महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। जनपद में नवागत जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने कार्यभार संभालते ही अपने मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण की मिसाल पेश की। उनके इस कदम से स्पष्ट हो गया कि उनके नेतृत्व में प्रशासनिक व्यवस्था केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसमें मानवीय मूल्यों को भी प्राथमिकता मिलेगी।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान जब अधिकारी पारंपरिक तरीके से जिलाधिकारी का स्वागत कर रहे थे, तभी एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने सभी को भावुक कर दिया। जिलाधिकारी ने मंच से कलेक्ट्रेट में वर्षों से सेवाएं दे रहे नज़ारत चपरासी समीम को अपने पास बुलाकर पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया।
आमतौर पर ऐसे कार्यक्रमों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी दूर खड़े होकर व्यवस्थाएं संभालते नजर आते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग थी। मंच पर बुलाकर सम्मान देने की इस पहल ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को आश्चर्यचकित कर दिया। कुछ क्षणों के लिए सभागार में सन्नाटा छा गया, फिर तालियों की गूंज ने माहौल को भावुक बना दिया।
जिलाधिकारी ने समीम से आत्मीय बातचीत करते हुए कहा कि वे उन्हें अपने पूर्व कार्यकाल से ही मेहनत और लगन के साथ कार्य करते हुए देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने में छोटे से छोटे कर्मचारी की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है, जितनी किसी बड़े अधिकारी की। प्रशासन की रीढ़ कर्मचारी हैं और हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है।
इस सम्मान से अभिभूत समीम की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर वे कार्यक्रमों में किनारे खड़े होकर सब कुछ देखते हैं, लेकिन आज पहली बार जिले के प्रमुख ने उन्हें मंच पर बुलाकर सम्मान दिया। यह उनके जीवन का एक यादगार क्षण बन गया।
जिलाधिकारी की इस पहल ने न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि सच्चा नेतृत्व वही होता है, जो हर स्तर पर काम करने वाले लोगों के योगदान को पहचानता और सम्मान देता है। कलेक्ट्रेट में दिन भर इस पहल की सराहना होती रही और कर्मचारियों के बीच नई ऊर्जा देखने को मिली।
