पटना(राष्ट्र की परम्परा)l शिक्षा विभाग द्वारा ग्रीष्मावकाश अवधि में शिक्षकों को मुख्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने एवं मोबाइल फोन चालू रखने संबंधी जारी निर्देश के खिलाफ शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ, बिहार प्रदेश ने शिक्षा मंत्री एवं अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर उक्त आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
महासंघ के प्रदेश मीडिया प्रभारी मृत्युंजय ठाकुर ने कहा कि जब विभाग ने पूर्व निर्धारित अवकाश तालिका के अनुसार ग्रीष्मावकाश घोषित किया है, तो उसी अवधि में शिक्षकों को मुख्यालय में उपस्थित रहने के लिए बाध्य करना विरोधाभासी एवं अव्यावहारिक है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शिक्षकों को अवकाश का वास्तविक लाभ ही नहीं मिलना है, तो फिर ग्रीष्मावकाश घोषित करने का औचित्य क्या है?
महासंघ ने अपने पत्र में कहा है कि ग्रीष्मावकाश की तिथियां पहले से निर्धारित रहती हैं और अधिकांश शिक्षक इस अवधि में अपने परिवार के साथ समय बिताने, सामाजिक एवं पारिवारिक दायित्वों के निर्वहन तथा मानसिक एवं शारीरिक पुनर्स्थापन की योजनाएं बनाते हैं। ऐसे में अचानक जारी आदेश शिक्षकों के वैध अधिकारों एवं व्यक्तिगत जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप के समान है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि शिक्षक पूरे वर्ष शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कार्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ करते हैं। ग्रीष्मावकाश उनके लिए विश्राम और परिवार के साथ समय बिताने का एकमात्र अवसर होता है। अवकाश अवधि में मुख्यालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित करने वाला है।
परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ ने विभाग से शिक्षकों की भावनाओं एवं व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए आदेश को अविलंब वापस लेने की मांग की है। महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो संगठन लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग एवं बिहार सरकार की होगी।
महासंघ ने अपने पत्र के अंत में यह भी कहा है कि “यदि ग्रीष्मावकाश वास्तव में अवकाश है तो शिक्षकों को उसका लाभ मिलना चाहिए, और यदि मुख्यालय में उपस्थिति अनिवार्य है तो फिर अवकाश घोषित करने का औचित्य क्या है?”
