जंगल बड़हरा में होली के दिन दिखाया गया मिट्टी कार्य, प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
महराजगंज (राष्ट्र की परम्परा)। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में पारदर्शिता और गरीबों को रोजगार देने के बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जनपद महराजगंज के पनियरा विकासखंड से सामने आया एक मामला इन दावों पर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि होली जैसे बड़े त्योहार के दिन भी कागजों में मनरेगा का काम दिखाकर मजदूरों की फर्जी हाजिरी दर्ज की गई है।
बताया जा रहा है कि पनियरा विकासखंड के जंगल बड़हरा गांव में 04 मार्च को होली के दिन, जब पूरा गांव रंग-गुलाल और उत्सव में डूबा था, उसी दिन सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों से मिट्टी कार्य कराए जाने का दावा दर्ज किया गया। ग्रामीणों के अनुसार उस दिन गांव में कहीं भी मनरेगा का कोई कार्य होता दिखाई नहीं दिया।
जानकारी के मुताबिक आईडी संख्या 3152009/RC/958486255823740040 के अंतर्गत चौधरी के खेत से गिरगिटिया गांव के सिवान तक संपर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य दर्शाया गया है। इस कार्य के लिए मस्टर रोल संख्या 8652, 8653 और 8654 में कुल 18 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इसी तरह दूसरे कार्य आईडी संख्या 3152009/RC/95848625582374003 के अंतर्गत रामरक्षा के घर से डिंगुरी सिवान तक संपर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य दिखाया गया है। इस कार्य के लिए मस्टररोल संख्या- 8527, 8528, 8529, 8530, 8531और 8532 में कुल 48 मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई है। इस प्रकार दोनों कार्यों में मिलाकर कुल 66 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज होने से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि होली के दिन गांव में कहीं भी मनरेगा का काम नहीं हुआ। ऐसे में रिकॉर्ड में मजदूरों की हाज़िरी दर्ज होना कागजी खेल और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका को मजबूत करता है।
इस मामले को लेकर यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस कथित कार्य की जानकारी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को थी या फिर स्थानीय स्तर पर ही फर्जी हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन निकालने की तैयारी की गई। पारदर्शिता और जवाबदेही के दावों के बीच यह मामला प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।
इस संबंध में जब पनियरा के एपीओ शिव प्रकाश सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि होली के दिन मनरेगा कार्य नहीं होता। यदि कहीं ऐसा दर्शाया गया है तो इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि यह मामला जांच के बाद ठंडे बस्ते में चला जाता है या फिर फर्जी हाजिरी दर्ज करने वालों पर वास्तव में कार्रवाई होती है। क्योंकि यदि त्योहार के दिन भी कागजों में काम दिखाया जा सकता है, तो मनरेगा की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था खुद कठघरे में खड़ी नजर आती है।
