Thursday, February 26, 2026
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इतिहास का भावुक दिन: 27 फ़रवरी को हुए निधन की गाथा

भारत और विश्व इतिहास में 27 फ़रवरी को हुए निधन कई ऐसी महान विभूतियों से जुड़े हैं, जिन्होंने राजनीति, स्वतंत्रता संग्राम, साहित्य और समाजसेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। यह दिन उन महापुरुषों को स्मरण करने का अवसर है, जिनकी विचारधारा और कर्म आज भी प्रेरणा देते हैं। आइए जानते हैं 27 फ़रवरी को हुए निधन से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में विस्तृत जानकारी।

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🇮🇳 1. नानाजी देशमुख (निधन: 2010)
नानाजी देशमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। वे एक प्रख्यात समाजसेवक और विचारक थे जिन्होंने ग्रामीण विकास के लिए जीवन समर्पित किया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और स्वावलंबन के मॉडल विकसित किए।
उनकी सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित किया।
27 फ़रवरी को हुए निधन में नानाजी देशमुख का नाम समाजसेवा की अमिट विरासत के रूप में दर्ज है।
🇮🇳 2. इन्दीवर (निधन: 1997)
हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय गीतकार इन्दीवर ने सैकड़ों सुपरहिट गीत लिखे।
उनके गीतों में भावनाओं की गहराई और सरल शब्दों की शक्ति दिखाई देती थी।
“चिंगारी कोई भड़के” और “कसमे वादे प्यार वफ़ा” जैसे गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हैं।
27 फ़रवरी को हुए निधन के अवसर पर हिंदी सिनेमा उन्हें कृतज्ञता से याद करता है।

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🇮🇳 3. के. सी. रेड्डी (निधन: 1976)
के. सी. रेड्डी कर्नाटक के प्रथम मुख्यमंत्री थे।
उन्होंने प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
बाद में वे मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रहे।
27 फ़रवरी को हुए निधन भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन था।
🇮🇳 4. गणेश वासुदेव मावलंकर (निधन: 1956)
गणेश वासुदेव मावलंकर स्वतंत्र भारत की पहली लोकसभा के अध्यक्ष थे।
उन्होंने संसदीय परंपराओं को मजबूत आधार प्रदान किया।
उनकी निष्पक्षता और अनुशासनप्रियता आज भी संसद के लिए आदर्श मानी जाती है।
27 फ़रवरी को हुए निधन भारतीय संसदीय इतिहास के लिए एक बड़ी क्षति थी।

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🇮🇳 5. चंद्रशेखर आज़ाद (निधन: 1931)
चंद्रशेखर आज़ाद भारत के महान क्रांतिकारी थे।
इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में 27 फ़रवरी 1931 को उन्होंने अंग्रेजों से घिर जाने पर स्वयं को गोली मार ली, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं किया।
उनकी वीरता और त्याग आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
27 फ़रवरी को हुए निधन में चंद्रशेखर आज़ाद का बलिदान स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय है।
27 फ़रवरी को हुए निधन: इतिहास से सीख
27 फ़रवरी को हुए निधन केवल तिथियाँ नहीं हैं, बल्कि यह प्रेरणा, त्याग और राष्ट्र निर्माण की कहानियाँ हैं।
राजनीति से लेकर साहित्य और स्वतंत्रता संग्राम तक, इस दिन हमने कई महान हस्तियों को खोया, लेकिन उनके विचार आज भी जीवित हैं।
इतिहास के पन्नों में दर्ज 27 फ़रवरी को हुए निधन हमें यह याद दिलाते हैं कि व्यक्तित्व समाप्त हो सकते हैं, पर उनके आदर्श अमर रहते हैं।

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