अमेरिका-इजरायल हमलों के बीच अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने के दावों ने ईरान की सत्ता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि सर्वोच्च नेता का पद खाली होता है, तो ईरान के संविधान के अनुसार नए सुप्रीम लीडर का चयन विशेष प्रक्रिया से होता है।
कैसे चुना जाता है सुप्रीम लीडर?
ईरान का राजनीतिक ढांचा विलायत-ए-फकीह सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत सर्वोच्च नेता का पद केवल एक वरिष्ठ धार्मिक विद्वान (मौलवी) को ही मिल सकता है।
नए सुप्रीम लीडर का चुनाव Assembly of Experts करती है, जिसमें 88 इस्लामी विद्वान शामिल होते हैं। यही परिषद आधिकारिक रूप से नए नेता की घोषणा करती है।
संभावित दावेदार कौन?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दो प्रमुख नाम चर्चा में हैं:
• मोजतबा खामेनेई – अली खामेनेई के बेटे
• हसन खुमैनी – ईरान के संस्थापक Ruhollah Khomeini के पोते
हालांकि अब तक किसी आधिकारिक उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की गई है।
ये भी पढ़े – Ayatollah Ali Khamenei Death: मीटिंग के दौरान सटीक हमला, कैसे हुई मौत?
IRGC की भूमिका क्यों अहम?
ईरान की सत्ता संरचना में Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह देश की सबसे शक्तिशाली सैन्य शाखा है और सीधे सर्वोच्च नेता को जवाबदेह होती है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक हालिया हमलों में IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपुर की भी मौत की खबर है, जिससे सत्ता समीकरण और जटिल हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नया नेता वही प्रभावी होगा जिसे IRGC और प्रमुख धार्मिक संस्थानों का समर्थन हासिल होगा।
राष्ट्रपति की स्थिति
ईरान के मौजूदा राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian को अपेक्षाकृत उदारवादी माना जाता है, लेकिन सर्वोच्च नेता की नियुक्ति में उनकी भूमिका सीमित होती है। अंतिम निर्णय धार्मिक और शक्ति संरचना से जुड़े प्रभावशाली समूहों पर निर्भर करेगा।
आगे क्या?
यदि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होती है, तो यह न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति बल्कि पूरे मध्य-पूर्व की रणनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में विशेषज्ञों की परिषद, IRGC और धार्मिक नेतृत्व के बीच शक्ति संतुलन निर्णायक साबित होगा।
ये भी पढ़े – लखनऊ में मातम: खामेनेई की मौत पर महिलाओं का प्रदर्शन
