Friday, July 24, 2026
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योग बंधन-2026 के माध्यम से डीडीयू ने दिया वैश्विक एकता और स्वस्थ जीवन का संदेश

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम “योग बंधन-2026” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा तथा कुलपति प्रो. पूनम टंडन के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इस आयोजन ने विश्वविद्यालय की वैश्विक शैक्षणिक सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्वास्थ्योन्मुख शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि योग भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने गोरखपुर की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु गोरखनाथ की भूमि सदियों से योग एवं साधना का प्रमुख केंद्र रही है। आज विश्वभर में करोड़ों लोग योग को स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली के रूप में अपना रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में योग अध्ययन एवं अनुसंधान से संबंधित विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें देश-विदेश के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि योग बंधन जैसे कार्यक्रम विश्वविद्यालय को वैश्विक शैक्षणिक सहयोग और वेलनेस एजुकेशन के केंद्र के रूप में और मजबूत बनाएंगे।
कार्यक्रम में 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, विशेष रूप से मलेशिया के सेगी विश्वविद्यालय के मेडिकल विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इस दौरान विभिन्न देशों के विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के बीच संवाद हुआ तथा योग के माध्यम से स्वास्थ्य, सद्भाव और वैश्विक एकता के मूल्यों को साझा किया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “बेहतर स्वास्थ्य एवं जीवनशैली के लिए योग” विषय पर प्रो. विजय चहल का विशेष व्याख्यान रहा। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवन में बढ़ता तनाव, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक निष्क्रियता अनेक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही हैं। योग एक समग्र जीवन-पद्धति है, जो शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देती है।
इस अवसर पर अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. दिनेश यादव तथा सेगी विश्वविद्यालय, मलेशिया के फैकल्टी ऑफ मेडिकल साइंसेज के डिप्टी डीन प्रो. सरवाना कुमार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वयन अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. रामवंत गुप्ता ने किया। अंत में प्रो. सरवाना कुमार ने सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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