बलिया(राष्ट्र की परम्परा)l तहसील क्षेत्र सिकन्दरपुर के लिलकर ग्राम स्थित श्री शास्त्री-कुटी में 5 फरवरी से प्रारम्भ नौ दिवसीय श्री सीताराम महायज्ञ का समापन शुक्रवार 13 फरवरी को यज्ञ पुरुष को पूर्णाहुति अर्पित करने के साथ सोल्लास सम्पन्न हो गया। ब्रह्मलीन संत श्री श्री 1008 परमहंस स्वामी गंगाधर शास्त्री जी महाराज की तपस्थली पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले इस महायज्ञ में क्षेत्र सहित दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का वातावरण व्याप्त रहा।वैदिक यज्ञाचार्य पं० जयनारायण शास्त्री एवं सहयोगी विप्र मंडली ने वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ विधि-विधान से यज्ञ अनुष्ठान संपन्न कराया। हवन, पूजन एवं अन्य याज्ञिक कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की। प्रमुख यजमान के रूप में सर्वश्री पवन राय, नीरज राय, मारकण्डेय राय, अखिलेश राय तथा भृगुनाथ राय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आयोजन समिति में पंकज राय, व्यास जी राय, अयोध्यानाथ मिश्र, विनय मिश्र, नीरज मिश्र, राजेश राय, भरत वर्मा एवं चन्द्रजीत प्रजापति का योगदान सराहनीय रहा।महायज्ञ के साथ आयोजित श्रीराम कथा में कथा मर्मज्ञा सुश्री आरती पाठक ने प्रतिदिन प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और धर्म संदेश का भावपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए। आयोजन में अनेक संत-भगवंतों की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशेष रूप से बाल ब्रह्मचारी मौन महाव्रतधारी संत श्री शिवेन्द्र ब्रह्मचारी उर्फ उड़िया बाबा, जो अद्वैत शिवशक्ति परमधाम एवं श्री वनखण्डीनाथ (श्री नागेश्वर नाथ महादेव) मठ के पीठाधीश्वर हैं, डूहा बिहरा से पधारकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। संतों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन कुशलतापूर्वक चन्द्रजीत प्रजापति ने किया।वर्तमान भौतिकवादी और व्यस्त जीवनशैली में ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन समाज में नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्री शास्त्री-कुटी में सम्पन्न यह महायज्ञ श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गया।
