
पूर्व IAS दिव्या मित्तल का सियासी ऐलान, बोलीं- किसी दल में नहीं जाऊंगी
लखनऊ/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा) पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मंगलवार को सक्रिय राजनीति में उतरने का ऐलान कर उत्तर प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद उनके अगले कदम को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए मित्तल ने वीडियो संदेश के जरिए कहा कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी। उनकी राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू होगी और वह जनता के साथ मिलकर स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।
दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि प्रशासनिक सेवा के दौरान जनता के बीच काम करते हुए उन्होंने ऐसी कई परिस्थितियां देखीं, जहां नियम, सरकारी मंजूरी और बजट उपलब्ध होने के बावजूद लोगों की समस्याओं का समाधान जमीन पर नहीं हो सका। उनके अनुसार, कई बार समस्या संसाधनों की कमी से ज्यादा व्यवस्था की कार्यशैली और इच्छाशक्ति से जुड़ी दिखाई दी।
उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभव का उदाहरण देते हुए एक दूरदराज गांव का जिक्र किया, जहां ग्रामीण पांचवीं कक्षा के बाद की पढ़ाई के लिए विद्यालय की मांग कर रहे थे। मित्तल के मुताबिक, उनके कार्यकाल में स्कूल के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं हो पाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नियम और धन की व्यवस्था मौजूद हो तो फिर आम लोगों की जरूरतें जमीन पर क्यों नहीं उतर पातीं।
पूर्व आईएएस अधिकारी ने एक भूमिहीन लाभार्थी से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन आवंटित होने के बावजूद संबंधित व्यक्ति को वास्तविक कब्जा नहीं मिल सका। मित्तल के अनुसार, जांच के दौरान रिपोर्टों में अनियमितताएं सामने आईं और सुधारात्मक कार्रवाई की गई, लेकिन इसके बावजूद मामला अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका। उन्होंने ऐसे मामलों में कथित ऊपरी हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठाए।
दिव्या मित्तल ने कहा कि यदि किसी नागरिक को कानून और सरकारी व्यवस्था के तहत उसका अधिकार मिलना तय है, फिर भी उसे अपने हक के लिए वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उनके राजनीतिक एजेंडे में ग्रामीण क्षेत्रों की आधारभूत सुविधाएं, खराब और असुरक्षित सड़कें, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं, युवाओं के रोजगार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के बढ़ते प्रभाव के बीच रोजगार के बदलते स्वरूप जैसे मुद्दे प्रमुख बताए गए हैं।
मित्तल ने कहा कि इन विषयों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय गंभीर सार्वजनिक चर्चा और दूरगामी नीतियों की जरूरत है। उन्होंने ऐसी राजनीति की बात कही, जिसमें इरादा, न्याय, संवेदनशीलता और भविष्य की सोच को महत्व दिया जाए। उनका कहना है कि लक्ष्य केवल मौजूदा नेताओं की जगह नए चेहरों को लाना नहीं, बल्कि राजनीति के काम करने के तरीके में बदलाव की कोशिश करना है।
किसी पार्टी में शामिल होने से इनकार
दिव्या मित्तल ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनका किसी राजनीतिक दल में शामिल होने का इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वह सीधे जनता के बीच जाकर काम करेंगी और लोगों की भागीदारी से अपना स्वतंत्र राजनीतिक मंच तैयार करेंगी। उन्होंने शिक्षकों, किसानों, विद्यार्थियों, चिकित्सकों, मजदूरों और अधिवक्ताओं समेत समाज के विभिन्न वर्गों से अपने अभियान से जुड़ने की अपील की।
मित्तल ने अपने इस्तीफे के बाद राजनीतिक भविष्य को लेकर सामने आई चर्चाओं और अटकलों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि सार्वजनिक जीवन में नए लोगों के प्रवेश को लेकर अफवाहें या दबाव उन्हें पीछे हटाने का कारण नहीं बनना चाहिए।
2013 बैच की उत्तर प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी रहीं दिव्या मित्तल ने अगस्त 2026 में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उनका इस्तीफा 15 सितंबर से प्रभावी हुआ। इसके बाद से उनके अगले कदम को लेकर लगातार चर्चा चल रही थी। अब उन्होंने खुद अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है।
हालांकि, दिव्या मित्तल ने अभी किसी चुनाव क्षेत्र, विधानसभा सीट या आगामी चुनाव में अपनी उम्मीदवारी को लेकर कोई घोषणा नहीं की है। फिलहाल उन्होंने स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाने और जनता को उसके साथ जोड़ने की बात कही है। ऐसे में आने वाले समय में उनके इस राजनीतिक प्रयास का स्वरूप क्या होगा, इस पर नजर रहेगी।
