बिहार में सितंबर में EOU-Vigilance का बड़ा एक्शन, 6 अफसरों के ठिकानों पर छापे; करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज और लाखों की नकदी सामने

पटना (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)। बिहार में सितंबर 2026 के दौरान आर्थिक अपराध इकाई (EOU) और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों में कई बड़ी कार्रवाई की। एक महीने के भीतर पांच अलग-अलग मामलों में छह अधिकारियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की गई। तलाशी के दौरान जमीन, मकान, फ्लैट, बैंक खाते, निवेश, आभूषण, वाहन और नकदी से संबंधित दस्तावेज तथा संपत्ति का ब्योरा जांच एजेंसियों के सामने आया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन पांच मामलों में कथित तौर पर आय से अधिक संपत्ति का कुल आंकड़ा करीब 9.38 करोड़ रुपये है। हालांकि, यह रकम एजेंसियों की प्रारंभिक जांच में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इसे अदालत द्वारा अंतिम रूप से साबित अपराध या संपत्ति की अंतिम जब्ती नहीं माना जा सकता।
8 सितंबर को EOU ने दरभंगा के बहादुरपुर प्रखंड में तैनात BDO आनंद कुमार विभूति से जुड़े पांच ठिकानों पर तलाशी ली। EOU की प्रारंभिक जांच में उन पर ज्ञात और वैध आय से करीब 1 करोड़ 71 लाख रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया गया। यह राशि उनकी ज्ञात आय से करीब 121 प्रतिशत अधिक बताई गई।
तलाशी के दौरान परिवार से जुड़े 16 भूखंडों के दस्तावेज मिले। करीब 70 लाख रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश की जानकारी भी जांच में सामने आई। इसके अलावा बैंक खातों, वाहनों, आभूषणों और मकान से संबंधित कागजात की भी जांच की गई। पूर्वी चंपारण में करीब 70 लाख रुपये की लागत से बने मकान का उल्लेख भी रिपोर्टों में है। इस मामले में नकदी की कोई निश्चित जब्ती राशि सार्वजनिक नहीं की गई।
16 सितंबर को Vigilance Investigation Bureau ने भवन निर्माण विभाग के पूर्णिया डिवीजन में तैनात अधीक्षण अभियंता सत्येंद्र कुमार चौधरी से जुड़े पटना और पूर्णिया के तीन ठिकानों पर छापेमारी की। प्रारंभिक जांच के मुताबिक करीब 1 करोड़ 97 लाख 58 हजार रुपये की ऐसी संपत्ति का आरोप है, जिसका उनकी ज्ञात आय से पूरा मिलान नहीं होता।
तलाशी के दौरान पटना स्थित बहुमंजिला मकान, पूर्णिया समेत अन्य स्थानों की जमीन, बैंक खाते, निवेश और दूसरी अचल संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज खंगाले गए। रिपोर्टों के मुताबिक पटना स्थित मकान में लिफ्ट और सोलर पैनल जैसी सुविधाएं भी हैं। इस कार्रवाई में नकदी या आभूषण की कोई निश्चित जब्ती राशि सार्वजनिक रिपोर्टों में सामने नहीं आई।
22 सितंबर को EOU ने बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक, तकनीकी कमलेश कुमार से जुड़े पटना और वैशाली के चार ठिकानों पर तलाशी ली। EOU के अनुसार, कमलेश कुमार पर ज्ञात आय से करीब 3 करोड़ 12 लाख 51 हजार रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह राशि उनकी ज्ञात आय से करीब 103.30 प्रतिशत अधिक बताई गई।
तलाशी में करीब 4 करोड़ 70 लाख रुपये मूल्य की 12 अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले। इनमें जमीन, मकान और फ्लैट शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा कमलेश कुमार और उनके करीबी परिजनों से जुड़े 16 बैंक खातों में जमा करीब 25 लाख 86 हजार रुपये फ्रीज किए गए। आभूषण, लग्जरी वाहन, निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में आए।
28 सितंबर को Vigilance ने पटना के ADM (सप्लाई) रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी से जुड़े ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कुमारी स्वीटी दानापुर की जिला अवर निबंधक हैं। पटना और बेगूसराय में दोनों से जुड़े चार ठिकानों की तलाशी ली गई।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, पति-पत्नी की ज्ञात आय और संपत्ति के बीच करीब 1 करोड़ 6 लाख 85 हजार 900 रुपये का अंतर पाया गया। तलाशी के दौरान करीब 79 से 80 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग रिपोर्टों में नकदी का आंकड़ा कुछ अंतर के साथ 70 से 80 लाख रुपये के बीच बताया गया है। इसके अलावा करीब 52.60 लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण और 48 महंगी घड़ियां भी मिलने की जानकारी है। घड़ियों की अनुमानित कीमत करीब 6 लाख रुपये बताई गई।
