कार्यों की सफलता का आधार बनाया जाए। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध और परिणामपरक तरीके से कार्य पूरा करने के निर्देश दिए।
बैठक में सीडीओ प्रतिभा सिंह, डीडीओ भावना यादव, डीडी पीडीआरडीए रेणु कुमारी, सीनियर जियोफिजिसिस्ट शंशाक शेखर सिंह, जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार, उपनिदेशक कृषि मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, डीसी एनआरएलएम रामायण सिंह यादव, आरएफओ कृपाशंकर समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
