चीन–OIC वार्ता: वांग यी का ‘जंगल के कानून’ पर तीखा हमला, बहुपक्षवाद और मध्य पूर्व शांति पर जोर
बीजिंग (राष्ट्र की परम्परा डेस्क)चीन के विदेश मंत्री वांग यी और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के महासचिव हिसैन इब्राहिम ताहा के बीच हुई अहम मुलाकात ने वैश्विक कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस उच्चस्तरीय बैठक में जहां चीन–इस्लामी देशों के रिश्तों को और मजबूत करने पर सहमति बनी, वहीं वांग यी ने वैश्विक राजनीति में “जंगल के कानून” की वापसी की कड़ी आलोचना करते हुए सच्चे बहुपक्षवाद की वकालत की।
ये भी पढ़ें – जमीन विवाद बना जानलेवा, गोरखपुर में प्रधान प्रत्याशी की हत्या
वांग यी ने कहा कि OIC इस्लामी जगत का सबसे बड़ा और प्रभावशाली संगठन है और चीन इस्लामी देशों के साथ अपने रिश्तों को हमेशा विशेष महत्व देता रहा है। उन्होंने शिनजियांग और ताइवान के मुद्दे पर चीन के रुख का समर्थन करने के लिए OIC का आभार जताया और कहा कि यह समर्थन अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहद अहम है।
‘जंगल के कानून’ पर वांग यी का सख्त संदेश
वांग यी ने वैश्विक हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ शक्तियां अपने हितों के लिए नियमों को ताक पर रख रही हैं। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि मनमाने टैरिफ, आर्थिक प्रतिबंध, और व्यापारिक रोक दुनिया को फिर से जंगल के कानून की ओर धकेल रहे हैं।
उनका कहना था कि जब कोई देश जब चाहे, जिस पर चाहे प्रतिबंध लगा दे, व्यापार रोके या दबाव बनाए, तो यह अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र की भावना के खिलाफ है। ऐसे में विकासशील देशों को मिलकर अपने अधिकारों और हितों की रक्षा करनी होगी।
ये भी पढ़ें – आंगनबाड़ी केंद्र के पास कोबरा सांप और नेवले की रोमांचक लड़ाई का वीडियो वायरल
बेल्ट एंड रोड परियोजना और विकासशील देशों की साझेदारी
चीन–OIC बैठक में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। वांग यी ने सुझाव दिया कि दोनों पक्षों को उच्च गुणवत्ता वाली बेल्ट एंड रोड परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिससे एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों में आधारभूत ढांचे, व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिले।
उन्होंने कहा कि चीन इस्लामी देशों के साथ मिलकर विकास आधारित सहयोग, आर्थिक साझेदारी, और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहता है।
मध्य पूर्व संकट और राजनीतिक समाधान पर जोर
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ रहा है। वांग यी ने क्षेत्रीय संघर्षों के राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सैन्य टकराव किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं हो सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाता रहेगा। खासतौर पर फिलिस्तीनी मुद्दे पर चीन के प्रयासों की सराहना OIC महासचिव ताहा ने भी की।
ये भी पढ़ें – गरीबों के लिए आगे आई समाजवादी पार्टी, बसरिखपुर में कंबल वितरण
OIC का एक-चीन सिद्धांत पर समर्थन
OIC महासचिव हिसैन इब्राहिम ताहा ने बैठक के दौरान साफ कहा कि संगठन एक-चीन सिद्धांत का दृढ़ता से समर्थन करता है। उन्होंने शिनजियांग में विकास और स्थिरता की सराहना की और चीन के आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को सिरे से खारिज किया।
ताहा ने कहा कि OIC चीन के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करना चाहता है ताकि एशिया और मध्य पूर्व में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
ईरान, अमेरिका और बढ़ता सैन्य तनाव
बीजिंग में हुई इस कूटनीतिक बातचीत के समानांतर, मध्य पूर्व में हालात और भी संवेदनशील होते दिखे। एक ईरानी अधिकारी ने चेतावनी दी कि ईरान पर किसी भी हमले को “पूर्ण युद्ध” माना जाएगा।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि एहतियात के तौर पर अमेरिकी सेना का एक बड़ा नौसैनिक बेड़ा मध्य पूर्व की ओर रवाना किया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एक विमानवाहक पोत और कई मिसाइल विध्वंसक जल्द ही क्षेत्र में तैनात किए जाएंगे।
ईरान की ओर से यह भी दावा किया गया कि आर्थिक तंगी के चलते हुए विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोगों की जान गई है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं।
ये भी पढ़ें – गढ़िया रंगीन में हिंदू सम्मेलन समिति की बैठक सम्पन्न
संयुक्त राष्ट्र और सच्चे बहुपक्षवाद की वकालत
वांग यी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया को किसी एक देश के नियमों पर नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत चलना चाहिए। उन्होंने इसे ही “सच्चा बहुपक्षवाद” बताया।
उनका कहना था कि लक्ष्य एक ऐसी निष्पक्ष और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था बनाना है, जहां सभी देशों—खासकर विकासशील राष्ट्रों—की आवाज सुनी जाए।
ये भी पढ़ें – हत्या के प्रयास का वांछित आरोपी गिरफ्तार
चीन–OIC संबंधों का बढ़ता कद
बीजिंग में हुई यह मुलाकात साफ संकेत देती है कि चीन और इस्लामिक सहयोग संगठन आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में एक मजबूत साझेदारी के रूप में उभर सकते हैं। शिनजियांग, ताइवान, बेल्ट एंड रोड, मध्य पूर्व शांति और बहुपक्षवाद जैसे मुद्दों पर दोनों पक्षों की साझा सोच, अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई दिशा तय कर सकती है।
