भगवान परशुराम जयंती पर बरहज में भक्ति और श्रद्धा का संगम, बीएसएस परशुराम सेना ने किया भव्य आयोजन

बरहज/देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गौरा बरहज स्थित श्रीराम जानकी बाल विद्या मंदिर परिसर में बीएसएस परशुराम सेना द्वारा भगवान परशुराम जी की जयंती श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन संगठन के जिलाध्यक्ष विनय पाठक के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान परशुराम जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मुख्य अतिथि समाजसेवी श्रीप्रकाश पाल एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक पाण्डेय ने विधिवत पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके बाद उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भी पुष्प अर्पित कर भगवान परशुराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
इस अवसर पर वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों और उनके द्वारा स्थापित नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि श्रीप्रकाश पाल ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम का जीवन हमें अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
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विशिष्ट अतिथि डॉ. अशोक पाण्डेय ने भगवान परशुराम के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए बताया कि वे केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि ज्ञान, तप और संयम के प्रतीक भी थे। उनका जीवन समाज के लिए मार्गदर्शक है और आज के समय में भी उनके सिद्धांत प्रासंगिक हैं।
कार्यक्रम में भालचंद्र तिवारी, बाल बिहारी तिवारी, अभ्यानंद तिवारी सहित कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाने पर जोर दिया। सभी वक्ताओं ने समाज में नैतिकता, संस्कार और एकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अशोक द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया, जिससे आयोजन में अनुशासन और गरिमा बनी रही। इस दौरान पवन पाण्डेय, कपिल देव, प्रेमशंकर तिवारी, मिथिलेश सिंह, राजेंद्र जायसवाल, चंदन कुमार, विद्यानंद पाण्डेय, राजेश यादव, एडवोकेट विकास पाण्डेय, अखिलानंद तिवारी, श्रीराम तिवारी, हरे कृष्ण तिवारी, कृष्ण देव तिवारी, रामआश्रय तिवारी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और उत्साहपूर्ण रहा। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और जयकारों के साथ वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। आयोजन के अंत में सभी ने समाज में सद्भाव, भाईचारा और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का भी एक सशक्त माध्यम बना। बीएसएस परशुराम सेना द्वारा इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देने का कार्य कर रहे हैं।