तलाशी के दौरान सात अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी मिले, जिनका दस्तावेजी मूल्य करीब 2.92 करोड़ रुपये बताया गया है। इस मामले में संपत्ति और नकदी के आंकड़े पति-पत्नी के संयुक्त मामले से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें दोनों के नाम पर अलग-अलग जोड़ना उचित नहीं होगा।
30 सितंबर को EOU ने परिवहन विभाग के प्रवर्तन अवर निरीक्षक अमित कुमार गुप्ता से जुड़े आरा और दानापुर के ठिकानों पर छापेमारी की। अमित कुमार गुप्ता के कैमूर के मोहनियां चेकपोस्ट से जुड़े होने की जानकारी दी गई है। EOU के मुताबिक, उन पर ज्ञात आय से करीब 1 करोड़ 49 लाख 58 हजार 500 रुपये अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। यह राशि ज्ञात आय से करीब 148 प्रतिशत अधिक बताई गई।
भोजपुर जिले के अवधपुरी स्थित निजी आवास की तलाशी के दौरान 3 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी है। इसी दौरान एक इलेक्ट्रिक कार टाटा टियागो और जमीन की खरीद से संबंधित दस्तावेज भी मिले। EOU के अनुसार, अमित कुमार गुप्ता और उनके परिजनों के नाम पर अलग-अलग जिलों में जमीन खरीदने की जानकारी सामने आई है।
तलाशी में आरा, पटना और छपरा में 11 भूखंडों की खरीद से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इन संपत्तियों की खरीद और आय के स्रोत का मिलान किया जा रहा है। अवधपुरी में G+3 मकान तथा आरा में करीब 5.1 डिसमिल जमीन पर निर्माणाधीन मकान की जानकारी भी सामने आई। इसके अलावा पटना के साई वरदान सिटी में एक फ्लैट से जुड़े दस्तावेज भी जांच टीम को मिले।
सितंबर में हुई इन पांच कार्रवाइयों में कुल छह अधिकारी जांच के दायरे में आए। इनमें आनंद कुमार विभूति, सत्येंद्र कुमार चौधरी, कमलेश कुमार, रविंद्र कुमार दिवाकर, कुमारी स्वीटी और अमित कुमार गुप्ता शामिल हैं। EOU ने आनंद कुमार विभूति, कमलेश कुमार और अमित कुमार गुप्ता से जुड़े मामलों में कार्रवाई की, जबकि Vigilance ने सत्येंद्र कुमार चौधरी तथा रविंद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी से जुड़े मामले में तलाशी अभियान चलाया।
एजेंसियों की ओर से बताए गए पांच मामलों के कथित आय से अधिक संपत्ति के आंकड़ों को जोड़ने पर कुल रकम करीब 9.38 करोड़ रुपये बैठती है। इसमें सबसे बड़ा आंकड़ा कमलेश कुमार के मामले का है। इसके बाद सत्येंद्र कुमार चौधरी और आनंद कुमार विभूति के मामले आते हैं। वहीं रविंद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी के मामले में करीब 1.06 करोड़ रुपये की संयुक्त अनुपातहीन संपत्ति का आरोप है।
नकदी की बात करें तो सितंबर की इन कार्रवाइयों में सबसे बड़ी स्पष्ट नकद बरामदगी रविंद्र कुमार दिवाकर और कुमारी स्वीटी से जुड़े मामले में सामने आई। यहां करीब 79 से 80 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी है। इसी कार्रवाई में आभूषण और महंगी घड़ियां भी मिलने की बात सामने आई है।
कमलेश कुमार के मामले में करीब 25.86 लाख रुपये 16 बैंक खातों में फ्रीज किए गए। वहीं करीब 4.70 करोड़ रुपये मूल्य की 12 अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज सामने आने की बात कही गई है। बाकी मामलों में भी जमीन, मकान, बैंक खाते, निवेश, वाहन और अन्य संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं।
हालांकि, इन सभी मामलों में जांच अभी प्रक्रिया में है। छापेमारी के दौरान सामने आए दस्तावेज, नकदी, निवेश और संपत्तियों के आंकड़े प्रारंभिक जांच का हिस्सा हैं। अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।