देवरिया (राष्ट्र की परम्परा)। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही जिले में गैस संकट ने गंभीर रूप ले लिया। पहले ही दिन गैस आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आई, जिससे प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए।
घंटों लाइन में खड़े रहे उपभोक्ता
सुबह से ही जिले की विभिन्न गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी रहीं। बड़ी संख्या में लोग घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन कई उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर नहीं मिल सका और उन्हें निराश होकर घर लौटना पड़ा।
‘सर्वर फेल’ बना बहाना
एजेंसी संचालकों द्वारा उपभोक्ताओं को अलग-अलग कारण बताए गए। कभी सर्वर न चलने की बात कही गई, तो कभी सर्वर ठप होने का हवाला देकर लोगों को टाल दिया गया। अंततः कई लोगों को अगले दिन आने के लिए कहकर वापस भेज दिया गया।
प्रशासनिक तैयारी पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासन ने पहले से कोई ठोस योजना नहीं बनाई, जिसके चलते यह संकट उत्पन्न हुआ। सरकारी दावे पहले ही दिन फेल होते नजर आए।
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वैकल्पिक साधनों का सहारा
स्थिति से परेशान होकर कुछ लोग लकड़ी, कोयला और अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग करने को मजबूर हो गए हैं, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ रही हैं।
जनता में बढ़ा आक्रोश
जिले की अधिकांश गैस एजेंसियों पर यही हालात देखने को मिले। एक ओर सरकार लोगों से घबराने से बचने की अपील कर रही है, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्था से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
जिम्मेदारी तय करने की मांग
अब लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन है और क्या संबंधित अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी या नहीं।
