गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के शोधार्थी राम उग्रह को “उर्दू अफसानों में दलित मसायल की अक्कासी” विषय पर उर्दू भाषा एवं साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। उनकी शोध मौखिकी परीक्षा शनिवार को ऑनलाइन माध्यम से संपन्न हुई। राम उग्रह ने अपना शोध कार्य उर्दू विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं साहित्यकार डॉ. महबूब हसन के निर्देशन में पूरा किया।
शोध मौखिकी में बाह्य परीक्षक के रूप में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रोफेसर सोबान सईद शामिल रहे। इस अवसर पर उर्दू विभागाध्यक्ष एवं कला संकाय की डीन प्रोफेसर कीर्ति पांडेय भी उपस्थित रहीं।
प्रोफेसर कीर्ति पांडेय ने शोध निर्देशक और शोधार्थी को बधाई देते हुए कहा कि उर्दू साहित्यकारों ने शायरी के साथ-साथ समाज के दुख-दर्द को भी अभिव्यक्ति दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध कार्य समाज में समानता और एकरूपता की भावना को मजबूत करेंगे तथा विमर्श के नए आयाम स्थापित करेंगे।
प्रोफेसर सोबान सईद ने शोध विषय से जुड़े कई महत्वपूर्ण और प्रासंगिक प्रश्न पूछे, जिनका राम उग्रह ने संतोषजनक उत्तर दिया। बाह्य परीक्षक ने शोध कार्य की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
विभाग के समन्वयक डॉ. साजिद हुसैन अंसारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। ऑनलाइन वायवा में उर्दू विभाग सहित अन्य विभागों के शोधार्थी और छात्र भी उपस्थित रहे। डॉक्टरेट की उपाधि मिलने पर सभी ने राम उग्रह को बधाई दी।
