दक्षिण एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर हालात गंभीर हो गए हैं। बीते 48 घंटों से छिटपुट गोलीबारी के बीच अब भारी हथियारों के इस्तेमाल की खबरें सामने आ रही हैं।
एयरस्ट्राइक के बाद बढ़ा तनाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान ने 22 फरवरी को अफगानिस्तान के कई इलाकों में आतंकवादियों के ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए। इन हमलों में आम नागरिकों की मौत का दावा किया गया, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई।
तालिबान सरकार का पलटवार
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने बयान जारी कर कहा कि आम नागरिकों पर हुए हमलों का जवाब देने के लिए अफगान सेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
बताया जा रहा है कि नंगरहार-खैबर और कुनार-बाजौर सीमा क्षेत्रों में टैंक, आर्टिलरी, रॉकेट और मोर्टार का इस्तेमाल किया गया। तालिबान सरकार ने दावा किया है कि पाकिस्तान की 15 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया है। साथ ही कुनार सीमा पर 40 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा भी किया गया है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
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ऑपरेशन के नाम और सीमाई हालात
अफगान पक्ष के अनुसार, “ऑपरेशन 201 खालिद बिन वालिद ब्रिगेड” और “205 अल बद्र ब्रिगेड” के तहत कार्रवाई की जा रही है। सीमा क्षेत्रों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
भारत की प्रतिक्रिया
पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बयान जारी कर अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन की बात कही थी तथा नागरिकों की मौत पर चिंता व्यक्त की थी।
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव जारी रहता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस घटनाक्रम पर टिकी हैं।
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