Friday, February 6, 2026
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रफाल, तेजस और प्रचंड की गर्जना से जैसलमेर का आसमान दहकेगा

वायु शक्ति 2026: सिर्फ अभ्यास नहीं, भारत की वायु शक्ति का निर्णायक संदेश

जैसलमेर (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में 27 फरवरी को भारतीय वायुसेना इतिहास का सबसे बड़ा वायु युद्ध अभ्यास वायु शक्ति 2026 आयोजित करने जा रही है। पाकिस्तान सीमा के निकट होने वाला यह अभ्यास केवल नियमित सैन्य गतिविधि नहीं, बल्कि यह स्पष्ट संकेत है कि भारत की वायु शक्ति अब पहले से कहीं अधिक संगठित, आधुनिक और आक्रामक क्षमता से लैस है।
वायु शक्ति 2026 को ऑपरेशन सिंदूर की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, जिसने सीमा पार आतंकी ठिकानों को नष्ट कर भारत की निर्णायक रणनीति का परिचय दिया था। जैसलमेर का आकाश उस दिन गरज उठेगा, जब 100 से अधिक लड़ाकू और सहायक विमान युद्ध जैसी वास्तविक परिस्थितियों में अपने कौशल का प्रदर्शन करेंगे।

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इस महाअभ्यास में भारतीय वायुसेना की पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी कमान की सभी प्रमुख इकाइयां शामिल होंगी। रफाल, सुखोई-30 एमकेआई, तेजस, मिग-29, जगुआर, मिराज-2000 और हाक जैसे अग्रिम पंक्ति के विमान हवा और जमीन दोनों लक्ष्यों पर सटीक प्रहार का अभ्यास करेंगे। यह पहला अवसर होगा जब सेवानिवृत्त मिग-21 इस तरह के किसी अभ्यास में भाग नहीं लेगा, जो वायुसेना के आधुनिकरण को दर्शाता है।
स्वदेशी प्रचंड आक्रमण हेलिकॉप्टर इस अभ्यास का बड़ा आकर्षण रहेगा, जो जीवित गोला-बारूद के साथ रॉकेट फायर करेगा। इसके अलावा चिनूक, मि-17 और उन्नत हल्के हेलिकॉप्टर भी युद्ध क्षेत्र में तैनात रहेंगे। परिवहन क्षमता का प्रदर्शन करते हुए C-130 हरक्युलिस विमान छोटी हवाई पट्टी पर उतरकर गरुड़ कमांडो को उतारेगा और कुछ ही मिनटों में दोबारा उड़ान भरेगा, जबकि C-295 विमान पहली बार रात्रि धावा उतराई अभ्यास करेगा।

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पूरा अभ्यास एक काल्पनिक युद्ध परिदृश्य में संचालित होगा, जिसकी निगरानी भारतीय वायुसेना के एकीकृत वायु आदेश और नियंत्रण तंत्र से की जाएगी। लंबी, मध्यम और छोटी दूरी के रडार से प्राप्त सूचनाओं को जोड़कर संपूर्ण हवाई चित्र तैयार किया जाएगा, जिससे आक्रमण और वायु रक्षा दोनों एक साथ संचालित हों।
पाकिस्तान को उड़ान सूचना संदेश के माध्यम से पहले ही अवगत करा दिया गया है, लेकिन उसके पुराने रवैये को देखते हुए भारत ने बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय कर दी है। आकाश मिसाइल प्रणाली, ड्रोन रोधी तंत्र और थलसेना की एल-70 तोपें पूरी तरह तैयार रहेंगी। इस अभ्यास को देखने के लिए मित्र देशों के लगभग 40 दूतावास अधिकारी और विशिष्ट अतिथि भी मौजूद रहेंगे।
वायु शक्ति 2026 ने सीमा पार स्पष्ट बेचैनी पैदा कर दी है। संदेश साफ है—भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं, बल्कि पहल कर आकाश से निर्णायक वार करने की क्षमता रखता है। यह अभ्यास राष्ट्रीय संकल्प, तकनीकी श्रेष्ठता और सैन्य आत्मविश्वास का जीवंत प्रदर्शन है।

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