Wednesday, March 11, 2026
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जीएसटी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन, 182 शोध-पत्रों की हुई प्रस्तुति

गोरखपुर (राष्ट्र की परम्परा)। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के सहयोग से “भारत में जीएसटी: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और आगे की राह” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हो गया। संगोष्ठी के दूसरे दिन तृतीय व चतुर्थ तकनीकी सत्र तथा समापन समारोह आयोजित किया गया। दो दिवसीय संगोष्ठी में कुल 182 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
तकनीकी सत्र–III का विषय “GST: इंडस्ट्री आधारित दृष्टिकोण” था, जिसमें 59 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। सत्र समन्वयक प्रो. अनिल कुमार यादव तथा सह-समन्वयक डॉ. राहुल मिश्रा रहे। सत्र की अध्यक्षता प्रो. अखिल मिश्रा (वाणिज्य विभाग, बीएचयू, वाराणसी) और प्रो. आकाश अग्रवाल (हेड, डिपार्टमेंट ऑफ एप्लाइड साइंस एंड ह्यूमैनिटीज, आर.ई. कॉलेज, कन्नौज) ने की, जबकि विशेषज्ञ वक्ता सी.ए. गौरव अग्रवाल रहे। सत्र में एमएसएमई, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, ई-कॉमर्स, निर्यात, पर्यटन और एफएमसीजी जैसे विभिन्न उद्योगों पर जीएसटी के प्रभाव का विश्लेषण किया गया। सी.ए. गौरव अग्रवाल ने जीएसटी की उपलब्धियों, वर्तमान चुनौतियों तथा कर प्रणाली में पारदर्शिता और अनुपालन बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
तकनीकी सत्र–IV का विषय “GST के भविष्य की संभावनाएं” रहा, जिसमें 48 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। सत्र समन्वयक प्रो. मनीष कुमार श्रीवास्तव तथा सह-समन्वयक डॉ. अंशु गुप्ता थे। सत्र की अध्यक्षता प्रो. नीरज शुक्ला (वाणिज्य विभाग, KMCL विश्वविद्यालय, लखनऊ) तथा प्रो. दीपक बाबू (वाणिज्य संकाय अध्यक्ष, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय) ने की। विशेषज्ञ वक्ता सुनील जायसवाल (AC, SGST) और सी.ए. दीपक गुप्ता रहे। विशेषज्ञों ने जीएसटी प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वचालन, पारदर्शिता तथा सरल व्यवसाय-अनुकूल ढांचे के विकास पर बल दिया।
संगोष्ठी का समापन सत्र महायोगी गुरु गोरक्षनाथ शोध पीठ में आयोजित हुआ। इस अवसर पर वाणिज्य विभागाध्यक्ष प्रो. एस. वी. पाठक ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रो. जे. वी. वैषम्पायन (भूतपूर्व कुलपति, CSJM कानपुर विश्वविद्यालय एवं बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी), मुख्य अतिथि प्रो. संजीत कुमार गुप्ता (कुलपति, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया) तथा उदित नारायण सिंह (S.B. Enforcement) उपस्थित रहे।
प्रो. जे. वी. वैषम्पायन ने कहा कि राज्य के संचालन में कराधान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने जीएसटी को महत्वपूर्ण कर सुधार बताते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता बढ़ती है, कर चोरी कम होती है और देश के बाजार को मजबूती मिलती है।
मुख्य अतिथि प्रो. संजीत कुमार गुप्ता ने कहा कि केवल विषयों को पढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहार में लागू करना भी आवश्यक है। ज्ञान का वास्तविक उद्देश्य समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में उसका उपयोग करना है।
उदित नारायण सिंह ने कहा कि जीएसटी के नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने उपभोक्ताओं से हर खरीद पर बिल लेने की अपील करते हुए कहा कि इससे कर प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ती है और देश के विकास में आम नागरिक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समापन सत्र में प्रत्येक तकनीकी सत्र से एक-एक श्रेष्ठ शोध-पत्र को “Best Paper Award” से सम्मानित किया गया। तकनीकी सत्र–I में प्रीति यादव, सत्र–II में अंचल, सत्र–III में डॉ. पूर्णिमा मिश्रा और सत्र–IV में अपर्णा गुप्ता को सम्मानित किया गया।
समापन सत्र में डॉ. अभिषेक कुमार ने संगोष्ठी की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंशिका मिश्रा ने किया। तकनीकी सत्रों का संचालन एवं मार्गदर्शन प्रो. ए. के. गुप्ता और डॉ. अंशु गुप्ता के नेतृत्व में हुआ। संगोष्ठी के सफल आयोजन में वाणिज्य संकाय, बैंकिंग एवं इंश्योरेंस विभाग के शिक्षकों तथा शोधार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। अंत में सह-संयोजक प्रो. राजीव प्रभाकर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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