-डॉ. प्रियंका सौरभ

नन्हा बच्चा साइकिल चलाए,
धीरे-धीरे आगे जाए।

पीले-पीले फूल खिले,
देख उन्हें वो खुश हो मिले।

छोटी-छोटी आँखें हँसती,
मस्ती में हर बात है बसती।

हवा संग वो गुनगुनाए,
खुशियों के गीत सुनाए।

पैर चलें तो चक्कर घूमे,
मन उसके संग-संग झूमे।

गिरकर फिर से उठ जाता,
हिम्मत से आगे बढ़ जाता।

हरी घास पर खेल रचाए,
दिन भर खुशियाँ ही पाए।

नन्हा दिल है साफ़ सुहाना,
सबको अपना दोस्त बनाना।